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23 निजी स्कूलों में गरीब बच्चों का एडमिशन, 580 में से 279 चयनित

  हजारीबाग झारखंड में हजारीबाग जिले के अलग-अलग 23 निजी स्कूलों के प्रवेश कक्षा में सत्र 2026-27 के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत 279 बच्चों के नामांकन संबंधित पहली सूची शिक्षा विभाग ने जारी किया. इसमें मिले 580 आवेदनों में सत्यापन के बाद लगभग 180 आवेदन को विचाराधीन श्रेणी में रखा गया है. शेष आवेदनों के साथ मौजूद कागजात पर अभिभावकों से उनका पक्ष मांगा गया है. आवेदक 28 अप्रैल शाम 4:00 बजे तक अपना पक्ष रख सकते हैं. जिला शिक्षा अधीक्षक सह अपर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी आकाश कुमार ने बताया सत्यापित सभी 580 बच्चों की सूची को हजारीबाग nic.com पर डाला गया है. इसमें 180 आवेदन के आवश्यक कागजात जांच में सही मिलने पर सभी को विचाराधीन (अंडर कंसीडरेशन फॉर रेंडमाइजेशन) की श्रेणी में रखा गया है. क्या है मामला? निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत 279 बच्चों के नामांकन को लेकर शिक्षा विभाग ने पोर्टल बनाकर निर्धारित समय सीमा यानी 14 मार्च 2026 तक 580 आवेदन प्राप्त किया है. नियम अनुसार इसमें अलग-अलग 23 निजी स्कूलों के लिए 279 बच्चों की सूची शिक्षा अधिकारी/कर्मी की एक टीम तैयार करने में जुटी है. अंतिम रूप से तैयार सूची संबंधित स्कूलों को भेजा जाएगा. आरटीई में गरीब बच्चों का नामांकन होना है. इसके लिए आरटीई के संकल्प पत्र में बच्चों के अभिभावकों को 72,000 का इनकम सर्टिफिकेट (आय प्रमाणपत्र) अनिवार्य किया गया है. हजारीबाग में आरटीई के तहत 23 निजी स्कूलों में 279 बच्चों के नामांकन के लिए पहली सूची जारी हुई है. कुल 580 आवेदन मिले थे, जिनमें करीब 180 आवेदन विचाराधीन रखे गए हैं. किस निजी स्कूल में कितना नामांकन बरही- डीएवी पब्लिक स्कूल – नर्सरी – 10 बड़कागांव-डीएवी पब्लिक स्कूल उरीमारी-एलकेजी-08 बरकट्ठा-डिवाइन पब्लिक स्कूल गंगपाचो-वन-20 चौपारण-सुरेखा प्रकाश भाई पब्लिक स्कूल बहेरा-वन-20 शहरी क्षेत्र-दिल्ली पब्लिक स्कूल-वन-15 शहरी क्षेत्र-जैक एंड जिल स्कूल सिंघानी-नर्सरी-10 शहरी क्षेत्र-लॉर्ड कृष्णा स्कूल अमृतनगर-वन-10 शहरी क्षेत्र-संत पॉल स्कूल-वन-10 शहरी क्षेत्र-सरस्वती शिशु विद्या मंदिर कुम्हारटोली-वन-10 शहरी क्षेत्र-नेशनल पब्लिक स्कूल-वन-20 शहरी क्षेत्र-संत स्टेफन स्कूल-वन-15 शहरी क्षेत्र-श्री रामकृष्ण शारदा मठ एंड मिशन-नर्सरी 12 शहरी क्षेत्र-माउंट एग्माउंट स्कूल-एलकेजी- 15 शहरी क्षेत्र-डीएवी पब्लिक स्कूल-नर्सरी-15 शहरी क्षेत्र-नमन विद्या-नर्सरी- 07 शहरी क्षेत्र- रोजबड स्कूल- एलकेजी- 07 शहरी क्षेत्र-ओएसिस स्कूल हजारीबाग-नर्सरी-10 शहरी क्षेत्र-न्यू हजारीबाग पब्लिक स्कूल हूपाद- नर्सरी-10 इचाक-चैंपियन बेसिक अकैडमी-वन-20- कटकमदाग-एंजेलस हाई स्कूल सिरसी-एलकेजी-10 कटकमदाग- दिल्ली पब्लिक स्कूल शंकरपुर-एलकेजी-10 कटकमसांडी-संत अगस्टिन हाई स्कूल कंचनपूर-वन-10 डाडी-डीएवी पब्लिक स्कूल गिद्दी-ए-नर्सरी-05

आरटीई कोटे के तहत स्कूल चयन: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में निकली लॉटरी, बच्चों को मिला मौका

दुर्ग. बच्चों की किस्मत की लॉटरी आखिरकार खुल गई। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों के क्लास वन में प्रवेश देने के लिए लाटरी के माध्यम से स्कूलों का चयन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में निकाली गई। प्रथम चरण की लॉटरी में 1059 बच्चों को स्कूल आवंटित किया गया है। दुर्ग जिले के 528 निजी विद्यालयों में आरटीई की इस बार कुल 1427 सीटें है। जबकि स्वीकृत आवेदनों की संख्या 1899 है। प्रथम चरण की लॉटरी के लिए इस बार सहायक संचालक, 5 पालक, निजी विद्यालय संगठन से जुड़े 2 पदाधिकारी, 2 पालक संघ के प्रतिनिधि तथा 2 मीडिया प्रभारी को विशेष रूप से रायपुर बुलाया गया था। इनकी मौजूदगी में लॉटरी निकाली गई। विभाग की ओर सहायक संचालक समृद्धि जोशी तथा आरटीई कक्ष प्रभारी राजदीप मौजूद थे। दुर्ग जिले के 528 निजी विद्यालयों के प्रारंभिक कक्षाओं में निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत भर्ती के लिए 3485 ऑनलाइन आवेदन मिले थे। इनमें से 900 यानी करीब 26% आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए। केवल 1899 आवेदन ही स्वीकृत किए गए हैं। इन्हीं आवेदनों पर लॉटरी 15 अप्रैल को निकाली गई। अब 1 मई से 30 मई तक स्कूल दाखिला की प्रक्रिया की जाएगी। वैसे इस बार आरटीई के तहत प्रवेश के लिए निर्धारित सीटों की संख्या में भारी कटौती की गई है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार करीब एक तिहाई सीटों की कटौती हुई है। इस वर्ष केजी-1, केजी – 2 तथा नर्सरी का कांसेप्ट खत्म कर दिया गया है। इस वजह से निजी स्कूलों में आरटीई के तहत केवल पहली कक्षा में प्रवेश दिया जा रहा है, जिसके लिए प्रथम चरण में ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 31 मार्च निर्धारित थी। पिछले वर्ष आरटीई की 4267 सीट थी। यानी इस बार 2840 सीटों की कटौती की गई है।

छत्तीसगढ़ सरकार का कड़ा रुख: RTE के तहत प्रवेश नहीं देने पर स्कूलों पर गिरेगी गाज

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि RTE के तहत बच्चों को प्रवेश नहीं देने वाले निजी स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। बता दें कि प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ाने पर RTE के तहत बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं देने का ऐलान किया था, जिसके बाद सरकार ने कड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त निजी विद्यालयों में RTE के तहत प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। इन सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर प्रवेश दिया जाता है।सरकार ने यह भी साफ किया है कि छत्तीसगढ़ में दी जाने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति राशि कई राज्यों के मुकाबले बेहतर या उनके बराबर है। कक्षा 1 से 5 तक: ₹7,000 प्रतिवर्ष, कक्षा 6 से 8 तक: ₹11,400 प्रतिवर्ष दिया जा रहा है। वहीं, दूसरे राज्यों में मध्य प्रदेश में ₹4,419, बिहार में ₹6,569, झारखंड में ₹5,100, उत्तर प्रदेश में ₹5,400 दिया जा रहा है। हालांकि ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में यह राशि अधिक बताई गई है, लेकिन समग्र रूप से छत्तीसगढ़ की प्रतिपूर्ति को संतुलित और उचित बताया गया है। वर्तमान में प्रदेश के 6,862 निजी स्कूलों में RTE के माध्यम से लगभग 3,63,515 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। वहीं इस वर्ष कक्षा पहली में करीब 22,000 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है। राज्य सरकार गरीब बच्चों की शिक्षा के प्रति संवेदनशील छत्तीसगढ़ में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009, अप्रैल 2010 से प्रभावी है। इसके अंतर्गत प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। इन सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर, दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर प्रवेश दिलाया जाता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीब बच्चों की शिक्षा के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और सभी के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। प्रतिपूर्ति राशि का पारदर्शी भुगतान शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत निजी स्कूलों को नर्सरी या कक्षा 1 में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है। इसके बदले राज्य सरकार प्रति बच्चा व्यय के आधार पर स्कूलों को प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान करती है। यह राशि सरकारी स्कूल में प्रति बच्चे पर होने वाले खर्च या निजी स्कूल की वास्तविक फीस (दोनों में से जो भी कम हो) के आधार पर निर्धारित की जाती है। ​अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर प्रतिपूर्ति छत्तीसगढ़ में शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि कई पड़ोसी राज्यों की तुलना में बेहतर या उनके समकक्ष है। प्रदेश में वर्ष 2011-12 से ही कक्षा 1 से 5 तक 7000 रूपए और कक्षा 6 से 8 तक 11 हजार 400 रूपए वार्षिक प्रतिपूर्ति राशि निर्धारित है। तुलनात्मक रूप से देखें तो मध्य प्रदेश में 4,419 रूपए बिहार में 6,569 रूपए, झारखंड में 5,100 रूपए और उत्तर प्रदेश में 5,400 रूपए वार्षिक दिए जाते हैं। यद्यपि ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में यह राशि अधिक है, किंतु समग्र मूल्यांकन में छत्तीसगढ़ की प्रतिपूर्ति राशि संतुलित और उचित है। ​साढ़े तीन लाख से अधिक बच्चे ले रहे लाभ वर्तमान में राज्य के 6,862 निजी विद्यालयों में आर.टी.ई. के माध्यम से लगभग 3,63,515 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इस वर्ष भी कक्षा पहली की लगभग 22,000 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है। चूंकि सभी निजी विद्यालयों को आर.टी.ई. अधिनियम के प्रावधानों के तहत ही मान्यता दी गई है, अतः यह उनकी वैधानिक जिम्मेदारी है कि वे निर्धारित सीटों पर प्रवेश सुनिश्चित करें। ​नियमों के उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई यदि कोई निजी विद्यालय आरटीई के तहत प्रवेश देने से इंकार करता है या प्रक्रिया में व्यवधान डालता है तो राज्य शासन उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा। इसमें विद्यालय की मान्यता समाप्त करने तक का प्रावधान शामिल है। शिक्षा विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस संबंध में फैलाई जा रही किसी भी भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक तथ्यों पर ही विश्वास करें।

दुर्ग में RTE सीटें घटीं, 1425 छात्रों तक सिमटा दायरा

दुर्ग. आरटीई के तहत प्रवेश के लिए निर्धारित सीटों की संख्या में भारी कटौती की गई है. पिछले वर्ष की तुलना में इस बार करीब एक तिहाई सीटों की कटौती हुई है. इस वर्ष केजी – 1, केजी -2 तथा नर्सरी का कांक्सेप्ट खत्म कर दिया गया है. इस वजह से निजी स्कूलों में आरटीई के तहत केवल पहली कक्षा में प्रवेश दिया जा रहा है, जिसके लिए प्रथम चरण में ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 31 मार्च से निर्धारित है. विभाग को अब तक 2533 आवेदन मिल चुके हैं. इस बार मात्र मात्र 1425 सीट निर्धारित है. पिछले वर्ष आरटीई की 4267 सीट थी. यानी इस बार 2842 सीटों की कटौती की गई है. इससे चलते जिले के कई बड़े नामी स्कूलों में आरटीई की सीटों में भारी कमी आई है. वैसे पिछले वर्ष आरटीई में प्रवेश के लिए 540 निजी स्कूल चिन्हाकित थे. इस बार यह संख्या घटकर 528 हो गई है. निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम अन्तर्गत वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश में संचालित निजी विद्यालयों में आरटीई पोर्टल के माध्यम से ऑनलाईन आवेदन/भर्ती की कार्यवाही की जानी है. गरीब तथा मध्यम तबके परिवार के बच्चों को आरटीई के तहत दिए जाने वाले प्रवेश प्रक्रिया में इस वर्ष से एक बड़ा बदलाव किया गया है. केजी- 1, केजी -2 तथा नर्सरी का कांक्सेप्ट खत्म कर आरटीई में अब पहली कक्षा में प्रवेश दिए जाने का प्रावधान किया गया है. इसके पहले तक जिले के बड़े निजी विद्यालयों में केजी-1, केजी 2 तथा नर्सरी कक्षा में बच्चों को प्रवेश दिया जाता था. बहरहाल, आगामी शिक्षा सत्र 2026-27 के लिए आरटीई के तहत प्रवेश दिए जाने राज्य से शेड्यूल जारी कर दिया गया है. प्रथम चरण में प्रवेश का शेड्यूल इस प्रकार ऑनलाइन आवेदन 31 मार्च तक . नोडल वेरीफिकेशन 16 फरवरी से 31 मार्च तक | लॉटरी एवं आबंटन 13 अप्रैल से 17 अप्रैल तक . स्कूल दाखिला 1 मई से 30 मई तक. 2025-26 की शुल्क प्रतिपूर्ति का सत्यापन कार्य 25 मई से 25 जून तक. द्वितीय चरण में प्रवेश की समय सारणी इस तरह न्यू स्कूल रजिस्ट्रेशन 8 से 20 जून तक . नोडल प्राचार्य, डीईओ द्वारा सत्यापन, ( सीट प्रकटीकरण) 8 जून से 25 जून तक छात्र पंजीयन 1 जुलाई से 11 जुलाई तक. नोडल वेरीफिकेशन 1 जुलाई से 15 जुलाई तक लॉटरी एवं आबंटन 27 से 31 जुलाई तक स्कूल दाखिला 3 अगस्त से 17 अगस्त तक .