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RTE में बड़ा बदलाव: EWS बच्चों को प्राथमिकता, पारदर्शिता के लिए डिजिटल सिस्टम लागू करेगी सरकार

रायपुर. डिजिटल सुशासन का सशक्त मॉडल से शिक्षा के अधिकार को एक नया आसमान मिल रहा है। भारत में शिक्षा को मौलिक अधिकार का दर्जा मिलने के बाद से लगातार यह प्रयास किए जा रहे हैं कि हर बच्चे तक शिक्षा का उजाला पहुंच सके। हमारे देश मे एक लंबे समय तक यह देखा गया कि नीतियां तो जरूर बनाई जाती रही मगर जमीन पर उसके क्रियान्वयन में पारदर्शिता और पहुंच की कमी बनी रहती थी। ऐसे समय में छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने जो करके दिखाया है आज उसकी मिसाल दी जा रही है। प्रदेश भर मे मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में डिजिटल सुशासन के जरिए शिक्षा के अधिकार (RTE) को वास्तविक रूप में लागू किया जा रहा है। यह कदम तकनीकी सुधार ही नई बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और पारदर्शिता की दिशा में भी एक क्रांतिकारी पहल है। RTE और डिजिटल बदलाव से पैदा हो रही एक नई सोच शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित किया गया है। पहले यही प्रक्रिया जटिल, समय लेने वाली और कई बार विवादों से घिरी रहने वाली होती थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस चुनौती को समझा और पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित कर दिया। अब आवेदन करने से लेकर चयन तक स्टेप ऑनलाइन और औटोमेटिक हो गया है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप स्वयमेव कम हो गया है। पक्षपात की संभावना पूरी तरह से समाप्त हो गई है साथ ही पारदर्शिता और भरोसा बढ़ा है। निष्पक्षता की गारंटी बन रही है ऑनलाइन लॉटरी डिजिटल प्रक्रिया का सबसे इम्पॉर्टन्ट पार्ट है ऑनलाइन लॉटरी सिस्टम। उदाहरण के तौर पर शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कुल 38,439 आवेदन प्राप्त हुए थे जिनमे 27,203 आवेदन पात्र पाए गए और इन पात्र आवेदन से 14,403 बच्चों का ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से चयन किया गया। पूरी तरह कंप्यूटर आधारित और रैंडमाइज्ड होने वाली इस प्रक्रिया से किसी भी प्रकार की सिफारिश या पक्षपात की गुंजाइश अपने आप समाप्त हो जाती है। राज्य सरकार का यह कदम सुनिश्चित करता है कि हर बच्चे को समान अवसर मिले जो लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है। सटीकता और भरोसे का आधार है डिजिटल सत्यापन डिजिटल प्रणाली में चयन के साथ डिजिटल सत्यापन को भी शामिल किया गया है। इस प्रणाली मे आवेदन के दौरान दस्तावेजों की ऑनलाइन जांच,पात्रता की स्वचालित पुष्टि, गलत जानकारी की तत्काल पहचान कर ली जाती है। जिससे यह पूरी प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय और त्रुटिरहित बन जाती है। अभिभावकों के लिए भी बनी सरल और सुविधाजनक प्रक्रिया डिजिटल प्रणाली का बड़ा लाभ आम नागरिकों को भी मिल रहा है। अब अभिभावकों को स्कूलों या कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते क्योंकि वे अब घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। मोबाइल नंबर के जरिए सत्यापन और अपडेट प्राप्त कर सकते हैं। आवेदन करते समय सिस्टम के द्वारा 1.5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले निजी स्कूलों की सूची और उपलब्ध सीटों की जानकारी भी उपलब्ध हो जाती है। इस सुविधा से अभिभावकों को सही निर्णय लेने में मदद मिलती है। कमजोर वर्ग के बच्चों को मिल रही प्राथमिकता इस योजना के उद्देश्य के मूल मे ही समाज के उन कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाना है जो अब तक अपने पिछड़ेपन की वजह से ज्ञान और शिक्षा से वंचित रहे। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए इस योजना मे अनुसूचित जाति (SC),अनुसूचित जनजाति दिव्यांग और अन्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को प्राथमिकता दी जाती है। छत्तीसगढ़ की साय सरकार की यह पहल सामाजिक समावेशन को मजबूत करने वाली और समानता की दिशा में ठोस कदम साबित हो रही है। योजना के व्यापक प्रभाव से हो रहा लाखों बच्चों को लाभ वर्तमान मे छत्तीसगढ़ में इस योजना से 3 लाख 63 हजार से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त राज्य की साय सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 300 करोड़ रुपये की शुल्क प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया है, जिससे और भी अधिक बच्चों को लाभ मिल सकेगा और निजी विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया और मजबूत होगी। यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि यह कदम केवल कागजों तक ही सीमित नहीं होगा बल्कि जमीनी स्तर पर इसके प्रभाव को देखा जा सकेगा। जिलेवार सफलता प्रमाण है की योजना राज्य के हर कोने तक पहुंच रही है। इस डिजिटल प्रक्रिया की सफलता इस बात से ही साबित हो जाती है कि छत्तीसगढ़ के लगभग सभी जिलों में हजारों बच्चों को इसका लाभ मिल रहा है। रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, दुर्ग, सरगुजा, जशपुर, बस्तर जैसे क्षेत्रों से बड़ी संख्या में बच्चों का चयन हुआ है। सुदूर प्रांतों से बच्चों का चयन यह दर्शाता है कि यह योजना केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों तक भी सफलता पूर्वक पहुंची है। छत्तीसगढ़ मे हुई डिजिटल सुशासन की व्यापक पहल RTE के अलावा भी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में कई डिजिटल सुधार किए जा चुके हैं जैसे e-Office प्रणाली,CMO पोर्टल, स्मार्ट क्लासरूम, विद्या समीक्षा केंद्र इत्यादि इन सभी कदमों का उद्देश्य छत्तीसगढ़ प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाना ही रहा है। APAAR ID से और संवरेगा राज्य का डिजिटल भविष्य शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल बदलाव को और मजबूत करने के लिए छात्रों को 12 अंकों की एक विशिष्ट पहचान देने वाली APAAR ID जैसी पहल भी महत्वपूर्ण है। यह ID उनके पूरे शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने का कम करती है, जिससे भविष्य में बच्चों को स्कूल बदलने में आसानी होगी, रिकॉर्ड की पारदर्शिता बनी रहेगी और शिक्षा प्रणाली की दक्षता बढ़ेगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शिता से संभव हो पाया यह बदलाव इस महा परिवर्तन के पीछे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की स्पष्ट सोच और प्रतिबद्धता साफ दिखाई देती है क्योंकि वे दृढ़ता से इस बात के पक्षधर हैं कि “कोई भी बच्चा केवल आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए।” उनकी यही सोच इस डिजिटल RTE मॉडल की नींव है। समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की ओर एक मजबूत कदम डिजिटल प्रक्रिया ने शिक्षा को अधिक समावेशी, अधिक सुलभ और अधिक पारदर्शी बनाने का कम किया है परिणामस्वरूप … Read more

आरटीई: शत-प्रतिशत नामांकन लक्ष्य पूरा करने के लिए योगी सरकार ने 25 अप्रैल तक दिए सख्त निर्देश

आरटीई: शत-प्रतिशत नामांकन को लेकर योगी सरकार सख्त, 25 अप्रैल तक हर हाल में लक्ष्य पूरा करने के निर्देश 1,95,740 आवंटनों के सापेक्ष अब तक मात्र 1,08,866 बच्चों के प्रवेश पर सख्त हुई योगी सरकार – महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सभी जिलाधिकारियों और बीएसए को 25 अप्रैल तक हर हाल में सभी पात्र बच्चों का नामांकन सुनिश्चित कराने के दिये निर्देश – लापरवाही या शिथिलता पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी, जिम्मेदार अधिकारी सीधे जवाबदेही में होंगे लखनऊ  शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अंतर्गत वर्ष 2026-27 में आवंटित गरीब बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित कराने के लिए योगी सरकार अब एक्शन मोड में आ गई है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा मोनिका रानी ने सभी जिलाधिकारियों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 25 अप्रैल 2026 तक हर हाल में सभी पात्र बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया जाए, इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आरटीई के अंतर्गत 1,95,740 आवंटनों के सापेक्ष अब तक मात्र 1,08,866 बच्चों का ही प्रवेश कराया जा सका है, जिस पर सरकार ने कड़ा संज्ञान लिया है। शेष बच्चों के नामांकन को लेकर अब फील्ड स्तर पर तेज और निर्णायक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। निर्देश में कहा गया है कि जिन बच्चों का अब तक प्रवेश नहीं हुआ है, उनकी सूची तैयार कर तत्काल प्रभाव से नामांकन कराया जाए। संबंधित विद्यालयों से समन्वय स्थापित कर प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी न होने दी जाए। योगी सरकार ने इस पूरे अभियान की सख्त मॉनिटरिंग के निर्देश देते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को प्रतिदिन प्रगति की समीक्षा करने को कहा है। समयबद्ध लक्ष्य हासिल करने के लिए अधिकारियों को पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता मिलने पर कड़ी कार्रवाई तय है और जिम्मेदार सीधे कार्रवाई की जद में आएंगे।

पंजाब में RTE के तहत प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन शुरू, एजुकेशन डिपार्टमेंट ने लिंक किया लाइव पोर्टल

चंडीगढ़  पंजाब में राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत प्राइवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों पर गरीब व डिसएडवांटेज्ड स्टूडेंट्स के एडमिशन का प्रोसेस शुरू हो गया। एजुकेशन डिपार्टमेंट में एडमिशन के लिए पोर्टल लाइव कर दिया है। गरीब व डिसएडवांटेज्ड स्टूडेंट्स पोर्टल पर अप्लाई करके किसी भी प्राइवेट स्कूल में एडमिशन ले सकेंगे। स्टूडेंट्स सिर्फ एंट्री क्लास में ही फ्री एडमिशन ले सकेंगे। डिपार्टमेंट ने राज्यभर के स्कूलों को एंट्री क्लास में 25 फीसदी सीटें रिजर्व रखने के आदेश भी दिए हैं। जो भी इलिजिबल स्टूडेंट प्राइवेट स्कूल्स में एडमिशन लेना चाहता है उसे इस पोर्टल पर ऑनलाइन अप्लाई करते हुए आवश्यक दस्तावेज भी अपलोड करने होंगे। दस्तावेज अपलोड न होने पर वह फ्री सीट का हकदार नहीं होगा। प्राइवेट स्कूल्स में फ्री एडमिशन के लिए क्या क्राइटीरिया होगा, जानिए…     आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS): प्राइवेट स्कूलों में फ्री एडमिशन व स्टडी के लिए आर्थिक तौर पर कमजोर स्टूडेंट्स इलिजिबल होंगे। EWS स्टूडेंट्स के लिए 25 प्रतिशत में से 12.5% सीटें रिजर्व रहेंगी। दाखिले के वक्त पेरेंट्स को इनकम और प्रॉपर्टी सर्टिफिकेट देना होगा। बिना इनकम सर्टिफिकेट के इस कैटागिरी में बच्चे का एडमिशन नहीं होगा।     डिसएडवांटेज्ड ग्रुप्स: प्राइवेट स्कूलों में ईडब्न्ल्यूएस के अलावा डिसएडवांटेज्ड ग्रुप के स्टूडेंट्स भी फ्री एडमिशन के लिए इलिजिबल होंगे।  उनके लिए भी 25 प्रतिशत में से 12.5 प्रतिशत सीटें रिजर्व रहेंगी। इसमें अनुसूचित जाति (SC), ओबीसी, वार विडो के बच्चे, दिव्यांग, स्पेशल चाइल्ड, अनाथ बच्चे शामिल होंगे।     नाइवरहुड स्कूल: स्टूडेंट को एडमिशन के लिए कम से कम दो स्कूलों के नाम भरने होंगे। पहला ऑप्शन 0 से 3 किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए जबिक दूसरा ऑप्शन 3-6 किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए।     बस का खर्च पेरेंट्स खुद उठाएंगे: एडमिशन पोर्टल पर ही डिपार्टमेंट ने स्पष्ट कर दिया है कि एडमिशन के लिए पेरेंट्स को नजदीकी स्कूल सलेक्ट करना होगा। अगर वो स्कूल दूर सलेक्ट करते हैं तो स्कूल बस का खर्च उन्हें अपने स्तर पर उठाना होगा।     ऐज क्राइटीरिया: डिपार्टमेंट ने एंट्री क्लास में एडमिशन के लिए मिनिमम ऐज क्राइटीरिया फिक्स किया है। नर्सरी में एडमिशन के लिए 3 साल, केजी में 4 साल, यूकेजी में 5 साल और फर्स्ट में 6 साल होने जरूरी हैं। स्टूडेंट्स की यह उम्र 1 अप्रैल 2026 को पूरी होनी चाहिए। एडमिशन प्रक्रिया को स्टेपवाइज जानिए…     ऑनलाइन करना होगा आवेदन: प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन के सिर्फ ऑनलाइन प्रक्रिया से ही होगा। स्कूल सीधे अपने स्तर पर एडमिशन नहीं देंगे। rte.epunjabschool.gov.in पोर्टल पर एडमिशन के लिए ऑनलाइन अप्लाई करना होगा।     रजिस्ट्रस्टेशन करना जरूरी: पेरेंट्स को एडमिशन के लिए पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना जरूरी होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद ऑनलाइन ही फार्म भरना होगा। आखिर में उसमें डॉक्यूमेंट अपलोड करने होंगे। पूरी प्रक्रिया अपनाने के बाद फाइनल सब्मिशन होगा।     ये सर्टिफिकेट जरूरी: ऑन लाइन फार्म भरते वक्त पेरेंट्स को बच्चे का बर्थ सर्टिफिकेट या अस्पताल का रिकार्ड, आंगनबाड़ी रिकार्ड अपलोड करना होगा। अगर कुछ भी उपलब्ध नहीं है तो पेरेंट्स को मजिस्ट्रेट से अटेस्टेड एफिडेविट देना होगा। रेजिडेंस सर्टिफिकेट के तौर पर आधार, वोटर आईडी, बिजली बिल पानी का बिल या राशन कार्ड अपलोड करना होगा। वहीं इलिजिबिलिटी के लिए कास्ट सर्टिफिकेट, इनकम सर्टिफिकेट, दिव्यांग सर्टिफिकेट, वार विडो या अनाथ का सर्टिफिकेट अपलोड करना होगा।     गलत जानकारी दी तो कानूनी कार्रवाई: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व फार्म भरते समय गलत जानकारियां दी गई या फिर कोई फर्जी डॉक्यूमेंट लगाए गए तो बच्चे का एडमिशन रद्द कर दिया जाएगा और अभिभावकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डिपार्टमेंट किसी भी लेवल पर दस्तावेजों की वेरिफिकेशन कर सकता है। स्कूलों के लिए गाइड लाइन – कोई स्क्रीनिंग टेस्ट या कैपिटेशन फीस नहीं – RTE बच्चों के साथ कोई भेदभाव नहीं – उन्हें अलग कक्षा या अलग समय पर नहीं पढ़ाया जाएगा – लाइब्रेरी, कंप्यूटर, खेलकूद और अन्य सुविधाओं में बराबर अधिकार – कक्षाएं समावेशी और सुरक्षित रखनी होंगी – स्कूलों को पोर्टल पर नामांकन और उपस्थिति नियमित अपडेट करनी होगी। स्कूलों को फीस ऐसे मिलेगी -सरकार स्कूल को प्रति बच्चा व्यय या वास्तविक फीस जो भी कम होगा उसे देगी। -स्कूल को इसके लिए अलग बैंक खाता खोलना होगा, जिसमें केवल RTE राशि आएगी। -सरकार से सब्सिडी ले चुके स्कूलों को सरकार कोई राशि नहीं देगी। ऐसे कर सकेंगे शिकायत आरटीई से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए जिला शिक्षा अधिकारी शिकायत निवारण अधिकारी होंगे। अगर कोई आवेदन रद्द होता है तो एक सप्ताह के अंदर पेरेंट्स को लिखित शिकायत देनी होगी। जिला शिक्षा अधिकारी को 15 दिन में शिकायत का निपटारा करना होगा। जिला शिक्षा अधिकारी के फैसले के खिलाफ पंजाब स्टेट कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट के पास अपील कर सकेंगे। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी को समय समय पर स्कूलों की जांच करनी होगी। अभिभावकों और स्कूलों के लिए अहम बातें यह SOP सिर्फ 2026-27 सत्र के लिए है, लेकिन विभाग समय-समय पर इनमें संशोधन कर सकता है। पंजाब में 1500 से ज्यादा प्राइवेट स्कूल पोर्टल पर रजिस्टर हो चुके हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अपील की है कि पेरेंट्स तय समय पर सही दस्तावेज अपलोड करके बच्चों का रजिस्ट्रेशन करवाएं। स्कूल प्रबंधन बच्चों के साथ किसी तरह का भेदभाव न करें। भेदभाव करने की स्थिति में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हाईकोर्ट ने फटकार लगाई तो शुरू किया पोर्टल पंजाब के प्राइवेट स्कूल्स में आरटीई के तहत एडमिशन न होने का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंचा। कोर्ट के आदेश पर पिछले साल सरकार ने सभी प्राइवेट स्कूल प्रिंसिपल्स को 25 प्रतिशत सीटें खाली रखने के आदेश दिए लेकिन उन सीटों पर एडमिशन ही नहीं करवाए। कोर्ट ने फटकार लगाई तो एजुकेशन डिपार्टमेंट ने आरटीई पोर्टल पर स्कूलों की रजिस्ट्रेशन करवाई और अब एडमिशन का लिंक लाइव कर दिया।

RTE एडमिशन में नया बदलाव, अब सिर्फ 1425 बच्चों को मिलेगा दाखिला, केजी और नर्सरी बंद

दुर्ग  छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जिले में आरटीई सीटों में भारी कटौती करते हुए संख्या घटाकर केवल 1425 कर दी गई है। पिछले वर्ष जहां 4267 सीटें उपलब्ध थीं, वहीं इस बार 2842 सीटें कम कर दी गई हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।  केजी-नर्सरी खत्म, अब सीधे पहली कक्षा में प्रवेश इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि केजी-1, केजी-2 और नर्सरी कक्षाओं को आरटीई दायरे से बाहर कर दिया गया है। अब केवल पहली कक्षा में ही प्रवेश दिया जाएगा। इससे पहले निजी स्कूलों में इन शुरुआती कक्षाओं में भी आरटीई के तहत दाखिले होते थे। विभाग को अब तक 2533 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जबकि सीटें सिर्फ 1425 ही हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में बच्चों का चयन नहीं हो पाएगा। इससे अभिभावकों के बीच प्रतिस्पर्धा और चिंता दोनों बढ़ गई हैं। निजी स्कूलों की संख्या भी घटी पिछले वर्ष जहां 540 निजी स्कूलों को आरटीई के तहत चिन्हांकित किया गया था, इस बार उनकी संख्या घटकर 528 रह गई है। इससे भी सीटों में कमी का असर साफ नजर आ रहा है। निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत वर्ष 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन की जा रही है। आरटीई पोर्टल के माध्यम से आवेदन और चयन की प्रक्रिया संपन्न होगी। पहले चरण का शेड्यूल जारी आरटीई प्रवेश प्रक्रिया के पहले चरण का शेड्यूल भी जारी कर दिया गया है। इसके तहत ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 31 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि नोडल वेरिफिकेशन की प्रक्रिया 16 फरवरी से 31 मार्च तक चलेगी। इसके बाद 13 से 17 अप्रैल के बीच लॉटरी के माध्यम से सीटों का आबंटन किया जाएगा। चयनित छात्रों का स्कूल में प्रवेश 1 मई से 30 मई के बीच कराया जाएगा, वहीं 2025-26 सत्र की शुल्क प्रतिपूर्ति का सत्यापन कार्य 25 मई से 25 जून तक पूरा किया जाएगा। दूसरे चरण की समय-सारणी द्वितीय चरण के तहत आरटीई प्रवेश प्रक्रिया की समय-सारणी भी जारी कर दी गई है, जिसके अनुसार नए स्कूलों का रजिस्ट्रेशन 8 से 20 जून तक किया जाएगा। इसके बाद नोडल अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) द्वारा सीटों का वेरिफिकेशन 8 जून से 25 जून तक किया जाएगा। छात्र पंजीयन की प्रक्रिया 1 से 11 जुलाई के बीच पूरी होगी, जबकि नोडल वेरिफिकेशन 1 से 15 जुलाई तक किया जाएगा। इसके पश्चात 27 से 31 जुलाई के बीच लॉटरी और सीटों का आबंटन किया जाएगा, वहीं चयनित छात्रों की स्कूल में प्रवेश प्रक्रिया 3 से 17 अगस्त तक पूरी की जाएगी। अभिभावकों में बढ़ी चिंता सीटों में भारी कटौती और कक्षाओं के दायरे में बदलाव के कारण इस बार बड़ी संख्या में बच्चों को आरटीई का लाभ नहीं मिल पाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे निजी स्कूलों में शिक्षा हासिल करने का अवसर सीमित हो सकता है, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए।

जबलपुर में RTE की धज्जियाँ उड़ाई गईं, गरीब बच्चों के भविष्य से खिलवाड़, ईओडब्ल्यू की जांच में हुआ खुलासा

जबलपुर  ईओडब्ल्यू ने जबलपुर में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत प्राइवेट स्कूलों में हुए एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है। इस मामले में 6 स्कूल संचालकों और 5 नोडल अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि इन लोगों ने एक ही छात्र का कई बार दाखिला दिखाकर सरकारी फीस प्रतिपूर्ति राशि में हेरफेर किया है। 2011 से 2016 साल तक चला घोटाला यह घोटाला साल 2011 से 2016 के बीच हुआ है। ईओडब्ल्यू को शिकायत मिली थी कि कुछ स्कूल संचालक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। शिक्षा के अधिकार के तहत, प्राइवेट स्कूलों को 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और गरीबी रेखा से नीचे वाले बच्चों के लिए मुफ्त रखनी होती हैं। इसके बदले सरकार स्कूलों को फीस देती है। 6 स्कूलों का नाम खुला जांच में पता चला कि जबलपुर के 466 प्राइवेट स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति के तौर पर 3 करोड़ 27 लाख 83 हजार रुपये दिए गए थे। लेकिन, 6 स्कूलों ने 628 छात्रों का फर्जी दाखिला दिखाकर करीब 26.50 लाख रुपये का गबन किया। इन पर दर्ज हुआ मामला ईओडब्ल्यू ने स्मिता चिल्ड्रन एकेडमी के संचालक मनीष असाटी और नोडल अधिकारी श्रीमती चंद्र कोष्टा, अशासकीय आदर्श ज्ञान सागर शिक्षा शाला की संचालक श्रीमती नसरीन बेगम और नोडल अधिकारी श्रीमती गुल निगार खान, गुरू पब्लिक स्कूल के मो तौफिक और नोडल अधिकारी अख्तर बेगम, अस्मानिया मिडिल स्कूल के संचालक मो शमीम और नोडल अधिकारी राजेंद्र बुधौलिया, और सेंट अब्राहम स्कूल के संचालक मोहम्मद शफीक और नोडल अधिकारी डी के मेहता के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन और आपराधिक साजिश जैसी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है।  

पंजाब शिक्षा विभाग का बड़ा कदम, अब RTE के तहत गरीब बच्चों को मिलेगा प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन

लुधियाना : पंजाब में अब गरीब बच्चों के लिए प्राइवेट स्कूलों में दाखिला मिलना आसान हो गया है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद शिक्षा विभाग ने प्राइवेट स्कूलों में गरीब बच्चों को एडमिशन देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कदम से राज्य के उन बच्चों को फायदा होगा जो शिक्षा के अवसरों से वंचित थे। पंजाब के सभी प्राइवेट स्कूलों के प्रिंसिपल्स को 12 जनवरी तक विभाग की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करवाने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के बाद गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन दिलवाने का काम विभाग करेगा। राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत प्राइवेट स्कूलों को अपनी 25 प्रतिशत सीटें गरीब बच्चों के लिए रिजर्व रखनी होती हैं। इन रिजर्व सीटों पर बच्चों का दाखिला शिक्षा विभाग की ओर से भेजे गए सिफारिशों के आधार पर होगा। इससे सुनिश्चित किया जाएगा कि गरीब बच्चों को सही तरीके से सरकारी सुविधाएं मिल सकें। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने फरवरी 2025 में आदेश दिए थे कि प्राइवेट स्कूलों को गरीब बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें रिजर्व रखनी होंगी। मार्च 2025 में शिक्षा विभाग ने इस आदेश के तहत सभी प्राइवेट स्कूलों को निर्देश दिए थे कि वे गरीब बच्चों के लिए सीटें खाली रखें। हालांकि, शिक्षा सत्र शुरू होने के करीब 10 महीने बाद भी प्राइवेट स्कूलों में किसी भी गरीब बच्चे का एडमिशन नहीं हो सका और रिजर्व सीटें खाली पड़ी रहीं। वहीं पंजाब में 7806 गैर-वित्तीय सहायता प्राप्त प्राइवेट स्कूल हैं। हर स्कूल में एंट्री लेवल पर लगभग 12 सीटें रिजर्व रखनी होती हैं। सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों में कई सेक्शन होते हैं, और इस तरह से अनुमान है कि करीब 1 लाख गरीब बच्चे प्राइवेट स्कूलों में दाखिला लेने से वंचित रह गए हैं। स्कूल संघ पंजाब के को-ऑर्डिनेटर राजेश नागर ने कहा कि सरकार को आरटीई के तहत रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शिक्षा सत्र की शुरुआत में ही पूरी करनी चाहिए थी, ताकि बच्चों को समय पर शिक्षा मिल सके। वहीं, स्कूल संघ पंजाब के महासचिव भुवनेश भट्ट ने यह भी कहा कि शिक्षा विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जो बच्चे आरटीई के तहत एडमिशन लें, उन्हें समय पर किताबें, वर्दी और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करवाई जाए, ताकि उनकी पढ़ाई में कोई रुकावट न आए। शिक्षा विभाग भेजेगा प्राइवेट स्कूलों में गरीब विद्यार्थी राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत गरीब विद्यार्थियों के सरकारी स्कूलों में 25 फीसदी सीटें रिजर्व रखनी होती हैं। रिजर्व सीटों पर दाखिले के लिए बच्चे शिक्षा विभाग की तरफ से रिकमंड किए जाने हैं ताकि विभाग के पास दाखिल करवाए गए बच्चों का रिकार्ड रहे और उनको विभागीय सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा सके। मार्च में दिए थे 25 प्रतिशत सीट खाली रखने के आदेश फरवरी 2025 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद शिक्षा विभाग ने मार्च 2025 में प्राइवेट स्कूलों को आदेश दिए थे कि वो गरीब बच्चों के एडमिशन के लिए 25 प्रतिशत सीट खाली रखें। विभाग के आदेश पर प्राइवेट स्कूलों ने सीटें खाली रखी लेकिन शिक्षा सत्र शुरू हुए 10 महीने बीत गए लेकिन शिक्षा विभाग ने एक भी गरीब बच्चे का एडमिशन प्राइवेट स्कूल में नहीं करवाया और प्राइवेट स्कूलों में रिजर्व रखी 25 प्रतिशत सीटें खाली रह गई। 1 लाख से ज्यादा बच्चे एडमिशन से रह गए वंचित पंजाब में 7806 गैर वित्तीय सहायता प्राप्त यानि प्राइवेट स्कूल हैं। स्कूल में एंट्री क्लास का अगर एक सेक्शन हो तो हर स्कूल में 12 बच्चों के एडमिशन के लिए सीट खाली हैं। सीबीएसई व आईसीएससी स्कूलों में एंट्री लेवल पर चार से पांच सेक्शन तक भी हैं। इस तरह पंजाब में कम से कम 1 लाख गरीब बच्चे प्राइवेट स्कूलों में दाखिला लेने से वंचित रह गए। स्कूल संघ ने किया किया स्वागत स्कूल संघ पंजाब के कोऑर्डिनेटर राजेश नागर ने कहा कि सरकार को आरटीई के तहत यह रजिस्ट्रेशन शिक्षा सत्र के शुरुआत में करवानी चाहिए थी ताकि गरीब बच्चों को इसका लाभ मिलता। वहीं स्कूल संघ पंजाब के महासचिव भुवनेश भट्ट ने कहा कि आरटीई के तहत एडमिशन लेने वाले बच्चों को सरकार समय पर किताबें, वर्दी व अन्य सामग्री समय पर उपलब्ध करवाए ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो और बाकी बच्चों के बीच में वो खुद को अलग महसूस न करें। 12 जनवरी तक स्कूल करें रजिस्ट्रेशन डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन सेकेंडरी गुरदीप सिंह सोढ़ी का कहना है कि स्कूलों को 12 जनवरी तक डिपार्टमेंट की साइट पर रजिस्ट्रेशन करवानी होगी। उन्होंने कहा कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के बाद गरीब बच्चों को आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूलों में दाखिला देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। रजिस्ट्रेशन के लिए आवश्यक जानकारी डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन सेकेंडरी, गुरदीप सिंह सोढ़ी ने बताया कि 12 जनवरी तक सभी स्कूलों को रजिस्ट्रेशन करना होगा। स्कूलों को रजिस्ट्रेशन करते वक्त जानकारी अपलोड करनी होगी। स्कूल का प्रकार (गर्ल्स, ब्वॉयज, या को-एजुकेशनल) पढ़ाई का मीडियम (पंजाबी, अंग्रेजी, या हिंदी) स्कूल को मान्यता मिलने का वर्ष पिन कोड प्रिंसिपल / हेडमास्टर / हेडमिस्ट्रेस का नाम संपर्क नंबर और स्कूल की वेबसाइट विभाग या बोर्ड से एफिलिएशन नंबर एंट्री क्लास में कुल सीटों की संख्या सालाना स्कूल फीस का विवरण स्कूल का पता और लोकेशन स्कूल का स्तर (प्राइमरी, अपर प्राइमरी, सेकेंडरी, सीनियर सेकेंडरी)

CM मोहन यादव का बड़ा फैसला: RTE छात्रों की फीस भुगतान के लिए 489 करोड़ रुपये जारी

भोपाल  शासकीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा दे रही मध्य प्रदेश सरकार शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन लेने वाले विद्यार्थियों की भी फ़ीस जमा करती है, हर साल की तरह इस साल भी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ये फ़ीस प्राइवेट स्कूलों के खातों में ट्रांसफर करेंगे। मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत अशासकीय विद्यालयों में निःशुल्क अध्ययन करने वाले बच्चों की 489 करोड़ रुपये फीस प्रतिपूर्ति की राशि सिंगल क्लिक से सीधे स्‍कूलों के खातों में ट्रांसफर करेंगे। ये  कार्यक्रम हरदा जिले के खिरकिया नगर में 29 सितम्बर, 2025 को होगा। 8 लाख 45 हजार विद्यार्थियों की फीस दी जायेगी राज्य शिक्षा केन्द्र की अपर मिशन संचालक हरसिमरन प्रीत कौर ने बताया कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार वर्ष 2023-24 के अशासकीय विद्यालयों के प्रेषित प्रस्ताव पर नियमानुसार पोर्टल से जनरेटेड इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के माध्यम से फीस प्रतिपूर्ति की कार्यवाही की गयी है। प्रदेश के 20 हजार 652 अशासकीय विद्यालयों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत नि:शुल्क अध्ययनरत करीब 8 लाख 45 हजार विद्यार्थियों की फीस की प्रतिपूर्ति की जायेगी। 19 लाख बच्चे अब तक हो चुके लाभान्वित उल्‍लेखनीय है कि प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के अंतर्गत गैर अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों में वंचित समूह एवं कमजोर वर्ग के बच्चों को उनके ग्राम, वार्ड अथवा पड़ोस में स्थित स्कूल की प्रथम प्रवेशित कक्षा की न्‍यूनतम 25 प्रतिशत सीटों पर निःशुल्क प्रवेश दिये जाने का प्रावधान है। पूर्व के वर्षों में प्रवेशित छात्रों की संख्या को देखा जाये तो सत्र 2011-12 से लागू इस प्रावधान के तहत अशासकीय स्कूलों में नि:शुल्‍क अध्‍ययन से लगभग 19 लाख बच्चे लाभान्वित हो चुके हैं।

मध्यप्रदेश के प्राइवेट स्कूलों का बड़ा फैसला: RTE के तहत पढ़ रहे 10 हजार बच्चों की पढ़ाई 1 अक्टूबर से बंद

भोपाल   मध्यप्रदेशके प्राइवेट स्कूलों में आरटीई के तहत दर्ज बच्चों की पढ़ाई पर संकट गहरा गया है। प्राइवेट स्कूलों ने आरटीई के तहत दर्ज बच्चों को न पढ़ाने राज्य शिक्षा केन्द्र को अल्टीमेटम दिया है। फीस विवाद इसका कारण बना है। निजी स्कूल संचालकों ने कहा कि 30 सितंबर तक विभाग फीस चुकाए। तीन साल की फीस बकाया है। भोपाल शहर में करीब 12 सौं निजी स्कूलों में करीब 10 हजार बच्चों को आरटीई के तहत प्रवेश हुआ है। एसोसिएशन ने कहा कि फीस न मिली तो बच्चों को पढ़ाने में असमर्थ होंगे। ये है पूरा मामला निजी स्कूल एसोसिएशन के अजीत सिंह के मुताबिक प्राइवेट स्कूलों में सरकार ने आरटीई के तहत बच्चों का दाखिला(RTE School Admission) कराया गया है। प्रदेश में हर साल एक से ज्यादा एडमिशन कराए जा रहे है। इन बच्चों की फीस सरकार देती है। लेकिन करीब तीन साल हो गए। प्रदेश के अधिकांश स्कलों में आरटीई के दाखिलों की फीस की प्रतिपूर्ति नहीं की गई है। स्कूल संचालकों ने कहा त्योहारी सीजन, शिक्षकों का वेतन फीस के भरोसे स्कूल एसोसिएशन के मुताबिक प्राइवेट स्कूल में शिक्षको का वेतन फीस के भरोसे है। प्रतिपूर्ति न होने से त्योहारी सीजन में परेशानी होगी। स्कूलों को आर्थिक परेशानी आ रही है। एसोसिएशन के मुताबिक स्कूल इससे पहले भी फीस की मांग कर चुके है। राज्य शिक्षा केन्द्र को ज्ञापन दिए लेकिन सुनवाई नहीं हुई। एक नजर में     शहर में 1200 निजी स्कूल     आइटीई में 10000 बच्चों का हुआ प्रवेश।     तीन साल से फीस की नहीं हुई प्रतिपूर्ति।     (एसोसिएशन के मुताबिक) 3 साल की फीस बकाया तीन साल की फीस बकाया है। स्कूलों की आर्थिक स्थिति खराब है। तीस सितंबर तक फीस की प्रतिपूर्ति नहीं हुई तो आरटीई के तहत दर्ज(RTE School Admission) बच्चों को प्राइवेट स्कूल पढ़ाने में असमर्थ रहेंगे। राज्य शिक्षा केन्द्र को इसका पत्र दे चुके हैं। – अजीत सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन