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मिडिल ईस्ट संकट पर भारत-जर्मनी की चिंता, जयशंकर ने जर्मन विदेश मंत्री से की बातचीत

नई दिल्ली भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडफुल के साथ बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच वर्तमान समय में जारी पश्चिम एशियाई तनाव पर बातचीत हुई। दोनों पक्ष बदलते घटनाक्रम के बीच करीबी संपर्क में रहने पर सहमत हुए। डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बातचीत की जानकारी साझा कर लिखा, "कल रात जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ पश्चिम एशिया विवाद पर काम की बातचीत हुई। संपर्क में रहने पर सहमत हुए।" यह नई बातचीत हाल के हफ्तों में दोनों नेताओं के बीच कई डिप्लोमैटिक मुलाकातों के बीच हुई है। विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने ब्रसेल्स में 16 मार्च को वाडेफुल से खुद मुलाकात की। इस दौरान भी दोनों नेताओं ने "पश्चिम एशिया में विवाद पर विचार साझा" किया और साथ ही दोनों देशों के बीच सहयोग के अलग-अलग पहलुओं की भी समीक्षा की। इससे पहले, 10 मार्च को, दोनों मंत्रियों ने लगातार बातचीत के हिस्से के तौर पर पश्चिम एशिया के हालात पर भी चर्चा की थी, जो ऊर्जा सुरक्षा और इलाके की स्थिरता पर विवाद के असर को लेकर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चिंता को दिखाता है। हाल के हफ्तों में, डॉ. जयशंकर कई ग्लोबल साझेदारों के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं, क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता जा रहा है। भारत के विदेश मंत्री ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची समेत कई खास स्टेकहोल्डर्स के साथ भी लगातार संपर्क में बने हुए हैं। ईरान के अलावा, विदेश मंत्री ने कई खाड़ी देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बातचीत जारी रखी है, जिससे इस संकट में शामिल सभी पक्षों के साथ डिप्लोमैटिक रूप से जुड़े रहने की भारत की कोशिशों पर जोर दिया गया है। पश्चिम एशिया में संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की तरफ से ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ, जिसके नतीजे में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई। तब से स्थिति और बिगड़ गई है, जिसमें खाड़ी क्षेत्र के कई देश शामिल हो गए हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इस संकट पर भारत का नजरिया एक सोची-समझी और संतुलित डिप्लोमैटिक स्ट्रैटेजी दिखाता है। भारतीय नेतृत्व 28 फरवरी से सभी क्षेत्रीय नेतृत्व के साथ बातचीत बनाए हुए है। भारत जिस तरह से इस पूरी स्थिति से निपट रहा है, वह देश के किसी खास पक्ष के साथ जुड़े बिना संकट से निपटने की लगातार कोशिश का संकेत देता है।

पेरिस में भारतीय संस्कृति की झलक: एस. जयशंकर ने विरासत प्रदर्शनी का किया उद्घाटन

पेरिस/नई दिल्ली भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर 4 जनवरी से दो देशों के विदेश दौरे पर हैं। पहले चरण में जयशंकर फ्रांस पहुंचे हुए हैं। इस दौरान उन्होंने पेरिस में 'से क्वी से ट्रैम' नामक एक प्रदर्शनी का दौरा किया। इसमें भारत की पुरानी कपड़ा विरासत और शानदार कारीगरी को पेश किया गया, जो यह दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध कितने गहरे और मजबूत हैं। इस सिलसिले में ईएएम जयशंकर ने भारतीय समयानुसार सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, "आज शाम पेरिस में 'से क्वी से ट्रैम' प्रदर्शनी देखी। यह प्रदर्शनी भारत की टेक्सटाइल विरासत, सवोइर-फेयर और क्रिएटिविटी को दिखाती है। यह भारत-फ्रांस के मजबूत सांस्कृतिक जुड़ाव की भी याद दिलाती है।" बता दें, एस जयशंकर 4-9 जनवरी तक फ्रांस और लक्जमबर्ग के आधिकारिक दौरे पर हैं। फ्रांस के अपने दौरे के दौरान, वह राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात के साथ विदेश मंत्री, जीन नोएल बैरोट के साथ बातचीत करेंगे। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "वे भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के तहत हुई प्रगति और वैश्विक महत्व के मामलों पर चर्चा करेंगे। ईएएम गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर फ्रेंच एम्बेसडर कॉन्फ्रेंस के 31वें एडिशन को भी संबोधित करेंगे।" इसके बाद लक्समबर्ग के दौरे पर विदेश मंत्री जयशंकर उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल और वरिष्ठ नेतृत्व के साथ बातचीत करेंगे। लक्जमबर्ग में मौजूद भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी वह बातचीत करेंगे। पिछले साल नवंबर में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में जी20 समिट के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात की थी। मीटिंग के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, "जोहान्सबर्ग जी20 समिट के दौरान राष्ट्रपति मैक्रों से मिलकर खुशी हुई। हमने अलग-अलग मुद्दों पर अच्छी बातचीत की। भारत-फ्रांस के रिश्ते दुनिया की भलाई के लिए एक ताकत बने हुए हैं।" दोनों नेताओं ने पिछले साल सितंबर 2025 में फोन पर बात की थी, जिसमें यूक्रेन में लड़ाई खत्म करने की कोशिशों पर विचार साझा किए गए थे। इसके साथ ही उन्होंने इस मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान और पूरे इलाके में जल्द शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए भारत के लगातार समर्थन को दोहराया था। इससे पहले दोनों नेताओं ने 21 अगस्त, 2025 को भी फोन पर बात की थी। इस समय भी यूक्रेन को लेकर बातचीत हुई थी। पिछले कुछ महीनों में अपनी बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने अर्थव्यवस्था, रक्षा, विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष समेत अलग-अलग क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग में हुए विकास की समीक्षा की। उन्होंने होराइजन 2047 रोडमैप, इंडो-पैसिफिक रोडमैप और डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप के हिसाब से इंडिया-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

पाकिस्तान को दो टूक: आतंकवाद और जल साझा करना संभव नहीं— एस. जयशंकर

चेन्नई भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर तमिलनाडु के आईआईटी मद्रास में आयोजित फायरसाइड चैट कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने के लिए चेन्नई पहुंचे। कार्यक्रम में संबोधन के दौरान उन्होंने बांग्लादेश में उनके हालिया दौरे का जिक्र किया। एस जयशंकर खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भारत की ओर से शामिल होने के लिए ढाका गए थे। इसे लेकर उन्होंने कहा कि अगर आपका कोई पड़ोसी आपके साथ अच्छा है और कोई नुकसान नहीं पहुंचा रहा है, तो आप उसके साथ संबंध आगे बढ़ाते हैं। वहीं उन्होंने पाकिस्तान को लेकर भी बड़ा बयान दिया। भारत की पड़ोस नीति के बारे में एस. जयशंकर ने कहा, "मैं दो दिन पहले बांग्लादेश में था। हमें कई तरह से बहुत सारे पड़ोसी मिले हैं। अगर आपका कोई पड़ोसी अच्छा है या नुकसान नहीं पहुंचा रहा है, तो आप स्वाभाविक रूप से उसके साथ संबंध बनाते हैं। भारत ऐसे पड़ोसी की मदद करता है, स्वाभाविक रूप से। हमारे ज्यादातर पड़ोसियों को वैक्सीन की पहली खेप भारत से मिली।" बांग्लादेश में इस साल फरवरी में चुनाव होने वाला है। इसे लेकर विदेश मंत्री ने कहा कि हम बांग्लादेश को उनके चुनाव में शुभकामनाएं देते हैं, और हम उम्मीद करते हैं कि एक बार चीजें ठीक हो जाने पर, अच्छे पड़ोसी का रिश्ता जारी रहेगा। वहीं, उन्होंने यूक्रेन विवाद को लेकर कहा, "इस वजह से कई दिक्कतें थीं। हमने पड़ोसियों को खाने और दूसरी चीजों से मदद की। श्रीलंका में बहुत बड़ा आर्थिक संकट था, हमने चार बिलियन डॉलर की मदद की, अच्छे पड़ोसी यही करते हैं। श्रीलंका में एक तूफान आया, हम उसी दिन वहां पहुंचे और सभी बचाव कार्य किए।" पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए एस जयशंकर ने कहा, "हमें अपने लोगों को आतंकवादियों से बचाने का हक है। हम अपनी रक्षा के लिए जो कुछ भी कर सकते हैं, करते हैं। लेकिन अगर आपके यहां दशकों से आतंकवाद है, तो आपके पास अच्छा पड़ोसी नहीं हो सकता। आप ऐसे किसी व्यक्ति के साथ अच्छे पड़ोसी वाले संबंध नहीं रख सकते और पानी साझा नहीं कर सकते जो आतंकवाद जारी रखे हुए है।"

एस जयशंकर बोले: अमेरिका के साथ मजबूत रिश्तों को प्राथमिकता, मोदी-ट्रंप के संबंध हैं शानदार

नई दिल्ली  विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को भारत-अमेरिका संबंधों की सराहना की और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के साथ साझेदारी को अत्यधिक महत्व देते हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब आज ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी के साथ अपनी दोस्ती की तारीफ की थी, लेकिन कुछ मुद्दों पर असहमति भी जताई थी।जयशंकर ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के साथ हमारी साझेदारी को अत्यधिक महत्व देते हैं। जहां तक राष्ट्रपति ट्रंप की बात है, पीएम मोदी के उनके साथ हमेशा बहुत अच्छे व्यक्तिगत संबंध रहे हैं। फिलहाल मैं इतना ही कह सकता हूं कि हम अमेरिका के साथ निरंतर संवाद बनाए हुए हैं।” वाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा था, “मैं हमेशा प्रधानमंत्री मोदी का दोस्त रहूंगा। वे एक महान प्रधानमंत्री हैं। लेकिन मुझे इस वक्त उनकी कुछ नीतियां पसंद नहीं हैं। हालांकि भारत और अमेरिका के बीच बहुत विशेष रिश्ते हैं। चिंता की कोई बात नहीं है, कभी-कभी ऐसे पल आ जाते हैं।” प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर लिखा, “मैं राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं और हमारे रिश्तों के सकारात्मक आकलन की गहराई से सराहना करता हूं और उसे पूरी तरह से प्रत्युत्तर देता हूं। भारत और अमेरिका के बीच एक बहुत ही सकारात्मक और भविष्य उन्मुख व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है।” टैरिफ पर तनातनी ये बयान ऐसे समय आए हैं जब दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर तनाव गहराया हुआ है। अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया है, जिसमें 25% पारस्परिक टैरिफ और 25% अतिरिक्त शुल्क रूस से तेल खरीदने पर शामिल है। भारत ने इसे अनुचित और अव्यवहारिक बताते हुए कहा है, “किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था की तरह भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।”  

क्या है इकनॉमिक वारफेयर? एस. जयशंकर ने आतंकी हमले से जोड़ा गंभीर रिश्ता

नई दिल्ली विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पहलगाम आतंकवादी हमले को इकनॉमिक वारफेयर बताया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने यह हमला इसलिए कराया ताकि कश्मीर में पर्यटन उद्योग को नुकसान पहुंचाया जा सके, जिसके चलते वहां आर्थिक समृद्धि आ रही थी और हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि हम किसी भी देश की न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि कश्मीर में आर्थिक संपन्ना का एक ही माध्यम लेगों के पास है और वह है पर्यटन। ऐसे में पाकिस्तानी आतंकियों ने उसे ही टारगेट किया। इसके अलावा धर्म पूछकर लोगों को इसलिए मार डाला गया ताकि सांप्रदायिक सौहार्द देश का बिगड़ जाए। इकनॉमिक वारफेयर युद्ध की ऐसी पद्धति है, जिसमें प्रतिद्वंद्वी देश की अर्थव्यवस्था को टारगेट करने की कोशिश होती है। आर्थिक युद्ध का अर्थ है- किसी देश या समूह को आर्थिक रूप से कमजोर करने, अस्थिर करने या दंडित करने के लिए आर्थिक साधनों का प्रयोग करना। यह एक गैर-सैन्य रणनीति है, जिसमें दुश्मन पर बंदूक या बम से हमला नहीं किया जाता, बल्कि उसकी आर्थिक प्रणाली को निशाना बनाकर कमजोर किया जाता है। ऐसी रणनीति अकसर अमेरिका अपनाता रहा है, जैसे रूस, ईरान, क्यूब, वेनेजुएला जैसे देशों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाना। इसके अलावा ऐसे हमलों को भी इस श्रेणी में शामिल किया जाता है, जिससे आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हों और लोगों में डर का संचार हो। क्या हैं इकनॉमिक वारफेयर के पैंतरे किसी देश के व्यापार, निवेश या वित्तीय लेन-देन पर रोक लगाना इसका सबसे प्रमुख तरीका है। जैसे रूस पर अमेरिका और यूरोप द्वारा लगाए गए प्रतिबंध। इसके अलावा किसी देश से आयात-निर्यात पर पूर्ण या आंशिक रोक। यही नहीं अपनी मुद्रा को जानबूझकर सस्ता करके दूसरे देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना भी इसमें शामिल है। किसी देश या उसके नेताओं की विदेशी संपत्तियों को फ्रीज करना भी इस रणनीति में शामिल है। कई बार बैंक, शेयर बाजार और फाइनेंशियल नेटवर्क पर हमला करने की कोशिश भी इसमें शामिल है। इसके अलावा सप्लाई चेन तोड़ने की कोशिश भी इसमें शामिल है, जैसे- तेल, गैस या अन्य महत्वपूर्ण संसाधनों की आपूर्ति को बाधित करना। एक और चीज इसमें अहम है, जैसे आर्थिक प्रोपेगेंडा। यानी किसी देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर बताना या फिर शेयर बाजार को लेकर अफवाह फैलाना ताकि निवेशकों में डर का संचार हो। लगभग ऐसी ही रणनीति पाकिस्तान ने भी पहलगाम में अपनाई, जो एक टूरिस्ट हॉटस्पॉट है। ऐसे में पहलगाम में ही हमला करके पर्यटकों में डर का संचार करने की कोशिश की गई।