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आस्था का महासागर: सबरीमाला मंदिर में दर्शन करने पहुंचे 30 लाख से अधिक तीर्थयात्री

नई दिल्ली  सबरीमाला मंदिर में इस वर्ष दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 30 लाख को पार कर गई है जो पिछले वर्ष की तुलना में दो लाख से अधिक की कमी को दर्शाती है। आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। 25 दिसंबर तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अब तक 30,01,532 श्रद्धालु मंदिर में दर्शन कर चुके हैं। पिछले वर्ष (2024) 30 लाख का आंकड़ा 23 दिसंबर तक ही पार हो गया था जब 30,78,044 श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन किए थे। पिछले साल 25 दिसंबर तक कुल 32,49,756 श्रद्धालु मंदिर में दर्शन कर चुके थे। वहीं 2023 में इस तारीख तक यह संख्या करीब 28.42 लाख थी।  हालांकि वर्ष की शुरुआत से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली लेकिन उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने 'वर्चुअल क्यू' (ऑनलाइन दर्शन) और मंदिर परिसर में जाकर दर्शन के लिए बुकिंग (स्पॉट बुकिंग) के लिए नियम कड़े कर दिए। एक दिन में सबसे अधिक दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 19 नवंबर को दर्ज की गई थी जब मंदिर खुलने के चार दिन बाद 1,02,299 भक्तों ने दर्शन किये थे। सबसे कम भीड़ 12 दिसंबर को रही,जब 49,738 श्रद्धालु पहुंचे।  अधिकारियों के अनुसार छुट्टी होने के बावजूद रविवार के दिन पिछले वर्षों की तुलना में कम भीड़ रही। 21 दिसंबर, जो रविवार था, उस दिन 61,576 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। अन्य दिनों में रोजाना श्रद्धालुओं की संख्या 80,000 से अधिक रही। मंडला पूजा के मद्देनजर शुक्रवार और शनिवार (26 और 27 दिसंबर) को वर्चुअल क्यू के जरिए दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या घटाकर क्रमशः 30,000 और 35,000 कर दी गई है जबकि स्पॉट बुकिंग को 2,000 तक सीमित किया गया है।  ‘थंगा अंकी' जुलूस के चलते शुक्रवार सुबह से पंपा से श्रद्धालुओं की आवाजाही भी नियंत्रित कर दी गई। सुबह नौ बजे तक 22,039 श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। अधिकारियों ने बताया कि मंडला पूजा शनिवार को होगी। इस अवसर पर भगवान का स्वर्ण जड़ित वस्त्रों और आभूषणों से श्रृंगार किया जाएगा। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 10.10 बजे से 11.30 बजे के बीच है। सबरीमाला मंदिर शनिवार रात 11 बजे ‘हरिवरसनम' (भक्ति गीत) के बाद बंद हो जाएगा और 30 दिसंबर को मकरविलक्कु उत्सव के लिए फिर से खोला जाएगा। 

क्या है इरुमुदिकट्टू? सबरीमाला यात्रा की सबसे पवित्र परंपरा को जानें

केरल के सबरीमाला में वार्षिक मकरविलक्कु तीर्थयात्रा चल रही है. इस दौरान सबरीमाला मंदिर में यात्रियों का सैलाब उमड़ रहा है. मंदिर में 18 पवित्र सीढ़ियां चढ़कर भगवान अयप्पा के भक्त इरुमुदिकट्टू लेकर दर्शन कर रहे हैं. ये एक प्रकार का एक विशेष प्रकार का थैला होता है, जो भक्त सिर पर रखकर ले जाते हैं. दरअसल, भक्त 41 दिनों तक कठोर उपवास रखते हैं, मालाएं पहनते हैं, काले कपड़े पहनते हैं. ऐसा माना जाता है कि अगर 41 दिनों का यह व्रत पूरी श्रद्धा और निष्ठा से रखा जाए, तो जीवन में बड़े बदलाव आ सकते हैं. आइए आपको बताते हैं कि इरुमुदिकट्टू क्या है और इसका क्या महत्व है? सबरीमाला में इरुमुदिकट्टू का क्या महत्व है? सबरीमाला में भगवान अयप्पा से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक इरुमुदिकट्टू है. सबरीमाला में 18 पवित्र सीढ़ियां चलकर भगवान अयप्पा के दर्शन करने वाला भक्त अपने सिर पर इरुमुदिकट्टू पहनता है. वास्तव में, इरुमुदिकट्टू सिर्फ एक थैला नहीं है. यह सबरीमाला में भगवान अयप्पा के लिए किए जाने वाले महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक है. इसे भक्त के 41 दिनों के व्रत, समर्पण और आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक माना जाता है. इरुमुदिकट्टू में क्या होता है? इरुमुदिकट्टू के एक भाग में भगवान को अर्पित किया जाने वाला प्रसाद होता है. इसमें मुख्यतः सूखे चावल आदि होते हैं जिन्हें भगवान को अर्पित किया जाता है. इसके अतिरिक्त, इसमें घी से भरा एक नारियल रखा जाता है. यह नारियल भक्त के पूर्ण समर्पण और मुक्ति का प्रतीक है. इसके अतिरिक्त, इस भाग में अन्य पूजा सामग्री जैसे कपूर, रेशम, अवल, फूल, पान आदि भी शामिल होते हैं. ये सभी भगवान को अर्पित की जाने वाली सामग्री है. पिनमुड़ी का उपयोग भक्त की यात्रा के दौरान की जाने वाली आवश्यकताओं के लिए किया जाता है. वहीं, कुछ जगहों पर नादुमुदी नाम की एक प्रथा भी है. इसमें चढ़ावे के रूप में दिए जाने वाले सिक्के, चढ़ावे की रसीदें आदि को बीच में एक छोटी सी पोटली में बांधकर कुछ जगहों पर रख दिया जाता है. यह प्रथा कुछ ही जगहों पर प्रचलित है.