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संजय निषाद बोले: तुष्टिकरण करते रहे तो जिस तरह बंगाल में दीदी साफ हुईं, उसी तरह सपा साफ हो जाएगी

मुगलों द्वारा लाए गए धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता, अखिलेश पर संजय निषाद का तीखा हमला संजय निषाद बोले: तुष्टिकरण करते रहे तो जिस तरह बंगाल में दीदी साफ हुईं, उसी तरह सपा साफ हो जाएगी फूलन देवी ने आरक्षण मांगा था तो पार्टी से बाहर कर दी गई थीं, वह मार भी दी गईं: संजय निषाद लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने आरक्षण के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा है। निषाद ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव पिछड़ों का हक मारकर मुगलों द्वारा लाए गए धर्म को आरक्षण देना चाहते हैं। निषाद ने जोर देते हुए कहा कि संविधान सभा ने भी ऐसा करने से मना कर दिया था। संजय निषाद ने कहा कि अखिलेश यादव की प्रेस कांफ्रेंस ने पीडीए के एजेंडे की पोल खोल दी है। पिछड़ों के अधिकारों पर डांका डालने का काम किया गया है। उन्होंने कहा, 'जब संविधान सभा की बैठक हुई और जब संविधान सभा में आरक्षण की बात आई, उस समय धर्म के आधार पर इसको देना मना कर दिया था क्योंकि जो भारतीय धर्म हैं भारतीय सभ्यता है, उस पर मुगलों ने आक्रमण किया। भारत के ऊपर अंग्रेजों ने आक्रमण किया। तो मुगलों के द्वारा लाए गए धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। भीम राव अंबेडकर ने भी इसका विरोध किया था। ' सपा और इंडी गठबंधन पर साधा निशाना संजय निषाद ने सपा और इंडी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा, ‘इन लोगों ने जस्टिस रंगनाथ मिश्र कमेटी बनाकर ओबीसी आरक्षण में से हिस्सा काटकर मुसलमानों को आरक्षण देने का प्रयास किया था। आंध्र प्रदेश में इनकी दोस्त कांग्रेस ने मुसलमानों को ओबीसी आरक्षण दिया। कर्नाटक में मुस्लिम जातियों को ओबीसी में शामिल कर पिछड़ों के अधिकारों को कमजोर किया।’ पश्चिम बंगाल का जिक्र पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए निषाद ने कहा,  ‘पश्चिम बंगाल में 118 मुस्लिम जातियों को ओबीसी में शामिल करके वर्षों तक पिछड़ों के हक पर डकैती डाली। कोलकाता हाई कोर्ट ने इस असंवैधानिक कदम को रद्द किया। जिस तरीके से वहां पिछड़ों के हक पर डकैती डाली गई। उनका आरक्षण मुसलमानों को दिया गया। वहां के लोग एक हुए और वहां की सरकार को हटा दिया।’ निषाद ने कहा ने आगे कहा, ‘यहां पर (यूपी में) भी इंडी गठबंधन मुसलमानों की आवाज तो उठाता है, लेकिन देश को आजाद कराने वाली पिछड़ी और उजड़ी जातियों की आवाज नहीं उठाता। समाजवादी पार्टी का अगर यही रवैया रहा तो जिस तरीके से बंगाल में दीदी साफ हुईं, उसी तरीके सपा का सूपड़ा साफ हो जाएगा।’ निषाद ने किया फूलन देवी का जिक्र संजय निषाद ने यह भी कहा कि अन्य जातियों के नेता यह भी सोचें कि उन्हें सपा के समय में क्या मिला? फूलन देवी ने जैसे ही आरक्षण की बात की, किसानों के हक की बात की, उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया था। बाद में वह मारी भी गईं। आप इस अन्याय को समझ सकते हैं। ओबीसी की किसी भी जाति के साथ अन्याय नहीं होगा, ये हमारे एनडीए का संकल्प है। ****

आरक्षण पर दोगलापन? योगी के मंत्री संजय निषाद का UGC पर हमला

लखनऊ यूपी की योगी सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) से जुड़े विरोध प्रदर्शन पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देश में कोई भी कानून अचानक नहीं आ जाता है। इसके पीछे एक लंबी और संवैधानिक प्रक्रिया होती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जनरल कैटेगरी को 10 प्रतिशत आरक्षण मिला तब विरोध नहीं हुआ। मंत्री संजय निषाद ने कहा कि किसी भी कानून के निर्माण से पहले संबंधित आयोगों का गठन किया जाता है, उनकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार होती है और विशेषज्ञों की राय ली जाती है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और संवैधानिक प्रावधानों का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। UGC को लेकर हो रहे विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा कि हर फैसले का उद्देश्य समाज के व्यापक हित को ध्यान में रखकर किया जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब आयोग की रिपोर्ट के आधार पर जनरल कैटेगरी के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला लिया गया था, तब देश में इसका व्यापक विरोध नहीं हुआ। उस समय भी संवैधानिक प्रक्रिया के तहत निर्णय लिया गया था, जिसे सभी ने स्वीकार किया। संजय निषाद ने कहा कि सरकार की मंशा किसी वर्ग के साथ अन्याय करने की नहीं होती, बल्कि सभी को समान अवसर देने की होती है। उन्होंने अपील की कि किसी भी मुद्दे पर विरोध करने से पहले तथ्यों और प्रक्रिया को समझना जरूरी है। मंत्री ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन संवाद और संवैधानिक मर्यादाओं के दायरे में रहकर ही अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार द्वारा लिए गए फैसले देश के शिक्षा तंत्र और समाज के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में होंगे।