samacharsecretary.com

बीजेपी विधायक संजय पाठक के खिलाफ जज फोन मामले में कार्रवाई की मांग, 26 मार्च को होगी HC में सुनवाई

जबलपुर अवैध उत्खनन मामले में कटनी जिले भाजपा विधायक संजय पाठक की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन्होंने हाईकोर्ट जज को फोन लगाया था। अब इस मामले में कार्रवाई को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई गई है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद अगली सुनवाई 26 मार्च को निर्धारित की है। जज ने सुनवाई से कर दिया था इनकार दरअसल, विधायक संजय पाठक से संबंधित कंपनी के अवैध उत्खनन में मामले में हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा ने 1 सितंबर 2025 को सुनवाई से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट जस्टिस ने अपने आदेश में कहा था कि विधायक ने उनसे फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया। जिसके कारण वह सुनवाई से खुद को अगल कर रहे है। कटनी निवासी ने दायर की है याचिका वहीं, कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि विधायक संजय पाठक ने हाईकोर्ट के जज से संपर्क करने की कोशिश की थी, जो न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास माना जा सकता है। पाठक परिवार से जुड़ी खदानों के मामले की सुनवाई जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत में निर्धारित थी। इसी दौरान 1 सितंबर 2025 को जस्टिस मिश्रा ने स्वयं इस बात का खुलासा किया था कि विधायक ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की थी। केस से खुद को कर लिया अलग घटना के सामने आने के बाद जस्टिस विशाल मिश्रा ने निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को प्रशासनिक स्तर पर चीफ जस्टिस के समक्ष भेजने का निर्देश भी दिया था। यह कदम न्यायपालिका की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इसी कारण उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर विधायक संजय पाठक के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की है। याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव और पुनीत श्रोती उपस्थित रहे।

खदान विवाद में संजय पाठक की मुश्किलें बढ़ीं, 443 करोड़ की वसूली मामले में बड़ी कार्रवाई तय

जबलपुर  कटनी के विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक से जुड़ी खनन कंपनियों के खिलाफ खनिज विभाग ने 443 करोड़ रुपये की रिकवरी को लेकर सख्त रुख अपना लिया है। जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील में संचालित तीन लौह अयस्क खदानों में निर्धारित सीमा से अधिक खनन के मामले में विभाग द्वारा जारी दो नोटिस और अंतिम चेतावनी के बावजूद कंपनियों ने न तो कोई जवाब दिया है और न ही राशि जमा की है। खनिज विभाग ने 4 दिसंबर को अंतिम नोटिस जारी किया था, जिसकी समय-सीमा 23 दिसंबर की शाम को समाप्त हो गई। विभागीय सूत्रों के अनुसार अब रिकवरी आरोपित कर दी गई है और वसूली के लिए अधिकृत कार्रवाई शुरू कर दी गई है। तय राशि जमा नहीं होने पर नियमों के तहत खदान या उतनी ही कीमत की संपत्ति को सीज किया जा सकता है। यह मामला सिहोरा क्षेत्र की निर्मला मिनरल, आनंद मिनरल और पैसिफिक मिनरल नामक तीन लौह अयस्क खदानों से जुड़ा है। भले ही विधायक संजय पाठक इनके प्रत्यक्ष मालिक न हों, लेकिन विभागीय रिकॉर्ड में इन पर उनका आधिपत्य दर्ज है। जांच में अनुमति से अधिक खनन की पुष्टि हुई है, जिसके आधार पर 443 करोड़ रुपये की पेनल्टी तय की गई है। अब खनिज विभाग डिमांड नोटिस जारी करेगा। साथ ही, जियोमाइन बेनिफिकेशन प्लांट सहित अन्य खदानों को लेकर केंद्रीय पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की जांच में भी कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।  अधिकारियों का कहना है कि नोटिस का जवाब मिलने के बाद ही अगला कदम तय किया जाएगा, लेकिन यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक उत्तर नहीं मिला तो कुर्की की कार्रवाई शुरू की जाएगी। माइनिंग विभाग जल्द ही RRC जारी करने की भी तैयारी में है। प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर पाई गई अनियमितताओं को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। इस कार्रवाई ने खनन कारोबार से जुड़े कई व्यापारियों में भी चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि पहली बार सत्तारूढ़ दल के किसी विधायक की कंपनियों पर इतना बड़ा दंड लगाया गया है। विधायक संजय पाठक ने अब तक इस मामले पर चुप्पी साध रखी है, जिससे अटकलें और बढ़ गई हैं। सरकार द्वारा अपने ही पार्टी विधायक के खिलाफ इतनी कड़ी कार्रवाई करने से यह मामला और भी सुर्खियों में है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन आगे की कार्रवाई कितनी तेजी और निष्पक्षता से करता है। यह मामला न सिर्फ राजनीतिक वाद-विवाद का केंद्र बना हुआ है बल्कि प्रदेश में खनन गतिविधियों की निगरानी और नियमन पर भी नए सवाल खड़े कर रहा है।

संजय पाठक पर राष्ट्रीय जनजाति आयोग करेगा जांच, कलेक्टर से आदिवासी जमीन खरीदी की रिपोर्ट की मांग

भोपाल  विधायक संजय पाठक से जुड़ा आदिवासी भूमि खरीद का विवाद गहराता जा रहा है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने उनके विरुद्ध दर्ज शिकायत को गंभीर मानते हुए मध्यप्रदेश के पांच जिलों कटनी, जबलपुर, उमरिया, डिंडौरी और सिवनी के कलेक्टरों को जांच के आदेश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी कलेक्टर एक माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करें, अन्यथा समन जारी कर व्यक्तिगत रूप से तलब किया जाएगा। आयोग ने यह भी चेताया है कि समय सीमा के भीतर जवाब नहीं मिलने की स्थिति में वह संविधान के अनुच्छेद 338(क) के तहत सिविल कोर्ट जैसी शक्तियों का उपयोग करेगा।  कर्मचारियों के नाम पर खरीदी गई जमीन होने का आरोप आयोग को मिली शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संजय पाठक ने अपने कुछ अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों के नाम पर आदिवासी क्षेत्रों में जमीन खरीदी है। आयोग ने 5 दिसंबर को सभी संबंधित जिलों के कलेक्टरों को पत्र भेजते हुए इस पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। शिकायतकर्ता दिव्यांशु मिश्रा का आरोप है कि डिंडौरी, कटनी, जबलपुर, उमरिया और सिवनी जिलों में बैगा जनजाति के लोगों के नाम पर बड़े पैमाने पर बेनामी भूमि खरीदी गई है, जिसकी अनुमानित कीमत अरबों रुपये बताई जा रही है। NCST ने लिया संज्ञान इस पर संज्ञान में लेते हुए आयोग ने इन जिलों के कलेक्टरों से कहा है कि सभी कलेक्टर पत्र मिलने के बाद एक माह के अंदर प्रकरण में तथ्य और टिप्पणियां राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को व्यक्तिगत रूप से या अन्य संचार माध्यमों से उपलब्ध कराएंगे। आयोग के निर्देश पर डिंडोरी कलेक्टर ने जांच कर जानकारी भेज दी है, लेकिन चार कलेक्टरों जबलपुर, सिवनी, कटनी और उमरिया के कलेक्टर ने जानकारी नहीं दी है। इस पर आयोग ने उन्हें अंतिम चेतावनी दी है। शिकायत के बाद आयोग की सख्ती कटनी निवासी दिव्यांशु मिश्रा अंशु द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में दावा किया गया कि विजय राघवगढ़ से विधायक संजय पाठक ने अनुसूचित जनजाति के अपने कर्मचारियों के नाम पर जमीन खरीदी। आयोग ने 5 दिसंबर को कटनी, जबलपुर, उमरिया, डिंडौरी और सिवनी के कलेक्टरों को पत्र भेजकर कहा कि वे बैगा जनजाति के साथ धोखाधड़ी कर की गई भूमि खरीद के पूरे मामले की जांच कर तथ्य आयोग को उपलब्ध कराएं। आयोग ने पत्र में उल्लेख किया कि अरबों रुपए की बेनामी खरीद इन जिलों में बताई जा रही है, इसलिए प्रत्येक कलेक्टर एक माह के भीतर पूरे प्रकरण पर अपनी टिप्पणियां और दस्तावेज व्यक्तिगत रूप से या आवश्यक संचार माध्यमों से आयोग को भेजें। कलेक्टरों को आयोग की चेतावनी आयोग के अनुसार पांच में से सिर्फ डिंडौरी कलेक्टर ने अपनी रिपोर्ट भेजी है, जबकि सिवनी, जबलपुर, कटनी और उमरिया कलेक्टरों ने अब तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। इस पर आयोग ने चारों को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समय पर रिपोर्ट नहीं आई तो संविधान के अनुच्छेद 338 क के तहत उपलब्ध सिविल कोर्ट की शक्तियों का उपयोग कर उन्हें या उनके प्रतिनिधियों को आयोग के समक्ष बुलाया जाएगा। आयोग ने माना कि यह मामला जनजातीय अधिकारों और भूमि सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए इसे टालना स्वीकार्य नहीं होगा। 795 एकड़ जमीन पर खनन की तैयारी का दावा शिकायत में यह भी कहा गया है कि कटनी जिले के चार आदिवासी कर्मचारियों के नाम पर डिंडौरी जिले में करीब 795 एकड़ जमीन खरीदी गई है। यह जमीन बजाग तहसील के पिपरिया माल, बघरेली सानी, सरई टोला और हर्रा टोला क्षेत्रों में स्थित है। जमीन खरीद वर्ष 2025 के बाद से होना बताया गया है। शिकायत के अनुसार यह भूमि रघुराज सिंह गौड़, नत्थू कोल, राकेश सिंह गौड़ और प्रहलाद कोल के नाम दर्ज है तथा यहां बाक्साइट खनन की तैयारी की जा रही है। उन्होंने सभी संबंधित खातों की वित्तीय जांच की भी मांग की है। कलेक्टरों को आयोग ने अंतिम चेतावनी जारी की  शिकायतकर्ता ने बताया कि 15 सितंबर को आयोग को शिकायत सौंपी गई थी। इसके बाद आयोग के निर्देश पर केवल डिंडौरी कलेक्टर ने जांच कर रिपोर्ट भेजी है। जबकि कटनी, जबलपुर, उमरिया और सिवनी के कलेक्टरों से अब तक जानकारी नहीं मिली है। इस पर आयोग ने चारों जिलों को अंतिम चेतावनी जारी कर दी है। विधायक अलावा ने सीएम सचिवालय को दी शिकायत  इस प्रकरण में कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा ने भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखित शिकायत दी है। उनके पत्र के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। इसके क्रम में जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त ने डिंडौरी कलेक्टर को पत्र भेजकर उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने को कहा है। अपर आयुक्त द्वारा जारी पत्र में उल्लेख है कि बजाग तहसील के संरक्षित बैगा बहुल क्षेत्र में करीब 1200 एकड़ आदिवासी भूमि के कथित बेनामी सौदों की विस्तृत जांच आवश्यक है।  बैगा आदिवासियों की 795 एकड़ जमीन खरीदी गई शिकायतकर्ता के अनुसार बैगा आदिवासियों को धोखे में रखकर लगभग 795 एकड़ जमीन खरीदी गई और इस भूमि का उपयोग आगे चलकर बॉक्साइट खदानों के लिए किया जाना प्रस्तावित है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन कर्मचारियों के खातों में हुए लेन-देन और वित्तीय गतिविधियों की भी जांच होनी चाहिए, क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में भूमि खरीद उनकी वास्तविक आर्थिक क्षमता से मेल नहीं खाती। यह संदेह पैदा करता है कि जमीन वास्तव में बेनामी तरीके से खरीदी गई हो सकती है। आयोग को सितंबर में की गई इस शिकायत पर केवल डिंडौरी कलेक्टर ने ही अपनी रिपोर्ट भेजी है, जबकि सिवनी, जबलपुर, कटनी और उमरिया के कलेक्टरों ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। आयोग ने इसे अत्यंत गंभीर माना है और चारों जिलों के कलेक्टरों को अंतिम चेतावनी जारी की है। आयोग की इस कड़ी प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि आदिवासी जमीन से संबंधित मामलों में लापरवाही को वह किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं करेगा, खासकर तब जब मामला बैगा जैसे विशेष पिछड़ी जनजाति की जमीन से जुड़ा हो, जिनकी सुरक्षा के लिए कानून में विशेष प्रावधान मौजूद हैं। इस प्रकरण को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज है। कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा पहले ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इस … Read more

संजय पाठक नए विवाद में घिरे, जमीन मामले के चार आदिवासी कर्मचारी लापता

कटनी   मध्य प्रदेश के कटनी जिले की विजयराघवगढ़ सीट से बीजेपी विधायक संजय पाठक एक बार फिर विवादों में हैं। उन पर आदिवासियों के नाम पर जमीन खरीदने का गंभीर आरोप लगा है। जानकारी के अनुसार, कटनी, डिंडोरी, उमरिया, जबलपुर और सिवनी जिलों में आदिवासियों के नाम पर 1111 एकड़ जमीन खरीदी गई, लेकिन ये जमीनें कथित रूप से पाठक के चार आदिवासी कर्मचारियों के नाम पर दर्ज की गईं। अब इस मामले में नया मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता दिव्यांशु मिश्रा ‘अंशु’ ने दावा किया कि चारों आदिवासी कर्मचारी लापता जैसी स्थिति में हैं। आयोग की जांच शुरू शिकायत के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रशासन ने चारों आदिवासियों से पूछताछ के लिए नोटिस भेजे, लेकिन कोई भी हाजिर नहीं हुआ। जानकारी के मुताबिक, नत्थू कोल, प्रहलाद कोल, राकेश सिंह गौड़ और रघुराज सिंह गौड़ के नाम नोटिस जारी किए गए थे। 14 अक्टूबर को नोटिस जारी हुआ और 16 अक्टूबर को पेश होने को कहा गया था, लेकिन चारों ही नहीं पहुंचे। परिजनों ने नोटिस लेने से किया इनकार जब प्रशासन की टीम प्रहलाद कोल के घर पहुंची तो उसकी बेटी ने बताया कि पिता बाहर गए हैं और मोबाइल बंद है। कुछ परिजनों ने नोटिस लेने से भी इनकार कर दिया। प्रशासन अब चारों के आमदनी के स्रोत, पहचान और बैंक डिटेल्स की जांच कर रहा है।

‘नायसा’ के पीछे कौन? संजय पाठक ने कर्मचारी के नाम पर बनाई कंपनी, खरीदी करोड़ों की सहारा ज़मीन

जबलपुर  कटनी जिले से विधायक संजय पाठक ने जमीनों की खरीद फरोख्त के लिए न सिर्फ आदिवासियों की मदद ली, बल्कि अपने कर्मचारियों के नाम पर भी कंपनियां बनाईं। आदिवासियों के नाम पर करीब 1100 एकड़ जमीन खरीदने के आरोप से घिरे संजय पाठक सायना ग्रुप के मालिक हैं, इसलिए उन्होंने मिलते-जुलते नाम वाली नायसा देव बिल्ड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बना ली। इस कंपनी का कर्ताधर्ता अपने ही कर्मचारी सचिन तिवारी को बनाया। इस कंपनी से सहारा सिटी की जमीन खरीदी, वो भी औने-पौने दाम पर। सूत्रों की माने सचिन तिवारी के पास विधायक संजय पाठक के लिए जमीन खरीदने-बेचने से लेकर जनसंपर्क आदि कार्यों की जिम्मेदारी है। जबलपुर के तेवर स्थित सहारा सिटी की जमीन का सौदा करने और उसका भुगतान करने की पूरी जिम्मेदारी सचिन और उसके सहयोगियों ने संभाली। दोनों ही संजय पाठक से जुड़ी फर्म सूत्र बताते हैं कि कटनी और जबलपुर की दो फर्मों को सहारा सिटी की करीब 110 एकड़ जमीन खरीदी का काम दिया गया। ये दोनों ही संजय पाठक से जुड़ी फर्म हैं। इस जमीन को कमर्शियल के बजाय कृषि भूमि बताकर पंजीयन शुल्क की चोरी की गई। इतना ही नहीं, सूत्रों का कहना है कि यह जमीन 50 करोड़ में बेची गई, जबकि बाजार मूल्य 200 करोड़ था। इधर ग्रुप से जुड़े लोगों का कहना है कि यह मूल्य कलेक्ट्रेट गाइडलाइन के मुताबिक तय किया गया था। वहीं 2014 में सुप्रीम कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों में इस जमीन की कीमत 125 करोड़ रुपये तक दिखाई गई थी। माइनिंग कान्क्लेव में निवेश के बाद जांच ठंडी दरअसल, मेसर्स नायसा देव बिल्ड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने सहारा कंपनी से जमीने खरीदीं। 2022 में हुए इस सौदे के दौरान नायसा देव बिल्ड के तत्कालीन डायरेक्टर्स और प्राधिकृत अधिकारी को ईओडब्ल्यू ने नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाया भी था। जानकार बताते हैं कि रजिस्ट्री के दस्तावेजों की जांच में तीन पदाधिकारियों के नाम थे। जांच अधिकारियों ने यह पता लगाया कि नायसा कंपनी ने सहारा से खरीदी गई जमीन के एवज में कितनी रकम और किस माध्यम से सहारा को दी। इसके लिए ईओडब्ल्यू ने इनके बैंक खातें भी खंगाले, जिनसे जमीन के पैसों का भुगतान किया गया। हालांकि कंपनी में माइनिंग कान्क्लेव में सायना ग्रुप के बड़े निवेश के बाद मामला ठंडा करने में कई जुट गए, जिससे ईओडब्ल्यू की जांच ठंडी पड़ गई। खनिज से कलेक्टर के बीच घूम रही फाइल खनिज विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा बनाई गई जांच टीम ने जब सिहोरा, घुघरी कला समेत कई जगहों की जांच की तो वे भी हैरान हो गए। विभागीय सूत्र बताते हैं कि जांच के दौरान यह देखा गया कि जिस जमीन के उत्खनन का लाइसेंस लिया गया है, उससे लगी हजारों एकड़ जमीन में भी अवैध उत्खनन कर दिया गया। इस जमीन को जब गूगल और सैटेलाइट के माध्यम से खंगाला गया तो पता चला कि यह काम आज का नहीं बल्कि पिछले 10 सालों से जारी है। विभाग ने संजय पाठक की तीनों कंपनी निर्मला मिनरल, आनंद माइनिंग कार्पोरेशन और मेसर्स पेसिफिक एक्सपोर्ट के नाम पर जारी आठ खदानों को खंगाला तो करीब 443 करोड़ का अवैध उत्खनन पाया गया। इसे वसूलने का काम जबलपुर कलेक्टर को दिया है। भोपाल से फाइल आए हुए करीब 10 दिन से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन अब तक कुल जुर्माने की राशि का आकलन नहीं हो सका है।

संजय पाठक पर संकट: जज को फोन विवाद में कांग्रेस ने उठाई बर्खास्तगी की मांग

भोपाल मध्य प्रदेश के कटनी जिले की विजयराधवगढ़ विधानसभा सीट से भाजपा विधायक संजय पाठक की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अवैध खनन से जुड़े मामले में हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति को फोन कर सुर्खियों में आए विधायक पाठक पर कांग्रेस ने कदाचरण(अनुचित आचरण) का आरोप लगाते हुए विधानसभा सदस्यता से बर्खास्त करने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि प्रमाण सामने हैं। 30 दिन जेल में रहने पर सदस्यता समाप्त करने का कानून लाने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अब इस घटना का संज्ञान लेकर विधायक पाठक पर कार्रवाई करानी चाहिए। मुख्यमंत्री मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर इस प्रकरण का संज्ञान लेकर विधानसभा की सदस्यता समाप्त करें। इस मामले को लेकर पार्टी का प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही राज्यपाल मंगुभाई पटेल और विधानसभा अध्यक्ष से भेंट भी करेगा।    बता दें कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में करोड़ों के अवैध खनन से जुड़ी एक याचिका में विधायक पाठक के परिवार ने हस्तक्षेप याचिका दायर कर खुद को सुने जाने की मांग की है। अवैध खनन का आरोप विधायक पाठक के परिवार से जुड़ी कंपनियों पर है। याचिकाकर्ता ने याचिका में कहा है कि उन्होंने ही अवैध खनन की शिकायत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) से की थी, लेकिन ठोस कार्रवाई न करके मामले को निपटा दिया गया। याचिका में ईओडब्ल्यू को ही पक्षकार बनाया गया है। इसी कारण विधायक पाठक की पत्नी निर्मला पाठक व पुत्र यश पाठक तरफ से हस्तक्षेप याचिका दायर की गई है। सुनवाई न्यायमूर्ति विशाल मिश्र की एकल पीठ में चल रही थी। विधायक पाठक ने न्यायमूर्ति को फोन कर इस मामले में बातचीत करने का प्रयास किया। इसके बाद न्यायमूर्ति इस सुनवाई से हट गए। उन्होंने नोट शीट में विधायक के फोन आने का उल्लेख किया है। मप्र बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष रामेश्वर नीखरा कहते हैं कि जनप्रतिनिधि से अच्छे आचरण की अपेक्षा की जाती है। जो प्रकरण सामने आया है, वह नैतिकता की दृष्टि से सबसे बड़ा अपराध है।