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सऊदी अरब में शराब पर लगेगी नई छूट, क्राउन प्रिंस ने दिया फरमान, खुली पहली शराब की दुकान

रियाद सऊदी अरब ने चुपचाप अमीर विदेशी निवासियों को शराब खरीदने की इजाजत देना शुरू कर दिया है। यह खुलासा बीबीसी ने अपनी एक रिपोर्ट में किया है। इसमें कहा गया है कि सऊदी अरब ने 73 साल पहले शराब पर प्रतिबंध लगाया था। इसे सऊदी अरब के कानूनों में बहुत बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले सऊदी अरब ने विदेशी डिप्लोमेट्स को शराब खरीदने और उसका सेवन करने की इजाजत दी थी। हालांकि, सऊदी अरब में आज भी आम लोगों और मध्यम या गरीब तबके को शराब खरीदने या उसका सेवन करने की इजाजत नहीं है। सऊदी अरब में शराब की बिक्री पर कब लगा था प्रतिबंध सऊदी अरब इस्लाम के दो सबसे पवित्र स्थलों का घर है। उसने 1952 में शराब की बिक्री पर बैन लगा दिया था। लेकिन अपनी छवि को बदलने के बड़े प्रयास के तहत, सऊदी अरब ने हाल के सालों में बड़े सामाजिक और आर्थिक सुधार किए हैं। उसने खुद को एक ज्यादा उदार और निवेश-अनुकूल देश के रूप में पेश करने का प्रयास भी किया है। ये बदलाव क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में आए हैं, जो सऊदी अरब के प्रधानमंत्री हैं, लेकिन उन्हें किंगडम के असली शासक माना जाता है। सऊदी अरब में हो रहे बदलावों को जानें क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में सऊदी अरब में सिनेमाघर फिर से खोले गए हैं, बड़े म्यूजिक फेस्टिवल और फैशन शो आयोजित किए हैं, महिलाओं के ड्राइविंग पर बैन हटाया है, और धार्मिक पुलिस की शक्तियों को कम किया गया है। हालांकि शराब की बिक्री से प्रतिबंध हटाने का फैसला सबसे बड़ा और साहसिक कदम माना जा रहा है। सऊदी अरब में शराब की बिक्री शुरू सऊदी अरब में शराब की पहली दुकान जनवरी 2024 में रियाद में खुली थी। लेकिन, शुरुआत में इसमें खरीदारी की सिर्फ गैर-मुस्लिम डिप्लोमैट्स को ही इजाजत दी गई थी। अब रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 के आखिर में बिना किसी घोषणा के लागू किए गए नए नियमों के तहत, अमीर, गैर-मुस्लिम विदेशी निवासी अब बीयर, वाइन और स्पिरिट खरीदने के लिए वहां जा सकते हैं। सऊदी अरब में शराब खरीदने की योग्यता क्या है रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब में शराब खरीदने के लिए योग्यता एक विदेशी के पास या तो प्रीमियम रेजिडेंसी परमिट होना चाहिए, जिसकी कीमत सालाना 100,000 सऊदी रियाल ($27,000; £19,300) है; या यह दिखाना होगा कि वह हर महीने कम से कम 50,000 रियाल कमाता है। प्रीमियम रेजिडेंसी स्कीम के लिए अलग-अलग योग्यता मानदंड हैं, और यह आमतौर पर सीनियर विदेशी अधिकारियों, निवेशकों और खास स्किल्स वाले प्रोफेशनल्स के लिए खुली है।  

अमेरिका के दबाव के सामने साथ आए शिया और सुन्नी देश, सऊदी अरब ने ईरान को दिया बड़ा संकेत

तेहरान अमेरिका की ओर से ईरान को लगातार हमले की धमकियां दी जा रही हैं। इस बीच इस्लामिक जगत में शिया और सुन्नी मुसलमान देशों के बीच के मतभेद खत्म होते दिख रहे हैं। अमेरिकी हमले की स्थिति में सऊदी अरब ने ईरान को भरोसा दिया है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देगा। सऊदी अरब ने ईरान को बताया है कि वह अपनी जमीन का उसके खिलाफ हमलों में इस्तेमाल नहीं होने देगा। यही नहीं वह अपने एयरस्पेस से भी ऐसे किसी लड़ाकू विमान को गुजरने नहीं देगा, जिसका मकसद ईरान पर हमला करना हो। सऊदी अरब की ओर से ईरान को मिला यह भरोसा अहम माना जा रहा है।   वॉशिंगटन से कई बार ईरान को धमकी मिल चुकी है, जिसमें उसने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों पर सख्ती बरती गई तो वह सैन्य हस्तक्षेप करेगा। सऊदी अरब को अमेरिका के करीबी दोस्तों में शुमार किया जाता है। इसके अलावा शिया और सु्न्नी विवाद के कारण भी ईरान और सऊदी अरब के बीच एक दूरी रही है। ऐसे में सऊदी अरब की तरफ से ईरान को भरोसा दिया जाना बड़ा संकेत है। खासतौर पर तब जबकि पाकिस्तान समेत किसी भी इस्लामिक देश ने ईरान के साथ एकता की बात नहीं की है। पाकिस्तान अकसर इस्लामिक एकता का राग अलापता रहा है, लेकिन अमेरिकी की ओर से ईरान को मिल रही धमकियों के बाद भी वह चुप है। अमेरिका के मिडल ईस्ट में कई ठिकाने, सऊदी अरब में भी सऊदी विदेश मंत्रालय के एक सूत्र ने एएफपी को बताया, 'हमारी ओर से ईरान को स्पष्ट कर दिया गया है कि सऊदी अरब उसके खिलाफ किसी भी अलायंस का हिस्सा नहीं बनेगा। इसके अलावा हम ईरान पर हमले के लिए अपनी जमीन और एयरस्पेस का भी इस्तेमाल नहीं होने देंगे।' अमेरिका के मिडल ईस्ट में कई ठिकाने हैं। इनमें से कुछ सऊदी अरब में भी हैं। माना जाता रहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग में सऊदी अऱब किसी का पक्ष नहीं लेगा। उसका अब भी ऐसा ही स्टैंड है, लेकिन ईरान को उसने जो भरोसा दिया है, वह अहम है। बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव इस कदर है कि तेहरान ने एयरस्पेस बंद कर दिया है।  

सऊदी अरब और UAE के बीच दोस्ती में दरार, 24 घंटे के अल्टीमेटम के बाद क्यों हुए दुश्मन?

दुबई     अरब के नक्शे में दो घनिष्ठ मित्र रहे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की दोस्ती में दरार आ गया है. दरार भी ऐसी-वैसी नहीं. सऊदी अरब ने कहा है कि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा एक "रेड लाइन" है, जिसकी वह रक्षा करेगा. इससे पहले सऊदी अरब ने यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर हमला किया था. सऊदी का दावा है कि मुकल्ला पोर्ट पर उसने अटैक तब किया जब वहां UAE के जहाज वहां हथियारों की अनलोडिंग कर रहे थे. सऊदी अरब ने वीडियो फुटेज जारी कर बताया है उसने हमला तब किया जब UAE के शिप हथियार और बख्तरबंद गाड़ियां मुकल्ला पोर्ट पर उतार रहे थे. सऊदी नैरेटिव के मुताबिक ये हथियार यमन में उन गुटों को दिए जा रहे थे जो सऊदी अरब के दुश्मन हैं. सऊदी का दावा है कि ये जहाज फुजैराह बंदरगाह से रवाना हुए थे, जिनके ट्रैकिंग सिस्टम बंद थे और जिनमें भारी मात्रा में हथियार व लड़ाकू वाहन लादे गए थे. ये हथियार यमन के अलगाववादी समूह सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) के लिए थे. इस समूह को UAE का समर्थन प्राप्त करता है. सऊदी अरब ने UAE जैसे भाईचारे वाले देश द्वारा सदर्न ट्रांज़िशनल काउंसिल की सेनाओं पर सऊदी दक्षिणी सीमा के पास मिलिट्री ऑपरेशन करने का दबाव डालने का आरोप लगाया है और इसकी निंदा की है. रॉयटर्स के अनुसार सऊदी अरब ने यूएई के सैनिकों यमन छोड़ने के लिए 24 घंटे का समय दिया है.  सऊदी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, "यह सीमित कार्रवाई क्षेत्रीय शांति के लिए खतरे को रोकने के लिए की गई. हमने संपत्ति क्षति न्यूनतम रखी." हमले में कोई हताहत नहीं होने की खबर है, लेकिन मुकल्ला पोर्ट पर भारी क्षति हुई. समूह सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल ने इसे "आक्रामकता" करार देते हुए UAE से सैन्य सहायता मांगी है.  इसके जवाब में यमन की सऊदी समर्थित राष्ट्रपति परिषद ने UAE के साथ रक्षा समझौता रद्द कर दिया और 72 घंटे के लिए सीमाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है. यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के प्रमुख रशाद अल-अलीमी ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ संयुक्त रक्षा समझौते को रद्द करने का फैसला किया है.  गृह युद्ध में फंसे यमन में 3 गुट  गृह युद्ध में फंसे यमन में अभी गुट काम कर रहे हैं. इनमें हूती विद्रोही, सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल और प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल हैं. हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन हासिल है, सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल को कथित रूप से UAE का समर्थन प्राप्त है. जबकि प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल को सऊदी अरब का समर्थन प्राप्त है. ये तीनों ही गुट यमन के अलग अलग हिस्सों में कब्जा किए हुए हैं.  कैसे यमन की वजह से बिगड़ते गए सऊदी अरब और UAE के संबंध अल जजीरा ने हमद बिन खलीफा यूनिवर्सिटी में पब्लिक पॉलिसी के प्रोफेसर सुल्तान बराकत के हवाले से लिखा है कि UAE 2014 में सना में हूती विद्रोहियों के कब्जे को पलटने की कोशिश करने के लिए सऊदी अरब के नेतृत्व वाले मिलिट्री गठबंधन में शामिल हुआ था, लेकिन तब से दोनों देशों के बीच रिश्ते और ज़्यादा जटिल हो गए हैं. बराकत ने कहा, "धीरे-धीरे, UAE ने सऊदी अरब से पूछे बिना यमन में विदेश नीति और स्वतंत्र फैसले लेने की आदत डाल ली." "इसका नतीजा यह हुआ कि यमन में दक्षिणी अलगाववादियों की स्थिति कुछ हद तक मज़बूत हुई." 1990 से पहले यमन दो देशों में बंटा हुआ था,जब यमन अरब रिपब्लिक और पीपल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ यमन ने मिलकर एक संप्रभु राज्य बनाया.  एक्सपर्ट कहते हैं कि राजधानी पर हूती विद्रोहियों के कब्जे के बाद दक्षिण में अलगाववादी आंदोलन को जोर मिला, जब "कुछ लोगों को लगा कि क्योंकि दुनिया – खासकर सऊदी अरब – सना में सरकार को बहाल करने में नाकाम रही, इसलिए उनके लिए खुद ही आगे बढ़ना बेहतर होगा." सऊदी अरब और UAE 2015 से यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक्शन में सहयोगी रहे हैं. लेकिन उनके हित अलग हो गए हैं. सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमनी सरकार का समर्थन करता है और यमन को एकजुट रखना चाहता है. लेकिन UAE STC का समर्थन करता है, जो दक्षिण यमन को अलग राज्य बनाना चाहता है.

सऊदी अरब से एक माह बाद भारत पहुंचा रमेश मेघवाल का शव

बाड़मेर सऊदी अरब में काम करने गए बालोतरा जिले के युवक रमेश मेघवाल की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद शव को भारत लाने के लिए इंतजार कर रहे मृतक के परिवारजनों का इंतजार एक महीने बाद खत्म हुआ है। सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने बताया कि संसदीय क्षेत्र के बालोतरा जिले के सोहड़ा (गिड़ा) निवासी युवक स्व.रमेश कुमार मेघवाल 11 अक्तूबर 2025 को अपने दो साथियों हीराराम मेघवाल (सवाऊ मूलराज) एवं रोशन अली (जाजवा, गिड़ा) के साथ रोजगार हेतु अरब के दोहा (क़तर) गया था। दुर्भाग्यवश 17 नवंबर 2025 को उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। मृत्यु के पश्चात वहां की जटिल कानूनी प्रक्रिया, स्थानीय पुलिस कार्रवाई एवं मेडिकल पोस्टमार्टम की लंबी औपचारिकताओं के कारण पार्थिव शरीर को भारत लाने में अत्यधिक विलंब हुआ। उन्होंने बताया कि जैसे ही यह प्रकरण 18 नवंबर 2025 को मेरे संज्ञान में आया, मैंने तुरंत भारतीय दूतावास एवं विदेश मंत्रालय के संबंधित अधिकारियों से दूरभाष पर संपर्क कर आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ज्यादा देरी और जटिल प्रक्रियाओं के कारण 05 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर जी से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर भारत सरकार के खर्चे पर पार्थिव शरीर शीघ्र भारत लाने, मामले की कानूनी जांच कराने एवं पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की मांग रखी। इस पर भारत सरकार एवं भारतीय दूतावास द्वारा प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करवाने का आश्वासन दिया गया। बेनीवाल ने बताया कि बुधवार देर रात्रि रमेश कुमार मेघवाल का पार्थिव शरीर दम्माम (सऊदी अरब) एयरपोर्ट से रात्रि 12:05 बजे रवाना होकर आज प्रातः 06:45 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा गया है। उन्होंने बताया कि दोपहर 12:35 बजे दिल्ली से प्रस्थान कर 01:25 बजे जयपुर एयरपोर्ट पहुंचने की व्यवस्था की गई है। जयपुर एयरपोर्ट पर आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं के पश्चात पार्थिव शरीर परिजनों को सुपुर्द किया जाएगा। जयपुर से सोहड़ा गाँव तक सड़क मार्ग से ले जाने हेतु एम्बुलेंस की समुचित व्यवस्था करवा दी गई है। बेनीवाल ने दिवगंत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की धैर्य एवं शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करते हुए पीड़ित एवं शोक संतप्त परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाए व्यक्त की।