samacharsecretary.com

SEBI ने 12 लोगों को 5 साल के लिए बैन किया, 90 लाख का जुर्माना, यह थे उनके कृत्य

मुंबई  भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक बड़े फ्रंट-रनिंग गिरोह पर एक्‍शन लेते हुए 12 संस्थाओं को पांच साल के लिए शेयर बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है. शुक्रवार को अपने आदेश में कैपिटल मार्केट नियामक ने नोटिस प्राप्‍त करने वालों पर 90 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है और 1.07 करोड़ रुपये से ज्‍यादा के अवैध लाभ को वापस करने का भी आदेश दिया है.  यह मामला मंगल केशव फाइनेंशियल सर्विसेज एलएलपी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्‍टर परेश एन भगत नामक एक बड़े कस्‍टमर्स से संबंधित डील में एडवांस पेमेंट लेने से संबंधित है.  एमकेएफएस में कार्यरत और भगत के लिए लेन-देन संभालने वाले डीलर आशीष एस. पारेख और राजेश जोशी थे. सेबी की जांच के अनुसार, इन डीलर्स ने महत्वपूर्ण आगामी ऑर्डरों से संबंधित गैर-सार्वजनिक जानकारी शेयर करके अपने पद का दुरुपयोग किया.  कैसे पैसा बनाती थीं ये संस्‍थाएं?  यह गोपनीय जानकारी परिवार के सदस्यों और संबंधित संस्थाओं समेत कुछ लोगों के एक नेटवर्क तक लीक हो गई. सेबी ने पाया कि इस जानकारी की मदद से इन लोगों ने ट्रेडिंग की और अवैध पैसा बनाया. सेबी  ने कहा कि ये संस्‍थाएं समन्वित तरीके से ट्रेड करती थीं. आमतौर पर बॉय और सेल या सेल-सेल-बॉय पैटर्न पर काम करती थीं. वे बड़े ग्राहकों के बड़े सौदों से ठीक पहले अपने ऑर्डर देती थीं और थोक ऑर्डरों के कारण होने वाले प्राइस में उतार-चढ़ाव से लाभ कमाती थीं.  धोखाधड़ी का काम  SEBI के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश सी. वर्शनी ने अपने आदेश में क‍हा कि नोटिस प्राप्तकर्ताओं ने ऐसी जानकारी का उपयोग किया जो आम जनता के पास उपलब्ध नहीं थी, और इसका लाभ उठाकर उन्होंने अवैध रूप से पैसा कमाया. यह काम धोखाधड़ी का है. नियामक ने SEBI अधिनियम की धारा 15HA के तहत कठोर जुर्माना लगाया है.  कितना का लगा जुर्माना आशीष एस पारेख और राजेश जोशी नामक प्राथमिक डीलरों पर 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. नागेंद्र एस. दुबे और चिराग अतुल पिथड़िया पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिन्होंने बिचौलियों और डीलरों के रूप में काम करते हुए अग्रिम लेन-देन को आसान बनाया. 5 लाख रुपये प्रति व्यक्ति का जुर्माना, दीपा आशीष पारेख, कश्मीरा जोशी और इस योजना के लिए उपयोग किए गए विभिन्न हफ़ाइल परिवार खातों समेत आठ अन्य संस्थाओं पर भी लगाया गया है.  ब्‍याज के साथ पैसा वापस करने का भी आदेश प्रतिबंध और जुर्माने के अलावा, संस्थाओं को अवैध रूप से कमाए गए पैसे 1,07,61,609 रुपये की राशि, साथ ही लाभ अर्जित होने के समय से गणना किए गए 12% ब्याज को वापस करने का आदेश दिया गया है. नियामक ने इन बकाया राशियों के निपटान के लिए पिछले अंतरिम आदेश के तहत एस्क्रो खातों में पहले से ही जब्त किए गए लगभग 1.25 करोड़ रुपये के उपयोग की अनुमति दी है.  5 साल के लिए शेयर बाजार से बैन इस आदेश के तहत आशीष पारेख और नागेंद्र दुबे समेत दस संस्थाओं को 26 दिसंबर, 2022 के अंतरिम आदेश की तारीख से शुरू होकर पांच साल के लिए बाजार में कारोबार करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है. दो अन्य कश्मीरा जोशी और राजेश जोशी पर इस अंतिम आदेश की तारीख से पांच साल का नया प्रतिबंध लगाया गया है. सुषमा नागेंद्र दुबे के खिलाफ कार्यवाही उनकी मृत्यु के बाद समाप्त कर दी गई, हालांकि धन वापसी की देनदारी उनके कानूनी वारिसों को भेजा गया है. 

स्टॉक ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म पर SEBI की कार्रवाई, 7 दिन के लिए लगाया प्रतिबंध

 नई दिल्‍ली शेयर मार्केट रेग्‍युलेटरी सेबी ने स्टॉक ब्रोकर प्रभुदास लीलाधर प्राइवेट लिमिटेड पर तगड़ा एक्‍शन लिया है. सेबी-रजिस्‍टर्ड स्टॉक ब्रोकर प्रभुदास लीलाधर प्राइवेट लिमिटेड पर 15 दिसंबर, 2025 से सात दिनों के लिए नए ग्राहकों को जोड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह बैन सेबी और एक्‍सचेंजों के संयुक्‍त न‍िरीक्षण के बाद लगाया गया है, जिसमें जांच के समय क्‍लाइंट फंड मैनेज, सेटलमेंट और मार्जिन रिपोर्टिंग में कई खामियां पाई गई थीं.  यह मामला 2 नवंबर से 8 नवंबर, 2022 के बीच की गई जांच में 1 अप्रैल, 2021 से 31 अक्टूबर, 2022 तक के संचालन में पाया गया.जांच अधिकारियों ने पाया कि तीन नमूना डेट पर ब्रोकर का कैलकुलेशन किया गया, जिसमें कुल वैल्‍यू निगेटिव थी. इसमें कुल 2.70 करोड़ रुपये की कमी थी. सेबी ने कहा कि यह कमी क्लाइंट फंड के दुरुपयोग का संकेत है.  नियामक ने स्टॉक ब्रोकर को कस्‍टमर्स के अकाउंट का निपटान न करने के लिए भी फटकार लगाई. आदेश में विस्तार से बताया गया है कि 1,200 से ज्‍यादा कस्‍टमर्स के फंड सेटलमेंट अनिवार्य तिमाही या मासिक समय-सीमा के भीतर नहीं किया गया. जांच में क्‍या-क्‍या निकला?  सेबी का आदेश ग्रॉस-वैल्‍यू के निष्कर्षों से कहीं आगे जाता है. नियामक ने पाया कि ग्राहकों के चालू खातों का निपटान नहीं हुआ, 1283 नॉन-ट्रेडिंग कस्‍टमर्स (तिमाही) के कुल 36 लाख रुपये के फंड का समय पर निपटान नहीं किया गया,  677 मासिक गैर-व्यापारिक मामलों की राशि 2.85 करोड़ रुपये थी और तीन ट्रेडिंग कस्‍टमर्स तिमाही मामलों में 39 लाख रुपये शामिल थे.     इसके अलावा, ऑपरेशन संबंधी कमियों में दिन के अंत (EOD) और पीक मार्जिन की गलत रिपोर्टिंग भी शामिल थी. निरीक्षण में पाया गया कि ब्रोकर ने एक्सचेंज को ऐसे मार्जिन की जानकारी दी थी, जो वास्तव में वसूले ही नहीं गए थे और एक मामले में पीक मार्जिन का कलेक्‍शन कम हुआ था. कस्‍टमर्स पर जुर्माने का बोझ डाला साथ ही ब्रोकर को क्लियरिंग कॉर्पोरेशन द्वारा एडवांस मार्जिन की कम वसूली के लिए लगाए गए जुर्माने का बोझ अपने कस्‍टमर्स पर डालने का दोषी पाया गया. सेबी ने दोहराया कि सदस्यों को 'किसी भी परिस्थिति में' अपफ्रंट मार्जिन की कम वसूली के कारण क्लियरिंग कॉर्पोरेशन द्वारा लगाए गए जुर्माने का बोझ ग्राहकों पर डालने की अनुमति नहीं है.  ब्रोकर प्‍लेटफॉर्म ने क्‍या कहा?  प्रभुदास लीलाधर ने अपनी दलील में कहा कि कथित खामियां 'तकनीकी और प्रक्रियात्मक थीं, जानबूझकर नहीं' और कई गलतियों के लिए मैनुअल या लिपिकीय गलतियां जिम्मेदार हैं. ब्रोकर ने यह भी तर्क दिया कि वह अलग-अलग न्यायिक कार्यवाही में पहले ही 11 लाख रुपये का जुर्माना भर चुका है और नए कारोबार पर प्रतिबंध से उसकी प्रतिष्ठा और कर्मचारियों के मनोबल को स्‍थायी नुकसान होगा.  हालांकि सेबी के चीफ जनरल मैनेजर एन. मुरुगन ने कहा कि अतिरिक्त ब्रोकरेज की छोटी मात्रा और निरीक्षण के बाद सुधारात्मक कदम जैसे कारकों पर विचार किया गया, लेकिन उन्होंने ब्रोकर को दायित्व से मुक्त नहीं किया है. 

Mutual Fund निवेशकों के लिए राहत, SEBI ने कम किया एग्जिट लोड, जानें क्या बदलेगा

मुंबई  बाजार नियामक सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने  म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टर प्रोटेक्शन और फाइनेंशियल इन्क्लूजन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। बोर्ड ने मैक्सिमम परमीसिबल एग्जिट लोड को 5 फीसदी से घटाकर 3 फीसदी कर दिया है। इससे म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को फायदा मिलेगा, क्योंकि यह लोड फंड से निकासी के समय लगता है। सेबी ने इस बैठक में आइपीओ, कमोडिटी और बीमा सेक्टर से जुड़े नियमों को सरल किया है, जिससे निवेशक आकर्षित हो सके। क्या है एग्जिट लोड और किसे मिलेगा फायदा? जब आप किसी म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं और कुछ समय बाद अपने यूनिट्स बेचकर बाहर निकलते हैं, तो फंड हाउस आपसे एक शुल्क ले सकता है। इसे एग्जीट लोड कहा जाता है। एग्जीट लोड कम होने से सीधे तौर म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को फायदा मिलेगा, क्योंकि अब उन्हें कम निकासी शुल्क देना होगा। बड़ी कंपनियों के लिए हुआ यह फैसला सेबी ने कहा कि 50,000 करोड़ रुपए से एक लाख करोड़ रुपए के बीच मार्केट कैप वाली कंपनियों के लिए 25 प्रतिशत का कम से कम पब्लिक शेयर रखने के मानदंड को अब मौजूदा तीन सालों की जगह पांच सालों में हासिल किया जा सकता है। जिन कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 1 लाख करोड़ से 5 लाख करोड़ के बीच है, उनके लिए सेबी ने न्यूनतम 6,250 करोड़ या आइपीओ के बाद मार्केट कैप का 2.75 प्रतिशत तक का रखने की बात कही है। वहीं, 5 लाख करोड़ से अधिक मार्केट कैप वाली कंपनियों के लिए, सेबी ने न्यूनतम सार्वजनिक पेशकश का आकार 15,000 करोड़ रुपए या 1 प्रतिशत रखने की बात कही है। एंकर कोटे में मिलेगी प्राथमिकता एंकर कोटे में बीमा कंपनियों और पेंशन फंडों के लिए 7 फीसदी अतिरिक्त कोटा होगा। यानी बीमा, पेंशन फंड और म्यूचुअल फंडों के लिए 40 प्रतिशत कोटा होगा। इसके अलावा 250 करोड़ रुपए से अधिक के स्वीकार्य एंकर आवंटियों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी गई है। बीमा कंपनियों और पेंशन फंडों को आईपीओ एंकर बुक के लिए रिजर्व कैटेगरी में शामिल किया जाएगा। एमपीएस नियम हो जाएंगे सरल इससे जियो जैसे मेगा इश्यू के लिए पब्लिक ऑफर और एमपीएस नियम अब ज्यादा सरल हो जाएंगे। कॉर्पोरेट्स पर दबाव घटेगा कंपनियों को कम समय में बड़े पैमाने पर इक्विटी डायल्यूशन से बचने का मौका मिलेगा। ऑफर्स से रिटेल और संस्थागत निवेशकों को ज्यादा अवसर मिलेंगे।