samacharsecretary.com

मानगो नगर निगम में आजीविका सुधार की बड़ी पहल, 5 साल की सिटी लाइवलीहुड एक्शन प्लान पर काम शुरू

जमशेदपुर  मानगो नगर निगम क्षेत्र में रोजगार, स्वरोजगार और शहरी आजीविका को मजबूत बनाने के लिए अगले पांच वर्षों की व्यापक कार्ययोजना तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। इसी कड़ी में शुक्रवार को मानगो नगर निगम में महापौर सुधा गुप्ता की अध्यक्षता में सिटी लाइवलीहुड एक्शन प्लान (सीएलएपी) को लेकर फोकस ग्रुप डिस्कशन का आयोजन किया गया। इसमें शहरी गरीबों, स्वयं सहायता समूहों, पथ विक्रेताओं, युवाओं और स्थानीय कारीगरों की आजीविका को बेहतर बनाने के उपायों पर विस्तृत चर्चा हुई। नगर विकास एवं आवास विभाग, झारखंड सरकार के निर्देश पर दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत राज्य के 10 नगर निकायों में सिटी लाइवलीहुड एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। इसके लिए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कालीकट, केरल और नगर विकास एवं आवास विभाग के बीच समझौता हुआ है। एनआईटी कालीकट आगामी पांच वर्षों के लिए शहर की आजीविका संबंधी जरूरतों और संभावनाओं का अध्ययन कर कार्ययोजना तैयार करेगा। बैठक में जिला उद्योग केंद्र, जेएसएलपीएस, टाउन वेंडिंग कमेटी, एरिया लेवल फेडरेशन, स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधि तथा एनआईटी कालीकट की टीम के सदस्यों सहित विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया। सभी ने सहभागिता आधारित विकास मॉडल को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। महिलाओं के उत्पादों को बाजार से जोड़ने पर जोर महापौर सुधा गुप्ता ने बैठक में स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प और अन्य उत्पादों के लिए साप्ताहिक हाट शुरू करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने से उन्हें उचित मूल्य मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। साथ ही उत्पादों को बाजार से जोड़ने के लिए विशेष रणनीति बनाने का निर्देश भी दिया। वेंडिंग जोन और बस अड्डे से बढ़ेंगे अवसर महापौर ने शहर को व्यवस्थित बनाने के लिए वेंडिंग जोन विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़क किनारे कारोबार करने वाले पथ विक्रेताओं के लिए निर्धारित स्थान विकसित होने से ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर होगी और दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी। इसके अलावा प्रस्तावित बस अड्डे को रोजगार और स्वरोजगार का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में भी योजना तैयार की जा रही है। गरीबी उन्मूलन और कौशल विकास पर रहेगा फोकस अपर नगर आयुक्त जितेंद्र कुमार यादव ने कहा कि योजना के तहत शहरी गरीबों और कमजोर वर्गों की पहचान कर उन्हें रोजगार, स्वरोजगार, कौशल विकास तथा केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से जोड़ने का रोडमैप तैयार किया जाएगा। उप महापौर राहुल कुमार कश्यप ने कहा कि जागरूकता अभियान, सामुदायिक संस्थाओं को मजबूत बनाने, आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने तथा बाजार से जोड़ने की रणनीति पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही सर्वेक्षण के माध्यम से आजीविका से जुड़े लोगों की चुनौतियों और अवसरों का मूल्यांकन कर रोजगार सृजन, गरीबी उन्मूलन और आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देने वाली योजनाएं तैयार की जाएंगी।

स्व-सहायता समूह से जुड़कर पूनम देवी बनीं आत्मनिर्भर, अब ‘लखपति दीदी’ के रूप में बना रहीं नई पहचान लखपति दीदी’ के रूप में बना रहीं नई पहचान

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में प्रदेश की महिलाएं विभिन्न योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा की  पूनम देवी भी इसी बदलाव की एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी हैं।       पूनम देवी,जो गणेश महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं, आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में जानी जाती हैं। कभी सीमित संसाधनों के साथ घर-परिवार की जिम्मेदारियों में लगी रहने वाली पूनम देवी ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन की दिशा बदल दी।      पूनम देवी बताती हैं कि पहले वे घर-गृहस्थी के कामकाज तक ही सीमित थीं और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए मजदूरी का सहारा लेना पड़ता था। आर्थिक स्थिति सामान्य थी, जिससे परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करना कठिन हो जाता था। इसी दौरान उन्होंने गणेश महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हंन बचत, ऋण सुविधा और स्वरोजगार के विभिन्न अवसरों की जानकारी मिली। समूह की अन्य महिलाओं को मछली पालन, बकरी पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आय अर्जित करते देख उन्हें भी प्रेरणा मिली। वर्ष 2025 के मार्च माह मं  उन्होंने मुद्रा योजना के तहत 1 लाख रुपये का ऋण     प्राप्त किया। इस राशि का उपयोग उन्होंने अपने छोटे से किराना दुकान के विस्तार में किया।      किराना दुकान को व्यवस्थित और बड़ा करने के बाद उनके व्यवसाय में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने लगी। वर्तमान में उनकी दुकान से हर माह लगभग 30 से 35 हजार रुपये तक की बिक्री हो जाती है। इस आय से वे अपने परिवार का भरण-पोषण करने के साथ ही बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी अच्छी तरह से कर पा रही हैं।      पूनम देवी का कहना है कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में आत्मविश्वास और आर्थिक स्थिरता दोनों आए हैं। आज वे न केवल अपने परिवार के लिए सहारा बनी हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।      ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से जिले में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।