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‘वर्क फ्रॉम होम करें ठाकरे भाई’— BMC चुनाव संकेतों पर शिवसेना की सियासी चुटकी

मुंबई बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की 227 वार्डों की मतगणना जारी है। अब तक के रुझानों के मुताबिक, बीएमसी में भाजपा गठबंधन 118 सीटों पर आगे चल रहा है। ठाकरे भाइयों को 69 सीटें मिलती दिख रही हैं। कांग्रेस को 12 सीटों पर बढ़त हासिल है। इस बीच, शिवसेना नेता शाइना एनसी ने महायुति की महाराष्ट्र नगर निकाय चुनावों में बड़ी जीत का भरोसा जताया है। शाइना ने विपक्षी पार्टी के बार-बार लगाए जाने वाले आरोपों पर सवाल उठाया और ठाकरे से स्क्रिप्ट बदलने की सलाह दी।   शिवसेना लीडर ने कहा, 'उद्धव ठाकरे को अपना स्क्रिप्ट राइटर बदलना चाहिए और कोई नया बहाना ढूंढना चाहिए। हार-जीत का फैसला जनता करती है। संदेश यह है कि जो लोग जमीन पर काम करते हैं, उन्हें मौका मिलता है। जो घर से काम करते हैं, उन्हें घर पर ही रहना पड़ता है।' उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के राज्य में किए गए प्रयासों को रेखांकित किया और शिवसेना (यूबीटी) पर राज्य के विकास में विफल रहने का आरोप लगाया। ठाकरे भाइयों पर कसा तंज महायुति के प्रदर्शन पर शाइना एनसी ने कहा, '25 सालों में उन्होंने कुछ नहीं किया। लेकिन हमारे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दो चरणों में गड्ढों की समस्या हल की। उन्होंने 26 भ्रष्ट ठेकेदारों को जेल भेजा। पिछली सरकार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी नहीं दे पाई। हमने समय पर 7 प्रदान किए। विकास के मामले में हमने 5000 इलेक्ट्रिक बसें, 435 किमी मेट्रो कनेक्टिविटी और पर्यावरण-अनुकूल पहल की हैं।' उन्होंने आगे कहा कि BMC चुनावों के लिए गठबंधन बनाने वाले ठाकरे भाइयों को वर्क फ्रॉम होम करना चाहिए और घर पर रहना चाहिए। वर्क फ्रॉम होम का तंज शाइना एनसी ने कहा कि जो लोग सोचते हैं कि घर बैठे काम हो सकता है, उनके लिए यह समय राजनीति और प्रदर्शन का है, न कि सिर्फ सरनेम के आधार पर वोट कमाने का। हमारे नेता एकनाथ शिंदे आम लोगों के प्रति समर्पित रहे और उनके लिए काम किया, जिससे उन्होंने उनका विश्वास जीता। 2017 के चुनावों में अविभाजित शिवसेना ने कुल 227 में से 84 सीटें जीती थीं। उस समय भाजपा के साथ गठबंधन में आधे से ज्यादा 114 सीटें हासिल की थीं, जिसमें भाजपा ने 82 सीटें जीतीं। अविभाजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने 9 और कांग्रेस ने 31 सीटें जीती थीं। हाल ही में संपन्न बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव में मतदान प्रतिशत 52.94% रहा।

शिंदे के सामने भाजपा को तगड़ा नुकसान, कई पूर्व पार्षद ने थामा शिवसेना का हाथ

उल्हासनगर उल्हासनगर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। उल्हासनगर नगरपालिका के पांच पूर्व पार्षद भाजपा से इस्तीफा देकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए। शिंदे की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुए नेताओं में जम्नू पुरसवानी, प्रकाश माखीजा, महेश सुखरामानी, किशोर वनवारी और मीना सोनदे शामिल हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इन नेताओं ने अपने इस्तीफे की वजह राज्य भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की कार्यशैली को बताया। उनका कहना था कि मनमाने निर्णयों, पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और राज्य नेतृत्व व स्थानीय संगठन के बीच बढ़ती दूरी ने संगठन में असंतोष को जन्म दिया। पूर्व पार्षदों ने आरोप लगाया कि स्थानीय समस्याओं और संगठन की चिंताओं को बार-बार उठाने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला। 1984 से पार्टी में, पर शिकायतें कभी सुनी नहीं गईं- जम्नू पुरसवानी जम्नू पुरसवानी पांच बार के पार्षद और क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली सिंधी नेताओं में से एक हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों से लंबित शिकायतों को अनसुना किए जाने के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। 1984 से भाजपा में सक्रिय पुरसवानी 17 वर्षों तक नगर निगम में भाजपा के समूह नेता रहे और दो बार जिला अध्यक्ष भी बने। उन्होंने कहा कि हमने अपनी चिंताएं बार-बार वरिष्ठ नेताओं तक पहुंचाईं, लेकिन कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में हमारे पास पार्टी छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। 30 करोड़ रुपये की विकास निधि ठप होने का भी लगाया आरोप पूर्व पार्षदों ने बताया कि 2023 में विधायक को आवंटित 30 करोड़ रुपये की विकास निधि का उपयोग नहीं हो सका। उनका आरोप है कि चव्हाण के निर्णयों की वजह से यह फंड अटका रहा, जिससे कई विकास कार्य ठप पड़ गए और आम नागरिकों व कार्यकर्ताओं में नाराज़गी बढ़ी। सूत्रों के अनुसार, नेताओं ने अन्य दलों से जुड़ने पर भी विचार किया था, लेकिन व्यापक हिंदुत्व विचारधारा और NDA के ढांचे के भीतर बने रहने के लिए उन्होंने शिंदे की शिवसेना को चुना। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि आगामी नगरपालिका चुनावों के लिए वे भाजपा–शिवसेना गठबंधन की मांग कर रहे थे, जिसे स्थानीय स्तर पर काफी समर्थन भी मिल रहा था। लेकिन चव्हाण के गठबंधन से इनकार और पार्टी में नए चेहरों को अधिक महत्व देने की नीति से पुराने कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे। नगरपालिका चुनावों से पहले भाजपा की मुश्किलें बढ़ीं नगरपालिका चुनावों से पहले इन पांच अनुभवी नेताओं का भाजपा छोड़ना पार्टी के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है। उल्हासनगर में सिंधी समुदाय की राजनीति में जम्नू पुरसवानी जैसे नेताओं का प्रभाव काफी व्यापक है, ऐसे में इस घटनाक्रम का स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।  

चुनाव चिन्ह को लेकर फिर कोर्ट पहुंचेगी शिवसेना, सुप्रीम कोर्ट में 14 जुलाई को सुनवाई

नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय शिवसेना और शिवसेना (यूबीटी) के बीच 'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न आवंटन विवाद से संबंधित मामले में 14 जुलाई को विचार करेगा। न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की अंशकालीन कार्य दिवस पीठ ने बुधवार को शिवसेना (यूबीटी) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत की इस मामले में तत्काल सुनवाई की गुहार पर सहमति व्यक्त की। अधिवक्ता कामत ने गुहार लगाते हुए कहा कि महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों से संबंधित घोषणा अगले सप्ताह कभी भी की जा सकती है। पीठ के समक्ष उन्होंने कहा, “हम कुछ अंतरिम निर्देश चाहते हैं।‌ जैसे एनसीपी मामले में जारी किए गए थे। उन्हें चुनाव चिह्न दे दिया गया है।” पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने कहा कि दो चुनाव हो चुके हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष इसी तरह की याचिका का उल्लेख किया गया था, जिसे खारिज कर दिया गया। पीठ ने कहा, “भले ही चुनाव अधिसूचित हो जाएं, लेकिन यह आखिरकार उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ है।” इस पर श्री कामत ने कहा, “नहीं नहीं यह चुनाव चिह्न का विवाद है। मामला दो साल से लंबित है।” पीठ ने फिर पूछा, “अगर यह लंबित है तो कोई समस्या नहीं है, कोई अधिकार (जो मिलना चाहिए) नहीं जाएगा। इतनी जल्दी क्या है।” अधिवक्ता ने कहा कि यह अंततः लोगों की पसंद का सवाल है। शीर्ष अदालत ने इसके बाद कहा कि वह इस मामले में 14 जुलाई को विचार करेगी। गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने 17 फरवरी, 2023 को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को असली पार्टी के रूप में मान्यता दी थी। चुनाव आयोग द्वारा तैयार किए गए प्रतीक आदेश के अनुसार, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के साथ संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए इसे 'धनुष और तीर' चुनाव चिह्न आवंटित किया था।