samacharsecretary.com

सिंहस्थ 2028 के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तेज, समयसीमा पर कमिश्नर सख्त

उज्जैन उज्जैन में “सिंहस्थ महापर्व 2028” को लेकर शहर के विकास कार्यों को तेज कर दिया गया है। नगर निगम के मास्टर प्लान के तहत सड़कों के निर्माण का बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि शहर में मास्टर प्लान के अंतर्गत कुल 27 सड़क परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से वर्तमान में करीब 22 सड़कों पर निर्माण कार्य जारी है। उज्जैन में मास्टर प्लान की 27 सड़कों पर काम किया जाएगा। निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने बताया कि सभी सड़कों का निर्माण मास्टर प्लान में निर्धारित चौड़ाई के अनुसार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर हो सके। इन सभी परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 530 करोड़ रुपए है। ठेकेदारों-इंजीनियरों को सख्त टाइमलाइन कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने बताया कि होली पर्व के कारण एक-दो दिन निर्माण कार्य की गति थोड़ी प्रभावित हुई थी, लेकिन अब सभी साइटों पर फिर से पूरी टीम के साथ काम शुरू कर दिया गया है और जल्द ही पहले जैसी रफ्तार देखने को मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम ने इन परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए ठेकेदारों और इंजीनियरों को स्पष्ट चुनौती देते हुए सख्त टाइमलाइन तय की है। ये है नगर निगम का लक्ष्य साथ ही कौन-सी सड़क कितने समय में पूरी होगी, इसका डेटा भी सार्वजनिक किया गया है, ताकि काम तय समय सीमा में पूरा हो सके। नगर निगम का लक्ष्य है कि “सिंहस्थ 2028” से पहले शहर की प्रमुख सड़कों का निर्माण पूरा कर यात्रियों और श्रद्धालुओं को बेहतर यातायात सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

उज्जैन में शिप्रा नदी के 200 मीटर के भीतर अवैध निर्माण तोड़े जाएंगे, आदेश जारी

उज्जैन मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में सिंहस्थ के मद्देनजर हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शिप्रा नदी के किनारे हो रहे निर्माणों पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगल पीठ ने स्पष्ट किया कि शिप्रा के दोनों ओर 200 मीटर के भीतर किए गए सभी निर्माण अवैध हैं और इन्हें हटाया जाना चाहिए। कोर्ट ने इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए हैं। साथ ही पूर्व में जनहित याचिका में मांगी जानकारी को 21 जनवरी तक दाखिल करने को कहा। चेतावनी दी कि तय तिथि तक रिपोर्ट नहीं पेश हुई तो उज्जैन कलेक्टर व निगम आयुक्त को उपस्थित होना पड़ेगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चंदेसरा ब्रिज से राजगढ़ तक केवल शासकीय निर्माण ही होंगे। वहीं शिप्रा के 200 मीटर में किसी नए निजी निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी और नियमों के उल्लंघन में हो रहे निर्माण तुरंत हटाए जाएंगे। ये है मामला उज्जैन के सत्यनारायण सोमानी द्वारा दायर जनहित याचिका पर यह आदेश दिया गया। याचिका में आरोप है कि उज्जैन के मास्टर प्लान के विपरीत शिप्रा के 200 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण की अनुमति दी जा रही है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से इस पर जवाब मांगा था। बुधवार को सरकारी वकील की याचिका पर कोर्ट ने 21 जनवरी तक रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कब होगा सिंहस्थ उज्जैन में अगला सिंहस्थ मेला 27 मार्च से 27 मई 2028 तक आयोजित किया जाएगा, जो लगभग दो महीने तक चलेगा और इसमें शाही स्नान (Royal Bath) और पर्व स्नान (Festival Bath) होंगे, और मध्य प्रदेश सरकार इसे 'जीरो वेस्ट कुंभ' बनाने की तैयारी कर रही है, जिसमें घाटों का सुंदरीकरण और पुलों का निर्माण जैसे काम शामिल हैं। मुख्य जानकारी: अवधि: 27 मार्च से 27 मई 2028 (कुल 2 महीने) स्नान: इस दौरान 3 शाही स्नान और 7 पर्व स्नान होंगे। विशेषता: इसे देश का पहला 'जीरो वेस्ट कुंभ' बनाने का लक्ष्य है, जिसमें कई विकास कार्य किए जा रहे हैं। पिछला सिंहस्थ: पिछला सिंहस्थ 2016 में हुआ था, और अगला 2028 में है, जो हर 12 साल में आता है।

इंदौर में मंदिरों में बड़े पैमाने पर सुधार, रोज दो लाख से अधिक भक्तों की सुविधा पर खर्च करोड़ों रुपए

इंदौर   सिंहस्थ 2028 के दौरान इंदौर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शहर के प्रमुख मंदिरों में व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर और रणजीत हनुमान मंदिर में बुनियादी ढांचे और दर्शन व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जाने वाले हैं। जिला कलेक्टर शिवम वर्मा स्वयं इन विकास कार्यों की निगरानी कर रहे हैं और मंदिर समितियों के साथ मिलकर रूपरेखा तैयार कर चुके हैं। खजराना में प्रति घंटे 20,000 से अधिक भक्तों के दर्शन की व्यवस्था बनेगी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह का चांदी का द्वार दोनों तरफ से 3-3 फीट चौड़ा किया जाएगा। इसके साथ ही सभा मंडप की ऊंचाई को 3 फीट कम किया जाएगा ताकि पीछे खड़े भक्तों को भी भगवान के स्पष्ट दर्शन हो सकें। मंदिर प्रशासन के अनुसार पीछे के मंगल हॉल को स्थायी रूप से पक्का किया जा रहा है जिससे भक्त एक साथ चार लाइनों में लग सकेंगे। इन बदलावों के बाद कितनी भी भीड़ हो, भक्तों को अधिकतम आधे घंटे में दर्शन प्राप्त हो सकेंगे। मंदिर के मुख्य पुजारी पं. अशोक भट्ट ने बताया कलेक्टर और प्रबंध समिति अध्यक्ष शिवम वर्मा, प्रशासक दिलीप यादव व पुजारी, भक्तों की उपस्थिति में चर्चा कर इन बदलावों पर निर्णय हुआ है। अधिकारी मौका मुआयना करने वाले हैं, इसके बाद काम शुरू हो जाएगा। मंदिर समिति का लक्ष्य है कि पीक ऑवर्स के दौरान भी प्रति घंटे 20,000 से अधिक भक्तों को सुचारू रूप से दर्शन कराए जा सकें। रणजीत हनुमान मंदिर बनेगा भव्य रणजीत लोक शहर का ऐतिहासिक रणजीत हनुमान मंदिर अब महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस रणजीत लोक का काम इंदौर स्मार्ट सिटी को सौंपा गया है। विकास कार्यों के तहत मुख्य मंदिर परिसर को सामने की ओर 40 फीट आगे बढ़ाया जाएगा। मंदिर की छत पर विशेष कशीदाकारी (नक्काशीदार पत्थर) का काम होगा। बाउंड्रीवॉल पर 'सुंदरकांड' के प्रसंगों को चित्रों और कलाकृतियों के माध्यम से उकेरा जाएगा। मंदिर परिसर में एक अत्याधुनिक पुलिस चौकी, बेबी फीडिंग रूम (शिशु आहार कक्ष) और बुजुर्गों के लिए रैंप व विशेष जूता स्टैंड बनाए जाएंगे। पूरे परिसर में 'डायनेमिक फसाड लाइटिंग' का उपयोग होगा, जो विशेष त्योहारों पर रंग बदल सकेगी। मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास ने बताया कि रणजीत हनुमान मंदिर 135 साल से भी ज्यादा पुराना है। यहां इंदौर ही नहीं, आस-पास के जिलों से भी श्रद्धालु आते हैं। मान्यता है कि लंका विजय के बाद भगवान राम ने स्वयं हनुमान जी को रणजीत नाम दिया था।  सिंहस्थ-2028 में हर दिन 2 लाख से अधिक श्रद्धालु इंदौर आएंगे कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि सिंहस्थ के दौरान उज्जैन जाने वाले श्रद्धालु अनिवार्य रूप से इंदौर भी आते हैं, इसीलिए मंदिर प्रबंध समितियों की बैठकों में इन स्थायी व्यवस्थाओं को जल्द से जल्द पूरा करने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन का अनुमान है कि सिंहस्थ के दौरान इंदौर में प्रतिदिन 2 से 5 लाख अतिरिक्त श्रद्धालु रुकेंगे। इंदौर में हो रहे ये सभी निर्माण कार्य केवल सिंहस्थ के लिए नहीं, बल्कि स्थायी संपत्ति के रूप में किए जा रहे हैं।   

सिंहस्थ 2028 के लिए बिजली सप्लाई होगी बेहतरीन, यूपी की विशेषज्ञ टीम ने व्यवस्थाओं का किया दौरा

उज्जैन  उज्जैन जिले में सिंहस्थ 2028 के लिए अभी से तैयारियां की जा रही है। देश के सबसे बड़े आयोजन में किसी तरह की अव्यवस्था ना हो इसके लिए अभी से पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के पावर डिपार्टमेंट की एक एक्सपर्ट टीम पहुंची हुई है। यह टीम सिंहस्थ 2028 के दौरान बिजली की सुचारू सप्लाई के लिए प्लान बनाने के लिए जमीनी इंतजामों का अध्ययन करेगी और जानकारी शेयर करेगी। दरअसल, यूपी की यह एक्सपर्ट टीम शिप्रा नदी के किनारे मेला क्षेत्र में बिजली प्रबंधन से जुड़े व्यावहारिक अनुभव साझा करेगी। साथ ही आवश्यक प्लानिंग तैयार करेगी। ताकि कार्यक्रम के समय बिना अड़चन के बिजली की सप्लाई बंद नहीं हो। 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान आपको बता दें कि उज्जैन में आयोजित होने वाला सिंहस्थ हर 12 साल में होने वाला एक बड़ा धार्मिक आयोजन है। इसमें लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। यह आयोजन गर्मियों के पीक सीजन में आयोजित होगा। इसके चलते बिजली की मांग बहुत ज्यादा बढ़ने का अनुमान है। खासकर एयर कंडीशनर जैसे ज्यादा पावर वाले उपकरणों के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के कारण बिजली की खपत बढ़ जाएगी। अधिकारियों का अनुमान है कि उज्जैन शहर और मेला क्षेत्र में सिंहस्थ के दौरान बिजली की मांग लगभग 100 करोड़ यूनिट तक पहुंच जाएगी, जो पिछले सिंहस्थ के दौरान दर्ज की गई 60-70 करोड़ यूनिट से काफी ज्यादा है। 3 दिवसीय दौरे पर आई टीम उत्तर प्रदेश से आई टीम का यह दौरा  19 दिसंबर 2025 तक तय है। विशेषज्ञ के आने उद्देश्य मध्य प्रदेश वेस्टर्न रीजन पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के साथ जानकारी और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान करना है। डिस्कॉम वेस्टर्न रीजन के मैनेजिंग डायरेक्टर अनूप कुमार सिंह ने कहा, 'इस दौरे का मकसद डिस्कॉम को गर्मियों के पीक महीनों के दौरान स्थिर बिजली बनाए रखने में व्यावहारिक जानकारी और विशेषज्ञता हासिल करने में मदद करना है, जब एयर कंडीशनर जैसे हाई-लोड उपकरण बड़े पैमाने पर चलते हैं। 24 घंटे एक्टिव रहेगा कॉल सेंटर विश्वसनीयता और रिस्पॉन्स टाइम को बेहतर बनाने के लिए, मेला क्षेत्र में 24×7 कॉल सेंटर की योजना बनाई गई है। एक्सपर्ट्स के सुझावों के साथ एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया जा रहा है, जिसमें शिकायतों का तेजी से समाधान और बिजली कटौती या खराबी को ठीक करने के लिए जमीनी स्तर पर तेजी से टीम भेजने पर ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि रियल-टाइम फॉल्ट का पता लगाने और तेजी से बिजली बहाल करने के लिए मेला नेटवर्क में सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन सिस्टम लगाए जाएंगे। व्यापक योजना में लोड फोरकास्टिंग, फीडर-लेवल ऑग्मेंटेशन, महत्वपूर्ण नोड्स पर रिडंडेंसी और बेहतर लास्ट-माइल कनेक्टिविटी शामिल होने की उम्मीद है ताकि लाखों तीर्थयात्रियों के लिए एक सुचारू त्योहार का अनुभव सुनिश्चित किया जा सके।  

उज्जैन सिंहस्थ 2028 से पहले बनेगी मेगा पार्किंग, लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ रहेगी कंट्रोल में

उज्जैन सिंहस्थ-2028 में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आधुनिक अनुभव दिलाने के लिए राज्य सरकार ने भीड़ और यातायात प्रबंधन के सबसे अहम मोर्चे पर निर्णायक कदम उठा लिया है। उज्जैन में 100 करोड़ रुपये की मेगा पार्किंग परियोजना को जमीन पर उतारने की तैयारी तेज कर दी गई है। इस परियोजना के तहत 6012 हेक्टेयर क्षेत्र में विशाल पार्किंग नेटवर्क बनाया जाएगा, जिसके साथ ही अत्याधुनिक जनसुविधाएं भी विकसित होंगी। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को शहर की सीमा में प्रवेश करने से पहले ही व्यवस्थित पार्किंग और सुचारू ट्रैफिक व्यवस्था उपलब्ध कराना है। यह साफ संकेत है कि इस बार सिंहस्थ भीड़ के दबाव से नहीं, बल्कि डिजिटल और संरचनात्मक प्लानिंग की बदौलत संचालित होगा।   पार्किंग के साथ आधुनिक सुविधाओं का विकास सरकार की इस विशेष योजना में केवल पार्किंग स्थल का निर्माण नहीं हो रहा है। यहां पेयजल, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा तंत्र, यातायात संकेत और सीसीटीवी जैसी सुविधाएं भी स्थापित की जाएंगी। इस परियोजना को सिंहस्थ-2028 की सुरक्षा और सुगमता के लिए सबसे बड़ा आधार माना जा रहा है। इसका उद्देश्य उज्जैन शहर के भीतर वाहनों के दबाव को कम करना और प्रमुख मंदिरों तथा घाटों तक पहुंच को पहले की तुलना में अधिक सहज बनाना है। इसके लिए एक परामर्शदाता फर्म का चयन किया जा रहा है, जिसे सेवाओं के बदले लगभग दो करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा। यह फर्म दो प्रमुख चरणों में काम करेगी। दो चरणों में होगा काम पहला चरण डिजाइन और रूपरेखा तैयार करने से संबंध‍ित होगा। इसमें विस्तृत इंजीनियरिंग सर्वेक्षण, भू-तकनीकी अध्ययन, संरचनात्मक नक्शे, लागत अनुमान और आवश्यक स्वीकृतियां शामिल रहेंगी। दूसरे चरण में निर्माण प्रबंधन, गुणवत्ता नियंत्रण, साइट सुपरविजन, ठेका प्रबंधन और समयबद्ध कार्य निष्पादन सुनिश्चित किया जाएगा। लोक निर्माण विभाग के अनुसार, समय सीमा में केंद्रित इस परियोजना से सिंहस्थ-2028 के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन अत्यधिक सुदृढ़ हो जाएगा। भीड़ प्रबंधन होगा आसान परियोजना लागू होने से उज्जैन शहर के भीतर जाम की समस्याएं कम होंगी और श्रद्धालुओं को प्रमुख मंदिरों, घाटों और आयोजनों तक पहुंचने में कोई कठिनाई नहीं होगी। सिंहस्थ-2028 को दुनिया के सबसे विशाल धार्मिक समागम को आधुनिक स्वरूप में आयोजित करने की दिशा में यह कदम भीड़ प्रबंधन की चुनौती को अवसर में बदलने वाला साबित होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की केंद्रीय मंत्री डॉ. खट्टर से मुलाकात, सिंहस्थ-2028 तैयारियों पर चर्चा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री डा. खट्टर से की सौजन्य भेंट सिंहस्थ-2028 से जुड़ी तैयारियों एवं परियोजनाओं पर हुई विस्तृत चर्चा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार की शाम नई दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री डा. मनोहर लाल खट्टर से उनके आवास पर सौजन्य भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय मंत्री डा. खट्टर को सिंहस्थ-2028 आयोजन से जुड़ी तैयारियों एवं अन्य प्रमुख परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ क्षेत्र में अधोसंरचनात्मक विकास कार्यो और इसके विस्तार प्रस्तावों, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता, शुचिता, नदी संरक्षण, पेयजल व्यवस्था, अस्थायी आवास निर्माण आदि विषयों के संबंध में केंद्रीय मंत्री को विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2028 को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का सर्वोत्कृष्ट आयोजन बनाने के लिए राज्य सरकार विभिन्न बहुआयामी योजनाओं पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं —स्वच्छ भारत अभियान, अमृत मिशन, स्मार्ट सिटी पहल, विद्युत परियोजनाओं और शहरी आधारभूत ढांचे से संबंधित अन्य योजनाओं की प्रगति की भी जानकारी दी। बैठक में अपर मुख्य, (मुख्यमंत्री कार्यालय)  नीरज मंडलोई, केंद्रीय विद्युत, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के प्रमुख अधिकारी तथा राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

महाकाल नगरी उज्जैन चमकेगी: सिंहस्थ 2028 से पहले 5 बड़े प्रोजेक्ट में होंगे हजारों करोड़ खर्च

उज्जैन  सिंहस्थ 2028 से पूर्व मध्यप्रदेश के उज्जैन की सूरत पूरी तरह बदलने जा रही है. मध्यप्रदेश सरकार का श्रद्धालुओं की सुविधाओ के लिए 5 बड़े कामों पर फोकस है, जिनकी लागत हजारों करोड़ है. सबसे पहला काम मोक्षदायिनी क्षिप्रा शुद्धिकरण (कान्हा डायवर्जन क्लोज डक्ट परियोजना) है, जिससे क्षिप्रा पर कई जगह पुल, पुलिया व सड़क निर्माण के माध्यम से यातायात सुगम बनाया जाएगा. इसके बाद व्यापक स्तर पर सीवरेज पाइप लाइन व ट्रीटमेंट प्लांट, पेयजल परियोजना, अस्पताल, विश्राम भवन आदि पर फोकस होगा. 5 विकास कार्यों पर होगा सबसे ज्यादा फोकस सिंहस्थ 2028 से पहले मंदिरों के जीर्णोद्धार के साथ ऐतिहासिक स्थलों को मजबूती देना व सरकार की प्राथमिकता है. इन प्रमुख पांच विकास कार्यों को कैसे किया जाएगा, इसके लिए कितने बजट की जरूरत होगी और इसकी क्या टाइम लाइन होगी इसे लेकर एक बार फिर प्रशासनिक बैठक का आयोजन किया गया. 20 हजार करोड़ से चमकेगी उज्जयनी नगरी सिंहस्थ महाकुंभ उज्जैन नगरी में वर्ष 2028 में लगने जा रहा है, जिसकी तैयारी अभी से शुरू हो गई है. सरकार का अनुमान है कि उज्जैन सिंहस्थ 2028 में 30 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचेंगे और इसी के हिसाब से पूरा रेडमैप तैयार किया गया है. जनसंपर्क विभाग के अनुसार सिंहस्थ महापर्व 2028 के पहले जिले में लगभग 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि से अलग-अलग प्रकार के विकास कार्य किए जा रहे हैं. 914 करोड़ कान्हा क्लोज डायवर्जन परियोजना पर लगभग 919.94 करोड़ रुपए की लागत से कान्‍हा डायवर्जन क्‍लोज डक्‍ट परियोजना का कार्य क्षिप्रा शुद्धिकरण के लिए किया जाएगा. इसमें कान्हा नदी के पानी को 18.5 किमी कट/कवर व 12 किमी टनल का निर्माण कर उज्‍जैन शहर की सीमा से बाहर कर गंभीर नदी के डाउन स्‍ट्रीम में प्रवाहि‍त किया जाएगा. यह परियोजना आगामी सितंबर 2027 तक पूर्ण हो जाएगी. निर्माण एजेंसी द्वारा 15 वर्षों का संचालन व रख-रखाव का प्रावधान किया गया है. इसकी कुल लंबाई 30.15 किमी रहेगी. इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद पूरे वर्ष क्षिप्रा नदी में स्‍वच्‍छ जल का प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा. 440 करोड़ की लागत से पुलि-पुलियों का निर्माण सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों के लिए 19 नवीन पुलों व आरओबी का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें 14 पुल नदी पर व 5 रोड ओवर ब्रिज शामिल हैं. इनकी अनुमानित लागत 440.13 करोड़ रुपए है. पुल निर्माण कार्यों की श्रृंखला में शहर के बहुप्रतीक्षित फ्रीगंज का ब्रिज भी शामिल किया गया है. शहर का सबसे महत्‍वपूर्ण हरिफाटक ब्रिज का चौड़ीकरण काम म.प्र. सड़क विकास निगम द्वारा 371.11 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है. साथ ही सड़कों का चौड़ीकरण, नवीन मार्गों का निर्माण भी इसमें शामिल है. सीवरेज पर 476 करोड़, पेयजल पर 1113 करोड़ सिंहस्थ मेला क्षेत्र में सीवरेज पाइप लाइन और सीवरेज ट्रीटमेंट प्‍लान्ट का निर्माण कार्य किया जा रहा है, जो शहर के अधोसंरचना विकास की दृष्‍टि‍ से अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण रहेगी और इसकी लागत 476.06 क‍रोड़ रुपए रहेगी. शहर की पेयजल परियोजना भी 1113 करोड़ रुपए की लागत से बनाई जा रही है. इस परियोजना में 150 एमएलडी का वॉटर ट्रीटमेंट प्‍लान्‍ट, 700 किमी से अधिक पाइप लाइन का नेटवर्क और 17 नए जल टैंक बनाए जाएंगे. ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और मंदिर जीर्णोद्धार के लिए 500 करोड़ से ज्यादा ऐति‍हासिक स्थलों का संरक्षण करना जैसे शहर का कोठी पैलेस भवन उसे कुंभ एक्सपीरियंस सेंटर व वीर भारत संग्रहालय बनाना, वीर दुर्गादास सिंह राठौड़ की छत्री पर 52.69 करोड़ की लागत से विकास कार्य, मंदिर के जीर्णोद्धार कर परमार, मराठा शैली का वैभव लौटाना भी इसमें शामिल है. इसपर 500 करोड़ से ज्यादा खर्ज होंगे. अन्य कई परियोजनाओं पर खर्च होंगे हजारों करोड़ सिहंस्‍थ में करोड़ों श्रध्‍दालुओं के आने पर उनके स्वास्थ्य का ध्‍यान रखते हुए 550 बिस्‍तरीय चिकित्‍सालय भवन, 150 सीट्स का चिकित्‍सा महाविद्यालय भवन व छात्रावास निर्माण होगा. इंदौर से उज्‍जैन के बीच 48 किमी एक नई ग्रीन फिल्‍ड सड़क का निर्माण कार्य लागत लगभग 2935 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे

सिंहस्थ 2028 को लेकर बड़ा फैसला, उपयोग न हुई जमीन दो साल बाद किसानों को लौटाई जाएगी

उज्जैन   उज्जैन सिंहस्थ वाले प्लान से सरकार ने लैंड पुलिंग को बाहर कर दिया है। सिंहस्थ 2028 के लिए इसी आधार पर प्लानिंग की थी, इस पर आगे बढ़ने से पहले कई बाधाएं आई, जिसका नए सिरे से परीक्षण कराया गया और लोगों से फीडबैक लिए। केंद्रीय नेतृत्व से भी राय ली, उसके बाद तय किया कि पहले की तरह ही मेला क्षेत्र में काम होंगे। इसके लिए दो साल के लिए ही जमीन ली जाएगी, उस पर अस्थाई काम होंगे। सिंहस्थ खत्म होने के बाद जमीन लौटा दी जाएगी। 2016 के सिंहस्थ के लिए करीब 3200 हेक्टेयर जमीन ली थी, इसमें से कुछ हेक्टेयर का उपयोग नहीं हुआ था। इस बार भी इतनी ही जमीन ली जाएगी और उसका 100 फीसद क्षेत्रफल उपयोग किया जाएगा। बन गई सहमति सरकार पूर्व की तरह अखाड़ों, धार्मिक संस्थाओं व साधु-संतों को पूरी तरह विकसित करके अस्थाई प्लाट देगी, लेकिन किसी को स्थाई तौर पर जमीन नहीं दी जाएगी। हालांकि इनके पास पूर्व से मौजूद निजी जमीन में से कुछ हिस्से पर स्थाई निर्माण की अनुमति विशेष शर्तों के तहत दी जाएगी। सरकार बीच का रास्ता निकाल रही है। किसानों व जमीन मालिकों को निराश नहीं किया जाएगा, जो जमीन प्लानिंग के लिए बहुत उपयोगी होगी, उसे ही आम अधिग्रहण की तरह लिया जाएगा। सरकार से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने उसी तर्ज पर काम किया और लगभग सहमति बन गई है। सरकार के सामने ये चुनौतियां बरकरार अस्थाई निर्माण में बांस: बल्लियों का उपयोग होता है। बड़ी मात्रा में टीन की चादरें लगती हैं। चूंकि सिंहस्थ का आयोजन गर्मियों में होता है, तब कई बार चक्त्रस्वात की स्थिति बनती है और अस्थायी निर्माण में शेड के लिए उपयोग किए टीन के चादर हवा के साथ उड़ जाते हैं, आम श्रद्धालुओं को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है। खानपान व स्वास्थ्य सुविधा: इसके लिए पक्के भवनों की जरुरत है। अस्थाई शेड व निर्माण स्थलों पर कई तरह का खतरा रहता है। आग लगने जैसी संभावित अप्रिय स्थिति पैदा होने का प्रबल खतरा रहता है। प्रयागराज कुंभ में आग लगने जैसी घटना हो चुकी है। ऐसे अस्थाई निर्माणों को तेजी से नुकसान पहुंचता है। सुझाव: कम से कम जमीन पर स्थाई निर्माण हो। जब इस फार्मूले पर अमल होगा तो स्वाभाविक है कि जमीन की जरुरत कम से कम होगी। सरकार ने ये किया: सरकार इसी दिशा में बढ़ी। किसानों की जमीन पर जबरन की प्लानिंग को हटा दिया है। सुझाव: अभी जो प्लानिंग खाली खेतों पर निर्माण को लेकर की थी, उसका स्थान बदला जाए। ताकि सिंहस्थ के लिए किसानों की जमीन की जरुरत कम से कम पड़े। सरकार ने ये किया: स्थाई निर्माण शिप्रा नदी के किनारों और श्रद्धालुओं के आवागमन क्षेत्र तक। सुझाव: सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए आसपास के जिलों में भी प्रबंध हों, वहां से सिंहस्थ क्षेत्र तक आवागमन के ज्यादा विकल्प दिए जाएं। ताकि भीड़ प्रबंधन में आसानी हो। सरकार ने ये किया: उज्जैन से सटे जिलों में श्रद्धालुओं के लिए बड़े स्तर पर सुविधाएं विकसित करने का निर्णय लिया।

मध्य प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स निगम ने युवाओं को दिया सिंहस्थ के लिए तकनीकी समाधान प्रस्तुत करने का मौका

उज्जैन   सिंहस्थ-2028 के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा-आधारित तकनीकों के माध्यम से भीड़ प्रबंधन, सार्वजनिक सुरक्षा, गतिशीलता, स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसी चुनौतियों का समाधान किया जाएगा। इसके लिए उज्जैन महाकुंभ हैकाथान का आयोजन किया गया था। भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान भोपाल में उज्जैन महाकुंभ हैकाथान-2025 के दो दिन के सत्र में प्रौद्योगिकी, नवाचार और संस्कृति का संगम देखने को मिला। मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रानिक्स विकास निगम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित इस आयोजन में देशभर के युवाओं को एक मंच पर सिंहस्थ-2028 के लिए स्मार्ट, सुरक्षित और समावेशी समाधान प्रस्तुत करने का अवसर मिला। यह सिंहस्थ-2028 के लिए समाधान विकसित करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है। देश के 26 राज्यों से पंजीकरण और 11 राज्यों की 36 चयनित टीमों की भागीदारी ने इस हैकाथान को भारत की नवाचार विविधता का प्रतीक बनाया। टीमों ने नवाचार और तकनीक के अलग-अलग प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत किए। चयनित टीमें अगले दो महीनों के परिशोधन अवधि में अपने समाधानों को और विकसित करेंगी, जिससे सिंहस्थ-2028 के लिए एक सशक्त, समावेशी और टिकाऊ तकनीकी आधार तैयार हो सके। कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, आयुक्त, नगरीय प्रशासन संकेत एस. भोंडवे सहित गणमान्य व्यक्तियों ने प्रतिभागियों के रचनात्मक, तकनीकी और सामाजिक रूप से प्रासंगिक समाधानों की सराहना की। किसी ने यूनिफाइड प्लेटफार्म तो किसी ने भीड़ नियंत्रण प्रणाली की विकसित सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजनों के लिए डिजाइन नवाचारों में जंगोह (इंदौर) ने 'सिंहथा यूनिफाइड' प्लेटफार्म प्रस्तुत किया। यह स्थानीय भाषाओं में एआइ-संचालित सहायता, रीयल-टाइम अपडेट्स प्रस्तुत करता है। सेल्फ सर्व बूथ ने एक 6डी वर्चुअल रियलिटी अनुभव प्रस्तुत किया, जो कुंभ के वातावरण को वैश्विक दर्शकों के लिए सजीव बनाता है। संचार वारियर ने एक रीयल-टाइम भीड़ निगरानी और चेतावनी प्रणाली विकसित की जो आपात स्थिति में मूक रिपोर्टिंग को भी सक्षम बनाती है। सेफ क्लाक ने भारतीय भाषाओं में डेटा भंडारण माडल पर ध्यान केंद्रित किया। मेडीवेंड ने रियल-टाइम वाइस इंटरफेस से युक्त एक चिकित्सा वेंडिंग प्लेटफार्म प्रदर्शित किया। उज्जैन महाकुंभ हैकाथान ने न केवल भविष्य की तकनीकी शासन प्रणाली की झलक दी, बल्कि मध्य प्रदेश के डिजिटल ट्रांसफार्मेशन विजन को भी मजबूती प्रदान की।

हैकाथॉन में दिखा परंपरा और प्रौद्योगिकी का अभिनव संगम

भोपाल  भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान भोपाल में उज्जैन महाकुंभ हैकाथॉन-2025 के दो दिन के सत्र में प्रौद्योगिकी, नवाचार और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित इस अनूठे आयोजन में देशभर के युवाओं को एक मंच पर सिंहस्थ-2028 के लिए स्मार्ट, सुरक्षित और समावेशी समाधान प्रस्तुत करने का अवसर मिला। यह सिंहस्थ-2028 के लिए समाधान विकसित करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है। देश के 26 राज्यों से पंजीकरण और 11 राज्यों की 36 चयनित टीमों की भागीदारी ने इस हैकाथॉन को भारत की नवाचार विविधता का प्रतीक बनाया। प्रतिभागियों ने सिंहस्थ-2028 के लिये ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा-आधारित तकनीकों के माध्यम से भीड़ प्रबंधन, सार्वजनिक सुरक्षा, गतिशीलता, स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसी चुनौतियों के समाधान प्रस्तुत किए। 36 उत्कृष्ट टीम को मिला दो माह का परिशोधन समय हैकाथॉन के अंतिम दिन निर्णायक मंडल ने सभी टीम के उन्नत समाधानों का मूल्यांकन किया। पहले दिन दिए गए सुझावों को शामिल करते हुए प्रतिभागियों ने अपने प्रस्तावों को और बेहतर रूप में प्रस्तुत किया। नवाचार की गहराई और समाधानों की मापनीयता को देखते हुए निर्णायकों ने एक अभूतपूर्व निर्णय लेते हुए सभी 36 टीम को दो माह का अतिरिक्त समय प्रदान किया, जिससे वे अपने विचारों को और परिष्कृत कर सकें। यह कदम राज्य सरकार की दीर्घकालिक नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे, आयुक्त, नगरीय प्रशासन श्री संकेत एस. भोंडवे, प्रबंध निदेशक एमपीएसईडीसी श्री आशीष वशिष्ठ और मुख्य महाप्रबंधक एमपीएसईडीसी शिवांगी जोशी सहित गणमान्य व्यक्तियों ने प्रतिभागियों के रचनात्मक, तकनीकी और सामाजिक रूप से प्रासंगिक समाधानों की सराहना की। सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजनों के लिये डिजाइन किये गये नवाचारों में जंगोह (इंदौर) ने “सिंहथा यूनिफाइड” प्लेटफॉर्म प्रस्तुत किया जो स्थानीय भाषाओं में एआई-संचालित सहायता, रीयल-टाइम अपडेट्स प्रस्तुत करता है। सेल्फ सर्व बूथ ने एक 6डी वर्चुअल रियलिटी अनुभव प्रस्तुत किया जो कुंभ के वातावरण को वैश्विक दर्शकों के लिए सजीव बनाता है। संचार वॉरियर ने एक रीयल-टाइम भीड़ निगरानी और चेतावनी प्रणाली विकसित की जो आपात स्थिति में मूक रिपोर्टिंग को भी सक्षम बनाती है। सेफ्टी और सिक्योरिटी ट्रेकिंग यूनिट ने लोरा-आधारित सुरक्षित संचार नेटवर्क का प्रस्ताव रखा जो फील्ड टीमों और कमांड सेंटर्स के बीच समन्वय को सुनिश्चित करता है। क्राफ्टआई ने एआई -आधारित तीर्थयात्री निगरानी प्रणाली प्रस्तुत की, जबकि सेफ क्लॉक ने भारतीय भाषाओं में डेटा भंडारण मॉडल पर ध्यान केंद्रित किया।मेडीवेंड ने रियल-टाइम वॉइस इंटरफेस से युक्त एक चिकित्सा वेंडिंग प्लेटफॉर्म प्रदर्शित किया। दर्शिनी एआई टीम WAPPGO ने भीड़भाड़ को रोकने और सार्वजनिक सुरक्षा को बढाने के लिए एआई आधारित ट्रैकिंग और निगरानी उपकरणों को एकीकृत करने वाले एक स्मार्ट गतिशीलता और भीड़ प्रबंधन प्लेटफॉर्म का प्रस्ताव रखा। अमृतशरणम ने एक एकीकृत गतिशीलता और सुरक्षा निगरानी प्रणाली प्रस्तुत की, जो भीड़भाड़ को रोकने और एक एकीकृत कमांड प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से पुलिस, स्वास्थ्य और नगरपालिका विभागों के बीच वास्तविक समय समन्वय को सक्षम करने के लिए पूर्वानुमानित विश्लेषण का लाभ उठाती है। इस बीच, केरल की एल्विक्टो टेक्नोलॉजीज ने एक स्मार्ट पार्किंग प्रबंधन प्रणाली प्रस्तुत की, जिसे सुगम यातायात प्रवाह के लिए कई पार्किंग क्षेत्रों को एक जुड़े हुए नेटवर्क में एकीकृत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, और रोबस्ट रोबोटिक्स ने अग्नि का पता लगाने, जोखिम प्रबंधन और वास्तविक समय प्रतिक्रिया के लिए इसरो नाविक उपग्रह डेटा और ड्रोन इमेजरी को मिलाकर एआई-संचालित सटीक मानचित्रण समाधान से निर्णायक मंडल को प्रभावित किया। इन सभी नवाचारों ने यह स्पष्ट किया कि भारत की युवा तकनीकी शक्ति, सामाजिक चेतना के साथ मिलकर परंपरागत आयोजनों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने में सक्षम है। उज्जैन महाकुंभ हैकाथॉन-2025 ने न केवल भविष्य की तकनीकी शासन प्रणाली की झलक दी, बल्कि मध्यप्रदेश के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन विजन को भी मजबूती प्रदान की। चयनित टीमें अगले दो महीनों के परिशोधन अवधि में अपने समाधानों को और विकसित करेंगी, जिससे सिंहस्थ-2028 के लिए एक सशक्त, समावेशी और टिकाऊ तकनीकी आधार तैयार हो सके।