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झारखंड: जंगल में मिले तीन शव, बिना चोट के निशान से बढ़ी सस्पेंस

हजारीबाग झारखंड के हजारीबाग जिले में रिश्ते के भाई-बहनों का शव बरामद हुआ। सगे भाई-बहनों के मौत के मामले में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। उसने बताया कि तीनों के शव चार दिन पहले वन क्षेत्र में मिले थे। शव पर ना कोई चोट का निशान था और ना ही खून बह रहा था। ऐसे में सवाल उठता है कि तीनों भाई-बहनों की मौत कैसे हुई। इसी सवाल का जवाब अब एसआईटी ढूंढने का प्रयास करेगी। अल्पसंख्यक आयोग ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं पुलिस ने क्या बताया इस मामले की जानकारी देते हुए हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक अमन कुमार ने बताया कि गुरुवार को पुलिस को मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तीनों शवों पर किसी भी प्रकार के बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए। मृतकों की पहचान मोहम्मद आदिल (25) निवासी कटकमदाग, शानिया परवीन (19) निवासी लोहसिंघा और खुशी परवीन (21) निवासी हजारीबाग मुफस्सिल के रूप में हुई है। तीनों के शव 27 अप्रैल को मुफस्सिल पुलिस थानाक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पौटा वन क्षेत्र से बरामद किए गए थे। तीनों के लापता होने की शिकायत 23 अप्रैल को दर्ज कराई गई थी। अब पुलिस जांच के बाद पता चलेगा कि आखिर तीनों भाई-बहनों की मौत कैसे हुई थी। टेस्ट के बाद पता चलेगा सच पुलिस अधीक्षक ने कहा कि मैंने तीनों व्यक्तियों की मौत की जांच के लिए एसडीपीओ (मुख्यालय) अमित कुमार आनंद के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन किया है। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शवों पर बाहरी चोट के कोई निशान नहीं मिले हैं। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि अभी कुछ परीक्षण किए जाने बाकी हैं, जिनसे यह निष्कर्ष निकाला जा सकेगा कि मामला हत्या का है या आत्महत्या का। उन्होंने बताया कि पुलिस ने मोहम्मद आदिल के पिता के बयान के आधार पर सात से आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। अल्पसंख्यक आयोग की अध्यक्ष ने लगाए आरोप इस बीच, झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष ज्योति सिंह मथारू ने आरोप लगाया कि 23 अप्रैल को शिकायत मिलने पर पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। गुरुवार को उन्होंने तीनों मृतकों के परिवारों से मुलाकात की और उस स्थान का दौरा किया जहां शव मिले थे। मथारू ने संवाददाताओं से कहा कि मामले की शुरुआती चरण की पुलिस जांच संतोषजनक नहीं थी। हमने पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की और उन्हें मामले में तेजी से कार्रवाई करने और दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने का निर्देश दिया।

सब्जी मंडी पुल प्रकरण: दुष्यंत-दिग्विजय चौटाला से पूछताछ के लिए SIT सक्रिय

हिसार हिसार में पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला-सीआईए इंचार्ज पवन कुमार के विवाद के मामले में एसआईटी इंचार्ज डीएसपी कमलजीत ने पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय चौटाला को नोटिस जारी कर अपना जवाब देने के लिए बुलाया है। डीएसपी कमलजीत ने इस मामले सीआईए इंचार्ज पवन सहित सभी 6 पुलिस कर्मियों को भी नोटिस दिया है। अभी दुष्यंत चौटाला-दिग्विजय चौटाला ने जांच में शामिल होने के लिए कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। जजपा प्रवक्ता एडवोकेट मनदीप बिश्नोई का कहना है कि पुलिस ने अभी तक शिकायत व एफआईआर की कॉपी उपलब्ध नहीं करवाई है। उसे देखने के बाद ही जवाब दिया जा सकता है। आज दुष्यंत चौटाल कार्यकर्ताओं की बैठक लेने आएंगे। जिसके बाद इस विषय पर भी विमर्श किया जाएगा। एसआईटी इंचार्ज कमलजीत ने कहा कि अभी इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी। हमने दोनों पक्षों से साक्ष्य मांगे हैं। उनके बयान भी लेंगे। इसके बाद मौके से जुटाए गए अन्य वीडियो का भी विश्लेषण करेंगे। पूरी जांच के बाद एसपी सिद्धांत जैन को रिपोर्ट सौंपेंगे। यह था मामला गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन के बाद जजपा व इनसो नेताओं पर एफआईआर दर्ज होने के बाद 17 अप्रैल को दुष्यंत चौटाला और उनके भाई दिग्विजय चौटाला मामले के विरोध में गिरफ्तारी देने सिटी थाना पहुंचे थे। इसके बाद एसपी ऑफिस जा रहे थे तो रास्ते में सब्जी मंडी पुल पर सीआईए इंचार्ज पवन कुमार के साथ पुलिस कर्मियों से काफी बहस हुई थी। पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने आरोप लगाया था कि सीआईए इंचार्ज पवन कुमार की गाड़ी से उन्हें सब्जी मंडी पुल पर कुचलने का प्रयास किया। पवन कुमार ने उन्हें हथियार दिखाया। इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से एक दूसरे के खिलाफ शिकायत दी ई है। जिसकी जांच के लिए एसपी ने डीएसपी कमलजीत के नेतृत्व में एसआईटी बनाई थी।  

प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत पर SIT सक्रिय, पिता को तलब कर पूछताछ

जोधपुर जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच तेज कर दी गई है। सोमवार को डीसीपी वेस्ट विनीत बंसल सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एसीपी कार्यालय पहुंचे, जहां साध्वी के पिता को बुलाकर पूछताछ की गई। मीडिया से बातचीत करते हुए डीसीपी वेस्ट विनीत बंसल ने बताया कि घटना के बाद से पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर पूरी टीम गंभीरता से जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि मृतका के बैकग्राउंड, उनके पिता के बैकग्राउंड, किसी से रंजिश या दुश्मनी, मेडिकल लापरवाही सहित सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। डीसीपी ने बताया कि रविवार को एफएसएल टीम द्वारा दोबारा घटनास्थल का निरीक्षण कराया गया है और वहां से मिले अहम तथ्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। इसके साथ ही साध्वी के पिता के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जांच की जा रही है, ताकि मामले से जुड़े हर संभावित सुराग की पड़ताल की जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में फिलहाल कोई भी व्यक्ति शक के दायरे से बाहर नहीं है और किसी को भी क्लीन चिट नहीं दी गई है। पूछताछ के लिए किसी व्यक्ति को दोबारा बुलाया जाना जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। डीसीपी विनीत बंसल ने भरोसा दिलाया कि गठित एसआईटी द्वारा किसी के साथ अनावश्यक दबाव या दुर्व्यवहार नहीं किया जाएगा। प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किसी प्रकार की बाहरी या आंतरिक चोट के स्पष्ट निशान सामने नहीं आए हैं, हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। वहीं पूछताछ के बाद साध्वी के पिता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें केवल बातचीत के लिए बुलाया गया था और उन पर किसी तरह का पुलिस दबाव नहीं बनाया गया। मोबाइल फोन का पासवर्ड मांगे जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनसे अब तक कोई पासवर्ड नहीं मांगा गया है। उन्होंने बताया कि वे साध्वी के समाधि स्थल जा रहे थे, इसी दौरान पुलिस ने उनसे एक बार कार्यालय आने को कहा था। बातचीत के बाद वे समाधि स्थल के लिए रवाना हो गए।