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बदल रहा हरियाणा! कम हुए बाल विवाह, महिलाएं तेजी से जुड़ रहीं डिजिटल दुनिया से

रोहतक. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6, 2023-24) की ताजा रिपोर्ट ने प्रदेश की सामाजिक तस्वीर में कई बड़े बदलावों को उजागर किया है। जहां एक ओर महिलाओं की शिक्षा, इंटरनेट उपयोग और आर्थिक भागीदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, वहीं परिवार नियोजन के तरीकों में तेजी से बदलाव देखने को मिला है। आंकड़े बताते हैं कि अब हर चार में से लगभग तीन महिलाएं इंटरनेट का इस्तेमाल कर चुकी हैं। यह आंकड़ा 2019-21 में केवल 48.4 प्रतिशत था। यानी तीन साल में महिलाओं की डिजिटल पहुंच में करीब 26 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी हुई है। आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि हरियाणा बदलाव के दौर से गुजर रहा है और आने वाले वर्षों में इन संकेतकों पर सरकार की नीतियों का असर और अधिक स्पष्ट दिखाई देगा। रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश अब केवल कृषि और उद्योग के लिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के मामले में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। महिलाओं ने पिछले तीन वर्षों में ऐसी डिजिटल छलांग लगाई है, जिसने राज्य की सामाजिक तस्वीर बदल दी है। 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 74 प्रतिशत महिलाएं अब इंटरनेट उपयोग कर रही हैं। मोबाइल फोन का स्वयं इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। विशेष तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाओं की डिजिटल पहुंच तेजी से बढ़ी है। एनएफएचएस-5 में जहां यह आंकड़ा 50.4 प्रतिशत था, वहीं अब बढ़कर 64.9 प्रतिशत हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन, आनलाइन सेवाओं और डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग ने महिलाओं को अधिक आत्मनिर्भर बनाया है। शिक्षा में भी दिखा बड़ा सुधार शिक्षा के क्षेत्र में भी राज्य ने प्रगति दर्ज की है। 10 या उससे अधिक वर्ष की स्कूली शिक्षा प्राप्त महिलाओं का प्रतिशत 49.5 से बढ़कर 55.2 हो गया है। पुरुषों में यह आंकड़ा 62.2 प्रतिशत से बढ़कर 64.4 प्रतिशत तक पहुंचा है। महिलाओं के स्कूल जाने की दर में भी सुधार देखने को मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा और डिजिटल पहुंच में बढ़ोतरी आने वाले वर्षों में रोजगार और सामाजिक भागीदारी को और मजबूत करेगी। आर्थिक रूप से मजबूत हुई महिलाएं आर्थिक सशक्तिकरण के मोर्चे पर भी महिलाओं की स्थिति बेहतर हुई है। पिछले 12 महीनों में नकद भुगतान के साथ कार्य करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 18.8 से बढ़कर 25.1 हो गया है। वहीं स्वयं उपयोग करने वाले बैंक खातों वाली महिलाओं की संख्या 73.6 प्रतिशत से बढ़कर 85.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है। घर या जमीन में महिलाओं की हिस्सेदारी भी 11.8 प्रतिशत से बढ़कर 14.7 प्रतिशत दर्ज की गई है। कम हो रही बाल विवाह की समस्या हरियाणा में बाल विवाह के मामलों में भी गिरावट दर्ज हुई है। रिपोर्ट में परिवार और समाज से जुड़े संकेतकों में भी बदलाव दिखाई देता है। 18 वर्ष से पहले विवाह करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 12.5 से घटकर 11.9 प्रतिशत रह गया है। वहीं 21 वर्ष से पहले विवाह करने वाले पुरुषों का प्रतिशत 16 से घटकर 13.3 प्रतिशत हो गया है। इससे स्पष्ट है कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों पर धीरे-धीरे नियंत्रण हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं की घरेलू निर्णयों में भागीदारी 87.5 प्रतिशत से बढ़कर 91.1 प्रतिशत हो गई है। घर की खरीदारी, स्वास्थ्य और पारिवारिक निर्णयों में महिलाओं की भूमिका पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है। स्वास्थ्य क्षेत्र में हरियाणा की उपलब्धियां उल्लेखनीय रही हैं। गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार प्रसवपूर्व जांच कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 60.9 से बढ़कर 79 प्रतिशत हो गया है। परिवार नियोजन के क्षेत्र में भी नया रुझान देखने को मिला है। महिला नसबंदी का प्रतिशत घटकर 28.5 रह गया है, जबकि पारंपरिक गर्भनिरोधक तरीकों का उपयोग बढ़कर 21.4 प्रतिशत हो गया है। इससे संकेत मिलता है कि परिवार नियोजन के प्रति लोगों की पसंद और व्यवहार में बदलाव आ रहा है। बदलते हरियाणा की नई तस्वीर एनएफएचएस-6 के आंकड़े बताते हैं कि हरियाणा में बदलाव सिर्फ सड़कों, भवनों या उद्योगों तक सीमित नहीं है। डिजिटल तकनीक, शिक्षा और आर्थिक अवसरों ने महिलाओं के जीवन में बड़ा परिवर्तन लाया है। राज्य की नई पहचान अब डिजिटल महिला शक्ति के रूप में उभरती दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि रिपोर्ट हरियाणा में सामाजिक और तकनीकी बदलाव की मजबूत तस्वीर पेश करती है। महिलाओं की शिक्षा, डिजिटल पहुंच और आर्थिक भागीदारी में सुधार राज्य के लिए सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन पोषण और परिवार नियोजन से जुड़े क्षेत्रों में अभी भी गंभीर प्रयासों की जरूरत बनी है।

मनातू की नई कहानी: नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब बन रहा शिक्षा का केंद्र

तरहसी (पलामू)  कभी नक्सलवाद, बारूद और दहशत के लिए कुख्यात रहा पलामू जिले का मनातू इलाका आज शिक्षा और उम्मीद की नई कहानी लिख रहा है। यहां मनातू थाना परिसर में शुरू हुई सामुदायिक कोचिंग ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सही दिशा और मार्गदर्शन मिले तो कठिन से कठिन हालात भी बदले जा सकते हैं। इस पहल से जुड़े सभी 25 छात्र-छात्राओं ने इंटरमीडिएट परीक्षा में शत-प्रतिशत सफलता हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। वर्षों तक जिस क्षेत्र में शाम ढलते ही सन्नाटा डर में बदल जाता था, वहीं आज बच्चों के हाथों में किताबें और आंखों में उज्ज्वल भविष्य के सपने दिखाई दे रहे हैं। मनातू थाना परिसर, जो कभी सुरक्षा और अपराध की चर्चाओं तक सीमित था, अब शिक्षा के केंद्र के रूप में पहचान बना रहा है। पुलिस नहीं गुरुजी, थाना बना पाठशाला तत्कालीन थाना प्रभारी निर्मल उरांव ने अपनी जिम्मेदारियों के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा को मिशन बना लिया। उनके प्रयासों से थाना परिसर में सामुदायिक कोचिंग की शुरुआत की गई, जहां पुलिसकर्मी न केवल सुरक्षा व्यवस्था संभालते हैं, बल्कि छात्रों को पढ़ाई में मार्गदर्शन भी देते हैं। यह कोचिंग मुख्य रूप से मजदूर और किसान परिवारों के बच्चों के लिए शुरू की गई थी, जो आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हो जाते थे। यहां उन्हें निःशुल्क शिक्षा, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास मिला, जिसका परिणाम आज शत-प्रतिशत सफलता के रूप में सामने आया है। रेशमी कुमारी ने हासिल किया 70 प्रतिशत अंक इस कोचिंग की छात्रा रेशमी कुमारी ने साइंस संकाय में 70 प्रतिशत अंक हासिल किए। उन्होंने बताया कि उनके पिता मजदूरी करते हैं और यदि पुलिस की यह पहल नहीं होती तो उनका आगे पढ़ना मुश्किल था। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि निर्मल उरांव बच्चों को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं कराते थे, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देते थे। उनका संदेश था.जिस हाथ में कलम मजबूत हो, वहां अंधेरा ज्यादा देर टिक नहीं सकता। ”मनातू की यह कहानी आज इस बात का प्रमाण बन गई है कि जब खाकी सिर्फ कानून नहीं, बल्कि बदलाव की जिम्मेदारी भी उठाती है, तो सबसे कठिन हालात में भी सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। नक्सल से शिक्षा की ओर बदलता मनातू मनातू, जो कभी अफीम की खेती और नक्सली गतिविधियों के लिए जाना जाता था, अब शिक्षा और विश्वास की नई पहचान बन रहा है। ग्रामीणों ने पहली बार पुलिस और जनता के बीच इतना आत्मीय और सकारात्मक रिश्ता महसूस किया है। पलामू एसपी कपिल चौधरी ने सभी सफल छात्रों को बधाई दी और कहा कि शिक्षा ही समाज परिवर्तन का सबसे मजबूत माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों को आगे भी मेहनत करने और बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया।