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रायपुर में कल से खेल अकादमियों के लिए चयन ट्रायल, खिलाड़ियों को मिलेगा मौका

रायपुर. राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने रायपुर जिले में संचालित गैर-आवासीय खेल अकादमियों में प्रवेश और प्रवेश के नवीनीकरण के लिए 23 और 24 सितम्बर को चयन ट्रायल का आयोजन किया है। इसमें भाग लेने के इच्छुक खिलाड़ी 23 सितम्बर को रायपुर के कोटा स्थित स्वामी विवेकानंद स्टेडियम में प्रातः 7 बजे से 11 बजे तक पंजीयन करा सकते हैं। चयन ट्रायल में शामिल होने के लिए आधार कॉर्ड, निवास प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र या जन्मतिथि के उल्लेख वाली प्रमाणित अंकसूची उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गैर-आवासीय बालक-बालिका तीरंदाजी और बालिकाओं के फुटबॉल (बालिका) के लिए चयन ट्रायल 23 सितम्बर को स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा तथा तीरंदाजी एरिना (बालिका खेल छात्रावास के सामने) में होंगे। वहीं, गैर-आवासीय बालक-बालिका हॉकी एवं बालक-बालिका एथलेटिक्स के लिए चयन ट्रायल 24 सितम्बर को स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा एवं हॉकी स्टेडियम पिच-02 में सुबह 7 बजे से आयोजित किए गए हैं। चयन ट्रायल में राज्य के बालक-बालिका खिलाड़ी तथा अन्य राज्यों के 13 से 17 आयु वर्ग के खिलाड़ी शामिल हो सकते हैं। फुटबॉल एवं तीरंदाजी खिलाड़ियों का 23 सितम्बर को पंजीयन, दस्तावेज परीक्षण, चिकित्सकीय परीक्षण, शारीरिक दक्षता परीक्षण एवं खेल कौशल परीक्षण स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा एवं तीरंदाजी एरिना रायपुर में किया जाएगा। वहीं 24 सितम्बर को हॉकी एवं एथलेटिक्स खिलाड़ियों का पंजीयन, दस्तावेज परीक्षण, चिकित्सकीय परीक्षण, शारीरिक दक्षता परीक्षण एवं खेल कौशल परीक्षण स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा एवं सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम पिच-02 में होगा। चयन ट्रायल में खिलाड़ियों का चयन उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर चयन समिति करेगी। खेल अकादमी संचालन नियम,2014 के तहत अंतिम रूप से चयनित खिलाड़ियों को निःशुल्क प्रशिक्षण, खेल परिधान, प्लेइंग किट, बीमा एवं छात्रवृत्ति आदि सुविधाएं शासन द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी।

आइस हॉकी, फुटबॉल और फिगर स्केटिंग: इन खेलों ने रूस को बनाया दुनिया की बड़ी स्पोर्ट्स पावर

मॉस्को रूस का नाम आते ही राजनीति, इतिहास और उसकी विशाल भौगोलिक सीमा के साथ खेलों की दुनिया भी याद आती है. रूस की खेल पहचान की बात हो तो आइस हॉकी का नाम सबसे पहले आता है. सोवियत दौर से चली आ रही हॉकी की मजबूत परंपरा ने रूस को दुनिया की बड़ी हॉकी शक्तियों में शामिल किया है. इसके साथ फुटबॉल, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल और फिगर स्केटिंग भी देश की खेल संस्कृति का अहम हिस्सा हैं. 1. आइस हॉकी- रूस की खेल पहचान का बड़ा हिस्सा रूस की खेल संस्कृति की बात हो और आइस हॉकी का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं. ठंडे मौसम और बर्फीले क्षेत्रों वाले इस देश में हॉकी लंबे समय से बेहद लोकप्रिय रही है. सोवियत संघ के दौर से ही रूस की हॉकी परंपरा दुनिया की सबसे मजबूत परंपराओं में गिनी जाती रही है. सोवियत टीम ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी में लंबे समय तक दबदबा कायम रखा और उसके बाद रूस ने भी इस विरासत को आगे बढ़ाया. देश की Kontinental Hockey League यानी KHL दुनिया की प्रमुख आइस हॉकी लीगों में शामिल है. रूस के कई शहरों में हॉकी क्लबों के पास मजबूत प्रशंसक आधार है. राष्ट्रीय टीम के स्तर पर भी रूस ने ओलंपिक और विश्व चैम्पियनशिप सहित कई बड़े टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन किया है. यही वजह है कि आइस हॉकी रूस के लिए सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि उसकी खेल पहचान का अहम हिस्सा है. 2. फुटबॉल- रूस के सबसे लोकप्रिय खेलों में शामिल रूस में फुटबॉल की लोकप्रियता काफी गहरी है. बच्चों और युवाओं से लेकर प्रोफेशनल स्तर तक इस खेल की मजबूत मौजूदगी है. स्कूलों और स्थानीय क्लबों से लेकर शीर्ष स्तर की लीग तक फुटबॉल का बड़ा नेटवर्क देखने को मिलता है. हालांकि, फुटबॉल को रूस का निर्विवाद रूप से नंबर-1 खेल कहना सही नहीं होगा. अलग-अलग सर्वे में फुटबॉल और आइस हॉकी के बीच लोकप्रियता का अंतर बेहद कम या अलग-अलग रहा है. इसलिए रूस के सबसे लोकप्रिय खेलों की बात करें तो इन दोनों का नाम सबसे पहले लिया जाता है. रूस की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने 1992 में सोवियत संघ के विघटन के बाद अलग पहचान के साथ अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में कदम रखा. रूस ने 1994, 2002, 2014 और 2018 में FIFA World Cup खेला. 2018 में रूस को मेजबान होने के कारण सीधे विश्व कप में जगह मिली थी. घरेलू मैदान पर टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया. यह विश्व कप में रूस का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है. रूस से पहले सोवियत संघ ने सात विश्व कप टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया था. उसका सबसे शानदार प्रदर्शन 1966 में आया, जब टीम चौथे स्थान पर रही थी. 3. वॉलीबॉल- स्कूलों से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक मजबूत पकड़ रूस में वॉलीबॉल की भी मजबूत परंपरा रही है. स्कूलों, खेल संस्थानों और क्लब स्तर पर इस खेल की अच्छी पहुंच है. पुरुष और महिला दोनों वर्गों में सोवियत संघ और बाद में रूस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं. इनडोर वॉलीबॉल के अलावा बीच वॉलीबॉल ने भी रूस में अपनी जगह बनाई है. हालांकि, यूक्रेन पर 2022 में रूस के आक्रमण के बाद अंतरराष्ट्रीय वॉलीबॉल में रूस की स्थिति बदल गई. मार्च 2022 में FIVB ने रूस और बेलारूस की राष्ट्रीय टीमों, क्लबों, अधिकारियों और खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय और महाद्वीपीय प्रतियोगिताओं से बाहर कर दिया था. 2026 में FIVB ने रूसी खिलाड़ियों और टीमों की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में वापसी का रोडमैप तय किया. इसके तहत रूस की पुरुष और महिला राष्ट्रीय टीमें 2027 Volleyball Nations League में हिस्सा लेंगी. यानी लंबे अंतराल के बाद रूसी वॉलीबॉल की अंतरराष्ट्रीय वापसी का रास्ता साफ हुआ है. 4. बास्केटबॉल- रूस की मजबूत क्लब परंपरा रूस में बास्केटबॉल की भी मजबूत परंपरा रही है. खास तौर पर CSKA Moscow जैसे क्लब ने देश को यूरोपीय बास्केटबॉल में बड़ी पहचान दिलाई है. CSKA Moscow यूरोपीय क्लब बास्केटबॉल के सबसे सफल नामों में शामिल रहा है. रूसी क्लबों ने यूरोपीय प्रतियोगिताओं में लंबे समय तक प्रभाव छोड़ा है. स्कूल और युवा स्तर पर भी बास्केटबॉल की अच्छी मौजूदगी है. शहरी इलाकों में यह खेल खास तौर पर युवाओं के बीच लोकप्रिय रहा है. हालांकि, रूस की बास्केटबॉल की कहानी सिर्फ क्लब स्तर तक सीमित नहीं है. सोवियत संघ के दौर से ही इस खेल में रूस और उसके खिलाड़ियों की मजबूत अंतरराष्ट्रीय परंपरा रही है. 5. फिगर स्केटिंग- खेल से कहीं आगे सांस्कृतिक जुनून अगर किसी एक खेल ने रूस की अंतरराष्ट्रीय खेल पहचान को सबसे ज्यादा चमक दी है तो फिगर स्केटिंग उसका बड़ा उदाहरण है. रूस में फिगर स्केटिंग सिर्फ प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक तरह का सांस्कृतिक जुनून है. ओलंपिक और विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में रूसी स्केटर्स ने लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन किया है. रूस के सबसे बड़े फिगर स्केटिंग सितारों में एवगेनी प्लुशेंको का नाम सबसे ऊपर आता है. उन्होंने 10 बार रूसी राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीती और अपने करियर में चार ओलंपिक पदक हासिल किए. इनमें दो गोल्ड और दो सिल्वर शामिल हैं. उनकी उपलब्धियों ने उन्हें रूस के सबसे सफल फिगर स्केटर्स में शामिल कर दिया. मेदवेदेवा-जागितोवा ने भी दिखाया रूस का दबदबा रूसी फिगर स्केटिंग की अगली पीढ़ी ने भी दुनिया को अपनी ताकत दिखाई. एवगेनिया मेदवेदेवा ने अपने करियर में कई विश्व रिकॉर्ड बनाए. 2018 PyeongChang Winter Olympics में रूस की अलीना जागितोवा ने महिला सिंगल्स का गोल्ड मेडल जीता, जबकि मेदवेदेवा ने सिल्वर हासिल किया. दोनों ने उस दौर में महिला फिगर स्केटिंग के उच्चतम स्तर को नई ऊंचाई दी. यही वजह है कि रूस को फिगर स्केटिंग की दुनिया की सबसे प्रभावशाली शक्तियों में गिना जाता है. रूस में खेल सिर्फ मनोरंजन नहीं रूस में खेल सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि देश की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान का भी अहम हिस्सा हैं. फुटबॉल और आइस हॉकी बड़े पैमाने पर लोगों को जोड़ते हैं, वॉलीबॉल और बास्केटबॉल की मजबूत क्लब और युवा परंपरा है, जबकि फिगर स्केटिंग ने रूस को ओलंपिक और विश्व मंच पर अलग पहचान दिलाई है. सोवियत संघ के दौर से चली आ रही खेल संस्कृति ने रूस को कई ऐसे चैंपियन दिए हैं, जिन्होंने दुनिया में देश … Read more

खेल विभाग में बंपर भर्ती की तैयारी, 1006 पदों से जिलों से लेकर अकादमी तक मजबूत होगा सिस्टम

 पटना  राज्य में खेल प्रतिभाओं को तराशने और उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के लिए खेल विभाग राज्य में विभिन्न स्तरों पर 1006 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। इनमें 33 जिला खेल पदाधिकारी, स्टेडियमों के लिए 380 प्रशिक्षक, राजगीर राज्य खेल अकादमी के लिए 48 कोच, बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के 301 और बिहार खेल विश्वविद्यालय के 244 पद शामिल हैं। खेल प्राधिकरण व राजगीर खेल विश्वविद्यालय में भी 545 पदों पर नियुक्ति की तैयारी जिला खेल पदाधिकारियों की नियुक्ति अंतिम चरण में है। प्रशिक्षकों की नियुक्ति के लिए परीक्षा की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। खेल व्यवस्था को सुचारु करने के लिए संविदा पर लिपिकीय कर्मियों की नियुक्ति और प्रतिनियुक्ति के माध्यम से आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराने की तैयारी है। नियुक्तियां पूरी होने के बाद जिला स्तर से लेकर राज्य स्तरीय खेल संस्थानों तक प्रशासनिक व्यवस्था और प्रशिक्षण तंत्र को मजबूती मिलेगी। खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि जिलों में खेल पदाधिकारियों, स्टेडियमों में प्रशिक्षकों, राजगीर राज्य खेल अकादमी के प्रशिक्षकों के साथ-साथ खेल प्राधिकरण और खेल विश्वविद्यालय में नियुक्तियों से खेल व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। जिलों में 33 पदाधिकारी संभालेंगे खेल की कमान जिला स्तर पर खेल गतिविधियों को गति देने के लिए 33 जिला खेल पदाधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है। इसके लिए बीपीएससी परीक्षा ले चुका है और अब साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी की जानी है। नियुक्ति के बाद जिलों में खिलाड़ियों की पहचान, खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी को बेहतर तरीके से संभाला जा सकेगा। स्टेडियमों में 380 प्रशिक्षक बढ़ाएंगे खेल प्रतिभाओं की धार राज्य में तैयार हो रहे इंडोर और आउटडोर स्टेडियमों को केवल खेल आयोजन स्थल नहीं, बल्कि नियमित प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इसके लिए विभिन्न खेल विधाओं में 380 प्रशिक्षकों की बहाली होगी। इन पदों के लिए बिहार कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से परीक्षा आयोजित की जाएगी। राजगीर अकादमी में 48 प्रशिक्षक देंगे हाई परफार्मेंस ट्रेनिंग राजगीर में विकसित हो रही आधुनिक खेल सुविधाओं को मजबूत प्रशिक्षण व्यवस्था से जोड़ने के लिए राज्य खेल अकादमी में 48 प्रशिक्षकों की नियुक्ति होगी। अकादमी में उपलब्ध खेल सुविधाओं के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन मिलने से खिलाड़ियों को नियमित और वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षण देने में मदद मिलेगी। खेल प्राधिकरण में 301 पद, विश्वविद्यालय में 244 बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के प्रशासनिक और खेल संबंधी कार्यों को मजबूत करने के लिए 301 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। खेल शिक्षा, प्रशिक्षण और प्रशासनिक व्यवस्था को संस्थागत मजबूती देने के लिए बिहार खेल विश्वविद्यालय में 244 पदों पर नियुक्ति की कार्रवाई चल रही है। संविदा और प्रतिनियुक्ति से भी मजबूत होगा सिस्टम खेल विभाग की विभिन्न इकाइयों में कामकाज को सुचारु रखने के लिए संविदा पर लिपिकीय कर्मियों की नियुक्ति के साथ जरूरत के अनुसार प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भी मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाएगा।  

खेलों की दुनिया में झारखंड की अलग छवि, सीएम सोरेन ने किया मेगा कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन

रांची झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राजधानी रांची में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी खोलने की दिशा में ठोस कदम उठाने का निर्देश अधिकारियों को दिया है। सोरेन ने कहा कि इसके लिए जो भी आवश्यक प्रक्रियाएं हैं, वह जल्द से जल्द पूरी की जाए। मुख्यमंत्री हेमन्त ने कहा कि स्पोट्र्स यूनिवर्सिटी के खुलने से यहां के खेल और खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने के साथ उन्हें आगे बढ़ाने के लिए बेहतर प्लेटफार्म मिलेगा। सोरेन झारखंड मंत्रालय में पर्यटन, कला- संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य मंत्री सुदिव्य कुमार की उपस्थिति में खेल विभाग एवं सीसीएल के वरीय अधिकारियों के साथ मेगा स्पोट्र्स काम्प्लेक्स, होटवार, रांची के प्रस्तावित उन्नयन को लेकर उच्चस्तरीय बैठक कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने खेलगांव में अवस्थित सभी स्टेडियम के अद्यतन हालात की विस्तृत जानकारी ली। सोरेन ने कहा कि मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से झारखंड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान मिली है। देश में बहुत कम ही ऐसे स्पोर्ट्स सेंटर है, जहां अलग-अलग खेलों के स्टेडियम एक ही परिसर में अवस्थित हैं। यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताएं लगातार आयोजित होती आ रही है। ऐसी कई खेल प्रतियोगिताओं का सफल और शानदार आयोजन हम कर चुके हैं। राष्ट्रीय- अंतरराष्ट्रीय की विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं की हमें निरंतर मेजबानी मिलती आ रही है, ऐसे में हमारे स्टेडियम भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के सभी मानकों के अनुकूल हों, इसके लिए खेलगांव में स्थित सभी स्टेडियमों में आधुनिक सुविधाओं के साथ सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त रहनी चाहिए। सोरेन ने कहा कि मेगा स्पोट्र्स कॉम्प्लेक्स में सालों भर कोई ना कोई खेल प्रतियोगिता आयोजित होती रहती है। यहां खिलाड़ियों के नियमित प्रैक्टिस की भी व्यवस्था है। ऐसे में इस स्पोट्र्स कॉम्प्लेक्स का बेहतर से बेहतर इस्तेमाल हो, इसके लिए यहां स्थित स्टेडियमों में जो भी खामियां है, उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। साथ ही खेल आयोजनों को लेकर जो भी जरूरी संसाधनों की जरूरत हो, उसे उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के अपग्रेडेशन में अंतरराष्ट्रीय खेल मानकों के अनुरूप आधुनिक तौर- तकनीक और तरीकों का इस्तेमाल होना चाहिए। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों के स्पेशलाइज्ड एजेंसीज का सहयोग लें। इस बैठक में मंत्री सुदिव्य कुमार, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, सचिव मनोज कुमार, सचिव अरवा राजकमल, खेल निदेशक शेखर जमुआर, झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड के अभियन्ता प्रमुख संजय कुजूर, झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम के महाप्रबंधक अविनाश कुमार दीपक, सीसीएल के सीएमडी एनके सिंह, निदेशक (एचआर ) एचएन मिश्रा, जेएसएसपीएस के सीईओ एनके झा और मास एंड वॉइड एजेंसी के ग्रुप हेड प्रणव कुमार मौजूद रहे।