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महम रैली में माइक फेल मामला: डीआईपीआरओ संजीव सैनी सस्पेंड

महम महम में पांच अप्रैल को हुई विकास रैली में मुख्यमंत्री नायब सैनी के भाषण के दौरान माइक बंद होना डीआईपीआरओ संजीव सैनी पर भारी पड़ गया। विभागीय जांच के बाद मुख्यालय की तरफ उन्हें तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। अभी किसी अन्य को रोहतक का कार्यभार नहीं दिया गया है। मुख्यमंत्री हर हलके में जनसभा कर रहे हैं। इसी कड़ी में महम में पांच अप्रैल को विकास रैली थी। रैली में संबोधन के लिए दो बाइक सैट रखे हुए थे। एक माइक डिवाइस से मंच संचालन के अलावा स्थानीय नेताओं व मंत्रियों का संबोधन हुआ। जबकि मुख्यमंत्री नायब सैनी के लिए अलग से माइक डिवाइस लगाया गया था। मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान अचानक माइक ने काम करना बंद कर दिया। रैली में पीछे मौजूद श्रोताओं को आवाज सुनाई नहीं दे रही थी। पीछे से लोग चिल्लाने लगे तो मुख्यमंत्री ने दूसरे माइक से संबोधन करना पड़ा। चूक की तभी से विभागीय जांच की जा रही थी। बुधवार शाम को मुख्यालय की तरफ से डीआईपीआरओ संजीव सैनी को सस्पेंड करने के आदेश जारी किए गए। वहीं, डीआईपीआरओ संजीव सैनी का कहना है कि माइक की जांच हुई थी। अचानक तकनीकी फाल्ट आ गया।  

कर्मचारियों को एरियर न देना पड़ा भारी, जींद में शिक्षा विभाग के दो अधिकारी निलंबित

जींद. शिक्षा विभाग में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी के 50 जूनियर कर्मियों को स्पेशल केस के तहत एरियर देने पर डायरेक्टर जनरल सेकेंडरी एजुकेशन, हरियाणा ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अधीक्षक जयवीर, उप अधीक्षक रमेश कुमार और लिपिक राजेश कुमार को निलंबित कर दिया है। इन तीनों को विभाग के आदेशानुसार चार सदस्यीय कमेटी गठित कर और मुख्यालय की अनुमति लेकर ही एरियर का लाभ जारी करना था। आदेशानुसार निलंबन के दौरान तीनों कर्मियों की सेवा शिक्षा सदन मुख्यालय पंचकूला पर रहेगी। तीनों कर्मचारी मुख्यालय की अनुमति के बिना स्टेशन नहीं छोड़ सकते। यह कार्रवाई बगैर नियम पूरा किए 50 कर्मचारियों लाभ देने पर की गई है।  एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी 2004 से एरियर सहित अन्य लाभ ले रहा था जबकि अन्य वरिष्ठ कर्मचारियों को यह लाभ नहीं मिल पा रहा था। लाभ न मिलने पर कर्मचारियों ने कोर्ट में याचिका दायर की। इस पर कोर्ट ने शिक्षा विभाग के डायरेक्टर को जांच के आदेश दिए थे। डायरेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों को निर्देश दिए थे कि सीनियर कर्मचारियों की प्रेजेंटेशन की जांच की जाए और सीनियर कर्मचारी एरियर सहित अन्य लाभलेने के हकदार हैं तो उन्हें लाभ दिए जाएं। जांच के दौरान कर्मचारियों को चार सदस्यीय कमेटी बनानी थी। लेकिन विभाग के तीन कर्मियों ने बिना कमेटी बनाए ही प्रेजेंटेशन के आधार पर 50 सीनियर कर्मियों को एरियर के लाभ दे दिए। बाद में शिक्षा विभाग को पता चला कि जूनियर कर्मी को स्पेशल केस के तहत एरियर दिए थे। इस पर शिक्षा विभाग ने 50 सीनियर कर्मियों के एरियर रोक दिए। इस पर 50 सीनियर कर्मियों ने कोर्ट में याचिका दायर की कि उनके एरियर को रोका जा रहा है। इस मामले को अब संज्ञान में लेते हुए अब डायरेक्टर जनरल सेकेंडरी एजुकेशन ने जींद के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अधीक्षक, उप अधीक्षक और लिपिक को निलंबित कर दिया है।

AAP के तीन नेता सस्पेंड, 50 लाख के चेयरमैनी विवाद में जिला प्रधान की रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई

अमृतसर आम आदमी पार्टी में चेयरमैनी दिलाने के नाम पर 50 लाख रुपये मांगने के आरोप के बाद पार्टी हाईकमान ने सख्त कार्रवाई करते हुए तीन नेताओं को सस्पेंड कर दिया। यह कदम जिला प्रधान की रिपोर्ट के आधार पर उठाया गया।  मामला अमृतसर सेंट्रल के ब्लॉक प्रधान रविंदर डाबर से जुड़ा है जिन्होंने हाल ही में चंडीगढ़ स्थित पार्टी दफ्तर के बाहर लाइव होकर आरोप लगाया था कि उनसे चेयरमैनी दिलाने के बदले 50 लाख रुपये की मांग की गई। इस खुलासे के बाद विपक्षी दलों ने सरकार की ईमानदारी पर सवाल उठाए। पार्टी ने अमृतसर गेम्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी नवजोत सिंह ग्रोवर, जिला महासचिव मुखविंदर सिंह विरदी और यूथ विंग के स्टेट उपप्रधान कुनाल धवन को सस्पेंड किया है। वहीं सस्पेंड नेताओं ने कार्रवाई को साजिश बताया। नवजोत ग्रोवर ने कहा कि मामला गंभीर है और मुख्यमंत्री भगवंत मान से निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके। 

वायरल तस्वीरों के बाद बड़ा एक्शन, IPS रतन लाल डांगी सस्पेंड

रायपुर राज्य सरकार ने पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी आईजी IPS रतन लाल डांगी को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उनके आपत्तिजनक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद की गई है। इसका आदेश गृह (पुलिस) विभाग, छग शासन ने जारी किया है। प्रारंभिक तौर पर यह पाया गया है कि IPS रतन लाल डांगी ने अपने पद की गरिमा के अनुरूप आचरण नहीं किया और ऐसा व्यवहार किया जो नैतिकता और सेवा नियमों के खिलाफ है। उन पर पद के प्रभाव का दुरुपयोग करने और स्थापित सामाजिक मानकों का उल्लंघन करने के आरोप भी लगे हैं। आदेश में कहा गया है कि उनकी गतिविधियां सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुईं, जिससे पुलिस विभाग की छवि पर नकारात्मक असर पड़ा। इस आधार पर उनके खिलाफ अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम 1968 के तहत कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। फिलहाल IPS रतन लाल डांगी को निलंबित कर विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। निलंबन अवधि के दौरान रतन लाल डांगी का मुख्यालय पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर निर्धारित किया गया है। जारी आदेश के अनुसार निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। साथ ही सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना वे मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। शासन की इस कार्रवाई को प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने की दिशा में सख्त कदम माना जा रहा है।

श्रम निरीक्षक लक्ष्मण सिंह मरकाम निलंबित

निर्माण श्रमिक पंजीयन में अनियमितता के आरोप में निलंबित रायपुर,  मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना से जुड़े प्रकरण में प्रथम दृष्टया अनियमितता पाए जाने पर जिला जांजगीर-चांपा के श्रम निरीक्षक लक्ष्मण सिंह मरकाम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला पंचायत उपाध्यक्ष, जिला जांजगीर-चांपा द्वारा 02 मार्च 2026 को कलेक्टर को शिकायत भेजी गई थी। इस संबंध में विधानसभा सदस्य बालेश्वर साहू द्वारा विधानसभा में ध्यानाकर्षण के जरिए मुद्दा उठाया गया। इसके बाद कलेक्टर जांजगीर-चांपा द्वारा कराई गई प्राथमिक जांच में निर्माण श्रमिक के पंजीयन में प्रथम दृष्टया अनियमितता परिलक्षित हुई। जांच में पंजीयन आवेदन स्वीकृत करने वाले क्षेत्रीय श्रम निरीक्षक लक्ष्मण सिंह मरकाम, कार्यालय श्रम पदाधिकारी जिला जांजगीर- चांपा की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए विभागीय जांच संस्थित की गई है।        निलंबित श्रम निरीक्षक   मरकाम के निलंबन अवधि के दौरान मुख्यालय कार्यालय सहायक श्रमायुक्त, जिला बिलासपुर निर्धारित किया गया है। साथ ही उन्हें निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। यह आदेश श्रमायुक्त के अनुमोदन से अपर श्रमायुक्त (स्थापना), कार्यालय श्रमायुक्त, छत्तीसगढ़, नवा रायपुर, अटल नगर द्वारा आज सोमवार को जारी किया गया है।  

नींबू-पानी बेचने वाला बन गया करोड़पति, 782 करोड़ के गबन मामले में जांच जारी, दो निगम अधिकारी सस्पेंड

चंडीगढ़  चंडीगढ़ और हरियाणा में 782 करोड़ रुपए के गबन का मास्टरमाइंड विक्रम वधावा सेक्टर-19 स्थित शराब ठेके के सामने नींबू-पानी की रेहड़ी लगाता था। धीरे-धीरे उसने शहर के कई कारोबारियों, बिल्डरों और ब्यूरोक्रेट्स से संबंध बना लिए, जिसके बाद वह करोड़पति बन गया। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी के पास चंडीगढ़ के सेक्टर-33 और सेक्टर-36 में करोड़ों रुपए की कोठियां हैं। इसके अलावा मोहाली के खरड़ क्षेत्र में उसने प्रिज्मा रेजीडेंसी एलएलपी के नाम से एक हाउसिंग सोसाइटी भी विकसित की है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट में सबसे बड़ा निवेश रिभव ऋषि की ओर से किया गया था। सूत्रों के मुताबिक आरोपी ने पुलिस पूछताछ में कई ब्यूरोक्रेट्स और कारोबारियों के नाम लिए हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इन लोगों के साथ विक्रम वधावा के क्या संबंध थे और किस तरह से इनसे काम करवाया जाता था। आरोपी वधावा से चंडीगढ़ पुलिस पूछताछ कर रही है। लुकआउट सर्कुलर के बाद पकड़ा गया हरियाणा में 590 करोड़ रुपए के गबन में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि ने जब पूछताछ में विक्रम वधावा का नाम लिया तो वह रातों-रात चंडीगढ़ से शिमला भागकर वहां छिप गया था। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि 27 फरवरी की रात वह प्राइवेट गाड़ी से शिमला पहुंचा और वहां दो दिन तक छिपा रहा। इसी दौरान उसने अपने खास लोगों के जरिए यह अफवाह भी फैलवा दी कि वह विदेश भाग सकता है, ताकि जांच एजेंसियों का ध्यान भटकाया जा सके। इसके बाद हरियाणा विजिलेंस ने उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी कर दिया। LOC जारी होने के बाद विक्रम शिमला से आधी रात को निकलकर मोहाली पहुंच गया और वहां रिश्तेदारों व दोस्तों के यहां छिपता रहा। बाद में वह खरड़ के एक फ्लैट में पहुंचा, जहां चंडीगढ़ पुलिस को सूचना मिल गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लिया। पत्नी और बच्चों के नाम भी अकाउंट प्राथमिक जांच में पता चला है कि विक्रम वधावा के चंडीगढ़ के चार प्राइवेट बैंकों में खाते हैं। इसके अलावा उसकी पत्नी और दो बच्चों के नाम से भी अलग-अलग बैंक अकाउंट हैं। जांच एजेंसियों को जानकारी मिली है कि इन खातों में करोड़ों रुपए जमा हैं। चंडीगढ़ पुलिस ने संबंधित बैंकों को खातों की पूरी जानकारी और स्टेटमेंट उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा है।

शिकायतों पर सख्त रुख: खेल मंत्री गौतम ने कोच को किया सस्पेंड, विभाग में हड़कंप

चंडीगढ़ खेल मंत्री गौरव गौतम ने झन्जर जिले के गांव खरहर के ग्रामीणों द्वारा प्रशिक्षक अजय राठी के खिलाफ ड्यूटी में लापरवाही तथा बच्चों को नियमित प्रशिक्षण न देने संबंधी शिकायत पर कोच को निलंबित करने के आदेश जारी किए थे। खेल विभाग ने सोमवार को कोच को निलंबित कर दिया और जांच अवधि तक हैड ऑफिस पंचकूला में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए। पिछले ही महीने गांव खरहर जिला झज्जर में कार्यरत एथलैटिक्स कोच के ट्रांसफर हो जाने पर नए कोच अजय राठी को विभाग द्वारा स्थानांतरित किया गया था। इसके पश्चात नए कोच अजय राठी के खिलाफ लगातार मैदान पर अनुपस्थिति की शिकायत गांव के सरपंच और अन्य सदस्यों द्वारा डी. एस. ओ. झज्जर को भी दी गई परंतु कोई उचित कार्रवाई न होने के कारण गांववासियों ने खेल मंत्री को कोच के अनुचित व्यवहार से खिलाड़ियों के होने वाले नुकसान से अवगत करवाया था। खेल मंत्री ने जिला खेल अधिकारी और निजी खेल सलाहकार को औचक निरीक्षण के लिए भेजा जिसमें कोच सुबह की ट्रेनिंग से नदारद पाया गया। इस दौरान मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों ने भी अधिकारियों को अवगत करवाया कि संबंधित कोच मैदान पर सिर्फ शाम की ट्रेनिंग पर हफ्ते में 1-2 दिन मौजूद रहते हैं और अधिकांश खिलाड़ी स्वयं ही मैदान पर प्रैक्टिस करते हैं। इस संबंध में जब फोन के माध्यम से कोच से अनुपस्थिति का कारण पूछा गया तो कोच अजय द्वारा फोन पर भी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया। 

पुल स्पान दुर्घटना के बाद कार्रवाई तेज, प्रबंधक को किया गया निलंबित

बरेली–पिपरिया मार्ग पर पुल का स्पान गिरने की घटना में प्रबंधक निलंबित वर्तमान एवं तत्कालीन संभागीय प्रबंधक एवं सहायक महाप्रबंधकों को नोटिस मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित भोपाल बरेली–पिपरिया मार्ग (किमी 4/10) पर स्थित उच्च स्तरीय पुल का एक स्पान सोमवार को मरम्मत कार्य के दौरान अचानक ढह गया, जिससे मोटरसाइकिल से गुजर रहे चार युवक नीचे गिरकर घायल हो गए। सभी घायलों का उपचार बरेली सिविल अस्पताल में जारी है। यह पुल वर्ष 1980 में लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित किया गया था और वर्ष 2010 से म.प्र. सड़क विकास निगम के संधारण में है। रैम्स सॉफ्टवेयर से किए गए सर्वे में पुल के विभिन्न अवयवों जैसे स्लैब रीइन्फोर्समेंट में जंग, एक्सपेंशन जॉइंट में खराबी तथा प्रोटेक्शन वर्क की कमजोर स्थिति को देखते हुए इसके मरम्मत एवं पुनर्निर्माण के लिए ₹98 लाख की स्वीकृति 29 मई 2025 को प्रदान की गई थी। घटना के तुरंत बाद विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित फील्ड स्टाफ की जिम्मेदारी तय कर प्रबंधक  ए.ए. खान को निलंबित कर दिया तथा वर्तमान एवं तत्कालीन संभागीय प्रबंधक एवं सहायक महाप्रबंधकों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया। साथ ही मुख्य अभियंता  गोपाल सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है, जो सात दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। रिपोर्ट के आधार पर विभाग द्वारा आगे की कठोर कार्रवाई की जाएगी। पुल का स्पान गिर जाने के कारण मार्ग पर यातायात प्रभावित हो गया है, जिसे अब वैकल्पिक डायवर्जन मार्ग से संचालित किया जा रहा है। फिलहाल यातायात को ग्राम नागपुरिया में स्थित पुरानी पुलिया के माध्यम से मोड़ा गया है। इसके साथ ही क्षतिग्रस्त पुल के समीप ह्यूम पाइप डालकर अस्थायी डायवर्जन भी बनाया जा रहा है, ताकि वाहनों की आवाजाही सुचारू रखी जा सके। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा उपाय बढ़ा दिए गए हैं और मरम्मत कार्य की निगरानी तीव्र की गई है।  

जेल प्रशासन पर बड़ी कार्रवाई: हजारीबाग जेपी कारा के 12 कर्मी निलंबित/बर्खास्त

हजारीबाग झारखंड के हजारीबाग स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा में लापरवाही और अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के बाद सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है। जेल अधीक्षक की अनुशंसा पर जेलर समेत छह सरकारी कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि संविदा पर कार्यरत छह भूतपूर्व सैनिक कक्षपालों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि हाल ही में एक पूर्व जेल सिपाही की गिरफ्तारी के बाद हुई विभागीय जांच में कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। जांच में यह पाया गया कि कारा के अंदर बाहरी व्यक्तियों को अनधिकृत रूप से प्रवेश की अनुमति दी जा रही थी। कुछ कर्मियों पर बंदियों को अनुचित सुविधाएं उपलब्ध कराने के भी आरोप लगे हैं। प्रशासन ने निलंबित कर्मियों के विरुद्ध विभागीय जांच के आदेश जारी किए हैं। वहीं बर्खास्त संविदाकर्मियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई पर भी विचार किया जा रहा है। इस कार्रवाई के बाद जेल प्रशासन में भारी हड़कंप मच गया है। वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि 'जेल व्यवस्था में किसी भी प्रकार की ढिलाई, अनुशासनहीनता या भ्रष्टाचार को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।' राज्य कारा निदेशालय ने घटना के बाद सभी जिलों के जेलों को सतर्क किया है और सुरक्षा मानकों के सख्त पालन का निर्देश जारी किया है।  

हिरासत में मौत से हड़कंप: डूंगरपुर में पुलिस पर कार्रवाई, धरना प्रदर्शन जारी

बांसवाड़ा/डूंगरपुर बांसवाड़ा के समीपवर्ती डूंगरपुर जिले के दोवड़ा थाना क्षेत्र में चोरी के आरोप में गिरफ्तार किए गए देवसोमनाथ निवासी दिलीप अहारी की पूछताछ के दौरान तबीयत बिगड़ गई थी। जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उसे उदयपुर के महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय रेफर किया गया, जहां मंगलवार दोपहर उसने दम तोड़ दिया। इस घटना को लेकर अब बवाल मचा हुआ है।  धरने पर बैठे परिजन और ग्रामीण युवक की मौत के बाद परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण पहले दोवड़ा थाने और फिर कलेक्ट्री के बाहर धरने पर बैठ गए। उनका कहना है कि पुलिस की पिटाई से दिलीप की मौत हुई है। मृतक के परिवार और ग्रामीणों ने एक करोड़ रुपये का मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और दोवड़ा थाने में तैनात सभी पुलिसकर्मियों को बर्खास्त करने की मांग की है। मंत्री, सांसद और विधायक पहुंचे, वार्ता विफल घटना के बाद मंगलवार शाम को जनजाति विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी, सांसद मन्नालाल रावत, विधायक गणेश घोघरा, उमेश डामोर, अनुतोष रोत सहित आदिवासी समाज के प्रतिनिधि प्रशासन के साथ बातचीत में शामिल हुए। देर रात तक कलेक्टर अंकित कुमार सिंह और एसपी मनीष कुमार ने वार्ता की, लेकिन सहमति नहीं बन पाई। बुधवार शाम तक भी ग्रामीण कलेक्ट्री परिसर में डटे रहे।   पांच पुलिसकर्मी निलंबित मामले की गंभीरता को देखते हुए डूंगरपुर पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार ने कार्रवाई की है। दोवड़ा थानाधिकारी तेजकरण सिंह, सहायक पुलिस निरीक्षक वल्लभराम, हेड कांस्टेबल सुरेश कुमार, कांस्टेबल पुष्पेंद्र सिंह और माधव सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन के बाद इनका मुख्यालय डूंगरपुर रिजर्व पुलिस लाइन में कर दिया गया है।