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संगीतधानी ग्वालियर में 101वें तानसेन संगीत समारोह का शुभारंभ, CM डॉ. मोहन यादव देंगे शुरुआत

ग्वालियर संगीतधानी ग्वालियर की फिजाएं एक बार फिर सुरों की बारिश से सराबोर होने जा रही हैं। विश्व प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत का सबसे बड़ा आयोजन 101वां तानसेन संगीत समारोह आज से शुरू हो रहा है। हजीरा स्थित तानसेन समाधि स्थल पर आयोजित इस समारोह का शुभारंभ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। इस बार मंच ग्वालियर के प्रसिद्ध चतुर्भुज मंदिर (शून्य मंदिर) की तर्ज पर तैयार किया गया है, जो आयोजन को और भी भव्य बना रहा है।  15 से 19 दिसंबर तक चलने वाले इस पांच दिवसीय समारोह में देश-विदेश के विश्वविख्यात शास्त्रीय संगीत कलाकार सुर सम्राट मियां तानसेन को स्वरांजलि अर्पित करेंगे। समारोह के पहले दिन शाम 6 बजे से राष्ट्रीय तानसेन अलंकरण और राजा मानसिंह तोमर सम्मान वितरण समारोह होगा। इसमें मूर्धन्य संगीतज्ञ पंडित राजा काले (2024) और पंडित तरुण भट्टाचार्य (2025) को तानसेन अलंकरण से विभूषित किया जाएगा। वहीं साधना परमार्थिक संस्थान समिति मंडलेश्वर और रागायन संगीत समिति ग्वालियर को राजा मानसिंह तोमर सम्मान प्रदान किया जाएगा।

तानसेन समारोह 2025 में 114 कलाकार करेंगे लाइव पेंटिंग, 10 राष्ट्रीय स्तर के चित्रकार भी भाग लेंगे

ग्वालियर  विश्वविख्यात अखिल भारतीय तानसेन समारोह की शुरुआत 15 दिसंबर से तानसेन समाधि स्थल पर होने जा रही है। इस दौरान चार दिन तक सजीव चित्रांकन भी रहेगा, जिसकी शुरुआत समारोह की शुरुआत के साथ 15 दिसंबर से ही होगी। इसमें देशभर से 114 कलाकार भाग लेंगे। वे समारोह के दौरान अपने कल्पना के रंगों को कैनवास पर उकेरते नजर आएंगे। इनमें राष्ट्रीय स्तर के ख्यातिलब्ध 10 कलाकार भी लाइव चित्रांकन करेंगे। ललित कला संस्थान इंदौर, ललित कला संस्थान धार, ललित कला संस्थान खंडवा और ललित कला संस्थान जबलपुर के छात्र-छात्राएं भी चित्र बनाते नजर जाएंगे। संस्कृति विभाग ने सजीव चित्रांकन के लिए कलाकारों की सूची जारी कर दी है। उल्लेखनीय है कि सजीव चित्रांकन का लुत्फ संगीतप्रेमी 18 दिसंबर तक समाधि स्थल पर सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक उठा सकेंगे। 19 दिसंबर को सुबह की सभा बेहट और शाम की सभा गूजरी महल में होगी। इसके पूर्व 14 दिसंबर को इंटक मैदान में पूर्व रंग गमक कार्यक्रम होगा, जिसमें सूफी गायिका जसपिंदर नरूला प्रस्तुति देंगी। पुणे से नवनाथ, मुंबई से सुमित्रा, कोल्हापुर से अरुण बनाएंगे पेंटिंग सजीव चित्रांकन में शहर के 30 कलाकारों को मौका दिया जा रहा है। साथ ही राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय एवं ललित कला संस्थान ग्वालियर के 50 छात्र-छात्राएं, प्रदेश के ललित कला संस्था इंदौर, धार, खंडवा, जबलपुर से 24 कलाकार शामिल होंगे। इसके अलावा 10 राष्ट्रीय स्तर के कलाकार शामिल होंगे, जिनमें भोपाल से आलोक भावसार, पुणे से नवनाथ क्षीरसागर, कोल्हापुर से अरुण सुतार, जयपुर से कृष्ण कुमार कुंडारा, भुवनेश्वर से रघुनाथ साहू, भोपाल से दुर्गा बाई व्यास, दिल्ली से सुमित्रा अहलावत, मुंबई से निशिकांत पलांदे, उदयपुर से मदीप शर्मा, महाराष्ट्र से संदीप अहीर आएंगे। प्रदर्शनी में 76 कलाकारों की पेंटिंग का होगा प्रदर्शन समारोह के दौरान तानसेन समारोह की प्रस्तुतियों पर एकाग्र चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसमें 76 कलाकारों की पेंटिंग शामिल की गई हैं, जिन्हें डिस्प्ले किया जाएगा। संगीत रसिकों के अवलोकन के लिए यह सुबह 10 बजे से रात तक खुली रहेगी।

15 दिसंबर से शुरू होगा तानसेन समारोह 2025, इन कलाकारों को मिला प्रतिष्ठित तानसेन सम्मान

ग्वालियर  राष्ट्रीय तानसेन सम्मान और राष्ट्रीय राजा मानसिंह तोमर सम्मान की घोषणा शुक्रवार को संस्कृति विभाग ने की। ये सम्मान 15-19 दिसंबर तक ग्वालियर में तानसेन समारोह में दिए जाएंगे। संस्कृति संचालक एनपी नामदेव ने बताया, 2024 के लिए तानसेन सम्मान पं. राजा काले मुंबई, 2025 के लिए पं. तरुण भट्टाचार्य, कोलकाता को दिया जाएगा। तोमर सम्मान 2024 के लिए साधना परमार्थिक संस्थान समिति, खरगोन व 2025 के लिए रागायन, ग्वालियर को दिया जाएगा। सम्मानित कलाकार एवं संस्था को 5 लाख की सम्मान राशि एवं सम्मान पट्टिका भेंट की जाती है। संतूर वादक पं. भट्टाचार्य से पत्रिका की विशेष बातचीत पत्रिका से विशेष बातचीत में संतूर वादक पं. भट्टाचार्य ने कहा, यह मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है। उन्होंने कहा, ग्वालियर के तानसेन समारोह (Tansen Samaroh) वह मंच है, जहां से हम अपने संगीत को पूरी दुनिया तक पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा, वे समारोह में अब तक चार बार प्रस्तुति दे चुके हैं। मप्र के श्रोता बेहद सटीक और हार्डकोर हैं, वे हर स्वर व ताल समझते हैं। शांति और अमन का संदेश फैला सकते हैं शास्त्रीय संगीत की महत्ता पर पं. भट्टाचार्य ने कहा, इसके जरिए हम दुनिया में शांति का संदेश फैला सकते हैं। 10 साल तक शास्त्रीय संगीत सिखाने से बच्चों का मन पूरी तरह से बदल सकता है। संतूर के बारे में कहा, यह वीणा की तरह सततंरी वाद्य है। उल्लेख वेद-पुराणों में भी मिलता है। संतूर में मैंने कई प्रयोग किए हैं। शास्त्रीय संगीत (Tansen Samaroh) का आकर्षण कायम है। स्कूल-कॉलेज के बच्चों में रुचि बढ़ी है।