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तारिक रहमान हो सकते हैं बांग्लादेश के अगले पीएम, बचपन की जेल से लेकर सत्ता तक का अनोखा सफर

ढाका  बांग्लादेश में आम चुनाव के बाद राजनीतिक तस्वीर तेजी से साफ होती दिख रही है. मतगणना के बीच बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने जीत का दावा किया है और कई मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि 300 सदस्यीय संसद में पार्टी 151 से ज्यादा सीट हासिल कर चुकी है, जो सरकार बनाने के लिए पर्याप्त मानी जाती है. हालांकि निर्वाचन आयोग की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है और कुछ सीटों के नतीजे आने बाकी हैं. बीएनपी ने सोशल मीडिया पर कहा कि वह बहुमत के साथ सरकार बनाने के लिए तैयार है. 200 से ज्यादा सीटों पर बढ़त की भी खबर है. चुनाव जीतने वाली पार्टी उस अंतरिम प्रशासन की जगह लेगी, जिसने अगस्त 2024 में आवामी लीग सरकार के हटने के बाद सत्ता संभाली थी. इसी बीच यह भी खबर है कि पार्टी प्रमुख तारिक रहमान शनिवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. बांग्लादेश चुनाव BNP के जीतने के साथ ही विदेशों से प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रहमान को जीत पर बधाई देते हुए कहा कि यह बांग्लादेश की जनता के उनके नेतृत्व पर भरोसे को दिखाता है और भारत साझा विकास लक्ष्यों पर साथ काम करने को तैयार है. अमेरिका ने भी चुनाव को सफल बताते हुए शुभकामनाएं दी हैं. वहीं पाकिस्तान के नेतृत्व की ओर से भी बधाई संदेश भेजे गए हैं. बांग्लादेश चुनाव को बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच सीधी टक्कर माना गया, क्योंकि आवामी लीग मैदान में नहीं थी. जमात ने मतगणना में देरी और हेरफेर के आरोप लगाए हैं और चेतावनी दी है कि जनादेश छीना गया तो बड़ा आंदोलन होगा. नेशनल सिटिजन पार्टी ने भी कुछ सीटों पर धांधली के आरोप लगाए. दूसरी ओर निर्वाचन आयोग ने मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नतीजों में उतार-चढ़ाव सामान्य है. गुरुवार को देशभर में 299 सीटों पर मतदान गुरुवार सुबह 7:30 बजे शुरू होकर शाम 4:30 बजे तक चला, जिसके बाद तुरंत मतगणना शुरू कर दी गई. चुनाव के दौरान व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए और करीब 10 लाख सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई, जिसे अब तक की सबसे बड़ी चुनावी तैनाती माना जा रहा है. आयोग के अनुसार हजारों केंद्रों से अलग-अलग समय पर नतीजे आने के कारण अंतिम तस्वीर बनने में वक्त लग रहा है. बीएनपी पिछली बार 2001 से 2006 के बीच सत्ता में रही थी. पार्टी ने पहले ही साफ किया था कि जीत मिलने पर तारीक रहमान प्रधानमंत्री बनेंगे. करीब 17 साल विदेश में रहने के बाद पिछले साल देश लौटे रहमान ने समर्थकों से जश्न के बजाय संयम रखने और दुआ करने की अपील की है. फिलहाल आधिकारिक नतीजों की घोषणा का इंतजार है, लेकिन शुरुआती संकेत बताते हैं कि बांग्लादेश की राजनीति में एक नया दौर शुरू होने की तैयारी है. 4 साल की उम्र में जेल से PM की कुर्सी तक बांग्लादेश के 2026 के आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की ऐतिहासिक जीत में तारिक रहमान की रणनीतिक और करिश्माई भूमिका ने केंद्रबिंदु की तरह काम किया। लंबे निर्वासन और राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने पार्टी को एकजुट किया, युवा मतदाताओं को आकर्षित किया और जनसमर्थन की नई लहर खड़ी की। यह जीत सिर्फ बीएनपी की नहीं, बल्कि तारिक रहमान की नेतृत्व क्षमता और राजनीतिक दृष्टि का प्रतीक बनकर उभरी है। इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि बांग्लादेश की राजनीति दशकों से दो मुख्य पारिवारिक‑राजनीतिक धारणाओं के बीच घूमती रही है। अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत खालिदा जिया की विरासत के बीच। ऐसे में 2026 के चुनावों में बीएनपी की जीत और तारिक रहमान की उभरती भूमिका यह संकेत देती है कि अब देश का नेतृत्व एक नए राजनीतिक दौर में प्रवेश कर सकता है।  पहले तारिक रहमान के बारे में जानिए 20 नवंबर 1965 को जन्मे तारिक रहमान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के वरिष्ठ नेता और पार्टी के चेयरमैन हैं। वह पार्टी की सर्वोच्च राजनीतिक इकाई का नेतृत्व करते हैं। उन्होंने ढाका यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना शुरू किया। वे बांग्लादेश के इतिहास में एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता जिया उर रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति और स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे, जिनकी 1981 में हत्या हो गई थी। उनकी मां बेगम खालिदा जिया 1991 से 1996 व 2001 से 2006 तक बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री रहीं और बीएनपी की प्रमुख चेयरपर्सन थीं। अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दिनों से ही तारिक अपने परिवार की राजनीति में शामिल रहे हैं और बीएनपी के भीतर स्थायी भूमिका निभाई है।  जब चार साल की उम्र में जेल गए थे तारिक तारिक रहमान, जिन्हें बांग्लादेश की राजनीति में अक्सर तारिक जिया कहा जाता है, अपने परिवार के नाम से ही पहचान रखते हैं। 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान वे केवल चार साल के थे और कुछ समय के लिए हिरासत में भी रहे। इसी वजह से उनकी पार्टी बीएनपी उन्हें युद्ध के सबसे कम उम्र के बंदियों में शामिल बताकर सम्मान देती है। उनकी राजनीतिक पहचान भी इसी पारिवारिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़ी है। छोटे उम्र में संघर्ष और परिवार की विरासत ने उन्हें बांग्लादेश की राजनीति का एक प्रमुख चेहरा बना दिया।  अब तारिक रहमान की मां खालिदा जिया के बारे में जानिए तारिक रहमान की मां और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया ने 3 जनवरी 1982 को पहली बार बीएनपी के सदस्य के तौर पर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। बाद में वे बीएनसपी की अध्यक्ष बनीं और अपनी मौत तक वह इस पद पर रहीं। बांग्लादेश में सैन्य शासन के खिलाफ खालिदा जिया एक प्रमुख आवाज बनकर उभरीं। लोगों को सैन्य शासन के खिलाफ एकजुट करने में खालिदा जिया ने अहम भूमिका निभाई।  जिया 1991 में पहली बार बनीं पीएम खालिदा जिया साल 1991 में पहली बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं। इसके साथ ही बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने का गौरव भी हासिल किया। इसके बाद साल 2001 से 2006 तक दूसरी बार भी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं। बताते चले कि खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त 1946 को अविभाजित भारत के दिनाजपुर जिले … Read more

खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान जल्द लौटेंगे बांग्लादेश, आम चुनाव की सुगबुगाहट बढ़ी

ढाका  बांग्लादेश में आगामी चुनाव को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है. बांग्लादेश की नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री डॉ. खांडेकर मोशर्रफ हुसैन ने बताया कि देश में आगामी आम चुनाव का कार्यक्रम नवंबर या दिसंबर में घोषित किया जाएगा. उन्होंने भरोसा जताया कि चुनाव फरवरी 2026 तक जरूर संपन्न हो जाएगा और ये स्वतंत्र एवं निष्पक्ष होगा, ताकि जनता अपने सांसद चुन सके और सरकार बना सके. साथ ही उन्होंने बताया कि आगामी आम चुनाव में बीएनपी से निर्वासित नेता तारिक रहमान 17 साल बाद जल्द ही लंदन से बांग्लादेश लौटेंगे. मौजूदा चुनाव प्रणाली पर जोर डॉ. हुसैन ने बांग्लादेश की पारंपरिक चुनाव प्रणाली पर उठा रहे सवालों बोलते हुए कहा, 'देश में प्रत्यक्ष मतदान के माध्यम से ही सांसद चुने जाते हैं, जहां मतदाता किसी व्यक्ति को वोट देते हैं, न कि किसी दल को.' उन्होंने जमात-ए-इस्लामी के जनसंपर्क द्वारा उठाई जा रही (PR) प्रणाली की मांग को अप्रासंगिक बताया और कहा कि जनसंपर्क प्रणाली में मतदाता किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि किसी पार्टी को वोट देंगे… सांसद पार्टी के सदस्य होंगे. वे जनता के प्रति जवाबदेह नहीं होंगे. बांग्लादेश में इसकी उम्मीद नहीं है. इसलिए, हमारा दृढ़ विश्वास है कि बांग्लादेश में चुनाव वर्तमान प्रणाली के अनुसार ही होंगे. और कई लोकतांत्रिक देशों में यही व्यवस्था है. उन्होंने ब्रिटेन और भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि इन लोकतंत्रों में भी सांसदों का सीधा चुनाव जनता करती है और फिर वे संसद में जाकर सरकार बनाते हैं. अंतरिम सरकार पर भरोसा BNP नेता ने वर्तमान अंतरिम सरकार की तारीफ की और कहा कि सत्ता संभालते वक्त उसने जनता से मताधिकार जल्द लौटाने का वादा किया था. उन्होंने कहा कि हमें विश्वास है कि अंतरिम सरकार जनता से किया अपना वादा निभाएगी और हमें उम्मीद है कि चुनाव फरवरी 2026 में होंगे. तारिक रहमान की वापसी तारिक रहमान के बांग्लादेश लौटने के सवाल में उन्होंने कहा, 'हां हमने सुना है कि उन्होंने खुद घोषणा की है कि वह जल्द ही आएंगे और इसी तैयार भी चल रही है. हम सभी चुनाव आयोग द्वारा घोषित चुनाव कार्यक्रम का इंतजार कर रहे हैं, ताकि वह आकर चुनाव में भाग ले सकें. हमें उम्मीद है कि तारिक रहमान जल्द ही बांग्लादेश आएंगे.' कौन हैं तारिक रहमान तारिक रहमान दिवंगत राष्ट्रपति जियाउर्रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के पुत्र हैं, जिन्हें देश में अनुपस्थिति में कई मामलों में सजा सुनाई गई थी. शेख हसीना के अपदस्थ होने के बाद उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया है. दरअसल, जुलाई-अगस्त 2024 में बांग्लादेश में छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के कारण प्रधानमंत्री शेख हसीना को पीएम पद छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी. इसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हुआ. यूनुस ने लंदन जाकर तारिक रहमान से मुलाकात की और फरवरी 2026 में चुनाव की घोषणा की. उधर, अंतरिम सरकार ने हसीना की आवामी लीग पार्टी की गतिविधियां निलंबित कर दीं और चुनाव आयोग ने पार्टी का पंजीकरण भी रद्द कर दिया. इससे लगता है कि आवामी लीग को आगामी आम चुनाव में भाग लेने की अनुमति नहीं मिलेगी.