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तारिक रहमान के सत्ता में आने से बदलेगा भारत-बांग्लादेश समीकरण, हिन्दुओं पर क्या असर?

ढाका पड़ोसी देश की कमान संभालने जा रहे नए नेतृत्व ने 'बांग्लादेश फर्स्ट' नीति की बात कही है, जो काफी हद तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति से प्रेरित बताई जा रही है। पूर्वी पड़ोसी देश बांग्लादेश में एक दिन पहले (12 फरवरी को) हुए संसदीय चुनावों में तारिक रहमान की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने भारी बहुमत हासिल की है। कुल 299 में से 200 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की है। इन नतीजों से स्पष्ट है कि तारिक रहमान अब बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। वह पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। तारिक रहमान ने इन चुनावों में जमात-ए-इस्लामी और छात्रों की पार्टी नेशनल सिटीजन पार्टी के गठबंधन को करारी शिकस्त दी है। इस राजनीतिक बदलाव का असर केवल बांग्लादेश तक सीमित नहीं होगा, बल्कि पड़ोसी भारत और क्षेत्रीय भू-राजनीति पर भी इसका साफ असर पड़ सकता है। भारत-बांग्लादेश रिश्तों में नई शुरुआत की उम्मीद भारत ने चुनाव परिणाम आने से पहले ही बांग्लादेश के नए नेतृत्व को बधाई देकर यह संकेत दिया कि वह संबंधों को फिर से मजबूत करना चाहता है। यह खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में ठंडापन आ गया था। भारत की नजर में BNP को अक्सर कट्टरपंथी विचारधारा वाली जमात-ए-इस्लामी के मुकाबले ज्यादा लोकतांत्रिक विकल्प माना जाता रहा है। बांग्लादेश फर्स्ट नीति और संतुलन की रणनीति पड़ोसी देश की कमान संभालने जा रहे नए नेतृत्व ने 'बांग्लादेश फर्स्ट' नीति की बात कही है, जो काफी हद तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति से प्रेरित बताई जा रही है। इसका मतलब यह हो सकता है कि बांग्लादेश भारत, चीन और पाकिस्तान, तीनों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की कोशिश करेगा। यह भारत के लिए राहत की बात हो सकती है क्योंकि अंतरिम सरकार के दौरान मोहम्मद यूनुस प्रशासन का जोर पाकिस्तान और चीन के साथ नजदीकी बढ़ाने पर रहा था। ऐतिहासिक तनाव बनाम व्यावहारिक मजबूरी भारत और बांग्लादेश के बीच लगभग 4000 किलोमीटर लंबी सीमा, व्यापार, बिजली आपूर्ति और कनेक्टिविटी जैसे मजबूत संबंध हैं। इसलिए दोनों देशों के लिए सहयोग जरूरी माना जाता है, चाहे दोनों के बीच राजनीतिक मतभेद क्यों न हों। हालांकि बांग्लादेश की नई युवा पीढ़ी में भारत को लेकर संदेह भी बढ़ा है, खासकर तब से जब शेख हसीना भारत में शरण लेकर रह रही हैं। भारत की कूटनीतिक सक्रियता दूसरी तरफ, भारत ने पिछले एक साल में BNP नेतृत्व के साथ संबंध सुधारने की कोशिश तेज की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बीमारी के समय समर्थन जताया था। पिछले साल, जब तारिक की मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया हेल्थ प्रॉब्लम से जूझ रही थीं, तो प्रधानमंत्री मोदी ने सबके सामने चिंता जताई और भारत का सपोर्ट ऑफर किया। BNP ने तुरंत शुक्रिया अदा करते हुए इसका जवाब दिया था। कुछ दिनों बाद, खालिदा ज़िया की मौत के बाद, विदेश मंत्री एस जयशंकर 2024 की अशांति के बाद ढाका जाने वाले पहले भारतीय नेता बने और तारिक रहमान से मिले। उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक पर्सनल लेटर भी उन्हें सौंपा था। PM मोदी ने भेजा बधाई संदेश शुक्रवार को PM मोदी तारिक रहमान को बधाई देने वाले पहले नेताओं में से एक थे। उन्होंने ट्वीट किया, "मैं हमारे कई तरह के रिश्तों को मज़बूत करने के लिए आपके साथ काम करने का इंतजार कर रहा हूँ।" साफ है कि पीएम मोदी ने पुराने कड़वे अतीत को पीछे छोड़ते हुए, सावधानी से द्विपक्षीय संबंधों को तेजी से आगे बढ़ाने के संकेत दिए हैं। बांग्लादेश के हिंदुओं के लिए क्या संकेत? हाल के वर्षों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमलों की घटनाओं को लेकर चिंता रही है। ऐसे में ये अटलें लगना स्वाभाविक है कि नए नेतृत्व को लेकर हिन्दुओं के लिए क्या संकेत हैं। दरअसल, रहमान ने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि धर्म व्यक्तिगत है लेकिन राज्य सभी नागरिकों का है। अगर तारिक रहमान की यह नीति जमीन पर लागू होती है, तो बांग्लादेश के लगभग 8% हिंदू समुदाय के लिए सुरक्षा और भरोसा बढ़ सकता है।

आज बांग्लादेश में स्टार एंट्री, 17 साल पहले बेल लेकर लंदन फरार थे तारिक रहमान

ढाका  बांग्लादेश में तारिक रहमान ने हीरो जैसी एंट्री की है। गुरुवार को उनके समर्थन में लाखों लोगों की भीड़ उमड़ी। उन्होंने भी मां, माटी और मानुष वाला संदेश देने की कोशिश की। बांग्लादेश की जमीन पर पहुंचकर वह नंगे पैर खड़े हुए, मां खालिदा जिया से मुलाकात की और बांग्ला मानुष के लिए भविष्य की योजनाओं को लेकर बात की। तारिक रहमान का बांग्लादेश के उन दो परिवारों में से एक से नाता रहा है, जो देश की राजनीति की धुरी रहे हैं। उनमें से एक परिवार की नेता शेख हसीना इन दिनों भारत में शरण लिए हुए हैं। वहीं दूसरा परिवार बेगम खालिदा जिया का है, जो फिलहाल बीमार चल रही हैं। तारिक रहमान उनके ही बेटे हैं। तारिक के पिता जिया उर रहमान भी पीएम रह चुके हैं। रहमान की कहानी भी कम रोचक नहीं है। वह 2008 में उस वक्त लंदन निकल गए थे, जब उन्हें जेल से बेल पर रिहाई मिली थी। इसी दौरान वह मौका देखकर लंदन के लिए निकल गए थे। वह जिया उर रहमान और खालिदा जिया के सबसे बड़े बेटे हैं। खालिदा जिया 1991 में देश की पहली महिला पीएम बनी थीं। लेकिन तारिक रहमान के राजनीति में चर्चे तब शुरू हुए, जब 2001 से 2006 के बेगम खालिदा जिया के दौर में उन पर भ्रष्टाचार, हिंसा जैसे आरोप लगे थे। इसी बीच उनकी मां की सत्ता से 2006 में विदाई हो गई थी और सैन्य समर्थन वाली केयरटेकर सरकार आई थी, जिसने उनके खिलाफ जांच की। आर्मी ने देर रात को किया था तारिक रहमान को अरेस्ट मार्च 2007 में तारिक रहमान को आर्मी यूनिट्स ने अरेस्ट कर लिया था। उन्हें उनके ढाका स्थित लग्जरी घर से निकालकर देर रात में ले जाया गया था। कई महीनों के बाद वह बेल पर रिहा हुए थे और फिर इलाज कराने के नाम पर लंदन चले गए और वहां से लौटे ही नहीं। फिर वह सीधे गुरुवार को ही ठीक 17 साल के बाद वापस लौटे। रहमान और बीएनपी की ओर से लगातार कहा जाता रहा है कि उनके ऊपर आरोप राजनीतिक थे, लेकिन विपक्ष से अलग भी ऐसे लग रहे हैं, जो उन पर संदेह करते रहे हैं।   विकिलीक्स के खुलासों में तारिक रहमान पर क्या कहा गया था यहां तक कि 2011 में आए विकिलीक्स के खुलासों में भी तारिक रहमान को लेकर दावा किया गया था कि वह हिंसा को बढ़ावा देने वाले और मनमाने ढंग से सत्ता चलाने वाले शख्स हैं। हालांकि अब उन्हें बांग्लादेश में नए तेवरों के साथ पेश किया जा रहा है। उनकी हीरो जैसी एंट्री हुई है और आने वाले पीएम के तौर पर उन्हें देखा जा रहा है। तारिक रहमान ने भी इस मौके को खूब भुनाया है। उन्होंने आते ही इमोशनल बातें की हैं और बांग्लादेश में हिंसा को खत्म करने की बात कही है। हालांकि यह देखना होगा कि सत्ता हासिल करने के बाद उनका रुख क्या होगा।