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सहालग शुरू होते ही प्रदेश भर में सामूहिक विवाह समारोह का हो रहा आयोजन

सीएम योगी के प्रयासों से गरीब व वंचित वर्गों के बेटियों की शादी हुई आसान योगी सरकार का विकास पर केंद्रित एजेंडा विपक्ष को दिखा रहा आईना प्रदेश के दलित वर्ग से 2.20 लाख से अधिक बेटियों को मिला योजना का लाभ पिछड़े वर्ग से 1.30 लाख से अधिक गरीब बेटियों की हो चुकी है शादी अल्पसंख्यक वर्ग की 40 हजार से अधिक से अधिक बेटियों की शादी करा चुकी है योगी सरकार लखनऊ सीएम योगी की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना ने आर्थिक रूप से कमजोर तबके, खासकर पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है। 2017 में शुरू हुई यह योजना आज न केवल इन वर्गों की बेटियों के लिए वरदान साबित हो रही है, बल्कि सामाजिक समरसता और समावेशिता को भी मजबूत कर रही है।   बीते आठ वर्षों में इस योजना के तहत 4 लाख से अधिक गरीब कन्याओं की शादी योगी सरकार द्वारा पूरे रीति-रिवाज और सम्मान के साथ कराई जा चुकी है। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 57 हजार के लक्ष्य के सापेक्ष अबतक करीब 1.20 से अधिक आवेदन आ चुके हैं, जिसमें करीब 14 हजार से अधिक गरीब कन्याओं की शादी संपन्न कराई जा चुकी हैं। विभागीय अधिकारियों की माने तो आने वाले दिनों में इस संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है। वंचित वर्गों को मिल रहा लाभ, विपक्ष की राजनीति को आईना दिखा रही योगी सरकार इस योजना ने उन राजनीतिक दलों को कठघरे में खड़ा कर दिया है, जो लंबे समय तक पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग की राजनीति के सहारे सत्ता का आनंद लेते रहे, लेकिन उनके लिए ठोस विकास कार्य करने में विफल रहे। विपक्ष की राजनीति को आइना दिखाते हुए, इस योजना ने यह साबित कर दिया है कि केवल वादों से नहीं, बल्कि ठोस कदमों से ही समाज का सशक्तीकरण संभव है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कदम न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास और समावेशिता को प्राथमिकता देकर यह साबित कर दिया है कि उनकी सरकार "सबका साथ, सबका विकास" के सिद्धांत पर अडिग है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए जीवन बदलने वाली है मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के आंकड़े यह स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के लिए यह योजना कितनी प्रभावशाली साबित हुई है। अब तक इस योजना का सबसे अधिक लाभ दलित वर्ग ने उठाया है, जिसमें 2.20 लाख से अधिक गरीब परिवारों की बेटियों की शादी कराई गई है। वहीं, पिछड़े वर्ग के 1.30 लाख परिवार और अल्पसंख्यक वर्ग के 40,000 से अधिक परिवार इस योजना के लाभार्थी बने हैं। वहीं सामान्य वर्ग के करीब 16,000 गरीब परिवारों ने अब तक सामूहिक विवाह योजना का लाभ लिया है। वर्ष 2025-26 में आए 1.20 लाख से अधिक आवेदन कुल आवेदन- 1.20 लाख से अधिक (अबतक) कुल अप्रूव आवेदन- 21 हजार से अधिक (अबतक) रिजेक्ट आवेदन- 18 हजार से अधिक (अबतक) कुल शादियां- 14 हजार से अधिक योजना के प्रभारी उपनिदेशक आर.पी. सिंह ने बताया कि यह न केवल एक सामाजिक सहायता है बल्कि सामूहिक सहयोग, सामुदायिक भावना और महिलाओं के सम्मान को बढ़ाने का प्रयास भी है। यह योजना न केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की बेटियों की शादी का सपना पूरा कर रही है, बल्कि यह उन्हें सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा भी प्रदान कर रही है। विवाह समारोह में हर जोड़े को एक लाख रुपये की मदद दी जाती है, जिसमें विवाह से जुड़ी आवश्यक सामग्री, वधू के खाते में नकद धनराशि और आयोजन की व्यवस्था शामिल होती है। पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध हैं सीएम योगी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने साढ़े आठ वर्षों के कार्यकाल में बार-बार यह दिखाया है कि उनकी प्राथमिकता वंचित वर्गों को सशक्त बनाना है। इस योजना के माध्यम से वे यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि प्रदेश के सभी वर्ग, विशेषकर पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक, मुख्यधारा से जुड़े और उनके विकास के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। यही वजह है कि इस योजना के लिए योगी सरकार ने अब तक करीब 2,200 लाख रुपये से अधिक की धनराशि खर्च कर चुकी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस मद में 550 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अबतक दलित और पिछड़ा वर्ग को मिला सबसे अधिक लाभ सामान्य वर्ग- 494 (जोड़ा) अल्पसंख्यक वर्ग- 828 (जोड़ा) ओबीसी वर्ग- 5500 (जोड़ा) दलित वर्ग- 6556 (जोड़ा) मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह जाति और धर्म की सीमाओं को पार कर सभी को समान अवसर प्रदान करती है। विवाह समारोह में धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है, चाहे वह हिंदू, मुस्लिम, सिख या ईसाई समुदाय का हो। यह पहल सामाजिक समरसता और भाईचारे का भी संदेश देती है।

मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम के अंतर्गत योगी सरकार ने बुंदेलखंड के 6 कृषि विज्ञान केंद्रों में तैयार कराए मिलेट्स प्रोसेसिंग प्लांट

कृषि विज्ञान केंद्रों में बनकर तैयार हुए श्री अन्न आधारित प्रोसेसिंग प्लांट, मिलेट्स प्रसंस्करण के साथ ही पैकेजिंग और विपणन में भी बनेंगे मददगार योगी सरकार ने कृषि विज्ञान केंद्रों को प्रोसेसिंग प्लांट शुरू करने के लिए दी है आर्थिक मदद झांसी, ललितपुर, बांदा, महोबा, जालौन और हमीरपुर में बनकर तैयार हुए हैं मिलेटस प्रोसेसिंग प्लांट मशीनों की खरीद के लिए शुरू हुई प्रक्रिया, नए साल में शुरू हो जाएगा सभी प्रोसेसिंग प्लांट पर काम लखनऊ उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम के अंतर्गत बुन्देलखंड के 6 जिलों में कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से मिलेट्स प्रसंस्करण, पैकेजिंग सह विपणन केंद्रों के निर्माण का काम फरवरी पूरा कर लिया गया है।प्रोसेसिंग प्लांट के लिए मशीनों की खरीद और इंस्टालेशन का काम जल्द शुरू होगा। विभागीय अफसरों का कहना है कि अगले वर्ष ये सभी प्रोसेसिंग प्लांट शुरू हो जाएंगे, जिससे किसानों को इसका लाभ मिल सकेगा। झांसी, बांदा, ललितपुर, महोबा, जालौन और हमीरपुर ज़िलों में कृषि विभाग ने प्रोसेसिंग प्लांट के निर्माण के लिए आर्थिक मदद प्रदान की है। योगी सरकार ने प्रत्येक मिलेट्स प्रसंस्करण, पैकेजिंग सह विपणन केंद्र की स्थापना के लिए 95 लाख रुपये प्रदान किए हैं। इन मिलेट्स प्रसंस्करण, पैकेजिंग सह विपणन केंद्रों की स्थापना का उद्देश्य श्री अन्न की खेती को बढ़ावा देना, प्रोसेसिंग करना और किसानों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने में मदद करना है। सभी कृषि विज्ञान केंद्रों पर प्रोसेसिंग प्लांट के लिए भवन तैयार कर लिया गए है। अब आने वाले समय में इनमें अत्याधुनिक प्रोसेसिंग मशीन को लगाया जाएगा। इनके माध्यम से मोटे अनाज की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग हो सकेगी। बुन्देलखण्ड की जलवायु के अनुकूल मोटे अनाजों को उगाने के लिए किसानों को बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। फसल तैयार हो जाने पर इन केंद्रों पर किसानों के उपज की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग की जाएगी। बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार डॉ एन के बाजपेयी ने बताया कि झांसी, ललितपुर, जालौन, महोबा, बांदा और हमीरपुर में श्री अन्न आधारित प्रोसेसिंग प्लांट के लिए भवन निर्माण का काम पूरा हो गया है। अब बहुत जल्द यहां मशीनों की खरीद और इंस्टालेशन का काम पूरा कर लिया जाएगा। उम्मीद है कि अगले वर्ष किसानों को बीज देने और उससे होने वाली उपज को इन केंद्रों में प्रोसेस करने का काम शुरू हो जाएगा।

अयोध्या बनेगी डेवलपमेंट का रोल मॉडल: 2031 तक आधुनिक सुविधाओं से लैस आध्यात्मिक सिटी का खाका तैयार

लखनऊ अयोध्या आज विश्व के मानचित्र पर धार्मिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और विकसित शहर के रूप में समृद्धि और विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है. अयोध्या के विकास का श्रेय उत्तर प्रदेश के दूरदर्शी और दृढ़संकल्पित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जाता है. श्रीराम मंदिर के निर्माण के पहले से ही सीएम योगी अयोध्या को उसके गौरवशाली इतिहास को पुन: वापस दिलाने के लिए योजना पर काम कर रहे हैं. अयोध्या में आज देशी विदेशी पर्यटक बड़ी तादाद में आ रहे हैं और अर्थव्यवस्था के विकास में अपना योगदान दे रहे हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा निर्देश में रामनगरी के विकास के लिए अनेकों प्लान बनाए गए हैं और उसको विभिन्न विभागों के साथ मिलकर धरातल पर उतारा जा रहा है. अयोध्या मास्टर प्लान 2031 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया और उसके क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों को कड़े निर्देश दिए. शहर के नगर नियोजन के लिए 1000 करोड़ से ज्यादा धनराशि उपलब्ध कराकर एक व्यापक शहरी खाका खींचा. ये मास्टर प्लान 133.67 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विकास की योजनाओं को मूर्त रूप दे रहा है. इसे भी पढ़ें- जेब भारी रखना, क्योंकि ढ़ीली होने वाली है… टोल टैक्स भुगतान के नियमों में बदलाव, FASTag फेल हुआ तो लगेगी तगड़ी चपत इसके जरिए अयोध्या को एक आधुनिक, सतत, और आध्यात्मिक नगर के रूप में विकसित किया जा रहा है. इस बात का भी ध्यान रखा जा रहा है कि रामनगरी में बढ़ती पर्यटकों की संख्या के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार किया जाए. अयोध्या में जनवरी-जून, 2025 के बीच करीब 24 करोड़ पर्यटक आए. अनुमान लगाया जा रहा है कि साल के अंत तक पर्यटकों की संख्या का आंकड़ा 50 करोड़ पार कर जाएगा. यही वजह है कि अयोध्या में पर्यटकों की हर सुख सुविधा का ध्यान रखा जा रहा है. इसमें इस बात का खास ध्यान रखा गया है कि सड़कों, जल निकासी, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, आवास और हरित क्षेत्रों के उन्नयन पर विशेष फोकस रहे. अयोध्या ग्रीनफील्ड टाउनशिप अयोध्या ग्रीनफील्ड टाउनशिप के तहत 1407 एकड़ में 2180 करोड़ रुपये की ज्यादा लागत से स्मार्ट और पर्यावरण-अनुकूल टाउनशिप विकसित हो रही है. इस टाउनशिप योजना का विकास वैदिक प्रस्तार योजना के तहत हो रहा है. इसका उद्देश्य भविष्य में बढ़ने वाले पर्यटकों की संख्या और जनसंख्या दबाव को संतुलित ढ़ंग से प्रबंधित करना है. महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अयोध्या में हर साल पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है. रामलला के दर्शन के लिए न केवल देश बल्कि विदेशी श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में आ रहे हैं. ऐसे में अयोध्या में एक अत्याधुनिक हवाई अड्डे की भी आवश्यकता थी. इसी को ध्यान में रखते हुए डबल इंजन सरकार ने 1450 करोड़ की लागत से आधुनिक एयरपोर्ट का विकास किया. महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा 2023 से सफलतापूर्वक संचालित है. इस एयरपोर्ट में 6000 वर्ग मीटर का टर्मिनल और बड़े विमानों के लिए रनवे है. यह एयरपोर्ट अयोध्या को भारत के प्रमुख शहरों और अंतरराष्ट्रीय शहरों से जोड़ता है. अयोध्या धाम जंक्शन रेलवे स्टेशन अयोध्या में आने वाले पर्यटकों की सुविधा का ध्यान रखने के लिए रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास और आधुनिकीकरण किया गया है. रेलवे स्टेशन को तीन मंजिला बनाया गया है. इस रेलवे स्टेशन में लिफ्ट, एस्केलेटर, फूड प्लाजा और प्रतीक्षालय जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं. ये रेलवे स्टेशन लाखों की संख्या में आने वाले पर्यटकों को सुविधाएं प्रदान कर रहा है. आउटर रिंग रोड अयोध्या शहर में ट्रैफिक के दबाव को कम करने के लिए 67.17 किलोमीटर लंबी, 4/6 लेन की अयोध्या आउटर रिंग रोड परियोजना पर काम हो रहा है. यह परियोजना लगभग 3,935 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा है. इसका उद्देश्य शहर में बढ़ते ट्रैफिक के दबाव को कम करना और पड़ोसी जिलों लखनऊ, रायबरेली, सुल्तानपुर, बाराबंकी, बस्ती और गोंडा से आने वालों को सुविधाजनक यातायात व्यवस्था देना है. इसके जरिए राष्ट्रीय राजमार्गों सुविधाजनक संपर्क स्थापित करना है. राम की पैड़ी का आधुनिकीकरण पर्यटकों को अयोध्या आकर दिव्यता और भव्यता का अनुभव हो इसके लिए करीब 24 करोड़ की लागत से राम की पैड़ी का कायाकल्प किया गया है. इसमें 350 मीटर लंबी सीढ़ी, 20000 दर्शकों के लिए विशाल दर्शक दीर्घा और मिनी एम्पीथिएटर को बनाया गया है. इसमें दर्शकों के लिए एक सेल्फी प्वाइंट का निर्माण किया गया है जिसमें भगवान राम की भव्य मूर्तियां स्थापित की गई हैं. गुप्तार घाट पुनर्विकास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन का ही परिणाम है कि जो गुप्तार घाट पहले उपेक्षित था आज वही घाट सुंदरता का प्रतिमान बन गया है. लगभग 77 करोड़ की लागत से गुप्तार घाट को पुनर्विकसित किया गया है. इसमें लगभग 1 किमी लंबा तटबंध, खुला रंगमंच, पार्क और आधुनिक जलक्रीड़ा और नौकायन सुविधाएं उपलब्ध हैं. होटल और आवास सुविधाएं करोड़ों की संख्या में आने वाले पर्यटकों को सुख सुविधा प्रदान करने के लिए प्रमुख होटल कंपनियां 350 करोड़ से अधिक का निवेश कर रही हैं. इससे अयोध्या में न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा. अयोध्या की प्राचीनता को अक्षुण्ण रखने के लिए योगी सरकार का विशेष निर्देश है. इसी वजह से राम कथा संग्रहालय, तुलसी स्मारक भवन, परिक्रमा मार्ग विकास को संरक्षित और संवर्धित किया गया है. इसी तरह पर्यटकों को वाहन पार्किंग में असुविधा न हो उसके लिए मल्टी लेवल कार पार्किंग का भीड़भाड़ वाली जगहों पर निर्माण किया जा रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या के विकास को लेकर दृढ़संकल्पित हैं. आने वाले समय में अयोध्या का विकास पूरी दुनिया में रोल मॉडल बनकर उभरने वाला है.

सत्र 2025-26 में 44127.91 मीट्रिक टन हुई धान खरीद, 2024-25 में इस अवधि तक की गई थी 25329.75 मीट्रिक टन की खरीद

लखनऊ, 'अन्नदाता किसानों' को निरंतर योगी सरकार का साथ मिल रहा है। आंकड़े योगी सरकार की सकारात्मक नीतियों की गवाही दे रहे हैं। गौरतलब है कि विपणन सत्र 2025-26 में धान बिक्री के लिए पहली सितंबर से पंजीकरण प्रारंभ हुआ था। 25 अक्टूबर तक धान बिक्री के लिए 1,54,035 किसानों ने पंजीकरण करा लिया है। वहीं विगत वर्ष (2024-25) में इस अवधि तक 1,51,374 किसानों ने पंजीकरण कराया था। बाजरा के लिए 15248, ज्वार के लिए 2706 तथा मक्का के लिए 1509 किसानों ने पंजीकरण करा लिया है। 44127.91 मीट्रिक टन धान की हुई खरीद, पिछले वर्ष हुई थी 25329.75 मीट्रिक टन की खरीद खाद्य व रसद विभाग के मुताबिक इस वर्ष 2369 रुपये कॉमन तथा 2389 रुपये (ग्रेड-ए) प्रति कुंतल की दर से खऱीद हो रही है। 7507 किसानों से 44127.91 मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इस अवधि तक 4517 किसानों से 25329.75 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी। वहीं श्रीअन्न बाजरा की खरीद इस वर्ष अब तक 4153.35 मीट्रिक टन हो चुकी है। पिछले वर्ष इस अवधि तक 4021.39 मीट्रिक टन बाजरा खरीद हुई थी। सीएम योगी के निर्देश पर 48 घंटे में किसानों को किया जा रहा भुगतान सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 48 घंटे के भीतर किसानों को भुगतान किया जा रहा है। धान बिक्री करने वाले किसानों को इस वर्ष अब तक 86.68 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। इस अवधि में पिछले वर्ष 43.91 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। वहीं बाजरा के किसानों को 8.43 करोड़ रुपये डीबीटी के माध्यम से स्थानांतरित किए गए हैं, पिछले वर्ष इस अवधि तक यह आंकड़ा 7.63 करोड़ रुपये का था। सीएम योगी की नीतियों के कारण किसानों के हित में प्रतिवर्ष सकारात्मक पहल बढ़ती जा रही है। टोल फ्री नंबर 18001800150 पर समस्या बता सकते हैं किसान किसान अपनी किसी भी समस्या के लिए टोल फ्री नंबर 18001800150 से मदद ले सकते हैं। इसके अलावा वे जिला खाद्य विपणन अधिकारी, क्षेत्रीय विपणन अधिकारी, विपणन निरीक्षक से भी संपर्क साध सकते हैं। किसानों के आधार लिंक्ड बैंक खाते में सीधे भुगतान किया जाएगा। वहीं बिचौलियों को रोकने व पारदर्शिता बरतते हुए क्रय केंद्रों पर मोटे अनाज की खरीद ई-पॉप (इलेक्ट्रॉनिक प्वॉइंट ऑफ परचेज) डिवाइस के माध्यम से पहले की भांति किसानों का बायोमीट्रिक सत्यापन के जरिए ही होगी। इन जिलों में हो रही मक्का खरीद   मक्का खरीद 25 जनपदों में चल रही है। यह जनपद बदायूं,  बुलंदशहर, हरदोई, उन्नाव, मैनपुरी, आगरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, एटा, कासगंज, हाथरस, कानपुर नगर-देहात, कन्नौज, औरैया, इटावा, बहराइच, गोंडा, बलिया, जौनपुर, फर्रुखाबाद, मीरजापुर, सोनभद्र, देवरिया व ललितपुर हैं। बाजरा खरीद वाले जनपद निर्धारित बदायूं,  बुलंदशहर, आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, मैनपुरी, अलीगढ़, कासगंज, हाथरस, एटा, बरेली,  शाहजहांपुर, संभल, रामपुर, अमरोहा, कानपुर नगर-देहात, फर्रुखाबाद, औरैया, कन्नौज, इटावा, जालौन, हमीरपुर, चित्रकूट, गाजीपुर, जौनपुर, प्रयागराज, फतेहपुर, कौशांबी, मीरजापुर, बलिया, हरदोई व उन्नाव समेत 33 जनपदों में बाजरा खरीद हो रही है।   इन जिलों में हो रही ज्वार की खरीद बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, कानपुर नगर-देहात, फतेहपुर, उन्नाव, हरदोई, मीरजापुर व जालौन में ज्वार की खरीद चल रही। 2025-26                                                         2025-24 धान- 1,54,035 पंजीकरण                 1,51,374 पंजीकरण बाजरा- 15,248 पंजीकरण                  6075 पंजीकरण ज्वार- 2706 पंजीकरण                      1262 पंजीकरण मक्का- 1509 पंजीकरण                    —————— वर्ष (2025-26) धान खरीद- 44127.91 मीट्रिक टन किसान- 7507 किसानों को भुगतान- 86.68 करोड़ बाजरा खरीद- 4153.35 मीट्रिक टन किसान- 715 भुगतान 8.43 करोड़ पूर्वी उत्तर प्रदेश व लखनऊ संभाग के इन जनपदों में पहली नवंबर से शुरू होगी खरीद पूर्वी उत्तर प्रदेश के संभागों में पहली नवम्बर से धान खरीद होगी। यह खरीद पूर्वी उत्तर प्रदेश के चित्रकूट, कानपुर, अयोध्या, गोरखपुर, देवीपाटन, बस्ती, आजमगढ़, वाराणसी, मीरजापुर व प्रयागराज संभाग में होगी। इसके साथ ही लखनऊ संभाग के लखनऊ, रायबरेली व उन्नाव में भी पहली नवंबर से खरीद होगी, जो 28 फरवरी 2026 तक चलेगी।