samacharsecretary.com

सॉइल टू सिल्क की संपूर्ण प्रक्रिया का होगा जीवंत प्रदर्शन, शुद्ध रेशमी वस्त्रों के लिए बनेगा भरोसेमंद केंद्र

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के पारंपरिक और ग्रामीण उद्योगों को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसके तहत, रेशम उद्योग के सुदृढ़ीकरण, शुद्ध रेशमी वस्त्रों की पहचान तथा आमजन को रेशम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराने के उद्देश्य से प्रदेश में ‘सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स’ की स्थापना की गई है। स्थानीय कारीगरों को उपलब्ध होगा सीधा बाजार सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स में ‘सॉइल टू सिल्क’ की समस्त विधाओं, नर्सरी विकास, शहतूत वृक्षारोपण, रेशम कीट पालन, कोया उत्पादन, धागाकरण से लेकर साड़ी एवं परिधान निर्माण तक का चरणबद्ध और व्यावहारिक प्रदर्शन किया जाएगा। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को यह समझाना है कि शुद्ध रेशम क्या होता है, उसकी गुणवत्ता कैसे पहचानी जाए और बाजार में उपलब्ध नकली या मिश्रित रेशम से कैसे भेद किया जा सकता है। यह केन्द्र न केवल प्रशिक्षण और जागरूकता का माध्यम होगा, बल्कि एक्जीबिशन, मार्केटिंग कम सेल सेंटर के रूप में भी कार्य करेगा, जहां शुद्ध रेशमी वस्त्रों और परिधानों का सीधा विक्रय किया जाएगा। इससे स्थानीय बुनकरों, कारीगरों, किसानों और स्वयं सहायता समूहों को सीधा बाजार उपलब्ध होगा। हजारों परिवारों की आजीविका होगी सुदृढ़ योगी सरकार की यह पहल आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है, जिससे रेशम उद्योग से जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका सुदृढ़ होगी और प्रदेश की पारंपरिक कला एवं विरासत को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। इस महत्वाकांक्षी केन्द्र का उद्घाटन सोमवार को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि रेशम निदेशालय परिसर में स्थापित यह सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जहां रेशम उत्पादन की पूरी श्रृंखला का प्रत्यक्ष एवं जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यहां रेशम कीट से धागा बनने की प्रक्रिया, धागाकरण एवं वस्त्र निर्माण की संपूर्ण विधि को एक ही स्थान पर देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि पूर्व में यह स्थल अनुपयोगी अवस्था में था, जिसे विभागीय प्रयासों से आधुनिक, भव्य एवं उपयोगी स्वरूप प्रदान किया गया है। अब यह केन्द्र प्रदेश मुख्यालय पर देश-विदेश से आने वाले आगंतुकों के लिए रेशम उद्योग की पहचान का प्रमुख केन्द्र बनेगा। यहां एरी, शहतूती एवं टसर रेशम की उत्पादन प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से समझा जा सकेगा। प्रदेश में लगभग 300 से 350 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन मंत्री सचान ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार वर्ष 2022 से प्रदेश में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 300 से 350 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन हो रहा है, जिसे निरंतर बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों को प्रशिक्षण देकर रेशम उत्पादन से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त हों। भारत सरकार एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से रेशम उत्पादकों को अनुदान, प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं रेशम, उत्तर प्रदेश शासन, विशेष सचिव/निदेशक (रेशम), केन्द्रीय रेशम बोर्ड (भारत सरकार) के अधिकारी एवं वैज्ञानिकों सहित विभागीय एवं तकनीकी अधिकारी उपस्थित रहे।

इन्वेस्ट यूपी से बदली निवेश की तस्वीर, यूपी बना निवेशकों का भरोसेमंद ठिकाना

निवेशकों के लिए बना सिंगल-पॉइंट संपर्क केंद्र, निवेश सारथी और निवेश मित्र से पूरी तरह डिजिटल हुई निवेश प्रक्रिया लखनऊ वर्ष 2025 के समापन के साथ उत्तर प्रदेश में निवेश, उद्योग और विदेशी पूंजी आकर्षण के लिए लागू किए गए संस्थागत, डिजिटल और नीतिगत उपाय पूरे वर्ष चर्चा में रहे। योगी सरकार के नेतृत्व में इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से निवेश सुविधा और हैंडहोल्डिंग को जिस तरह सशक्त किया गया, जो इस वर्ष की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2025 के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने निवेश प्रोत्साहन को प्रशासनिक प्राथमिकता में रखा। सरकार का फोकस निवेशकों को भरोसेमंद वातावरण, स्पष्ट नीति और समयबद्ध सुविधा उपलब्ध कराने पर रहा, जिससे राज्य उद्योग और रोजगार सृजन के केंद्र के रूप में उभरता गया। इन्वेस्ट यूपी : निवेश की शुरुआत से क्रियान्वयन तक राज्य की समर्पित निवेश प्रोत्साहन एजेंसी इन्वेस्ट यूपी ने पूरे वर्ष निवेशकों को परियोजना की अवधारणा से लेकर ग्राउंड इम्प्लीमेंटेशन तक सहायता प्रदान की। निवेशक सुविधा, हैंडहोल्डिंग और समस्या समाधान की एकीकृत व्यवस्था ने उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए पसंदीदा गंतव्य बनाया। डिजिटल प्लेटफॉर्म से आसान हुआ निवेश निवेश प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए निवेश सारथी पोर्टल को प्रभावी रूप से लागू किया गया। इस प्लेटफॉर्म के जरिए एमओयू साइनिंग, निवेश इंटेंट पंजीकरण, शिकायत निस्तारण और परियोजना अनुश्रण एक ही स्थान पर संभव हुआ। वहीं निवेश मित्र के अंतर्गत ऑनलाइन इंसेंटिव मैनेजमेंट सिस्टम से प्रोत्साहन आवेदन और ट्रैकिंग पूरी तरह डिजिटल हो गई। मुख्यमंत्री उद्यमी मित्र: व्यक्तिगत हैंडहोल्डिंग योगी सरकार की मुख्यमंत्री उद्यमी मित्र योजना वर्ष 2025 में निवेशकों के लिए मजबूत सहारा बनी। प्रत्येक निवेशक को एक समर्पित उद्यमी मित्र उपलब्ध कराया गया, जो विभागीय समन्वय, नीति मार्गदर्शन और स्थानीय स्तर पर समस्या समाधान में सहयोग करता रहा। सभी जनपदों और औद्योगिक प्राधिकरणों में इसकी मौजूदगी से निवेशकों को त्वरित सहायता मिली। सेक्टोरल डेस्क से उद्योग-विशेष फोकस वर्ष 2025 के दौरान इन्वेस्ट यूपी के अंतर्गत पांच सेक्टोरल डेस्क (वस्त्र एवं परिधान, ऑटोमोबाइल एवं ई-मोबिलिटी, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स और GCC) सक्रिय रहे। इन डेस्कों के माध्यम से रोड शो, राउंडटेबल और उद्योग संवाद को बढ़ावा मिला और सेक्टर-विशेष निवेश रणनीति को मजबूती मिली। कंट्री डेस्क से वैश्विक निवेश को बढ़ावा विदेशी निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से इन्वेस्ट यूपी के तहत छह कंट्री डेस्क (रूस, जर्मनी-फ्रांस, UAE-सिंगापुर, जापान, दक्षिण कोरिया-ताइवान और यूनाइटेड किंगडम) सक्रिय रहीं। इन डेस्कों ने वैश्विक कंपनियों और निवेशकों के साथ संपर्क को संस्थागत रूप दिया। निवेशकों के लिए ड्रीम डेस्टिनेशन बना यूपी वर्ष 2025 में योगी सरकार ने निवेश को नीति से आगे बढ़ाकर एक प्रभावी सिस्टम में बदला। इन्वेस्ट यूपी, डिजिटल प्लेटफॉर्म, उद्यमी मित्र और वैश्विक आउटरीच के जरिए उत्तर प्रदेश निवेशकों के लिए भरोसेमंद, पारदर्शी और अवसरों से भरपूर राज्य के रूप में स्थापित हुआ।