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अब आसमान से तय होगा इंदौर-भोपाल का सफर, हेलीकॉप्टर सेवा के लिए प्रक्रिया शुरू

इंदौर अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (AICTSL) की बोर्ड बैठक का आयोजन बुधवार को महापौर और बोर्ड अध्यक्ष पुष्यमित्र भार्गव की अध्यक्षता में किया गया। बैठक में शहर के सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण अनुकूल और यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इसमें एक बड़ी घोषणा भी की गई, जिसमें बताया गया कि इंदौर से भोपाल के बीच अब हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है। जिसके लिए AICTSL एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मंगाने का निर्णय भी लिया गया है। हेलीकॉप्टर सेवा पर मिलने वाले प्रस्तावों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। रक्षाबंधन पर महिलाओं को मिलेगी मुफ्त यात्रा सुविधा महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बोर्ड बैठक में एक और महत्वपूर्ण घोषणा की। इसमें उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन पर्व के उपलक्ष्य में महिला यात्रियों को शहर में संचालित सभी बसों में नि:शुल्क यात्रा की सौगात दी जाएगी। इसे उन्होंने माताओं और बहनों को रक्षाबंधन का उपहार बताया। बैठक में संभागायुक्त एवं बोर्ड उपाध्यक्ष दीपक सिंह, कलेक्टर एवं निदेशक आशीष सिंह, नगर निगम कमिश्नर एवं प्रबंध निदेशक शिवम वर्मा, आईडीए सीईओ रामप्रकाश अहिरवार, AICTSL सीईओ दिव्यांक सिंह सहित अन्य कई वरिष्ठ अफसर मौजूद थे।  50 नई इलेक्ट्रिक बसें चलाएंगे इंदौर में ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में इस माह 50 नई इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतरेंगी। वर्तमान में शहर में बीआरटीएस कॉरिडोर पर 30 और अन्य मार्गों पर 50 इलेक्ट्रिक बसें संचालित हो रही हैं। इसके साथ ही केंद्र सरकार की पीएम ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत प्रथम चरण में इंदौर को 150 इलेक्ट्रिक बसों की सौगात मिलने जा रही है। इन बसों के संचालन के लिए आईएसबीटी नायता मुंडला और देवास नाका पर दो नए इलेक्ट्रिक बस डिपो तैयार किए जाएंगे, जिसकी वित्तीय सहायता केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी। इंटरसिटी इलेक्ट्रिक बस सेवा का होगा शुभारंभ इंदौर से आसपास के शहरों के लिए जल्द ही 26 इंटरसिटी इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। ये बसें इंदौर से उज्जैन, भोपाल, खरगोन, सेंधवा, खंडवा, बुरहानपुर, रतलाम, धार-मांडव और महेश्वर तक चलेंगी। निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। पीपीपी मॉडल पर भविष्य की इलेक्ट्रिक बसों के लिए ऑपर्च्युनिटी चार्जिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे। नई एसी लग्जरी बस सेवाएं भी होंगी शुरू महापौर ने बताया कि पूर्व में की गई निविदा प्रक्रिया के आधार पर अब इंदौर से कोटा, मंदसौर होते हुए नीमच, जीरापुर और सोयत कला तक एसी बस सेवा भी प्रारंभ की जाएगी। पूर्व में आमंत्रित निविदा प्रक्रिया में कोई बोलीदाता न मिलने के कारण अब निगम स्वयं डबल डेकर बसें खरीदेगा। राष्ट्रीय स्तर पर जुड़ने की तैयारी, फिर से होंगी निविदाएं इंदौर को राष्ट्रीय मार्गों से जोड़ने के लिए कई शहरों के लिए फिर से निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी। जिसमें राजकोट (वाया सूरत), रायपुर (वाया नागपुर), जयपुर, ग्वालियर, कानपुर (वाया झांसी), अहमदाबाद, उदयपुर, पुणे, मुंबई, अयोध्या, वाराणसी, नई दिल्ली, दमोह, बांसवाड़ा, भुसावल और शहडोल शामिल है। ई-बाइक से लास्ट माइल कनेक्टिविटी को मिलेगी मजबूती मौजूदा माय बाइक प्रोजेक्ट के तहत शहर में 1500 साइकिलें सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। भविष्य में ई-बाइक सेवा भी शुरू करने पर विचार किया गया। AICTSL को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास AICTSL ने एबी रोड पर 42 यूनिपोल पर विज्ञापन के लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं। जल्द ही डिपो पर भी यूनिपोल लगाए जाएंगे और उन पर विज्ञापन के लिए बोली प्रक्रिया शुरू होगी।

मध्य प्रदेश में विज्ञान बना बदलाव की गाड़ी, ‘साइंस ऑन व्हील्स’ से टूट रही रूढ़ियां, संवर रहा भविष्य

शहडोल मध्यप्रदेश के जनजातीय जिलों में अब विज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को रोकने का मजबूत हथियार बन चुका है। शहडोल जिले के शिक्षक संतोष कुमार मिश्रा की अनोखी पहल 'साइंस ऑन व्हील्स' (Science on Wheels) न सिर्फ ग्रामीण बच्चों में वैज्ञानिक सोच जगा रही है, बल्कि समाज में गहराई से जमी कुप्रथाओं के खिलाफ जागरूकता की अलख भी जगा रही है। शहडोल जिला, जहां आज भी कई ग्रामीण इलाकों में झाड़-फूंक, दागना और बाल विवाह जैसी परंपराएं प्रचलित हैं, वहां शिक्षक संतोष कुमार मिश्रा ने ‘साइंस ऑन व्हील्स’ की शुरुआत की। इस पहल का मकसद था विज्ञान को कक्षा की चारदीवारी से बाहर निकालकर गांव-गांव तक पहुंचाना।   ‘साइंस ऑन व्हील्स’ के अंतर्गत एक चलती-फिरती साइंस वैन के ज़रिए स्कूल, खेत, गांव और छात्रावासों में जाकर विज्ञान की बेसिक और दिलचस्प जानकारी दी जाती है। इसमें बच्चों को विज्ञान के प्रयोग करवाए जाते हैं और उन्हें साइंस एंबेस्डर बनाया जाता है, ताकि वे अपने घर और समाज में वैज्ञानिक सोच फैला सकें। इस पहल की सबसे खास बात यह रही कि इसने बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा दिया। जब ग्रामीण इलाकों की बच्चियों ने इन विज्ञान गतिविधियों में हिस्सा लेना शुरू किया, तो अभिभावकों को भी यह समझ में आने लगा कि उनकी बेटियां भी होशियार हैं। परिणामस्वरूप कई बच्चियों का बाल विवाह टला और वे स्कूल में बने रहने लगीं। ‘साइंस ऑन व्हील्स’ सिर्फ पढ़ाई का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह बेटियों को आत्मविश्वासी, जागरूक और स्वतंत्र सोच वाला नागरिक बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ है। अभिभावकों के साथ संवाद कर उन्हें बेटियों की शिक्षा के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही उन्हें यह बताया गया कि झाड़-फूंक, दागना जैसी परंपराएं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गलत हैं और इनसे दूर रहना चाहिए।

बाघों की सुरक्षा बनाम गांवों का अस्तित्व: क्या खाली कराए जाएंगे जंगल के किनारे बसे गांव?

उमरिया मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में इजाफा तो हो रहा है, लेकिन उनके प्राकृतिक आवास यानी जंगल सिकुड़ते जा रहे हैं। कारण है जंगल के भीतर बसे सैकड़ों गांव, जो न सिर्फ जगह घेर रहे हैं, बल्कि जंगल के संतुलन को भी प्रभावित कर रहे हैं। अब तक राज्य के टाइगर रिजर्व क्षेत्रों से 200 से अधिक गांवों को विस्थापित किया जा चुका है। बावजूद इसके, इतने ही गांव अभी भी जंगलों के भीतर बसे हुए हैं। इनके कारण बाघों को उनके लिए जरूरी क्षेत्रफल नहीं मिल पा रहा है। साथ ही, इन गांवों की वजह से घास के मैदान विकसित नहीं हो पा रहे हैं, जो शाकाहारी वन्य जीवों के लिए जरूरी हैं।   घास के मैदान क्यों जरूरी हैं? जंगल के अंदर जब घास के मैदान नहीं बनते, तो शाकाहारी प्राणियों की संख्या कम हो जाती है, जिससे बाघ जंगल के कोर जोन से बाहर आकर गांवों की ओर बढ़ते हैं। वहां वे मवेशियों का शिकार करते हैं, जिससे मानव-पशु संघर्ष बढ़ता है। वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट डॉ. राकेश शुक्ला के अनुसार, जब तक जंगल के अंदर बसे गांवों को पूरी तरह से हटाया नहीं जाता, तब तक बाघों को उनका आवश्यक क्षेत्र नहीं मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी हाल ही में यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार विस्थापन प्रक्रिया को तेज करेगी और इसके लिए धन की कोई कमी नहीं होगी। सबसे ज्यादा प्रभावित टाइगर रिजर्व पन्ना टाइगर रिजर्व में सबसे ज्यादा गांव बसे हैं। बांधवगढ़ के कोर जोन में 10 गांव हैं। पेंच टाइगर रिजर्व में 44, संजय टाइगर रिजर्व में 34, वीरांगना रानी दुर्गावती में 81 और कान्हा में 8 गांव अब भी मौजूद हैं। क्या कहते हैं आंकड़े? प्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश की कोर और बफर जोन में गांव बसे हैं। उदाहरण के तौर पर, बांधवगढ़ में 165, कान्हा में 129, पेंच में 123 और सतपुड़ा में 62 बाघ हैं। 

मौसम विभाग की बड़ी चेतावनी: कई राज्यों में 12 अगस्त तक भारी बारिश का खतरा

उत्तराखंड उत्तराखंड में इस समय मौसम लगातार खराब बना हुआ है और स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 6 से 12 अगस्त तक राज्य के सभी जिलों के लिए भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा कई जगहों पर गर्जना और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना भी जताई गई है। अगले सात दिनों का मौसम पूर्वानुमान 6 अगस्त: सभी जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ कहीं-कहीं अत्यंत भारी बारिश की संभावना है। गरज-चमक और तेज बारिश के दौर भी रहेंगे। 7 अगस्त: देहरादून, पौड़ी, बागेश्वर, चम्पावत और नैनीताल जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। पूरे राज्य में गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना है। 8 अगस्त: उत्तरकाशी, देहरादून, पौड़ी, बागेश्वर, चम्पावत और नैनीताल में भारी बारिश हो सकती है। तेज बारिश के साथ बिजली गिरने के भी आसार हैं।   9 अगस्त: देहरादून और बागेश्वर में भारी बारिश की चेतावनी है। बाकी जिलों में भी गरज और तेज बारिश के दौर रहेंगे। 10 अगस्त: उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली और बागेश्वर जिलों में भारी बारिश की संभावना है। पूरे राज्य में आकाशीय बिजली और तेज बारिश की चेतावनी जारी की गई है। 11 और 12 अगस्त: सभी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज और बौछारें पड़ने की संभावना है। मौसम विभाग की चेतावनी IMD ने बताया है कि भारी बारिश से राज्य में भूस्खलन, नदियों का जलस्तर बढ़ना, सड़कों के अवरुद्ध होने, और निचले इलाकों में जलभराव जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। हाल ही में धराली और हरिद्वार में ऐसे हालात देखे जा चुके हैं। लोगों के लिए जरूरी सलाह     नदी और नालों के किनारे जाने से बचें।     पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा न करें।     मौसम की अपडेट पर नज़र रखें और अफवाहों से दूर रहें।     बच्चे और बुजुर्ग घरों में सुरक्षित रहें।     किसान फसलों को बचाने के लिए तिरपाल आदि का उपयोग करें।     मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर रखें।     किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन या स्थानीय अधिकारियों से तुरंत संपर्क करें। प्रशासन सतर्क रक्षाबंधन और स्वतंत्रता दिवस जैसे त्योहारों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को बढ़ा दिया है। आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा गया है और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी की जा रही है।

भोपाल गैस त्रासदी: गंभीर बीमार पीड़ितों की अनदेखी पर अब हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

भोपाल  भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े एक अहम मामले की अब सुनवाई मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में होने जा रही है। यूनियन कार्बाइड गैस लीक से प्रभावित हजारों लोगों को गलत तरीके से मामूली चोट या अस्थायी विकलांगता बता कर मुआवजा कम दिए जाने का आरोप है। पीड़ित संगठनों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में की गई। अपील के बाद अब यह मामला जबलपुर हाईकोर्ट पहुंचा है। यहां इसकी सुनवाई 11 अगस्त को होगी। गंभीर पीड़ितों को मामूली घायल बताकर मुआवजा घटा भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा समेत कई संगठनों ने आरोप लगाया है कि हजारों पीड़ितों को, जिनकी सेहत पर गैस रिसाव का गहरा असर हुआ था, उन्हें जानबूझकर अस्थायी विकलांगता या मामूली चोट की श्रेणी में डाल दिया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि उन्हें नाममात्र का मुआवजा मिला। इससे न तो उनका इलाज ठीक से हो पाया और न ही वे अपनी पीड़ा के लिए न्याय पा सके। सुप्रीम कोर्ट ने कहा – हाईकोर्ट तय करे मामला पीड़ितों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी। याचिका में मांग की गई थी कि केंद्र सरकार यह जांच कराए कि किन पीड़ितों को गलत तरीके से वर्गीकृत किया गया है। उन्हें उचित मुआवजे की श्रेणी में रखा जाए ताकि उनका इलाज और पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा था कि हाईकोर्ट इस मुद्दे का फैसला तथ्यों के आधार पर करे। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि पीड़ितों को अपनी बात रखने का उचित मंच मिलना चाहिए। भोपाल गैस त्रासदी पीड़ित मुआवजा मामले पर एक नजर… भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े मामले की सुनवाई अब 11 अगस्त को जबलपुर हाईकोर्ट में होगी, जिसमें पीड़ितों को कम मुआवजा दिए जाने के आरोपों की जांच की जाएगी। गैस लीक से गंभीर रूप से प्रभावित लोगों को जानबूझकर मामूली चोट या अस्थायी विकलांगता की श्रेणी में डालकर उन्हें कम मुआवजा दिया गया, जिससे उनका इलाज और पुनर्वास प्रभावित हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच हाईकोर्ट को सौंपते हुए कहा कि पीड़ितों को न्याय पाने का उचित मंच मिलना चाहिए और उचित मुआवजा मिलना चाहिए। पीड़ित संगठनों का आरोप है कि कैंसर, किडनी फेलियर जैसे गंभीर मामलों वाले लोगों को भी मामूली चोट का शिकार बताया गया, जबकि उन्हें स्थायी विकलांगता की श्रेणी में होना चाहिए था। पीड़ित संगठनों ने सरकार की चूक और सिस्टम की बेरुखी को उजागर किया, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में मुआवजा अपर्याप्त होने पर जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर डाली थी। आज 6 अगस्त को यह मामला जबलपुर हाईकोर्ट की मुख्य पीठ में लिस्ट हुआ था, लेकिन चीफ जस्टिस की बेंच अनुपलब्ध होने के कारण जस्टिस अतुल श्रीधर की डिविजनल बेंच ने इसे अगली सुनवाई के लिए 11 अगस्त की तारीख दे दी है। अब इसी दिन यह तय होगा कि आगे केस की सुनवाई कैसे चलेगी। कैंसर और किडनी फेलियर के मरीज भी गिनाए गए मामूली पीड़ितों में! पीड़ित संगठनों ने अदालत को बताया कि उनके पास ऐसे दर्जनों मामलों के प्रमाण हैं। इनमें मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस के कारण कैंसर, किडनी फेलियर और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को भी मामूली या अस्थायी चोट का पीड़ित बताया गया है। उनका कहना है कि इन्हें स्थायी विकलांगता की श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए था।   सरकार की चूक, सिस्टम की बेरुखी याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि जुलाई 2023 में जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की सुधारात्मक याचिकाएं खारिज की थीं, तो यह स्पष्ट कर दिया गया था कि यदि मुआवजा अपर्याप्त है, तो इसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की ही होगी। पीड़ित अब इस नई कानूनी लड़ाई में उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उन्हें देर से ही सही, लेकिन न्याय जरूर मिलेगा।

तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने पर चर्चा, मंत्री परमार ने की बैठक की अगुवाई

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में बुधवार को विधानसभा स्थित समिति कक्ष में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग की परामर्शदात्री समिति की बैठक हुई। बैठक में विधायक सर्वश्री हरिबब्बू राय, इंजीनियर श्री नरेंद्र प्रजापति, श्री अशोक रोहाणी, डॉ तेज बहादुर चौहान, डॉ राजेंद्र पाण्डेय (राजू भैया), प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार श्री मनीष सिंह, संचालक कौशल विकास श्री गिरीश शर्मा और आयुक्त तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार श्री अवधेश शर्मा सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में शासकीय योजनाओं, गतिविधियों एवं कार्यक्रमों के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करने के सुझाव विधायकों ने दिये। विधायकों ने स्थानीय उद्योग जगत की मांग एवं स्थानीय रोजगार की संभावनाओं के अनुरूप संस्थान एवं पाठ्क्रमों के संचालन के सम्बन्ध में भी महत्वपूर्ण परामर्श दिए। इंजीनियरिंग, पॉलीटेक्निक एवं आईटीआई संस्थानों में अधिकाधिक सीट भरने के लिए आवश्यक सुझाव भी विधायकों ने दिए। तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री परमार ने विधायकगणों से प्राप्त विभिन्न सुझावों के अनुरूप आवश्यक कार्ययोजना बनाकर क्रियान्वयन के लिए सम्बंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में पिछली बैठक का पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। इंजीनियरिंग, पॉलीटेक्निक एवं आईटीआई महाविद्यालयों में प्रवेश का अद्यतन परिदृश्य, तकनीकी शिक्षा, कौशल एवं रोजगार संचालनालय अंतर्गत संचालित विभिन्न शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की अद्यतन स्थिति, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय एवं ग्लोबल स्किल्स पार्क की गतिविधियों, संस्थान एवं पाठ्यक्रम, विभिन्न छात्रवृत्ति, पदपूर्ति की प्रकिया एवं भर्तियों की अद्यतन स्थिति, विभागीय कार्यों एवं नवाचारों पर क्रियान्वयन, संकल्प पत्र के अनुरूप विभागीय क्रियान्वयन की प्रगति, विभिन्न बोर्ड अंतर्गत संचालित योजनाओं, विभिन्न इंटर्नशिप योजनाओं, स्वामी विवेकानंद युवा शक्ति मिशन, रोजगार मेला एवं विद्यार्थियों के अध्ययन-अध्यापन और रोजगार से जुड़े विविध विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। स्थानीय एवं उद्योग जगत की मांग एवं आवश्यकतानुरूप संस्थान एवं पाठ्यक्रमों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।  

पाकिस्तान में मानसून की मार, जनजीवन अस्त-व्यस्त, बाढ़ को लेकर रेड अलर्ट

नई दिल्ली पाकिस्तान में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने कई क्षेत्रों में बाढ़ की चेतावनी जारी की है। ये चेतावनी ऐसे समय में जारी की गई है जब 5 से 8 अगस्त तक पाकिस्तान के ऊपरी और मध्य भागों में तीव्र मानसून के प्रभाव की आशंका है। इसके अलावा उत्तरी पाकिस्तान पर मानसूनी धाराओं और पश्चिमी द्रोणिका के प्रभाव से भारी बारिश होने की संभावना है। भारी बारिश के कारण पाकिस्तान में बाढ़ का अलर्ट भारी बारिश की वजह से सिंधु, चिनाब और रावी सहित पाकिस्तान की सभी प्रमुख नदियों में जल स्तर बढ़ने की संभावना है, जबकि रावी और चिनाब की सहायक नदियों में बाढ़ की संभावना जताई गई है। दूसरी तरफ, तरबेला, गुड्डू और सुक्कुर बैराज में बाढ़ फिलहाल निम्न स्तर पर है, लेकिन लगातार बारिश चश्मा और ताउंसा को भी निम्न बाढ़ स्तर की ओर धकेल सकती है। इसके अलावा, नौशेरा में काबुल नदी, स्वात नदी और पंजकोरा और उनसे जुड़ी धाराओं और नालों में लगातार बारिश के कारण जल स्तर में वृद्धि देखी जा सकती है। बारिश से बढ़ सकता है बाधों का जल स्तर मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में, हुंजा, शिगर और घांचे जिलों में जलधाराओं के नेटवर्क में पानी का प्रवाह सहायक नदियों के साथ संभावित बाढ़ का कारण बन सकता है। साथ ही बांधों में मौजूदा भंडारण से संकेत मिलता है कि खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में तरबेला जलाशय 94% पर है और भारी बारिश के कारण इसका जल स्तर बढ़ने की संभावना है। एनडीएमए लोगों के सतर्क रहने की चेतावनी दी एनडीएमए ने नदियों और नालों के पास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा है, क्योंकि रात में भारी बारिश के कारण अचानक जल स्तर बढ़ सकता है। बारिश के कारण अबतक कितना नुकसान? एनडीएमए की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 26 जून से अब तक मूसलाधार मानसूनी बारिश के कारण 140 बच्चों सहित कम से कम 299 लोगों की जान चली गई और 715 अन्य घायल हो गए। रिपोर्ट की मानें तो बारिश के कारण होने वाली घटनाओं में 715 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 239 बच्चे, 204 महिलाएं और 272 पुरुष शामिल हैं। अबतक, अचानक आई बाढ़ और भारी बारिश के कारण कुल 1,676 घर क्षतिग्रस्त हो गए और 428 जानवर मारे गए। इस बाढ़ के कारण कई क्षेत्रों में व्यापक विनाश हुआ है और स्थानीय समुदायों को भारी नुकसान पहुंचा है।

क्या ट्रंप की नीति से अमेरिका खुद फंसेगा जाल में? भारत नहीं, खुद पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) की सदस्य शामिका रवि ने कहा है कि अमेरिका की तरफ से टैरिफ में किसी भी तरह की वृद्धि का बोझ कम आया वाले अमेरिकी परिवारों पर पड़ेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि भारत एक अच्छा व्यापारिक साझेदार नहीं रहा। उन्होंने एलान किया कि वह अगले 24 घंटों में भारत पर टैरिफ में काफी वृद्धि करेंगे। ट्रंप का टैरिफ वास्तव में वैश्विक बाजारों में उपलब्ध सस्ते सामानों पर एक कर है, जिसका बोझ कम आय वाले अमेरिकी परिवारों पर पड़ेगा। रवि ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'ये टैरिफ अंतत: कम आय वाले अमेरिकी परिवारों से वहां की सरकार को हस्तांतरित होते हैं।'   भारत पर 25 फीसदी टैरिफ एक अगस्त को ट्रंप ने पारस्परिक टैरिफ दरों में संशोधन शीर्षक से एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें भारत के लिए 25 प्रतिशत की भारी वृद्धि सहित पांच दर्जन से अधिक देशों के लिए टैरिफ बढ़ा दिया गया था। हालांकि, कार्यकारी आदेश में उस जुर्माने का उल्लेख नहीं था, जो ट्रंप ने कहा था कि भारत को रूसी सैन्य उपकरण और ऊर्जा की खरीद के कारण चुकाना होगा। पिछले हफ्ते, ट्रंप ने भारत और रूस के घनिष्ठ संबंधों पर तीखा हमला करते हुए दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मृत बताया था। इस टिप्पणी ने नई दिल्ली को यह कहने के लिए प्रेरित किया कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है भारत की जीडीपी पर नहीं पड़ेगा असर     उद्योग संगठन पीएचडीसीसीआई के एक अध्ययन के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर घोषित 25 प्रतिशत टैरिफ का देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर प्रभाव नगण्य रहेगा। संगठन ने कहा कि इसकी वजह यह है कि इससे अमेरिका को केवल 8.1 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित होगा। अमेरिका द्वारा घोषित टैरिफ गुरुवार से प्रभावी होने की संभावना है।     पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) द्वारा जारी इस शोध पत्र में अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए कई उपायों की भी सिफारिश की गई है। पीएचडीसीसीआई के प्रेसिडेंट हेमंत जैन ने कहा, 'हमारा विश्लेषण दर्शाता है कि अमेरिका द्वारा भारत पर घोषित 25 प्रतिशत टैरिफ के परिणामस्वरूप भारत के कुल वैश्विक व्यापारिक निर्यात पर केवल 1.87 प्रतिशत और भारत के सकल घरेलू उत्पाद पर बहुत मामूली 0.19 प्रतिशत का प्रभाव पड़ेगा।'     अध्ययन में कहा गया है कि 2024-25 में भारत ने अमेरिका को 86.5 अरब डॉलर (भारत के कुल वैश्विक निर्यात का 1.87 प्रतिशत) का निर्यात किया था और जिस तरह के टैरिफ का एलान किया गया है, उससे 8.1 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित होगा। टैरिफ का असर जिन सेक्टर के निर्यात पर पड़ेगा, उसमें इंजीनियरिंग सामान पर 1.8 अरब डॉलर का, रत्न एवं आभूषण पर 93.2 करोड़ डॉलर का और सिले-सिलाए कपड़ों पर 50 करोड़ डॉलर का असर पड़ेगा।  

उत्तर प्रदेश में कानून का खौफ: योगी सरकार ने 15,000+ अपराधियों को भेजा जेल

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में आपरेशन कन्विक्शन के तहत पिछले एक वर्ष में गंभीर अपराध हत्या, डकैती, लूट, अपहरण और पॉक्सो एक्ट में 15 हजार से अधिक अपराधियों को कठोर सजा दिलायी गयी है। इस दौरान गंभीर अपराध के 47 हजार से अधिक मामले चिन्हित किये गये। इनमें से कोर्ट द्वारा 19 हजार से अधिक मामलों का निस्तारण कर अपराधियों को सजा दी गयी। प्रदेशभर में ऑपरेशन कन्विक्शन पुलिस महानिदेशक अभियोजन दीपेश जुनेजा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अपराधियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए प्रदेशभर में ऑपरेशन कन्विक्शन चलाया जा रहा है। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत पिछले एक वर्ष में हत्या, डकैती, लूट, अपहरण, पॉक्सो एक्ट, बलात्कार और चोरी जैसे गंभीर 47,149 अपराध के मामलों को चिन्हित किया गया। इनमें से कोर्ट द्वारा 19,584 मामलों का निर्णय करते हुए 15,641 अपराधियों को सजा सुनायी गयी। आंकड़ों पर एक नजर :- हत्या के 9,942 मामलों में से 4,137 का निर्णय हुआ, जिनमें से 3,411 अपराधियों को सजा मिली और 726 दोषमुक्त हुए। सजा दर 82.45 प्रतिशत है। पॉक्सो एक्ट/बलात्कार के 27,074 मामलों में 9,140 का निपटारा हुआ, जिसमें से 6,075 को सजा और 3065 दोषमुक्त हुए। सजा दर 66.46 प्रतिशत है। डकैती के 461 मामलों में 203 का निर्णय हुआ, जिनमें से 174 को सजा मिली और 29 बरी हुए। सजा दर 85.71 प्रतिशत है। ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान से अपराधियों में कानून का भय ऑपरेशन कन्विक्शन को प्रभावी बनाने के लिए ई-प्रॉसीक्यूशन पोर्टल और केस ट्रैकिंग सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। वर्चुअल कोर्ट सुनवाई जैसे नवाचारों को अपनाया गया है। जिला स्तर पर अभियोजन अधिकारियों को प्रशिक्षित कर मामलों की त्वरित समीक्षा करवाई जा रही है। ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान से अपराधियों में कानून का भय पैदा हुआ है और संगठित गिरोहों का नेटवर्क कमजोर हुआ है। कई मामलों में अपराध की प्रवृत्तियों में कमी आई है। यह अभियान प्रदेश में कानून के शासन की पुनर्स्थापना का प्रतीक बन चुका है।  

कांवड़ यात्रा को लेकर सपा पर बरसे योगी, बरेली को दी 2,264 करोड़ की विकास योजनाएं

बरेली  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि समाज की सतर्कता और प्रशासन की सक्रियता के कारण कांवड़ यात्रा को बदनाम करने की साजिशें बार-बार नाकाम हुई हैं। मुख्यमंत्री ने बरेली में 2,264 करोड़ रुपये की 545 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘कुछ असामाजिक तत्वों ने कांवड़ यात्रा की छवि खराब करने की कोशिश की लेकिन समाज की जागरुकता व प्रशासन की तत्परता ने ऐसी साजिशों को नाकाम कर दिया है। यह यात्रा अब एकता और भक्ति की प्रतीक है।''  ‘‘माफिया मुक्त'' हुआ यूपी – सीएम योगी  मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए उन पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘‘2017 से पहले बरेली हर तीसरे माह सांप्रदायिक दंगों का गवाह बनता था। आज यह नाथ कॉरिडोर और आध्यात्मिक पर्यटन के लिए जाना जाता है।'' उन्होंने उत्तर प्रदेश के ‘‘माफिया मुक्त'' हो जाने का दावा करते हुए कहा, ‘‘पहले हर जिले का अपना माफिया डॉन होता था। आज उत्तर प्रदेश एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज और एक जिला, एक उत्पाद के लिए जाना जाता है। हम आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण करते हुए आध्यात्मिक विरासत का संरक्षण कर रहे हैं।''  ‘2017 से पहले सरकारी नौकरियां राजनीतिक रिश्तेदारों के लिए खुली छूट थीं'  मुख्यमंत्री ने किसी का नाम लिये बगैर कहा, ‘‘2017 से पहले सरकारी नौकरियां राजनीतिक रिश्तेदारों के लिए खुली छूट थीं। चाचा-भतीजे भर्ती को अपने निजी व्यवसाय की तरह समझते थे। पिछले आठ वर्षों में साढ़े आठ लाख से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से नौकरी दी गई है।'' पुलिस बल में भर्ती का हवाला देते हुए आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘हमने 60 हजार 244 पुलिसकर्मियों की भर्ती पूरी कर ली है। इनमें से 12 हजार से अधिक महिलाएं हैं।''  भाजपा विरासत को विकास से जोड़ रही है – योगी आदित्यनाथ  उन्होंने दावा किया कि अब किसी भी योजना के क्रियान्वयन में जाति, धर्म या क्षेत्र के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता। उन्होंने कहा कि यह नया भारत है जो ‘सबका साथ, सबका विकास' की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है। आदित्यनाथ ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘डबल इंजन वाली भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) सरकार विरासत को विकास से जोड़ रही है।''  सीएम ने 6 हजार से अधिक युवाओं को वितरित किए नियुक्तिपत्र   मुख्यमंत्री ने रोजगार मेले के माध्यम से चयनित छह हजार से अधिक युवाओं को नियुक्तिपत्र भी वितरित किए और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाणपत्र व टैबलेट प्रदान किये। योगी आदित्यनाथ ने ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना' का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘इस योजना के तहत चयनित युवाओं को पांच लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त और गारंटी-मुक्त ऋण प्रदान किया जाता है। समय पर भुगतान करने पर ऋण को 7.5 लाख और फिर 10 लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है।'' उन्होंने कहा, ‘‘डबल इंजन वाली सरकार लोगों के जीवन में समृद्धि और खुशी सुनिश्चित करने के लिए अथक प्रयास कर रही है।''