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सीतापुरम टाउनशिप के लिए बड़ा फैसला, 30 जून 2027 तक निर्माण कार्य बंद

 सीतामढ़ी  ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के लिए अधिसूचित विस्तारित क्षेत्र में भी जमीन की खरीद बिक्री व नए भवन निर्माण पर रोक लगा दी गई है। इस संबंध में नगर विकास एवं आवास विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। यह रोक 30 जून 2027 तक रहेगी। मालूम हो कि इसके तहत पूर्व से अधिसूचित सीतामढ़ी आयोजना क्षेत्र का क्षेत्रफल 99.23 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में जमीन की खरीद बिक्री एवं नए निर्माण पर रोक लगाई गई थी। वहीं, विस्तारित क्षेत्रफल 200.09 वर्ग कि.मी. अर्थात् कुल क्षेत्रफल 200.32 वर्ग किमी. हो गया है। जिसमें शहरी क्षेत्र का क्षेत्रफल 55.84 वर्ग कि.मी. एवं शेष ग्रामीण क्षेत्र का क्षेत्रफल 243.48 वर्ग कि.मी. है। इस आयोजना क्षेत्र के अंतर्गत एक शहरी प्रशासनिक इकाई (नगर निगम, सीतामढ़ी) तथा 98 राजस्व ग्राम को शामिल किया गया है। शामिल किए गए नए क्षेत्रों में भी जमीन की खरीद बिक्री व नए निर्माण पर रोक लगा दी गई है। इनमें डुमरा सीडी ब्लॉक के 58, रीगा सीडी ब्लॉक के 17. परसौनी सीडी ब्लॉक के 14, बथनाहा सीडी ब्लॉक के 02 राजस्व ग्राम एवं रुन्नीसैदपुर सीडी ब्लॉक के 07 राजस्व ग्राम शामिल हैं। बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग ने सीतामढ़ी में प्रस्तावित सीतापुरम ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के लिए मास्टर प्लान तैयार होने तक इस क्षेत्र में जमीन के क्रय-विक्रय, हस्तांतरण और भवनों के निर्माण पर रोक लगा दी है। नगर विकास एवं आवास विभाग की अधिसूचना के अनुसार, सीतापुरम ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के विशेष क्षेत्र और कोर क्षेत्र सहित पूरे आयोजन क्षेत्र में 30 जून 2027 तक सभी तरह के भूमि विकास और निर्माण कार्यों पर रोक रहेगी। यह रोक बिहार शहरी आयोजना तथा विकास अधिनियम, 2012 की धारा-9(7) के तहत लगाई गई है। विभाग के अनुसार, इस क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। प्लान बनने तक अवैध प्लाटिंग और बेतरतीब निर्माण को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। रोक हटने के बाद ही सुनियोजित तरीके से टाउनशिप का विकास किया जाएगा। नगर आयुक्त डॉ. गजेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि नगर विकास विभाग की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। रोक के कारण अब टाउनशिप क्षेत्र में न तो कोई नई जमीन की रजिस्ट्री हो सकेगी और न ही कोई नया मकान या व्यावसायिक भवन बनाया जा सकेगा। 30 जून 2027 के बाद मास्टर प्लान के अनुसार ही विकास की अनुमति मिलेगी।

भागलपुर, मुजफ्फरपुर, छपरा और सीतामढ़ी में जमीन की खरीद-बिक्री और निर्माण पर प्रतिबंध

पटना बिहार में बनने वाले अलग-अलग टाउनशिप को लकर सम्राट चौधरी सरकार बेहद गंभीर नजर आ रही है। अब बिहार सरकार ने राज्य की चार ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप में जमीन खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी है। इसके तहत भागलपुर, मुजफ्फरपुर, छपरा और सीतामढ़ी में बनने वाले सेटेलाइनट टाउनशिप में यह रोक 30 जून 2027 तक प्रभावी रहेगी। बिहार सरकार के नगर विकास विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। यह भी कहा गया है कि इस प्रतिबंध के दौरान अगर जमीन की किसी तरह की कोई खरीद-फरोख्त की जाती है तो इसपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नगर विकास विभाग ने इस दौरान टाउनशिप में किसी प्रकार के नए निर्माण कार्यों पर भी रोक लगा दी है। जमीन खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के साथ ही अब चारों टाउनशिप के मास्टर प्लान बनाने का काम शुरू होगा। विभाग ने शनिवार (4 जुलाई) को इस संबंध मं अधिसूचना जारी करते हुए कहा है कि प्रतिबंध के दौरान अधिसूचित क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री, जमीन हस्तांतरण, भूमि के विकास और भवन निर्माण से संबंधित किसी भी प्रकार के कार्य नहीं किए जा सकेंगे। नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई यह भी कहा गया है कि प्रतिबंधित क्षेत्रों में नियम का उल्लंघन करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने यह कार्यवाही शहरी आयोजना तथा विकास अधिनियम, 2012 की धारा 9(7) तथा बिहार शहरी आयोजना तथा विकास नियमावली, 2014 के तहत की है। इस निर्णय का उद्देश्य चारों शहरों के प्रस्तावित टाउनशिप क्षेत्रों का योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित करना और भविष्य की शहरी जरूरतों के अनुरूप आधारभूत संरचना विकसित करना है। बता दें कि डेहरी सहित कुल 12 टाउनशिप विकसित किया जा रहा है। सात शहरों में पहले लग चुकी है रोक बता दें कि इससे पहल राज्य सरकार ने इससे पहले 23 अप्रैल को 11 टाउनशिप में जमीन खरीद-बिक्री पर रोक लगाई थी। उसके बाद 24 अप्रैल को सात शहरों पटना, सोनपुर, गयाजी, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और मुंगेर में 31 मार्च 2027 तक रोक का आदेश जारी किया गया था। तब जमीन मालिकों ने आर्थिक जरूरत में जमीन बेचने की अनुमति मांगी। सरकार ने जून 2026 में राहत देते हुए आवास बोर्ड को जमीन खरीदने के लिए अधिकृत किया था। यानी इच्छुक किसान आवास बोर्ड मुख्यालय पटना में एमडी के नाम से जमीन बेचने का आवेदन दे सकते हैं। दस्तावेज की जांच के बाद संबधित जिलाधिकारी जमीन का मूल्य तय करेंगे। अब विभाग ने 4 जुलाई को चार टाउनशिप में जमीन खरीद-बिक्री पर रोक की अधिसूचना जारी की है।

औद्योगिक विकास पर बड़ा प्लान: बिहार में स्टार्टअप और इंडस्ट्री को मिलेगा 30 दिन में क्लियरेंस

पटना बिहार में इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई योजनाएं ला रही है. इस बीच आज मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार में इंवेस्टमेंट को लेकर बड़ी जानकारी दी. सीएम सम्राट ने कहा, बिहार में 85 प्रतिशत लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं. देश के किसी भी कोने में आप कश्मीर से कन्याकुमारी तक चले जाएं सबसे अच्छी ग्रामीण सड़क आपको बिहार में ही मिलेगी. शहरी इलाकों में भी सड़कों को बेहतर बनाया जा रहा. 12 नई टाउनशिप से आएगा 6.5 लाख करोड़ का निवेश सीएम सम्राट ने यह भी कहा कि आज से 30-40 साल पहले प्रतियोगिता दर्पण में यह सामान्य ज्ञान हुआ करता था कि एशिया की सबसे बड़ी कॉलोनी कंकड़बाग, पटना है. हमलोग 12 नई टाउनशिप विकसित कर रहे हैं इसके लिए 6 लाख 25 हजार एकड़ भूमि पर काम शुरू किया जा रहा है. जिसमें 6.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश आने वाला है. विकसित होने वाले 12 टाउनशिप में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, इंडस्ट्रियल पार्क भी विकसित किया जाएगा. इसमें जिन लोगों की जमीन अधिग्रहित होगी उन्हें सरकार उचित मुआवजा देगी. हमने कहा है कि किसी व्यक्ति की जमीन टाउनशिप क्षेत्र में आती है और उनके घर में अगर बेटी की शादी है या वह किसी भी विपदा से जूझ रहे हैं तो वे डीएम को आवेदन दें. उनके खाते में मुआवजे की राशि तत्काल भेजी जाएगी ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है. उद्योग या स्टार्टअप के लिए 30 दिनों के अंदर क्लियरेंस मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए पिछले कैबिनेट की बैठक में निर्णय लिया है. पहले ऐसी व्यवस्था थी कि आवेदन देने के बाद भी नगर निगम और अग्निशमन में आवेदन लंबित रहते थे. अब हमने ऐसी व्यवस्था बनाई है कि उद्योग या स्टार्टअप लगाने के लिए आवेदन देने के 30 दिनों के अंदर क्लियरेंस मिलेगा. इस तरह से बिहार में युवाओं को बंपर रोजगार मिल सकेगा. जमीन अधिग्रहण को लेकर दिखे सख्त इससे पहले सीएम सम्राट चौधरी ने बिहार की विकास योजनाओं को लेकर भी कड़ा आदेश दिया था. खासकर उद्योग और टाउनशिप की जमीन को लेकर वे सख्त दिखे. उन्होंने स्पष्ट कहा कि जमीन अधिग्रहण को लेकर अगर कहीं भी बाधा आ रही है तो उसे तुरंत दूर किया जाए. इस तरह से उन्होंने जमीन अधिग्रहण से संबंधित सभी प्रक्रियाओं को निर्धारित समय-सीमा के अंदर पूरा कराने का अधिकारियों को निर्देश दिया है.