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रांची में वेतन भुगतान ठप, सत्यापन प्रक्रिया बनी बड़ी वजह

 रांची झारखंड में सामने आए ट्रेजरी घोटाले के बाद सरकारी कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर व्यापक असर पड़ा है। राज्य के कई प्रमुख विभागों में कर्मियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है, जिसकी सबसे बड़ी वजह अब शुरू की गई सख्त सत्यापन प्रक्रिया बताई जा रही है। इस प्रक्रिया के तहत प्रत्येक कर्मचारी का ब्योरा दोबारा जांचा जा रहा है और शपथ पत्र लेना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे भुगतान में विलंब हो रहा है। सबसे अधिक असर स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे अहम क्षेत्रों पर पड़ा है। रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में डाक्टरों और अन्य कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पाया है। इसके अलावा राज्य के विभिन्न सरकारी स्कूलों के शिक्षक भी वेतन भुगतान में देरी से जूझ रहे हैं। वहीं, 108 एम्बुलेंस सेवा के काल सेंटर में कार्यरत कर्मियों को भी वेतन नहीं मिलने के कारण हड़ताल जैसी स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। सत्यापन प्रक्रिया से बढ़ी देरी सरकारी सूत्रों के अनुसार, ट्रेजरी से जुड़े अनियमितताओं के सामने आने के बाद सरकार ने पूरे भुगतान सिस्टम को पारदर्शी बनाने के लिए सभी कर्मचारियों का पुन सत्यापन शुरू किया है। इसके तहत कर्मचारियों को अपना व्यक्तिगत व सेवा संबंधी विवरण फिर से जमा करना पड़ रहा है, साथ ही एक शपथ पत्र भी देना अनिवार्य किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया में समय लग रहा है, जिसके कारण वेतन निर्गमन बाधित हो गया है। मालूम हो कि हाल ही में ट्रेजरी सिस्टम में गड़बड़ियों और अनियमित भुगतान के मामलों ने सरकार को सतर्क कर दिया। आशंका जताई गई कि कुछ मामलों में फर्जी या गलत तरीके से भुगतान हुआ है, जिसके बाद पूरे सिस्टम की समीक्षा और जांच शुरू की गई। इसी कड़ी में ट्रेजरी से भुगतान की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोककर व्यापक सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। कर्मचारियों पर बढ़ा आर्थिक दबाव इधर, समय पर वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि नियमित सेवाएं देने के बावजूद यदि समय पर वेतन नहीं मिलेगा तो कामकाज प्रभावित होना स्वाभाविक है। शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों ने भी बच्चों की फीस, बैंक लोन और दैनिक खर्चों को लेकर चिंता जताई है। कई कर्मचारियों का कहना है कि वे पूरी ईमानदारी से काम कर रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें वेतन के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। स्थिति को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में अन्य सरकारी विभागों में भी वेतन भुगतान प्रभावित हो सकता है। फिलहाल सरकार ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सत्यापन प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की अनियमितता न हो सके। इससे संबंधित अधिकारियों ने बताया कि कर्मचारियों का वेतन रोका नहीं गया है, बल्कि सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही भुगतान किया जाएगा।

आईएएस समिति की सख्ती, हजारीबाग-बोकारो से 7 साल के रिकॉर्ड तलब

रांची झारखंड में ट्रेजरी (कोषागार) के माध्यम से हुए संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और घोटाले की जांच अब अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है. आईएएस अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति ने हजारीबाग और बोकारो के उपायुक्तों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर जांच की प्रगति की समीक्षा की. समिति ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों जिलों से पिछले सात वर्षों के वेतन भुगतान और अन्य मदों से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. 20 बिंदुओं पर जवाब और अप्रैल 2020 का डेडलाइन जांच टीम ने विशेष रूप से 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2026 के बीच हुए तमाम वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड मांगे हैं. समिति ने 20 मुख्य बिंदुओं पर रिपोर्ट तलब की है, जिसमें निकासी का विवरण, स्थापना खर्च, वेतन पंजी, सेवानिवृत्त कर्मियों का डेटा और उस कार्यकाल में तैनात रहे आहरण एवं संवितरण पदाधिकारियों (DDO) की सूची शामिल है. सूत्रों के अनुसार, टीम जल्द ही हजारीबाग और बोकारो का भौतिक दौरा कर फाइलों की जांच करेगी. कुबेर पोर्टल ने खोली पोल, कई जिलों में ‘खतरे की घंटी’ वित्त विभाग की पैनी नजर अब राज्य के उन जिलों पर भी है जहां कुबेर पोर्टल के माध्यम से बड़ी और संदिग्ध निकासी देखी गई है. रामगढ़, रांची, पलामू, गोड्डा, साहेबगंज, देवघर और गिरिडीह जिलों में भी भारी वित्तीय हेराफेरी की आशंका जताई गई है. वित्त विभाग ने इन जिलों के उपायुक्तों को भी आंतरिक जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. वर्तमान में जांच का मुख्य केंद्र हजारीबाग और बोकारो हैं, लेकिन यहां गड़बड़ी पुष्ट होने पर जांच का दायरा पूरे राज्य में बढ़ाया जा सकता है. DDO के रडार पर आने से मचा हड़कंप इस पूरे घोटाले में निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों (DDO) की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध मानी जा रही है. वित्त विभाग का मानना है कि बिना निचले स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत या घोर लापरवाही के वेतन मद में इतनी बड़ी अवैध निकासी संभव नहीं है. स्थापना शाखा और ट्रेजरी के बीच हुए इस ‘खेल’ में शामिल अधिकारियों की पहचान की जा रही है. जांच टीम यह भी देख रही है कि सेवानिवृत्त कर्मियों के नाम पर भी कहीं भुगतान तो नहीं किया गया.

रांची में हड़कंप,ट्रेजरी गड़बड़ी की जांच के लिए हाई लेवल कमेटी गठित

रांची झारखंड में ट्रेजरी से अवैध निकासी के मामले की वजह से राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है. सरकार इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की तैयारी में है. वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने प्रोजेक्ट भवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि इस घोटाले की जड़ तक पहुंचने के लिए दो स्तरों पर जांच कराई जाएगी. वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की अध्यक्षता में एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया जा रहा है, जिसकी फाइल मुख्यमंत्री को भेज दी गई है. इसके साथ ही मामले के आपराधिक पहलुओं को उजागर करने की जिम्मेदारी सीआईडी (CID) को सौंपी गई है. वेतन के नाम पर हुई गड़बड़ियों की होगी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ वित्त मंत्री ने विशेष रूप से हजारीबाग, बोकारो और रांची में वेतन मद में हुई अवैध निकासी का जिक्र किया है. उन्होंने कहा है ”शुरुआती जांच में सामने आया है कि नियमों को ताक पर रखकर मोटी रकम निकाली गई है”. आईएएस अधिकारियों की कमेटी यह जांच करेगी कि तकनीकी स्तर पर चूक कहां हुई और किन अधिकारियों की मिलीभगत से ट्रेजरी के सुरक्षा तंत्र को तोड़ा गया. वहीं, सीआईडी उन चेहरों को बेनकाब करेगी जिन्होंने साजिश रचकर सरकारी राशि का गबन किया है. राज्य के सभी 33 कोषागारों की ऑनलाइन निगरानी सरकार ने केवल तीन जिलों तक ही अपनी जांच सीमित नहीं रखी है. वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि राज्य के सभी 33 कोषागारों (Treasuries) का विस्तृत ऑडिट और जांच कराई जाएगी. उन्होंने बताया कि विभाग के वेब पोर्टल के माध्यम से सभी कोषागारों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा रही है. यदि कहीं भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन या डाटा में हेरफेर पाया जाता है, तो वहां तत्काल विशेष टीम भेजकर कार्रवाई की जाएगी. दोषियों के लिए कोई रियायत नहीं सरकार के कड़े रुख से यह स्पष्ट है कि इस बार दोषियों को बचाने का कोई रास्ता नहीं छोड़ा जाएगा. वित्त मंत्री ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि रिपोर्ट आने के बाद संलिप्त अधिकारियों और कर्मियों पर न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि उन पर सख्त कानूनी मुकदमा भी चलाया जाएगा. सरकार का लक्ष्य इस कार्रवाई के जरिये एक ऐसी उदाहरण पेश करना है जिससे भविष्य में सरकारी सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके.