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अमेरिकी मीडिया ने खोली ट्रंप पहल की परतें, ‘पीस बोर्ड’ निकला सिर्फ दिखावा?

नई दिल्ली डोनाल्ड ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस की पोल अमेरिकी मीडिया ने ही खोल दी है। अमेरिका के अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने उनके इस प्लान को वनमैन शो बताया है। अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए अखबार की यह टिप्पणी आईना दिखाने वाली है, जो अपने द्वारा तय एजेंडे को चलाने के लिए बोर्ड ऑफ पीस शुरू करना चाहते हैं। अखबार ने लिखा है कि डोनाल्ड ट्रंप की यह संस्था वन मैन पावर शो है। इसके तहत डोनाल्ड ट्रंप को ही अधिकार होगा कि वह किसी भी मसले पर वीटो कर सकते हैं। वह अनिश्चितकाल तक इस बोर्ड का चेयरमैन खुद को घोषित कर चुके हैं। इसके अलावा बोर्ड का एजेंडा भी वही तय करेंगे। उनके द्वारा ही तय किया जाएगा कि कौन इसमें रहेगा और नहीं।   इतना ही नहीं डोनाल्ड ट्रंप जब भी चाहें इस बोर्ड को भंग कर सकते हैं और अपना उत्तराधिकारी तय कर सकते हैं। इस बोर्ड ऑफ पीस के गठन का जो ड्राफ्ट है, उसके आर्टिकल 3.2 में ही लिखा गया है कि पहले चेयरमैन डोनाल्ड ट्रंप होंगे। अखबार लिखता है कि कई अधिकारी और एक्सपर्ट मानते हैं कि यह वनमैन शो है। अखबार ने लिखा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनी व्यवस्था को बदलकर डोनाल्ड ट्रंप नया सिस्टम लाना चाहते हैं और खुद को ही उसके केंद्र में रखने का विचार है। कैंब्रिज इंटरनेशनल लॉ प्रोफेसर मार्क वेलर ने कहा कि यह तो सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र पर हमला है और उसके वजूद पर खतरा पैदा करना है। सऊदी अरब, मिस्र, इजरायल, बेलारूस, पाकिस्तान समेत कई देश इससे जुड़े हैं। हंगरी भी इससे जुड़ा है और उसने तो डोनाल्ड ट्रंप की शान में कसीदे पढ़े हैं। हंगरी के पीएम विक्टर ऑर्बन ने फेसबुक पर लिखा, 'जहां ट्रंप, वहां शांति। मिस्टर ट्रंप ने मुझे बोर्ड का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है और मैंने निसंदेह इससे जुड़ूंगा। यह मेरे लिए गर्व की बात है।' मार्क वेलर कहते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की यह कोशिश है कि वह पूरी दुनिया को ही अपने इर्द-गिर्द घुमाएं। दरअसल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ही नवंबर में गाजा में शांति प्रस्ताव के लिए एक बोर्ड का गठन की बात रखी थी। इस प्रस्ताव के तहत यह कहा गया था कि 2027 तक यह बोर्ड काम करेगा। यह बोर्ड गाजा में हालात सामान्य करेगा। अब तक बोर्ड ऑफ पीस की शक्तियां निर्धारित नहीं की गई हैं, लेकिन जैसे हालात हैं उसके अनुसार ऐसा लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप वन मैन शो बनाने की कोशिश में हैं। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को एक स्पीच में कहा था कि संयुक्त राष्ट्र संघ उम्मीदें पूरी नहीं कर पाया है। उनका कहना था कि इस संस्था में बहुत क्षमता थी, लेकिन वह उम्मीदें पूरी नहीं कर सकी है। एक बयान से साफ हो गए ट्रंप के इरादे, तब से ही आशंकाएं उनका कहना था कि बोर्ड ऑफ पीस दुनिया के विवादों को खत्म करेगा। यही नहीं भविष्य में यूएन की ही जगह ले सकता है। इससे उनके इरादे स्पष्ट हो गए, लेकिन दुनिया भर के देशों में इसे लेकर चिंता भी बढ़ गई कि आखिर डोनाल्ड ट्रंप संयुक्त राष्ट्र को क्यों खत्म करना चाहते हैं। इसके अलावा अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में एकछत्र राज कायम करने की कोशिशों की भी आलोचना हो रही है।  

अमेरिका की नई पहल में पाकिस्तान शामिल, ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को मिला 9 मुस्लिम देशों का साथ

वाशिंगटन पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गठित 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने के निमंत्रण को आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया है। यह संस्था मुख्य रूप से गाजा में युद्ध विराम लागू कराने और युद्ध से तबाह हुए क्षेत्र के पुनर्निर्माण की निगरानी के लिए बनाई गई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान जारी कर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के इस बोर्ड में शामिल होने के फैसले की पुष्टि की।   मंत्रालय ने कहा, 'पाकिस्तान का यह कदम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के तहत गाजा शांति योजना का समर्थन करने के प्रयासों का हिस्सा है। पाकिस्तान को उम्मीद है कि इस मंच के जरिए स्थायी युद्धविराम, मानवीय सहायता में वृद्धि और गाजा का पुनर्निर्माण सुनिश्चित होगा।' बयान में स्पष्ट किया गया कि पाकिस्तान 1967 से पहले की सीमाओं और 'अल-कुद्स अल-शरीफ' (यरूशलेम) को राजधानी मानकर एक स्वतंत्र फिलिस्तीन देश के गठन का पक्षधर है। क्या है 'बोर्ड ऑफ पीस'? राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले साल सितंबर में गाजा युद्ध को समाप्त करने की अपनी योजना के तहत इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। इसमें कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया गया है। ट्रंप खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष होंगे। हालांकि शुरुआत गाजा से हुई, लेकिन अब इसके जरिए अन्य वैश्विक संघर्षों को सुलझाने का लक्ष्य भी रखा गया है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, बोर्ड में स्थायी सीट के लिए 1 अरब डॉलर (करीब 8300 करोड़ रुपये) के योगदान का अनुरोध किया गया है, हालांकि पाकिस्तान या सऊदी अरब के आधिकारिक बयानों में इस भुगतान का जिक्र नहीं है। मुस्लिम देशों का बड़ा समर्थन पाकिस्तान के साथ ही अब तक 9 मुस्लिम बहुल देश इस बोर्ड का हिस्सा बनने पर सहमत हुए हैं। इनमें गाजा मध्यस्थता में अहम भूमिका निभाने वाले कतर और तुर्किये भी शामिल हैं। सऊदी अरब ने एक साझा फैसले की घोषणा करते हुए बताया कि सऊदी अरब, कतर, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों ने इसका समर्थन किया है। इसके अलावा, कुवैत ने भी अलग से इस बोर्ड में शामिल होने की पुष्टि की है। इजरायल और हमास के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए यह बोर्ड एक प्रशासक की भूमिका निभा सकता है। पाकिस्तान का मानना है कि इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी मौजूदगी फिलिस्तीन के भाइयों और बहनों की पीड़ा को कम करने और उनके आत्मनिर्णय के अधिकार को दिलाने में मददगार साबित होगी।