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घर में तुलसी की गलत दिशा बन सकती है कंगाली का कारण, पढ़ें क्या कहता है वास्तु शास्त्र

वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर आपने तुलसी का पौधा गलत दिशा में लगाया है, तो पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होगा। साथ ही जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं कि किस दिशा में तुलसी का पौधा नहीं लगाना चाहिए। भूलकर भी न लगाएं इस दिशा में तुलसी वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की दक्षिण दिशा पितरों की होती है। इसलिए तुलसी के पौधे को दक्षिण दिशा में भूलकर भी नहीं लगाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि गलत दिशा में तुलसी को लगाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और पूजा सफल नहीं होती है। साथ ही आर्थिक परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए तुलसी को लगाने से पहले सही दिशा जरूर जान लें। कौन-सी दिशा में लगाएं तुलसी वास्तु शास्त्र की मानें तो तुलसी को उत्तर दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। इस दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा मानी जाती है। इस दिशा में तुलसी लगाने से धन, सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इसके अलावा उत्तर-पूर्व दिशा में भी तुलसी का पौधा लगा सकते हैं। इस दिशा में देवताओं का स्थान माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इस दिन लगाएं तुलसी अगर आप घर में तुलसी लगाना चाहते हैं, तो इसके लिए गुरुवार और शुक्रवार का दिन शुभ माना जाता है, क्योंकि गुरुवार भगवान विष्णु शुक्रवार धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है। इस दिन तुलसी लगाने से शुभ परिणाम देखने को मिलते हैं। कार्तिक का महीना भी तुलसी लगाने के लिए उत्तम होता है। बता दें कि तुलसी को सोमवार, रविवार और एकादशी के दिन लगाने से बचना चाहिए। इन बातों का रखें ध्यान     तुलसी के पौधे के आसपास सफाई का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि मां लक्ष्मी का वास सफाई वाली जगह पर ही होता है।     तुलसी के पास रोजाना सुबह और शाम देसी घी का दीपक जलाएं।     पौधे के पास जूते-चप्पल न रखें। साथ ही कांटेदार पौधा नहीं लगाना चाहिए।  

मोक्षदा एकादशी व्रत: तुलसी की ये बातें रखें ध्यान, वरना अधूरा रह जाएगा पुण्य

  एकादशी का व्रत बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. हर माह में दो एकदशी पड़ती है. पहली कष्ण और दूसरी शक्ल पक्ष में. एकादशी का दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु की कृपा पाने का शुभ अवसर होता है. इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और व्रत किया जाता है. मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष में मोक्षदा एकादशी पड़ती है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से जीवन के सभी दुख दूर होते हैं. जीवन में खुशहाली आती है. सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि मोक्षदा एकादशी का व्रत मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है. इस व्रत को करने से मृत्यु के बाद मोक्ष मिलता है. तुलसी भगवान विष्णु को अति प्रिय है. इस दिन पूजा पाठ के साथ-साथ तुलसी से संबंधित कुछ बातों का भी ध्यान अवश्य रखना चाहिए. ऐसा करने श्री हरि का आशीर्वाद बना रहता है और व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है. मोक्षदा एकादशी पर तुसली संबंधित इन बातों का रखें ध्यान     मान्यता है कि एकादशी के दिन माता तुलसी, भगवान विष्णु के निमित्त निर्जला व्रत रखती हैं. ऐसे में भूलकर भी इस दिन माता को जल न चढ़ाएं. साथ ही तुलसी पात्र भी न उतारें. ऐसा करने से तुलसी माता का व्रत खंडित हो जाता है.     एकादशी या किसी भी अन्य दिन तुलसी के आस-पास साफ-सफाई ध्यान रखना चाहिए. तुलसी के पास जूते-चप्पल, झाड़ू और कूड़ेदान जैसी चीजें न रखें. वरना माता लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं. इससे धन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं.     एकादशी के दिन तुलसी को छूना वर्जित है, लेकिन इस दिन पर शाम के समय तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं. सात या ग्यारह बार परिक्रमा और तुलसी माता के मंत्रों का जप अवश्य करें.     एकादशी पूजा के दौरान विष्णु जी के भोग में तुलसी दल जरूर चढ़ाएं. एकादशी के दिन इन बातों का ध्यान रखने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है.  

एकादशी व्रत पर तुलसी की विशेष महिमा: इन गलतियों से रहें दूर, वरना रुष्ठ हो सकती हैं मां लक्ष्मी

हर माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत रखा जाता है. हर माह में दो एकादशी व्रत पड़ते हैं. मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी उत्पन्ना एकादशी कहलाती है, क्योंकि मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी पर ही जगपालक भगवान विष्णु के शरीर से एकादशी देवी उत्पन्न हुईं थीं. इसके बाद उन्होंने मुर नाम के दैत्य का सिर काट दिया था. उत्पन्ना एकदशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के पूजन और व्रत का विधान है. इस दिन एकादशी देवी की भी पूजा होती है. इस दिन व्रत और पूजन से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं. जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं. इस दिन तुलसी से जुड़े नियमों का पालन का पालन भी अवश्य करना चाहिए. मान्यता है कि इस दिन अगर तुलसी से जुड़े इन नियमों का पालन नहीं किया जाता तो मां लक्ष्मी रूठ जाती हैं. उत्पन्ना एकादशी कब है? इस साल मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 15 नवंबर को सुबह 12 बजकर 49 मिनट पर शुरू हो रही है. इस तिथि का समापन अगले दिन 16 नवंबर को 02 बजकर 37 मिनट पर होगा. चूंकि 15 नवंबर को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि की शुरुआत हो रही है, इसलिए उत्पन्ना एकादशी का व्रत इस बार 15 नवंबर यानी कल रखा जाएगा. उत्पन्ना एकदशी पर तुलसी से जुड़ी इन बातों का रखें ध्यान तुलसी को जल न दें हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये कहा जाता है कि तुलसी माता एकादशी के दिन भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. धर्म शास्त्रों में इस दिन तुलसी माता को जल देना वर्जित है, क्योंकि इस दिन जल देने से तुलसी माता का व्रत खंडित होता है. तुलसी के पत्ते न तोड़ें और सफाई का ध्यान दें एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने के लिए भी मना किया जाता है. साथ ही एकादशी के दिन तुलसी के पौधे के पास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखाना चाहिए. मान्यता है कि तुलसी के पास गंदगी होने से घर में मां लक्ष्मी वास नहीं करतीं. तुलसी को गंदे या जूठे हाथ से न छुएं एकादशी के दिन भूलकर भी तुलसी को गंदे या जूठे हाथों से नहीं छूना चाहिए. माना जाता है कि गंदे या फिर जूठे हाथों से अगर तुलसी को छुआ जाता है, तो इससे अशुभ फलों की प्राप्ति होती है.

तुलसी और दीया: शाम के समय क्यों है यह धार्मिक व स्वास्थ्यवर्धक अभ्यास

भारतीय संस्कृति में तुलसी का पौधा शुद्धता, आस्था और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है. शाम के समय तुलसी के पास दीया जलाना, घर में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने का एक सरल और प्रभावी उपाय है. तुलसी के पौधे में देवी लक्ष्मी का निवास होता है और तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है . इसलिए इसके फायदे और भी बढ़ जाते हैं. जानते हैं शाम के समय तुलसी के पौधे के पास दिया जलाने से क्या-क्या फायदे होते हैं. तुलसी के पास दीया जलाने का महत्व तुलसी का पौधा घर में सकारात्मक ऊर्जा लाता है. जब आप इसके पास रोज दीया जलाते हैं, तो यह घर के माहौल को शुद्ध और पवित्र बनाता है. धीरे-धीरे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है. कहा जाता है कि तुलसी के पास दीया जलाने से घर में शांति बढ़ती है. यह एक सरल उपाय है जो पूरे घर में खुशियां और सकारात्मकता फैलाता है.  देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु का आशीर्वाद शास्त्रों में कहा गया है कि देवी लक्ष्मी तुलसी में निवास करती हैं और भगवान विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय है. जब हम तुलसी की पूजा करते हैं और उसके पास दीया जलाते हैं, तो लक्ष्मी जी और विष्णु जी दोनों का आशीर्वाद मिलता है. उनकी कृपा से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और हमारे कामों में सफलता और स्थिरता आती है. इससे घर में धन, शांति और सुख-समृद्धि बनी रहती है.  मन की शांति और तनाव से राहत हर शाम तुलसी के पास दीया जलाने से मन को शांति मिलती है. अगर आप ज्यादा सोचते हैं या परेशान रहते हैं, तो यह उपाय आपको आराम और सुकून देता है.  वास्तु के अनुसार लाभ वास्तु शास्त्र में तुलसी के पौधे को शुभ और पवित्र माना गया है. हर दिन इसके पास दीया जलाने से घर में धन, सौभाग्य और तरक्की आती है. यह घर की ऊर्जा को मजबूत बनाता है.  जिससे अड़चनें और आर्थिक तंगी दूर होती है. 

तुलसी और शालिग्राम का रहस्य: कैसे श्राप बना भक्तिभाव का प्रतीक?

हिंदू धर्मग्रंथों में तुलसी और भगवान विष्णु की कथा को अत्यंत पवित्र और भावनात्मक माना गया है. यह कथा भक्ति, निष्ठा और प्रेम की पराकाष्ठा को दर्शाती है. तुलसी विवाह का पर्व इसी दिव्य मिलन का प्रतीक है, जब माता तुलसी (लक्ष्मी स्वरूपा) और भगवान विष्णु (शालिग्राम रूप) का पुनर्मिलन होता है. यह कथा यह भी बताती है कि ईश्वर अपने भक्त के प्रेम से इतने बंधे होते हैं कि श्राप को भी आशीर्वाद बना देते हैं. तुलसी और विष्णु का यह संबंध सिखाता है कि सच्ची भक्ति और पवित्र प्रेम सभी विपरीत परिस्थितियों को मंगलमय बना देते हैं. पुराणों के अनुसार, तुलसी का पूर्व जन्म वृंदा नामक एक पवित्र स्त्री के रूप में हुआ था. वह दैत्यराज जलंधर की पत्नी थीं, जो भगवान विष्णु के वरदान के कारण एक अपराजित दैत्य था. जलंधर की भक्ति और पत्नी की पतिव्रता शक्ति के कारण देवता उसे पराजित नहीं कर पा रहे थे. जब देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता मांगी, तो भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धारण कर वृंदा के सामने प्रकट हुए. वृंदा को जब यह ज्ञात हुआ कि उनके साथ छल हुआ है, तो उन्होंने क्रोध में भगवान विष्णु को पत्थर बनने का श्राप दिया. इस श्राप के फलस्वरूप भगवान विष्णु शालिग्राम पत्थर के रूप में सामने आए. वृंदा के श्राप से भगवान विष्णु पत्थर रूप में तो परिवर्तित हुए, किंतु उन्होंने वृंदा की भक्ति और पतिव्रता को प्रणाम करते हुए उन्हें वर दिया कि तुम धरती पर तुलसी के रूप में जन्म लोगी और मेरा शालिग्राम रूप सदा तुम्हारे साथ पूजा जाएगा. वृंदा के शरीर से ही गंडकी नदी का उद्भव हुआ जो कि नेपाल में स्थित है. जहां से आज भी शालिग्राम पत्थर प्राप्त होता हैं. इसलिए आज भी तुलसी-दल से शालिग्राम भगवान की पूजा की जाती है. किसका अवतार माना जाता है तुलसी का पौधा? धर्मग्रंथों में तुलसी को माता लक्ष्मी का अवतार माना गया है. लक्ष्मी जी जिस प्रकार सौभाग्य, समृद्धि और शुद्धता की देवी हैं, उसी प्रकार तुलसी भी सात्त्विकता और पवित्रता का प्रतीक हैं. भगवान विष्णु के प्रति तुलसी की अखंड भक्ति के कारण उन्हें लक्ष्मी स्वरूपा कहा गया. कहा जाता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा होता है, वहां स्वयं लक्ष्मी जी का वास होता है. तुलसी-दल के बिना विष्णु या श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है क्योंकि यह ईश्वर के प्रति निष्ठा और प्रेम का प्रतीक है. तुलसी का पूजन न केवल धार्मिक दृष्टि से शुभ है, बल्कि यह घर में शांति, सौभाग्य और दिव्य ऊर्जा के प्रवाह को भी स्थिर करता है.

तुलसी के पास ये एक गलती बना सकती है दरिद्रता का कारण, जानें सही उपाय

धर्म में तुलसी के पौधे को अत्यंत पवित्र, पूजनीय और देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। इसे घर में लगाने से सकारात्मकता, सुख-समृद्धि और शांति आती है। हालांकि, वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी के पौधे के पास कुछ ऐसी चीजें रखना वर्जित माना गया है, जिन्हें रखने से घर की समृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और दरिद्रता आ सकती है। जूते-चप्पल जूते-चप्पल अशुद्ध माने जाते हैं और इनका सीधा संबंध गंदगी से होता है। तुलसी का पौधा पूजनीय है। इसके पास जूते-चप्पल या उनसे संबंधित कोई भी वस्तु रखने से लक्ष्मी का अपमान होता है, जिससे घर में आर्थिक तंगी आ सकती है।  कांटेदार पौधे या सूखे पौधे तुलसी के पास कभी भी कैक्टस या अन्य कांटेदार पौधे नहीं रखने चाहिए। कांटेदार पौधे नकारात्मक ऊर्जा लाते हैं और घर में कलह का कारण बन सकते हैं। इसी तरह, तुलसी के गमले के आस-पास सूखे या मुरझाए हुए पौधे भी नहीं रखने चाहिए। सूखी तुलसी या सूखे पौधे दुर्भाग्य और धन हानि का संकेत देते हैं। टूटी हुई या खंडित वस्तुएं पूजा-पाठ से संबंधित टूटी हुई मूर्तियां, दीपक, या अन्य खंडित सामग्री को तुलसी के पास नहीं रखना चाहिए। खंडित वस्तुएं वास्तु दोष पैदा करती हैं और घर की बरकत में रुकावट डालती हैं। लोहे का सामान तुलसी के गमले के आस-पास लोहे से बनी अनावश्यक वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए। लोहा नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है, जो तुलसी की सकारात्मकता को कम कर सकता है और समृद्धि में कमी ला सकता है।

एकता कपूर के शो में नजर आएंगे बिल गेट्स, ‘तुलसी’ से करेंगे गंभीर मुद्दे पर चर्चा

मुंबई, स्मृति ईरानी का पॉपुलर टीवी शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ फैंस के बीच एक बार फिर फेमस हो गया है। सीरियल टीआरपी (टेलीविजन रेटिंग पॉइन्ट) की टॉप फाइव की रेस में शामिल हो गया है। अब शो में एक इंटरनेशनल मेहमान की एंट्री होने वाली है, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर पहले ही बज बन चुका है। शो में गुरुवार को अरबपति बिल गेट्स तुलसी विरानी का किरदार निभा रहीं स्मृति ईरानी से खास बातचीत करने के लिए आ रहे हैं। स्टार प्लस ने सीरियल ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ का नया प्रोमो शेयर किया है, जिसमें तुलसी लैपटॉप पर बिजनेसमैन बिल गेट्स का स्वागत कर रही हैं और बिल गेट्स भी तुलसी विरानी से हिंदी में बात कर रहे हैं। नए प्रोमो के मुताबिक गुरुवार की रात के एपिसोड में बिल गेट्स का कैमियो रखा गया है। वे कुछ देर के लिए शो से जुड़ेंगे और बच्चे के स्वास्थ्य के मुद्दे पर बात करेंगे। प्रोमो को शेयर कर जानकारी दी गई कि एपिसोड में आज नया सेहत का, संवेदना का और बदलाव का रिश्ता जुड़ने वाला है, जिसमें हर मां और हर बच्चा सुरक्षित रहे, इस गंभीर मुद्दे पर बात होगी। बिल गेट्स की ‘बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन’ गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता फैलाती है। इसी उद्देश्य को पूरा करते हुए बिल गेट्स और तुलसी विरानी चर्चा करने वाले हैं। ऐसा पहली बार हुआ है जब एकता कपूर के शो में किसी इंटरनेशनल पर्सनैलिटी को देखा गया। प्रोमो सामने आने के बाद एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, “पहली बार भारतीय टेलीविजन पर बिल गेट्स का शो देखने को मिल रहा है, बहुत बढ़िया तुलसी जी…आप तो अनुपमा से भी आगे निकल गईं।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “जय श्री कृष्णा बोलते हुए बिल गेट्स कितने प्यारे लग रहे हैं।” बता दें कि शो हर रात 10 बजकर 30 मिनट पर स्टार प्लस पर प्रसारित होता है। शो में अभी तक कई गंभीर समाजिक मुद्दों को उजागर किया गया है। शो की कहानी तुलसी के मोटापे से शुरू हुई थी, जिसके बाद घरेलू हिंसा, एक्सट्रा मैरिटल अफेयर और उम्र संबंधी समस्याओं को कहानी के रूप में दिखाया गया। इन्हीं वजहों से सीरियल आज ‘अनुपमा’ को टक्कर दे रहा है, जो हमेशा टीआरपी चार्ट में टॉप वन पर विराजमान रहता है।  

तुलसी-शमी का पौधा लगाने के वास्तु नियम: दूर होंगी जीवन की हर बाधा

भारत की प्राचीन संस्कृति और परंपरा में पेड़-पौधों को एक विशेष स्थान दिया गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, कुछ पौधों को घर में लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख-समृद्धि आती है। इन्हीं में से दो प्रमुख पौधे हैं तुलसी और शमी। दोनों का ही धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व बहुत गहरा है। माना जाता है कि इन्हें सही दिशा में और सही तरीके से लगाने से जीवन की कई परेशानियां दूर हो सकती हैं। आइए जानते हैं तुलसी और शमी के पौधे से जुड़े वास्तु टिप्स और उनके फायदों के बारे में। तुलसी का पौधा तुलसी को हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र और पूजनीय माना जाता है। इसे मां लक्ष्मी का रूप माना गया है और लगभग हर भारतीय घर में इसे देखा जा सकता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, तुलसी का पौधा घर के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करता है, जो नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखता है। तुलसी लगाने की सही दिशा वास्तु के अनुसार, तुलसी का पौधा हमेशा घर के ईशान कोण या उत्तर दिशा में लगाना चाहिए। यह दिशा देवताओं की मानी जाती है, जिससे शुभ फल मिलते हैं। यदि संभव न हो तो इसे पूर्व दिशा में भी लगाया जा सकता है। शमी का पौधा शमी का पौधा भी भारतीय संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण है। इसे शनि देव से जोड़ा जाता है और माना जाता है कि इसे घर में लगाने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है। शमी को विजयदशमी के दिन पूजने की भी परंपरा है क्योंकि इसे शुभता और विजय का प्रतीक माना गया है। शमी लगाने की सही दिशा वास्तु शास्त्र के अनुसार, शमी का पौधा घर के बाहर मुख्य द्वार के पास लगाना चाहिए। इसे लगाते समय इस बात का ध्यान रखें कि जब आप घर से बाहर निकलें तो यह पौधा आपके बाईं ओर पड़े। अगर घर के बाहर जगह नहीं है, तो इसे छत पर दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) या पश्चिम दिशा में भी लगा सकते हैं। इसे घर के अंदर लगाने से बचें। तुलसी और शमी को एक साथ लगाने के नियम तुलसी और शमी के पौधों को कभी भी एक ही गमले में नहीं लगाना चाहिए। दोनों को अलग-अलग गमलों में रखें। दोनों पौधों को पास-पास लगाया जा सकता है, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि ये एक-दूसरे से सटे हुए न हों।  तुलसी को प्रतिदिन जल अर्पित करें और संध्या काल में उसके पास दीपक जलाएं। शमी के पौधे के नीचे शनिवार के दिन सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।