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शहरों के विकास के लिए बड़ा प्लान! Vipul Goel ने 6240 करोड़ रुपये के निवेश का किया दावा

चंडीगढ़. हरियाणा के निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ प्रमुख रणनीतिकार की भूमिका में रहे शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि प्रदेश की जनता विकास और सुशासन की राजनीति के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने शहरी निकायों में भाजपा की जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकारों के कल्याणकारी फैसलों को देते हुए भरोसा दिलाया कि शहरों के विकास में किसी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी। विपुल गोयल ने कहा कि भाजपा ने हर शहरी निकाय का अलग संकल्प पत्र जारी किया था, जिसे धरातल पर लागू करने की प्रक्रिया चुनाव नतीजे आते ही शुरू हो चुकी है। शहरी निकायों में जीत हासिल करने वाले जनप्रतिनिधियों के सम्मान के बाद मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए विपुल गोयल ने कहा कि हमारी सरकार का विजन और लक्ष्य स्पष्ट है। बजट 6249 करोड़ रुपये किया गया शहरों में विकास कार्यों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पिछले साल के मुकाबले बजट में 23.01 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 6240.97 करोड़ रुपये कर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरी निकायों की जीत केवल चुनावी परिणाम नहीं है, बल्कि हरियाणा की जनता द्वारा विकास, सुशासन, पारदर्शिता और जनसेवा की भाजपा की राजनीति पर जताया गया मजबूत विश्वास है। विपुल गोयल ने कहा कि हरियाणा की जनता ने स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया है कि वह ऐसी सरकार चाहती है जो जनता के बीच रहकर जनता के हित में कार्य करे और विकास को केवल घोषणाओं तक सीमित न रखकर उसे धरातल तक पहुंचाने का कार्य करे। शहरी निकाय चुनाव से विधानसभा चुनाव की दिशा होगी तय उन्होंने दावा किया कि शहरी निकाय चुनाव से साल 2029 में होने वाले विधानसभा चुनाव की दिशा अभी से तय हो गई है, हालांकि इसमें किसी तरह का संशय नहीं था, लेकिन भाजपा को पूरी तरह से जिताकर और कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों को बुरी तरह से हराकर लोगों ने अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं। निकाय मंत्री ने कहा कि भाजपा ने हर निकाय क्षेत्र में सरकार और संगठन के प्रमुख नेताओं की जिम्मेदारी लगाई थी। ग्रास रूट पर पार्टी के मेहनती कार्यकर्ताओं ने पूरे जी-जान और संकल्प के साथ काम किया। पार्टी हमेशा ऐसे कार्यकर्ताओं की आभारी है, जो जनता के बीच जाकर सरकार और संगठन के हित में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हैं। विपुल गोयल ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सैनी निरंतर इस दिशा में प्रयासरत हैं कि हरियाणा में जनसुविधाओं से जुड़ी प्रत्येक व्यवस्था अधिक सशक्त, आधुनिक, पारदर्शी और जवाबदेह बने, ताकि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक विकास को आत्मसात कर सके।

नगर विकास विभाग की नई पहल, 264 निकायों को जोड़ेगा एकीकृत ई-गवर्नेंस सिस्टम

पटना शहरी निकायों के नागरिकों को अपनी समस्या के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उन्हें निकाय से संबंधित समस्या का समाधान अब एक क्लिक पर मिलेगा। यानी सभी नगरीय सुविधाएं एक प्लेटफार्म पर मिलेंगी। नगर विकास विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए पोर्टल विकसित किया जा रहा है। इसी पोर्टल पर राज्य के 264 निकायों से संबंधित कार्य होंगे। वर्तमान में होल्डिंग टैक्स को छोड़कर अन्य सभी तरह की सुविधाओं के लिए नागरिकों को निकाय कार्यालय का चक्कर काटना पड़ता है। सभी निकायों की अपनी अलग-अलग व्यवस्था है। नियमों के पालन में एकरूपता नहीं है। इसीलिए नगर विकास विभाग ने राष्ट्रीय शहरी डिजिटल मिशन के तहत ई-गवर्नेंस मॉड्यूल्स विकसित करने का निर्णय लिया है। इसका मकसद शहरी नागरिकों को सभी तरह की सेवाओं की ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके लिए सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है। सॉफ्टवेयर विकसित होने के साथ ही सभी निकाय एक पोर्टल से जुड़ जाएंगे। उसी पोर्टल पर अलग-अलग 15 प्रकार की सेवाओं के विकल्प मौजूद होंगे। आम नागरिक अपनी जरूरत के हिसाब से विकल्प का चयन कर सकता है। संबंधित निकाय के पास उनकी समस्या भेज दी जाएगी। मुख्यालय स्तर से इसकी निगरानी की जाएगी। इससे नागरिकों की समस्या का समाधान भी सुनिश्चित होगा। इसके अलावा विकास से जुड़े कार्यों के दुहराव से भी बचा जा सकेगा।नगर विकास विभाग ने इस पर अगले पांच वर्षों में करीब 120 करोड़ रुपये खर्च करने का निर्णय लिया है। लोगों को 15 प्रकार की सुविधाएं प्राप्त होंगी शहरी नागरिकों को पंद्रह प्रकार की सेवाएं ऑनलाइन मिलेंगी। इसमें प्रोपर्टी टैक्स, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, व्यापार लाइसेंस, नक्शा पास कराना, किसी समस्या की शिकायत करना, किसी काम के लिए एनओसी लेना, पेयजल और सीवरेज कनेक्शन, होर्डिंग्स या विज्ञापन, अन्य कर संग्रह, साफ-सफाई और ठोस कचरा प्रबंधन से संबंधित कार्य होंगे। निकायों के लीगल, एसेट मैनेजमेंट, मैटेरियल मैनेजमेंट आदि प्रमुख कार्य शामिल हैं। कर्मचारियों को प्रशिक्षण मिलेगा सॉफ्टवेयर विकसित होने के साथ ही नगर विकास विभाग इस सेवा की शुरुआत कर देगा। इससे पहले नगर निकायों के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार ने सात निश्चय-3 के तहत सबका सम्मान, जीवन आसान के तहत ई-गवर्नेंस को लागू कर रही है। इसके संचालन के लिए मुख्यालय स्तर पर विशेषज्ञों की एक टीम होगी।

केंद्र सरकार की नई पहल,शहरों के रोजगार और अर्थव्यवस्था का तैयार होगा विस्तृत रिपोर्ट कार्ड

रांची तेजी से बदलते शहरी परिदृश्य के बीच केंद्र सरकार बड़े शहरों के समग्र विकास के लिए ठोस डेटा आधारित नीति तैयार करेगी। केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने देश के उन 47 शहरों के लिए सिटी लेवल स्टैटिस्टिकल रिपोर्ट (नगर-स्तरीय सांख्यिकी रिपोर्ट) तैयार करने का प्रस्ताव रखा है, जिसकी आबादी वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 10 लाख से अधिक है। इसमें झारखंड के दो शहर रांची और धनबाद का चयन हुआ है, जिसके आर्थिक विकास, नवाचार और रोजगार सृजन को गति देने के उद्देश्य से विशेष शहरी नीति निर्माण योजना बनानी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य शहरों में हो रहे संरचनात्मक बदलावों को समझना और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मजबूत करना है। क्यों आवश्यकता पड़ी केंद्र का मानना है कि देश के कई शहर आर्थिक विकास, नवाचार और रोजगार सृजन के रूप में उभर रहे हैं। संरचनात्मक बदलाव के बावजूद शहर स्तर पर आधिकारिक आंकड़ों की उपलब्धता सीमित है, जिससे साक्ष्य-आधारित शहरी नीति निर्माण और नियोजन में बाधा उत्पन्न होती है। साथ ही अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर जो भी आर्थिक आंकड़े जारी होते थे, वे मुख्य रूप से देश या राज्य स्तर के होते थे। शहरों के भीतर रोजगार की क्या स्थिति है या वहां का व्यापार कैसा चल रहा है, इसका कोई सटीक सरकारी डेटा उपलब्ध नहीं था। इसी कमी को दूर करने के लिए केंद्रीय मंत्रालय के अधीन ‘एनएसओ’ ने यह नई पहल शुरू की है। इसमें रांची और धनबाद जैसे शहरों को स्वतंत्र इकाई मानकर उनका डेटा अलग से संकलित किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर आम लोगों से भी सुझाव मांगे गए हैं। इच्छुक व्यक्ति 15 मई तक अपने सुझाव दे सकते हैं। पड़ोसी राज्यों में यूपी के सात शहर, बिहार के केवल एक चयनित 47 शहरों में महाराष्ट्र के सर्वाधिक 10 शहर शामिल हैं। झारखंड के दो शहर के अलावा उत्तर प्रदेश के 7 शहर, पश्चिम बंगाल एवं छत्तीसगढ़ के 2-2 और बिहार के एक शहर का चयन किया गया है। दो भागों में तैयार होगी रिपोर्ट पहली रिपोर्ट में दस लाख से अधिक आबादी वाले संबंधित शहरों का विस्तृत रोजगार प्रोफाइल होगा। इसमें 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों को शामिल करते हुए कुल छह प्रमुख संकेतकों (इंडिकेटरों) का विश्लेषण किया जाएगा। इनमें श्रम बल सहभागिता दर, श्रमिक जनसंख्या अनुपात, बेरोजगारी दर, रोजगार की स्थिति और विभिन्न उद्योगों में रोजगार का वितरण शामिल होगा। इससे यह स्पष्ट होगा कि शहरों में रोजगार के अवसर किस क्षेत्र में अधिक हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। दूसरी रिपोर्ट असंगठित क्षेत्र के उद्यमों पर केंद्रित होगी। इसमें उन आर्थिक गतिविधियों (रेहड़ी-पटरी व्यवसाय, निर्माण मजदूर और छोटे घरेलू उद्योग) को शामिल किया जाएगा, जो सरकारी विनियमन या कराधान के दायरे से बाहर हैं। इसमें कुल 13 संकेतकों के आधार पर विश्लेषण होगा। इसमें प्रतिष्ठानों की संख्या, स्वामित्व और साझेदारी आधारित प्रतिष्ठानों का प्रतिशत, किराए पर काम कर रहे कर्मचारी वाले प्रतिष्ठानों का अनुपात, महिला स्वामित्व वाले उद्यमों की हिस्सेदारी और व्यापार में इंटरनेट के उपयोग का प्रतिशत आदि प्रमुख हैं। इससे असंगठित क्षेत्र की वास्तविक स्थिति और उसकी चुनौतियों को समझने में मदद मिलेगी।