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वट सावित्री व्रत 2026: जानें बदलती तिथियां और शुभ मुहूर्त

 हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है.  यह व्रत अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना के साथ रखा जाता है. इस वर्ष कैलेंडर गणना और अधिकमास के प्रभाव के कारण वट सावित्री व्रत की तिथियों को लेकर कुछ बदलाव देखने को मिले हैं. आइए जानते हैं कि इस साल वट सप्तमी (बड़ साते) और वट पूर्णिमा कब मनाई जाएगी. क्यों बदला वट सावित्री व्रत का समय? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वट सावित्री का व्रत ज्येष्ठ मास में रखा जाता है. इस वर्ष ज्येष्ठ मास में अधिकमास (मलमास) आने के कारण तिथियों के क्रम में अंतर आया है.  अमावस्या के बाद अधिकमास की अवधि रही, जिसके समाप्त होने के बाद पुन: ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष शुरू हुआ. इसी कारण से इस वर्ष परंपरा के अनुसार, वट सप्तमी और वट पूर्णिमा की तिथियां सामान्य समय से आगे बढ़ गई हैं. वट सप्तमी (बड़ साते) 2026: कब है? ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को वट सप्तमी या बड़ साते के रूप में जाना जाता है.  कई क्षेत्रों में महिलाएं इस दिन भी अपने सुहाग की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और वट (बरगद) के वृक्ष की पूजा करती हैं. इस साल बड़ साते का व्रत 21 जून 2026 को रखा जाएगा. वट पूर्णिमा 2026: शुभ तिथि और मुहूर्त देश के कई हिस्सों में ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को ही वट सावित्री का व्रत किया जाता है, जिसे वट पूर्णिमा कहते हैं. इस वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि 29 जून 2026 (सोमवार) को पड़ रही है. पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ: 29 जून 2026 को सुबह 03:06 बजे से. पूर्णिमा तिथि की समाप्ति: 30 जून 2026 को सुबह 05:26 बजे तक. पूजा का महत्व: 29 जून को ही वट पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा.  इस दिन सुहागिनें बरगद के पेड़ की पूजा कर अपने वैवाहिक जीवन में सुख और समृद्धि की प्रार्थना करेंगी. वट सावित्री व्रत का धार्मिक महत्व पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावित्री ने इसी वट वृक्ष के नीचे यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस मांगे थे. यही कारण है कि इस दिन बरगद के पेड़ को अमरता और स्थायित्व का प्रतीक माना जाता है. महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं, वट वृक्ष की परिक्रमा करती हैं, कच्चा सूत अर्पित करती हैं और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं. कई परंपराओं में इस दिन सास को बायना देने की भी प्रथा है.

वट सावित्री व्रत 2026: जानें तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत बेहद शुभ माना जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या को रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और सतीत्व के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस छीन लिए थे। हर साल की तरह इस बार भी महिलाओं के मन में इस व्रत की तारीख को लेकर थोड़ी कन्फ्यूजन है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं। वट सावित्री व्रत 2026 तिथि और समय हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 मई को सुबह 05 बजकर 11 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 17 मई को रात 01 बजकर 30 मिनट पर होगा। पंचांग को देखते हुए वट सावित्री व्रत 16 मई को रखा जाएगा। इसी दिन महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा कर अपने अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। पूजा का शुभ मुहूर्त 16 मई को सुबह से ही पूजा के लिए कई शुभ योग बन रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 07 मिनट से 04 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 4 मिनट से 03 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 07 बजकर 04 मिनट से 07 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। इस दौरान आप वट वृक्ष की पूजा और परिक्रमा कर सकते हैं। वट वृक्ष की पूजा का महत्व शास्त्रों में बरगद के पेड़ को पूजनीय माना गया है, क्योंकि इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास होता है। इस वृक्ष की पूजा कर महिलाएं अपने पति के लिए लंबी उम्र और परिवार की समृद्धि मांगती हैं। पूजा के दौरान वट वृक्ष पर सूत का धागा लपेटना और 7 या 108 बार परिक्रमा करना विशेष फलदायी होता है। पूजन विधि इस दिन महिलाएं सुबह स्नान के बाद नए वस्त्र पहनकर शृंगार करती हैं। पूजा की थाली में धूप, दीप, रोली, अक्षत, कच्चा सूत, फल और भीगे हुए चने रखे जाते हैं। सावित्री और सत्यवान की कथा सुनी जाती है और अंत में बड़ों का आशीर्वाद लेकर व्रत पूर्ण किया जाता है। कई स्थानों पर इस दिन आटे के गुलगुले व कई तरह के पकवान बनाने की भी परंपरा है।