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1 जुलाई से लागू होगी वीबी जी राम जी योजना, ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह का माहौल

1 जुलाई से लागू होगी वीबी जी राम जी योजना, ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह का माहौल ग्राम सभाओं के माध्यम से दी जा रही योजना की जानकारी, मानव श्रृंखला बनाकर ग्रामीणों ने दिया जनजागरूकता का संदेश केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी की मानव श्रृंखला द्वारा जागरूकता की सराहना रायपुर, प्रदेश के ग्रामीण परिवारों को आजीविका और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा आगामी 1 जुलाई 2026 से लागू की जा रही वीबी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण) योजना को लेकर पूरे प्रदेश में व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और जिला स्तर पर लगातार प्रशिक्षण, बैठकें और ग्राम सभाएं आयोजित कर ग्रामीणों को योजना के विभिन्न प्रावधानों एवं लाभों की जानकारी दी जा रही है। सांकरा एवं देवरी में ग्रामीणों ने बनाई मानव श्रृंखला             योजना के प्रति ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रदेश के विभिन्न गांवों में आयोजित ग्राम सभाओं में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर योजना की जानकारी प्राप्त की तथा इसके सफल क्रियान्वयन में सहयोग का संकल्प लिया। इसी क्रम में बेमेतरा जिले के जनपद पंचायत बेरला की ग्राम पंचायत सांकरा एवं देवरी में ग्रामीणों ने योजना के प्रचार-प्रसार के लिए अनूठी पहल करते हुए मानव श्रृंखला का निर्माण किया। ग्रामीणों ने हाथों में जागरूकता संबंधी तख्तियां लेकर “वीबी जी राम जी – गांव की प्रगति, हम सबकी जिम्मेदारी”, “रोजगार और आजीविका का नया संबल” तथा “समृद्ध गांव, सशक्त परिवार” जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।  केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की सराहना         केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अपने एक्स अकॉउंट से पोस्ट कर लिखा कि छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से आई इस तस्वीर को देखकर मन आनंद और उत्साह से भर गया। यह तस्वीर गाँव की जनता के जागरूकता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी बेमेतरा जिले के इन प्रयासों की सराहना करते हुए अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर लिखा कि यह मानव श्रृंखला बन रही है, जो योजना के प्रति जन-जागरूकता का प्रतीक बनी हुई है। पात्र परिवारों को लाभ दिलाने और जानकारी पहुंचाने लिया संकल्प           मानव श्रृंखला के माध्यम से ग्रामीणों ने यह संदेश दिया कि योजना केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में जनभागीदारी का एक महत्वपूर्ण अभियान है। इस अवसर पर ग्रामीणों ने पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिलाने तथा अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने का संकल्प भी लिया। ग्राम सभा मे अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी           ग्राम सभाओं में अधिकारियों द्वारा बताया गया कि वीबी – जीरामजी योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि करना है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पंचायत स्तर पर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों और हितग्राहियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण          पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार 30 जून 2026 तक पंचायत, ब्लॉक एवं जिला स्तर के सभी अधिकारी-कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों तथा हितग्राहियों का प्रशिक्षण पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए विभिन्न चरणों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि योजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की कठिनाई न आए और पात्र परिवारों को समय पर लाभ मिल सके। 1 जुलाई से प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ           योजना के प्रचार-प्रसार के लिए ग्राम सभाओं, चौपालों, पोस्टर-बैनर, मुनादी, रथ प्रचार एवं डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। वहीं सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं, जनप्रतिनिधि तथा स्थानीय सामाजिक संगठन सक्रिय रूप से लोगों को योजना की जानकारी देने में जुटे हुए हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि यह योजना गांवों में रोजगार और आजीविका के नए अवसर सृजित करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 1 जुलाई से योजना के लागू होने के साथ ही प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की भी उम्मीद है।  उप मुख्यमंत्री शर्मा ने भी लाइव आकर दी जानकारी          उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी  मंगलवार को अपने फ़ेसबुक अकाउंट पर लाइव आकर आगामी ग्राम सभा और वीबी जीरामजी के संबंध में लोगों को जानकारी दी और लोगों को योजना का लाभ लेने को प्रेरित किया साथ ही उन्होंने लोगों के सवालों का भी समाधान किया।

वीबी-जी राम-जी का सकारात्मक प्रभाव- आदिवासी एवं वनांचल बहुल गांवों में आजीविका का सशक्त नया अध्याय

रायपुर वीबी-जी राम-जी (VB-G RAM G) योजना (विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन-ग्रामीण) का सकारात्मक प्रभाव ग्रामीण रोजगार और आजीविका को सशक्त बनाना, मनरेगा का स्थान लेकर 125 दिन के रोजगार की गारंटी देना है।  बुनियादी ढांचे (जैसे जल संरक्षण, गाँव का विकास, स्वयं सहायता समूह) में सुधार करना, और पारदर्शिता व जवाबदेही (बायोमेट्रिक हाजिरी, जियो-टैगिंग, त्वरित भुगतान) बढ़ाकर भ्रष्टाचार कम करना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सशक्तिकरण और विकास को बढ़ावा मिलेगा।   मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला छत्तीसगढ़ के उन विशिष्ट अंचलों में शामिल है जहाँ घने वन क्षेत्र, पहाड़ी भू-आकृति और आदिवासी बहुल आबादी ने विकास को सदैव प्रकृति- अनुकूल और समावेशी स्वरूप प्रदान किया है। यहाँ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था परंपरागत रूप से वर्षा आधारित कृषि, वनोपज संग्रह और मौसमी श्रम पर आधारित रही है। ऐसे परिदृश्य में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम ने वर्ष 2006 से जिले के हजारों ग्रामीण परिवारों के लिए आजीविका सुरक्षा की एक मजबूत आधारशिला रखी। मनरेगा ने न केवल न्यूनतम आय का भरोसा दिया, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में ग्रामीणों को उनके गांव में ही सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराकर सामाजिक स्थिरता को भी मजबूती दी। समय के साथ यह अनुभव सामने आया कि रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ यदि उसे स्थायी परिसंपत्तियों और दीर्घकालिक आजीविका से जोड़ा जाए, तो उसका प्रभाव कई गुना बढ़ सकता है। इसी सोच के विस्तार के रूप में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अर्थात वीबी-जी राम-जी सामने आया है, जिसने मनरेगा को एक नए, परिणामोन्मुख और भविष्यदृष्टा स्वरूप में ढालने का मार्ग प्रशस्त किया है। एमसीबी जैसे जिले के लिए यह पहल इसलिए भी विशेष महत्व रखती है क्योंकि यहाँ रोजगार की आवश्यकता के साथ-साथ टिकाऊ आजीविका और सुदृढ़ ग्रामीण परिसंपत्तियों की संभावना भी प्रचुर मात्रा में विद्यमान है। जमीनी अनुभवों से सीख और सशक्त भविष्य की दिशा जिले में मनरेगा के तहत बीते वर्षों में बड़ी संख्या में परिवारों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। औसतन रोजगार दिवस भले ही 50 के आसपास रहे हों, किंतु इसने यह स्पष्ट कर दिया कि जिले में श्रम की उपलब्धता, कार्य करने की इच्छा और योजना के प्रति विश्वास मजबूत है। यह स्थिति भविष्य में रोजगार दिवसों के विस्तार और गुणवत्ता सुधार के लिए एक सकारात्मक आधार प्रदान करती है। मजदूरी भुगतान प्रणाली, कार्य स्वीकृति और योजना निर्माण में हुए अनुभवों ने प्रशासन को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और उत्तरदायी तंत्र विकसित करने की दिशा में प्रेरित किया है। मनरेगा के माध्यम से जिले में जल संरक्षण, ग्रामीण सड़क, भूमि सुधार और अन्य आधारभूत कार्यों ने गांवों के भौतिक स्वरूप को बदला है। अब वीबी-जी राम-जी इन कार्यों को आगे बढ़ाते हुए उन्हें प्रत्यक्ष आजीविका और उत्पादकता से जोड़ने का अवसर प्रदान करता है, जिससे पलायन जैसी समस्याओं का समाधान स्वाभाविक रूप से संभव हो सके। वीबी-जी राम-जीरू वित्तीय स्थिरता और सुव्यवस्थित क्रियान्वयन वीबी-जी राम-जी के अंतर्गत केंद्र और राज्य के बीच 60-40 की स्पष्ट वित्तीय साझेदारी ने ग्रामीण रोजगार योजनाओं को नई स्थिरता प्रदान की है। यह व्यवस्था जिला प्रशासन और ग्राम पंचायतों को दीर्घकालिक योजना निर्माण, संसाधनों के बेहतर उपयोग और समयबद्ध क्रियान्वयन में सक्षम बनाती है। वित्त वर्ष 2026 के लिए 86 हजार करोड़ रुपये का ऐतिहासिक आवंटन यह दर्शाता है कि ग्रामीण रोजगार और आजीविका को अब देश के समग्र आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण स्तंभ माना जा रहा है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में इस मिशन के अंतर्गत कार्यों को जल सुरक्षा, मुख्य अवसंरचना, आजीविका-संबंधी अवसंरचना और जलवायु-सहिष्णु परिसंपत्तियों जैसी स्पष्ट श्रेणियों में केंद्रित किया गया है। जिले की भौगोलिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए खेत-तालाब, चेकडैम, लघु सिंचाई संरचनाएँ और ग्रामीण सड़कें न केवल रोजगार सृजन का माध्यम बन रही हैं, बल्कि कृषि उत्पादकता, बाजार संपर्क और ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता को भी नई ऊँचाई दे रही हैं। ग्राम पंचायत स्तर की योजनाओं का पीएम गति-शक्ति ढांचे से जुड़ना इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण विकास अब एक समग्र और दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है। 125 दिनों का रोजगाररू आत्मनिर्भरता की ओर सशक्त कदम वीबी-जी राम-जी के तहत रोजगार गारंटी को 100 से बढ़ाकर 125 दिनों तक विस्तारित करना ग्रामीण परिवारों के लिए एक सशक्त आश्वासन है। यह विस्तार केवल रोजगार के दिनों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन दिनों में किए जाने वाले कार्यों को अधिक उपयोगी, टिकाऊ और परिणाम-उन्मुख बनाने पर केंद्रित है। इससे ग्रामीण श्रमिकों को न केवल अधिक आय का अवसर मिलेगा, बल्कि उनके श्रम से निर्मित परिसंपत्तियाँ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी लाभकारी सिद्ध होंगी। एमसीबी जिले के आदिवासी और वनांचल बहुल क्षेत्रों में, जहाँ आजीविका का गहरा संबंध प्रकृति और स्थानीय संसाधनों से है, यह मॉडल मनरेगा को स्थायी ग्रामीण जीवन का आधार बनाने की क्षमता रखता है। जल संरचनाओं से बढ़ी सिंचाई क्षमता, बेहतर सड़कों से आसान बाजार पहुँच और आजीविका-संबंधी परिसंपत्तियों से स्थानीय रोजगार के नए अवसर ग्रामीण समाज को आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करेंगे। वीबी-जी राम-जी के माध्यम से मनरेगा का यह पुनर्गठन एमसीबी जिले के लिए केवल एक योजना सुधार नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की सोच में आया एक सकारात्मक और दूरगामी परिवर्तन है। राज्य सरकार, जिला प्रशासन और ग्राम पंचायतों के समन्वित प्रयासों से यह मिशन जिले को रोजगार गारंटी के साथ-साथ टिकाऊ आजीविका का सशक्त मॉडल बना सकता है।