samacharsecretary.com

मानसून से पहले महंगाई का झटका, हरी सब्जियों के बढ़ते दामों ने बिगाड़ा रसोई का बजट

रांची राजधानी रांची में बदलते मौसम और मानसून की दस्तक के साथ हरी सब्जियों की कीमतों में अचानक आई तेजी ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। बाजारों में टमाटर से लेकर अधिकांश सब्जियां 40 से 50 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही हैं, जबकि कुछ चुनिंदा सब्जियों के दाम आसमान छूने लगे हैं। महंगाई का सीधा असर निम्न मध्यम और मध्यम वर्गीय परिवारों की रसोई पर पड़ रहा है, जिससे घरेलू बजट पूरी तरह प्रभावित हो गया है। सब्जी विक्रेताओं के अनुसार एक सप्ताह पहले तक 10 से 15 रुपये प्रति किलो बिकने वाली भिंडी अब 30 से 40 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। वहीं स्थानीय टमाटर 50 से 55 रुपये प्रति किलो और हाइब्रिड टमाटर 50 से 70 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है। फ्रेंच बीन की कीमत सबसे अधिक बढ़ी है और यह 40 से 50 रुपये प्रति पाव तक बिक रही है। बीन की कीमत 150 से 200 रुपये केजी तक पहुंच गई है। आलू और प्याज को छोड़कर लगभग सभी सब्जियों के दामों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। रांची में बुंडू, तमाड़, जोन्हा, सिल्ली, झालदा, बेड़ो समेत आसपास के क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में सब्जियों की आपूर्ति होती है। यहां से आने वाली खेप नागाबाबा खटाल, मोरहाबादी, लालपुर, डोरंडा, रेलवे स्टेशन बाजार और बहुबाजार जैसी प्रमुख मंडियों तक पहुंचती है। अंतिम फसल और कम आपूर्ति बनी महंगाई की वजह सब्जी व्यापारी ने कहा कि वर्तमान में कई सब्जियों की अंतिम फसल बाजार में आ रही है। मानसून शुरू होने के बाद कई हरी सब्जियों की खेती और उत्पादन प्रभावित हो जाता है, जिससे बाजार में आपूर्ति कम हो जाती है। यही कारण है कि हर वर्ष इस अवधि में सब्जियों के दाम बढ़ जाते हैं। विक्रेताओं का कहना है कि जब तक नई फसल तैयार होकर बाजार में नहीं आती, तब तक कीमतों में राहत मिलने की संभावना कम है। सब्जियों के क्या हैं, रेट सब्जी का नाम     भाव (रुपये प्रति किलो) फ्रेंच बीन                   40 – 50 टमाटर                       50 – 60 झींगी / तोरई                40 – 60 खीरा                            30 – 40 भिंडी                            30 – 40 कद्दू                              20 सफेद आलू                    15 लाल आलू                      20 प्याज                            25 बैंगन                            40 पटल                             40 शिमला मिर्च                   50 – 70 बोदी                                40     पहले 300 रुपये में सब्जियां पूरी होती थी, अब हालत ऐसी हैं, कि 500 रुपये में भी थैला नहीं भरता है।     प्रति दिन 200 रुपये में पर्याप्त सब्जियां मिल जाती थीं, लेकिन अब 400 रुपये खर्च करने के बाद 2 दिन में सब्जियां खत्म हो रही।     बारिश तक महंगाई की समस्या बनी, महंगी सब्जी खरीद ही नहीं रही।     पहले टमाटर की चटनी बनती थी, अब सब्जी में आधा कटा टमाटर इस्तेमाल कर रही।  

सप्लाई ठप होने से भोपाल में सब्जियों की महंगाई चरम पर, टमाटर और मटर की कीमतें भारी

भोपाल  मौसम में बदलाव के साथ ही इसका असर सब्जियों व फलों पर देखने को मिल रहा है. राजधानी भोपाल की अलग-अलग सब्जी मंडी में सब्जियों के दाम में इजाफा देखा गया है. मध्यप्रदेश में बेमौसम बारिश ने सब्जी उत्पादक किसानों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है, जिसका सीधा असर प्रदेश भर को मंडियों में दिखाई दे रहा है. भोपाल की मंडी से सब्जियों के ताजा भाव. थोक व्यापारियों का कहना है कि टमाटर, मटर, धनिया, पालक, मेथी और लौकी जैसी हरी व मौसमी सब्जियों के दाम एक सप्ताह में दो से तीन गुना तक बढ़ गए हैं. शहर की मंडी में पहुंच रही ज्यादातर सब्जियां दूसरे जिलों से मंगवानी पड़ रही है. सप्लाई कम और मांग स्थिर रहने से दामों में और उछाल बना हुआ है. व्यापारी अनुमान लगा रहे हैं कि कीमतें अगले 15-20 दिन तक इसी स्तर पर रह सकती हैं.  बिट्टन मार्केट सब्जी बाजार में सब्जी की दुकान लगाने वाले पप्पू कुरैशी ने बताया कि बीते दिनों हुई बारिश के चलते मंडी में सब्जियों की आवक कम हो रही है. ऐसे में बारिश का असर दाम में उछाल के रूप में देखने को मिला है. पिछले तीन दिनों के अंदर ही टमाटर के दाम करीब ₹300 कैरेट तक बढ़ गए. पहले जो टमाटर 1,000-1,200 रुपए में बिक रहा था. वहीं अब ₹1,400 कैरेट पहुंच चुका है. बता दें, इन दिनों करोद मंडी में नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, नरसिंहपुर, रायसेन, विदिशा और सीहोर से आने वाली सब्जियों की आवक कम है. पंजाब में बाढ़ से आलू की फसल खराब होने से आवक बेहद कम है. मटर की अभी लोकल आवक नहीं है, जो भी मटर आ रहा है वह दूसरे राज्यों से आ रहा है. आवक कमजोर होने से सब्जियों के दाम बढ़े है. इन सब्जियों के दाम बढ़े सब्जी दाम मुनगा ₹200/किलो मटर ₹150/किलो धनिया ₹125/किलो ग्वारफली ₹70/किलो भिंडी ₹70/किलो गिलकी ₹60/किलो

शहडोल में महंगाई का तड़का, ठंड के मौसम में टमाटर 60 रुपये और बैंगन के दाम दोगुने

शहडोल  नवंबर का महीना चल रहा है और कड़ाके की ठंड भी पड़ रही है. इन दिनों हरी सब्जियों के बढ़े हुए दामों ने आम जनता की जेब ढीली कर दी है. अचानक ही सब्जियों के बढ़े हुए दामों से लोगों का हाल-बेहाल है. जिस सीजन में हरी सब्जियों की भरमार होती है, आखिर अचानक से सब्जियों के दाम कैसे बढ़ गए, आईए जानते हैं. हरी सब्जियों के बढ़ गए दाम इन दिनों हरी सब्जियों के दाम अचानक ही बड़े हुए हैं. जिससे आम जनता का हाल बेहाल है. सर्दियों के सीजन में काफी संख्या में हरी सब्जियां आती हैं, लेकिन इस बार सब्जियों के दाम काफी चढ़े हुए हैं. सब्जी खरीदने बाजार आए रिंकू तिवारी बताते हैं कि, ''अब तक तो काफी हरी सब्जियां मंडी में आने लगती हैं. लेकिन इन दिनों अचानक सब्जियों के दाम काफी हाई हो गए हैं जिससे आम इंसान को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. क्योंकि हर सब्जी काफी महंगी हो चुकी है. कुछ सब्जियों को छोड़ दें तो ज्यादातर सब्जी यहां 50 रुपए किलो पर ही है.  जिससे रसोई का बजट बिगड़ गया है.'' आसमान छू रहे सब्जियों के दाम शहडोल में पिछले कई सालों से सब्जी बेचकर अपना घर परिवार चलाने वाले राम प्रताप साहू बताते हैं कि, ''वर्तमान में सब्जियों के दाम अचानक ही बढ़ गए हैं, इसका असर ये हुआ है कि जो ग्राहक हर दिन दो किलो से लेकर 5 किलो तक सब्जियों की खरीदी करते थे, वो ग्राहक भी अब एक पाव आधा किलो में आ गए हैं, अभी दो-तीन दिन पहले ही टमाटर अचानक से एक-दो दिन के लिए ₹80 प्रति किलो तक बिका है, लेकिन फिर एक दो दिन में ही दाम ₹20 तक दाम घट भी गए और अभी वर्तमान में खुले रेट में टमाटर ₹60 किलो बिक रहा है. बदलते मौसम ने सब्जियों के दाम कर दिए हाई आखिर अचानक ही हरी सब्जियों के दाम क्यों बढ़ गए, सब्जी व्यापारी अमित गुप्ता बताते हैं कि "इन दिनों सब्जी खाने वालों के लिए आलू प्याज ही एक बड़ा सहारा बने हुआ है, क्योंकि पिछले कई महीनों से आलू और प्याज के दाम स्थिर हैं. आलू जहां वर्तमान में खुले रेट में 25 रुपए किलो की दर से बिक रहा है, वहीं प्याज 20 रुपए प्रति किलो की दर से बिक रही है, इस बार आलू प्याज के दाम नहीं बढ़े हैं. लेकिन हरी सब्जियों के दाम बढ़ गए हैं." सब्जियों की क्वालिटी में गिरावट पिछले कई सालों से सब्जियों की खेती करने वाले किसान राम सजीवन कचेर बताते हैं कि "अचानक से हरी सब्जियों के दाम बढ़ने की वजह ये है कि पिछले कुछ दिनों में जो बारिश हुई है, उससे मौसम में परिवर्तन हुआ है. उससे किसानों की सब्जियों की फसल में फर्क पड़ा है, सब्जियां भी अधिक मात्रा में और अच्छी क्वालिटी में आ नहीं रही हैं, जिससे सब्जियों के दाम बढ़े हुए हैं. एक तरह से कहा जाए तो लोकल सब्जियां भी उतनी मात्रा में आ नहीं पा रही हैं." सब्जी मंडी में बारिश का कहर अचानक इस बदले हुए मौसम और बारिश की वजह से खेतों में पानी भर गया है. फसल पर तरह-तरह के कीटों का अटैक हुआ है. जिससे किसानों की फसल का नुकसान तो हुआ ही है, साथ ही जो किसान सुबह-सुबह अलग-अलग वैरायटी की कई सब्जियां लेकर आ जाते थे. वह किसान अब ठंड से बचते नजर आ रहे हैं. फसलों में भी उनकी कमी आई है." सब्जी मंडी में बारिश का कहर अचानक इस बदले हुए मौसम और बारिश की वजह से खेतों में पानी भर गया है. फसल पर तरह-तरह के कीटों का अटैक हुआ है. जिससे किसानों की फसल का नुकसान तो हुआ ही है, साथ ही जो किसान सुबह-सुबह अलग-अलग वैरायटी की कई सब्जियां लेकर आ जाते थे. वह किसान अब ठंड से बचते नजर आ रहे हैं. फसलों में भी उनकी कमी आई है.

टमाटर 80, शिमला मिर्च 120 रुपए किलो: बरसात में सब्जियों की कीमतें हो गईं महंगी

रांची  बरसात के मौसम में सब्जियों की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है. सब्जियां महंगी होने से रसोई के बजट और खाने के स्वाद पर भी असर पड़ा है. झारखंड की राजधानी रांची की सब्जी मंडी में टमाटर 80 रुपए तो फूलगोभी और बींस 100 रुपए प्रति किलो के भाव पर है. भिंडी से लेकर तमाम दूसरी सब्जियां भी महंगी हैं और हरी सब्जी बमुश्किल ही 80 या 70 रुपये किलो से कम के भाव पर मिल पाए. गाजर भी आम लोगों के पहुंच से बाहर है. वहीं, शिमला मिर्च तो आंसू निकाल रही है, उसके भाव 120 रुपए किलो हैं. दुकानदारों का कहना है कि सुबह से वो दुकान सजाकर बैठे हैं लेकिन ग्राहक नदारद हैं. सब्जी बेशक महंगी है लेकिन दुकानदारों का कहना है कि इसमें उनका कोई कुसूर नहीं, उन्हें भी सब्जी महंगे दाम पर मिल रही है. दुकानदारों का कहना है कि उन्हें पता चला कि किसानों को लगातार बीते 3 महीनों से हो रहे बारिश के कारण नुकसान हुआ है. लिहाजा सामान कम है और डिमांड ज्यादा. जिसकी पूर्ति वो नहीं कर पा रहे हैं.सब्जियां खेतो में ही खराब हो गई हैं, जिसकी वजह से दाम आसमान छू रहे हैं. इधर ग्राहकों की कमी की ये भी वजह मानी जा रही है कि हरी सब्जियों की खरीदारी वो जरूरत के मुताबिक करते हैं और सप्लीमेंट्री सब्जी यानी चना, सोयाबीन वगैरह पर निर्भरता बढ़ रही है. वहीं, दुकानदारों को अगले 2 महीनों तक राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है.