samacharsecretary.com

विधानसभा में बड़ा बदलाव: अरविंद शर्मा नए प्रमुख सचिव, AP सिंह की ढाई साल बाद सेवानिवृत्ति

भोपाल  लोकसभा से प्रतिनियुक्ति पर मध्य प्रदेश विधानसभा आए सचिव अरविंद शर्मा का संविलियन मध्य प्रदेश विधानसभा में हो चुका है. अब उन्हें इस माह के अंत में मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव के पद पर प्रमोट किया जाएगा. 2 साल सेवा वृद्धि और 6 महीने का संविदा नियुक्ति पूरी करके विधानसभा के मौजूदा मुख्य सचिव एपी सिंह इसी माह रिटायर होने जा रहे हैं. मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह इस महीने 30 सितंबर को रिटायर होने वाले हैं और अब उनके पुनर्नियुक्ति की संभावना नहीं है। इसे देखते हुए विधानसभा में सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे अरविंद शर्मा को नया प्रमुख सचिव बनाए जाने की संभावना है। प्रमुख सचिव की नियुक्ति का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष को होता है। चूंकि अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ही अरविंद शर्मा को लोकसभा से प्रतिनियुक्ति पर लेकर आए थे, इसलिए उनका प्रमुख सचिव बनना लगभग तय माना जा रहा है। 1 अक्टूबर से मिल सकती है जिम्मेदारी वर्तमान प्रमुख सचिव एपी सिंह को मानसून सत्र के दौरान सदन में स्वयं विधानसभा अध्यक्ष ने विदाई दी थी और विधायकों से शुभकामनाएं दिलाई थीं। इससे यह संकेत स्पष्ट हो गया था कि एपी सिंह का कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। ऐसे में यह माना जा रहा है कि एपी सिंह का कार्यकाल अब नहीं बढ़ेगा और नया प्रमुख सचिव नियुक्त किया जाएगा। अरविंद शर्मा की दावेदारी सबसे मजबूत विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने विधानसभा चुनाव के बाद अध्यक्ष बनने के बाद अरविंद शर्मा को लोकसभा से प्रतिनियुक्ति पर लाकर विधानसभा सचिव बनाया था। एक साल की प्रतिनियुक्ति के बाद उनका संविलियन विधानसभा में हो गया। वर्तमान में वे 60 साल की उम्र पार कर चुके हैं और विधानसभा नियमों के अनुसार वे 62 साल की उम्र तक सेवा में रह सकते हैं। इस हिसाब से यदि उन्हें प्रमुख सचिव बनाया जाता है, तो वे अगले दो सालों तक इस पद पर कार्यरत रह सकते हैं। चूंकि स्पीकर की पसंद वे स्वयं हैं, इसलिए उनकी नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है। दूसरी बार सेवा हुई वृद्धि विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ढाई साल पहले सेवानिवृत्ति हो रहे थे. उन्हें साल 2023-24 के लिए एक साल की सेवा वृद्धि दी गई. इसके बाद 2024-25 में दूसरी बार 1 साल की सेवा वृद्धि दी गई. यह कार्यकाल 5 महीने पहले समाप्त हो गया था. इसके बाद 6 महीने की संविधान नियुक्ति प्रमुख सचिव के पद पर दी गई थी. यह अवधि इसी महीने 30 सितंबर को खत्म हो रही है. मध्य प्रदेश विधानसभा में हुआ संविलियन विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने मध्य प्रदेश में विधानसभा के कामों के लिए अरविंद शर्मा को सचिव बनाकर प्रतिनियुक्ति पर मध्य प्रदेश लेकर आए थे. अब उनका संविलियन मध्य प्रदेश विधानसभा में कर दिया गया है. मध्य प्रदेश विधानसभा के मौजूदा प्रमुख सचिव एपी सिंह का इसी महीने 30 सितंबर को कार्यकाल समाप्त हो रहा है. इसके बाद अरविंद शर्मा विधानसभा के प्रमुख सचिव बन जाएंगे. प्यासी का सबसे ज्यादा लंबा रहा कार्यकाल मध्य प्रदेश विधानसभा के पांचवें प्रमुख सचिव के तौर पर अरविंद शर्मा जिम्मेदारी संभालने वाले हैं. इससे पहले अवधेश प्रताप सिंह, भगवान देव इसरानी, राजकुमार पांडे और ए के प्यासी मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव रह चुके हैं. सभी विधानसभा प्रमुख सचिव में सबसे लंबा डॉक्टर एके पयासी का कार्यकाल रहा है साल 2002 से लेकर 2011 तक विधानसभा प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी में रहे थे. हालांकि की 9 से 10 साल तक अवधेश प्रताप सिंह भी प्रमुख सचिव विधानसभा की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. एपी सिंह को सेवा विस्तार की उम्मीद नहीं एपी सिंह पहले ही 62 साल की उम्र में रिटायर हो चुके हैं, फिर उन्हें दो साल का विस्तार और फिर 6 महीने की संविदा सेवा दी गई थी, जो 30 सितंबर को समाप्त हो रही है। अब वे 64 साल से ज्यादा के हो चुके हैं और स्पीकर द्वारा उन्हें औपचारिक विदाई दी जा चुकी है, इसलिए सेवा बढ़ाने की संभावना नहीं बची है। हालांकि सिंह ने प्रमुख सचिव के रूप में विधानसभा में लंबा कार्यकाल पूरा किया है। डीजे को पीएस बनाने का स्पीकर को है पावर विधानसभा अधिनियम के तहत स्पीकर के पास यह भी अधिकार है कि वे जिला न्यायाधीश (डीजे) स्तर के अधिकारी को भी प्रमुख सचिव नियुक्त कर सकते हैं। लेकिन सूत्रों के अनुसार फिलहाल इसकी संभावना कम है, क्योंकि अरविंद शर्मा ही स्पीकर की प्राथमिकता में हैं। विधानसभा सचिव पद की स्थिति विधानसभा में सचिव के दो पद होते हैं। फिलहाल एक पद पर अरविंद शर्मा कार्यरत हैं जबकि दूसरा पद रिक्त है। चूंकि प्रमोशन में आरक्षण का मामला कोर्ट में लंबित है, इसलिए अगर शर्मा को प्रमुख सचिव बनाया जाता है, तो सचिव के दोनों पद कुछ समय के लिए रिक्त रखे जा सकते हैं और जिम्मेदारियां प्रभार से संचालित की जा सकती हैं। विधानसभा में अपर सचिव के चार पद हैं, जिनमें से तीन भरे हुए हैं जबकि एक पद रिक्त है।  

MP Assembly : कांग्रेस ने उठाया पुरानी पेंशन का मुद्दा, शिवाजी पटेल का इनकार, विपक्ष ने किया वॉकआउट

भोपाल मध्य प्रदेश विधानसभा मानसून सत्र का आज सातवां दिन है। झारखंड के पूर्व सीएम शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देकर सदन की कार्यवाही शुरू की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी श्रद्धांजलि दी। प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक सेना महेश पटेल ने पुरानी पेंशन योजना का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने 2005 के बाद पेंशन को एनपीएस के अंतर्गत लाया। इसमें लाभ की कोई गारंटी नहीं है। सरकार ने जवाब दिया है कि हमारे पास इस पुरानी पेंशन योजना को लेकर कोई जानकारी नहीं है, कोई प्लानिंग नहीं है। क्या हमारे कर्मचारी देश की और प्रदेश की सेवा में कोई कसर छोड़ते हैं? यह सरकार की जिम्मेदारी है कि लोगों को सुरक्षा मिले। अन्य प्रदेशों में पुरानी पेंशन योजना लागू है तो मध्य प्रदेश में क्यों नहीं? जवाब में राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने इसका जवाब दिया। उन्होंने कहा, उत्तर पटल पर रखा है। पुरानी पेंशन योजना को लागू करने का न कोई प्लान है और न ही विचार। कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब से असंतुष्ट होकर विपक्ष ने वॉकआउट किया। जबलपुर में शासकीय विक्टोरिया अस्पताल में फर्जी नियुक्ति का आरोप लगाया था। उप मुख्यमंत्री राकेश शुक्ला के जवाब से असंतुष्ट होकर विपक्ष ने वॉकआउट किया है। सदन की कार्यवाही जारी है।

सोमवार से शुरू हो रहा विधानसभा सत्र, सुरक्षा नियमों में हुआ बड़ा बदलाव, लाल-पीली-नीली बत्ती वाले वाहन बैन

भोपाल  विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने से 48 घंटे पहले ही विधानसभा परिसर को सुरक्षा घेरा बना दिया गया है। विधानसभा सचिवालय के फैसले के चलते शनिवार को यहां नियमित कामकाज बंद रहा। केवल सुरक्षा प्रबंधों से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी ही विधानसभा परिसर में प्रवेश कर सकेंगे।  धरना-प्रदर्शन पर सख्ती, परिसर में सीमित एंट्री इस बार सत्र शुरू होने से पहले ही सुरक्षा प्रबंधों के साथ-साथ धरना-प्रदर्शन को लेकर भी सियासी गर्माहट देखने को मिल रही है। विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश पर प्रमुख सचिव ने विधायकों द्वारा परिसर में नारेबाजी और प्रदर्शन को प्रतिबंधित कर दिया है। अब एंट्री को लेकर भी नियम सख्त किए गए हैं। शनिवार को गेट नंबर 3 पर दिनभर पुलिस वाहनों की आवाजाही और अधिकारियों की रिहर्सल चलती रही, जबकि गेट नंबर 1, 2, 4 और 5 को बंद रखा गया। मीडिया और अन्य कार्यालय भी रहे बंद इस बार सत्र से पहले मीडिया कार्यालय शनिवार को बंद रहा, जो आमतौर पर खुला रहता है। इसके कारण पास बनवाने पहुंचे पत्रकारों को खाली हाथ लौटना पड़ा। उन्हें बताया गया कि पास वितरण रविवार दोपहर से शुरू होगा। यही स्थिति अन्य समितियों से संबंधित कार्यालयों की भी रही। विधानसभा परिसर में प्रवेश के लिए नए नियम     किसी भी वाहन में लाल, पीली या नीली बत्ती (फ्लैश लाइट) नहीं लगी होनी चाहिए। हूटर लगे वाहन परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेंगे।     केवल उन्हीं एलपीजी और सीएनजी वाहनों को प्रवेश मिलेगा, जिन्हें आरटीओ से अनुमति प्राप्त है।     बिना नंबर या अनधिकृत गैस चालित वाहनों को परिसर में प्रवेश नहीं मिलेगा।     प्राइवेट ऑटो रिक्शा को सत्र के दौरान परिसर में प्रवेश नहीं मिलेगा।     विधायकों की ड्यूटी में लगे अंगरक्षकों को विधानसभा परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।     भारी हथियारों से लैस अंगरक्षक भी परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेंगे।     वैध पास धारक अंगरक्षकों और सहायकों के बैठने की व्यवस्था नए शेड में की गई है।     विशेष आगंतुक और मंत्रियों को गेट नंबर 1 या 3 से प्रवेश मिलेगा।     विधानसभा अध्यक्ष गेट नंबर 1 से प्रवेश करेंगे और गेट नंबर 3 से बाहर निकलेंगे।     विधायक और अधिकारी भी गेट नंबर 1 से प्रवेश और गेट नंबर 3 से निकास करेंगे।     पत्रकारों और दोपहिया वाहन पासधारकों को गेट नंबर 5 से प्रवेश और निकास की अनुमति दी गई है।  

28 जुलाई से MP में सियासी हलचल तेज़, विधानसभा के मानसून सत्र में 10 बैठकें होंगी आयोजित

भोपाल  मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 28 जुलाई से प्रारंभ होने जा रहा है, जो 8 अगस्त तक चलेगा। इस 12 दिवसीय सत्र के दौरान कुल 10 बैठकें आयोजित की जाएंगी। सत्र में 2 अगस्त (शनिवार) और 3 अगस्त (रविवार) को अवकाश रहेगा। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने राजधानी भोपाल में नवीन विधायक विश्राम गृह के भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि यह सत्र प्रदेश के हित में बेहद उपयोगी और सार्थक रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से लाए गए विधेयकों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा और पक्ष-विपक्ष दोनों मिलकर राज्य के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे। तोमर ने कहा कि हमारा प्रयास है कि सभी दल सदन की गरिमा बनाए रखते हुए रचनात्मक बहस करें। इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मजबूत होगी।  विधानसभा के मानसून सत्र में मोहन सरकार अनुपूरक बजट पेश करेगी। सरकार ने तय किया है कि बजट में केवल जनहित से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं, अनावश्यक खर्चों पर सख्ती बरती जाएगी। वित्त विभाग ने सभी विभागों से साफ कह दिया है कि अफसरों के लिए वाहन जैसी फिजूलखर्ची संबंधी प्रस्ताव न भेजें। इस सप्लीमेंट्री बजट में जनता से जुड़े कार्यों के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया जाएगा, ताकि विकास योजनाएं रुकें नहीं और प्रदेश के हित में प्रभावी क्रियान्वयन हो सके।  मानसून सत्र के लिए अब विधायकों लिखित सवाल नहीं पूछ पाएंगे, ऐसा इसलिए क्योंकि लिखित सवाल पूछने का समय बीत चुका है। अब विधायक ध्यानाकर्षण, शून्यकाल, याचिका या फिर अन्य माध्यम से अपने क्षेत्र के मसले सदन में उठा सकेंगे, सरकार से सवाल कर सकेंगे। हालांकि विधायकों ने इस बार सवालों की झड़ी लगा दी है। विस सचिवालय तक 3,377 लिखित सवाल पहुंचे हैं। इनमें ऑनलाइन माध्यम से सवाल सर्वाधिक पहुंचे। बता दें, लिखित सवाल पूछने के लिए विधायकों(MP Monsoon Session) को 11 जुलाई तक का मौका था। यह तिथि बीत जाने के बाद विधायकों के अब किसी भी प्रकार के सवाल विधानसभा सचिवालय नहीं ले रहा है। सचिवालय तक जो सवाल आ चुके हैं, वे सभी सवाल राज्य सरकार को भेज दिए गए हैं, जिससे समय रहते सवालों के जवाब सरकारी महकमे विधानसभा सचिवालय को भेज सकें। विपक्षी दल कांग्रेस विधायकों ने तीखे सवाल किए हैं। प्रयास यही है कि सदन में सरकार की घेराबंदी की जा सके। इनमें भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी, घोटाला, बेरोजगारी, बिगड़ती कानून व्यवस्था, अवैध उत्खनन, कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सवाल हैं। पहले दिन रोजगार-कृषि, पंचायत पर सवाल सत्र के पहले दिन यानी 28 जुलाई को रोजगार, कृषि, पंचायत, श्रम, खेल एवं युवा कल्याण, सहकारिता, उच्च शिक्षा, आयुष, तकनीकी शिक्षा कौशल विकास इत्यादि से जुड़े सवाल होंगे। विधानसभा सचिवालय इसकी सूचना संबंधित विभागों को भेज चुका है। मंत्रियों को भी इसी आधार पर सदन में जवाब देने की तैयारी करना होगी। विपक्ष ने कसी कमर, सत्ता पक्ष भी तैयारी से विपक्षी दल कांग्रेस ने सदन में सरकार को घेरने की तैयारी की है। सवालों से सरकार को आइना दिखाने का प्रयास होगा। रोजगार का वादा पूरा न होने पर सवाल पूछे जाएंगे वहीं किसानों के साथ की गई वादा खिलाफी पर भी घेराबंदी होगी। घर-घर नल से जल पहुचाने में हुए घोटाले की गूंज भी होने की संभावना है। पिछले सत्रों में भी जल जीवन मिशन में घोटाला को लेकर कांग्रेस ने घेराबंदी की थी। इस बार भी तैयारी है। वहीं सत्तारूढ़ दल भाजपा और सरकार के मंत्रियों ने भी तैयारी कर रखी है। विपक्षी सदस्यों का जवाब उन्हीं की शैली में दिया जाएगा। 22 से ली जाएंगी स्थगन, ध्यानाकर्षण सूचनाएं विधायक यदि किसी मामले का ध्यानाकर्षण या शून्यकाल के जरिए सदन में उठाना चाहते हैं तो इसके लिए अभी मौका है। स्थगन, ध्यानाकर्षण एवं शून्यकाल की सूचनाएं 22 जुलाई से विधानसभा सचिवालय लेना शुरू करेगा। विधायकों को इसकी सूचना भेज दी गई है। सचिवालय ने कहा कि ये सूचनाएं ई-मेल के माध्यम से भी सचिवालय में भेजी जा सकती हैं। विधायक चाहें तो विधानसभा सचिवालय ने आकर भी ये सूचनाएं कार्यालय समय में दे सकते हैं। इसी सत्र में पेश होगा सप्लीमेंट्री बजट मानसून सत्र(MP Monsoon Session) में करीब एक दर्जन विधेयक भी सरकार सदन में पेश करेगी। अभी तक सिर्फ एक विधेयक विधानसभा तक पहुंचा है। अन्य की मौखिक सूचना सचिवालय को विभागों ने दे दी है। वहीं सप्लीमेंट्री बजट भी पेश किया जाएगा। इस सप्लीमेंट्री बजट में विभिन्न विभागों के खर्चों के लिए रकम का प्रावधान किया जा रहा है। वित्त विभाग सप्लीमेंट्री बजट की कवायद कर रहा है। विभागों से प्रस्ताव मंगाए जा चुके हैं। विभागों से स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि सप्लीमेंट्री बजट में कोई नया खर्च शामिल नहीं होगा। इस बार ये खास     3377: सवाल विधायकों ने लिखित पूछे     2076: सवाल ऑनलाइन माध्यम से पहुंचे     1301: सवाल ऑफलाइन माध्यम से भेजे गए     12 दिन: सत्र अवधि     10 दिन: सत्र की प्रस्तावित बैठकें