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मणिपुर: उखरूल में सुरक्षाबलों ने ध्वस्त किए 6 अवैध बंकर, हिंसा रोकने के लिए की बड़ी तैनाती

 इंफाल मणिपुर के उखरूल जिले में बढ़ती हिंसा के बीच सुरक्षाबलों ने बड़ा अभियान चलाया है. पुलिस के मुताबिक, लितान इलाके में सक्रिय सशस्त्र समूहों द्वारा बनाए गए 6 अवैध बंकरों को ध्वस्त कर दिया गया है. ये बंकर हाल ही में हुई गोलीबारी में इस्तेमाल हो रहे थे, जिसमें कई लोग घायल हुए थे. इस कार्रवाई के बाद इलाके में तनाव तो बना हुआ है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है।  गुरुवार को पुलिस ने जानकारी दी कि उखरूल जिले के लितान और मोंगकट चेपू अपर गांवों में सुरक्षाबलों ने संयुक्त ऑपरेशन चलाया. इस ऑपरेशन के दौरान कुल छह अवैध बंकरों को ढहा दिया गया. ये बंकर सशस्त्र समूहों द्वारा बनाए गए थे और इन्हें रणनीतिक रूप से ऐसे स्थानों पर बनाया गया था जहां से हमले करना आसान हो. सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई को इलाके में शांति बहाल करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।  पुलिस के बयान के मुताबिक, यह ऑपरेशन  चलाया गया और यह कार्रवाई पिछले दिन शुरू हुए अभियान का ही हिस्सा थी. सुरक्षाबलों ने व्यवस्थित तरीके से बंकरों को चिन्हित किया और फिर उन्हें ध्वस्त किया. इन बंकरों का इस्तेमाल हाल ही में हुई गोलीबारी के दौरान किया गया था, जिससे इलाके में भय का माहौल बना हुआ था. इस कार्रवाई के बाद कई बंकर अब पूरी तरह निष्क्रिय हो चुके हैं।  लितान इलाके में हाल ही में सशस्त्र समूहों के बीच हुई गोलीबारी में कम से कम तीन लोग घायल हो गए थे. यह घटना स्थानीय लोगों के लिए काफी डरावनी रही, क्योंकि गोलीबारी रिहायशी इलाकों के आसपास हो रही थी. सुरक्षाबलों ने इस घटना के बाद तुरंत इलाके में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी थी और लगातार निगरानी रखी जा रही थी।  यह पूरा घटनाक्रम लितान सारेइखोंग इलाके में कुकी और तंगखुल नागा समुदायों के बीच बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है. फरवरी में दोनों समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़पों में 30 से ज्यादा घरों को आग के हवाले कर दिया गया था. इस घटना के बाद से ही इलाके में तनाव बना हुआ है और छोटी-छोटी घटनाएं भी बड़े संघर्ष का रूप ले रही हैं।  फरवरी की घटना के बाद आसपास के गांवों जैसे मोंगकोट चेपू और शार्काफुंग में भी कई बार गोलीबारी की घटनाएं सामने आई हैं. इन घटनाओं ने पूरे इलाके को संवेदनशील बना दिया है. लोग डर के साये में जी रहे हैं और रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हो रही है. सुरक्षाबलों की लगातार तैनाती के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं।  हाल ही में हुई घटनाओं में मंगलवार को कामजोंग जिले के शार्काफुंग इलाके में फायरिंग के दौरान तंगखुल नागा समुदाय के दो लोग घायल हो गए. वहीं सोमवार को मोंगकोट चेपू में एक कुकी महिला भी गोलीबारी में घायल हुई थी. ये घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि इलाके में तनाव अभी भी चरम पर है और किसी भी समय हालात बिगड़ सकते हैं।  पुलिस ने बताया कि सुरक्षाबल अब भी इलाके में सर्च ऑपरेशन और एरिया डोमिनेशन अभियान चला रहे हैं. संवेदनशील और सीमावर्ती इलाकों में जवानों की तैनाती बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की हिंसा को रोका जा सके. अधिकारियों का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर और कड़े कदम उठाए जाएंगे। 

मणिपुर के उखरूल में हिंसा: 5 दिन के लिए इंटरनेट बंद, कर्फ्यू लागू

 इंफाल मणिपुर के उखरूल में हिंसा भड़कने की जानकारी सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि कुछ सशस्त्र बदमाशों ने लिटन सारेइखोंग गांव में कई घरों को आग लगा दी. इस घटना के बाद स्थिति बिगड़ने की आशंका में प्रशासन ने पूरे जिले में कर्फ्यू लगा दिया और इंटरनेट सेवाओं को पांच दिनों के लिए निलंबित कर दिया है, ताकि आगे की हिंसा और अफवाहों को रोका जा सके. अधिकारियों ने बताया कि सशस्त्र समूहों ने पहाड़ी गांव के पास हवा में कई राउंड फायरिंग की, जिससे इलाके में दहशत फैल गई. कई ग्रामीण आवश्यक सामान लेकर पड़ोसी कांगपोकपी जिले के सुरक्षित क्षेत्रों की ओर भाग गए, जबकि तांगखुल गांव के कई ग्रामीणों के भी इलाका छोड़ने की जानकारी मिली है. '5 दिन के लिए इंटरनेट सेव बंद' बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए मणिपुर सरकार के गृह आयुक्त ने सार्वजनिक सुरक्षा और शांति को खतरा होने के कारण उखरूल जिले में तत्काल प्रभाव से इंटरनेट सेवाओं को पांच दिनों के लिए निलंबित करने का आदेश जारी किया है.  आदेश में कहा गया है कि हाल की घटनाओं से काफी अशांति फैली है और गलत सूचनाओं के प्रसार से तनाव बढ़ सकता है. इसलिए स्थिति को नियंत्रित करने और अफवाहों को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद की जा रही हैं. वहीं, आगजनी की घटनाओं के बाद उखरुल जिले के कुछ हिस्सों में कर्फ्यू लगा दिया गया और आगे की हिंसा को रोकने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी गई. शनिवार को हुई हिंसा की शुरुआत प्रशासन का कहना है कि उखरूल में हिंसा की शुरुआत शनिवार रात को हुई जब लीटन गांव में सात-आठ लोगों ने तांगखुल नागा समुदाय के एक व्यक्ति के साथ कथित तौर पर मारपीट की. हालांकि, मामला सुलझने की उम्मीद थी, लेकिन रविवार की बैठक नहीं हो सकी. इसके बाद सोमवार आधी रात को कुछ हथियारधारी बदमाशों ने लीटन सारईखोंग में तांगखुल नागा समुदाय के घरों को आग लगा दी, जिसके बाद नाग समुदाय ने कुकी समुदाय के घरों को निशाना बनाया. पुलिस के अनुसार, के. लुंगविराम गांव में भी एक घर को आंशिक रूप से जलाया गया है. पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सोमवार को रात करीब 12:10 बजे के. लुंगविराम गांव में एक छोटी-सी आग लगने की घटना हुई, जिससे एक आवासीय घर को आंशिक नुकसान पहुंचा. सुरक्षाबलों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया. पुलिस ने बताया कि आग लगने के कारण की जांच की जा रही है और स्थिति सामान्य है.

हिंदू, ईसाई और सिख समुदाय बांग्लादेश में हिंसा का शिकार, दुनिया ने जताई चिंता

नई दिल्ली बांग्लादेश में हिंदुओं सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी चिंता और नाराजगी देखी जा रही है. हालात ऐसे हैं कि केवल हिंदू ही नहीं, बल्कि ईसाई और सिख समुदाय भी हिंसा और अमानवीय व्यवहार का शिकार बन रहे हैं. हाल ही में एक हिंदू युवक को भीड़ द्वारा बेरहमी से मार डाले जाने और बाद में उसके शव को पेड़ से लटकाकर जला दिए जाने की घटना ने पूरी दुनिया को भीतर तक झकझोर कर रख दिया है. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि हिंदुओं के लिए आखिर सबसे अत्याचारी मुस्लिम देश कौन सा है? क्या सबसे अत्याचारी देश की कोई आधिकारिक रैंकिंग है? सबसे पहले यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी भी मान्य अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा हिंदुओं के लिए सबसे अत्याचारी मुस्लिम देश की आधिकारिक रैंकिंग जारी नहीं की जाती है. धार्मिक स्वतंत्रता पर काम करने वाली संस्थाएं- जैसे USCIRF, Amnesty International और Pew Research देशों की स्थिति को घटनाओं, कानूनों और सामाजिक माहौल के आधार पर आकलित करती हैं, न कि किसी एक समुदाय के लिए सीधी रैंकिंग बनाती हैं.  धार्मिक उत्पीड़न को कैसे मापा जाता है अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स आमतौर पर तीन आधार देखती हैं- कानूनी ढांचा, सरकारी संरक्षण या निष्क्रियता, और सामाजिक हिंसा. जब किसी देश में अल्पसंख्यकों पर हमले होते हैं और उन पर कार्रवाई नहीं होती, तो उसे धार्मिक स्वतंत्रता के लिए जोखिमपूर्ण माना जाता है. यह आकलन किसी एक धर्म तक सीमित नहीं, बल्कि सभी अल्पसंख्यकों पर लागू होता है. कौन सा देश हिंदुओ के लिए सबसे अत्याचारी किसी भी अंतरराष्ट्रीय संस्था ने यह घोषित नहीं किया है कि किस मुस्लिम देश में हिंदुओं पर सबसे ज्यादा अत्याचार होता है, लेकिन मान्य वैश्विक रिपोर्टों और तथ्यों के आधार पर कुछ देशों का नाम बार-बार गंभीर स्थिति के रूप में सामने आता है. वर्तमान अंतरराष्ट्रीय आकलनों के अनुसार हिंदुओं के लिए सबसे ज्यादा कठिन और असुरक्षित हालात जिन मुस्लिम देशों में माने जाते हैं, उनमें पाकिस्तान और अफगानिस्तान टॉप पर आते हैं. पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति पाकिस्तान में हिंदुओं के खिलाफ जबरन धर्मांतरण, विशेषकर नाबालिग लड़कियों के मामले, मंदिरों पर हमले, ईशनिंदा कानूनों का दुरुपयोग और सामाजिक भेदभाव जैसी घटनाएं लगातार अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दर्ज होती रही हैं. यही कारण है कि USCIRF और अन्य मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों में पाकिस्तान को धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए उच्च जोखिम वाला देश माना जाता है. अफगानिस्तान के हालात अफगानिस्तान में तालिबान शासन के बाद हालात और भी खराब हुए हैं. वहां हिंदू समुदाय लगभग समाप्ति की कगार पर है. धार्मिक स्वतंत्रता लगभग नहीं के बराबर है और खुले तौर पर हिंदू पहचान के साथ रहना बेहद मुश्किल माना जाता है. बांग्लादेश की स्थिति क्या कहती है बांग्लादेश एक मुस्लिम-बहुल देश है, जहां हिंदू सबसे बड़ा धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय हैं. अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में बांग्लादेश को अक्सर वॉच लिस्ट या चिंताजनक घटनाओं वाला देश माना गया है. दुर्गा पूजा के दौरान हिंसा, मंदिरों पर हमले और जबरन पलायन की घटनाएं समय-समय पर रिपोर्ट हुई हैं. हालांकि बांग्लादेश का संविधान धर्मनिरपेक्षता की बात करता है और सरकार आधिकारिक रूप से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का दावा करती है. लेकिन इस वक्त वहां के हालात हिंदुओं के बद से बदत्तर हो चुके हैं. 

हिंसा छोड़कर 37 नक्सलियों ने किया सरेंडर, 27 पर था 65 लाख रुपये इनाम

दंतेवाड़ा नक्सलवाद को आज फर एक बड़ा झटका लगा है. छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में 37 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है. इनमें से 27 नक्सलियों पर कुल 65 लाख के इनाम घोषित थे. आत्मसमर्पित नक्सलियों में भैरमगढ़ एरिया कमेटी, इन्द्रावती एरिया कमेटी और माड़ इलाके के नक्सली शामिल हैं. सरकार की पुनर्वास पहल ‘पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन’ योजना से प्रभावित होकर सभी ने दंतेवाड़ा डीआरजी कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में आत्मसमर्पण कर दिया है. बता दें, हाल ही में 2 बड़े नक्सली चैतू और अनंत के सरेंडर के बाद नक्सलवाद की कमर पूरी तरह टूट चुकी है. साथ ही सुरक्षा बलों द्वारा लगातार बढ़ रहे दबाव और सरकार की पुनर्वास योजनाओं से प्रभावित होकर लगातार अलग-अलग माओवादी संगठनों से बड़ी संख्या में नक्सलियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा से जुड़ने का फैसला किया है. आत्मसमर्पित नक्सलियों की पहचान और ईनाम राशि: 8 लाख रुपये इनामी (4)     कुमली उर्फ अनिता मंडावी – कंपनी नंबर 06 सदस्य / एसजेडसीएम कमलेश की गार्ड     गीता उर्फ लख्मी उर्फ लक्ष्मी मड़काम – कंपनी नंबर 10 सदस्य     रंजन उर्फ सोमा मंडावी – कंपनी नंबर 06 सदस्य     भीमा उर्फ जहाज कलमू – कंपनी नंबर 02 सदस्य 5 लाख रुपये इनामी (1)     क्रांति उर्फ पोदिये गावड़े – एसीएम, आमदई एरिया कमेटी 2 लाख रुपये इनामी (7)     कुमारी मुन्नी कर्मा – प्लाटून नंबर 16 सदस्य     लक्ष्मी अटामी – प्लाटून नंबर 16 सदस्य     कृष्णा पदामी – पल्लेवाया पंचायत मिलिशिया कमांडर     श्रीमती मंगड़ी उर्फ मंगली हेमला – ककाड़ी आरपीसी, केएएमएस अध्यक्ष     दशरू डोडी – बेलनार आरपीसी, मिलिशिया सदस्य     नंदू मंडावी – गमपुर पंचायत, सीएनएम कमांडर     विज्जा मिच्चा – कोलनार आरपीसी, मिलिशिया अध्यक्ष 1 लाख रुपये इनामी (13)     हिड़मे कुहड़ाम – मंलागेर एरिया पार्टी सदस्य / कृषि शाखा अध्यक्ष     रोशनी उर्फ हुंगी सोड़ी – आमदई एरिया कमेटी पार्टी सदस्य     राजू उर्फ गांधी लेकाम – इन्द्रावती एरिया कमेटी पार्टी सदस्य     जनकू वेको – बोंडगा आरपीसी, जनताना सरकार अध्यक्ष     बुधराम माड़वी – पल्लेवाया आरपीसी, जनताना सरकार अध्यक्ष     सुखमति उर्फ सुक्की ताती – एलओएस सदस्य     सुकलू कड़ियाम – गमपुर आरपीसी, जनताना सरकार अध्यक्ष     टाकलू उर्फ अजय कश्यप – आमदई एरिया कमेटी पार्टी सदस्य     बामन मंडावी – हंड्री आरपीसी, जनताना सरकार अध्यक्ष     अर्जुन कुंजाम – भैरमगढ़ एरिया कमेटी पार्टी सदस्य     कुमारी सोमारी परसा – इन्द्रावती एरिया कमेटी पार्टी सदस्य     विजय ओयाम – इन्द्रावती एरिया कमेटी पार्टी सदस्य     फुलमती उर्फ शांति वेको – भैरमगढ़ एरिया कमेटी पार्टी सदस्य 50 हजार रुपये इनामी (2)     नितेष उर्फ बदरू अलामी – कुसमेली आरपीसी, सीएनएम सदस्य     सुखराम कुहड़ाम – जैगूर आरपीसी, सीएनएम सदस्य निरंक (इनाम रहित) – 10     मारा राम लेकाम – मूलवासी बचाओ मंच सदस्य     हेमला बुगुर – ताकीलोड़ पंचायत, कृषि शाखा सदस्य     बबलु ओयाम – बेचापाल आरपीसी, छात्र संगठन सदस्य     मंगडू लेकाम – डोडीतुमनार आरपीसी, डीएकेएमएस सदस्य     बामन उर्फ साई कुंजाम – डोडीतुमनार आरपीसी, जनताना सरकार सदस्य / संस्कृति शाखा अध्यक्ष     मल्ला बारसे – रेवाली पंचायत, संघम सदस्य     पांडू ताती – ग्राम अचेली जीआरडी सदस्य     नंदा मड़काम – ककाड़ी आरपीसी, केएमएस सदस्य     श्रीमती देवे मड़काम – ककाड़ी आरपीसी, केएमएस सदस्य     लिंगा कुंजाम – अरनपुर आरपीसी, डीएकेएमएस सदस्य ये सभी विभिन्न नक्सली गतिविधियों, मुठभेड़ों, हमलों, रोड काटने, बैनर-पोस्टर लगाने जैसी घटनाओं में शामिल रहे थे. इन घटनाओं में थे शामिल:     2024 में गोबेल और थुलथुली जंगलों की मुठभेड़     2019 भैरमगढ़—केशकुतुल के बीच पुलिस पर फायरिंग     2020 मिनपा मुठभेड़, जिसमें 26 जवान शहीद हुए थे     विभिन्न क्षेत्रों में नक्सली बंद के दौरान तोड़फोड़ और प्रचार गतिविधियां बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने कहा कि ‘पूना मारगेम’ बस्तर में स्थायी शांति और समग्र विकास की दिशा में परिवर्तनकारी पहल बनकर उभर रहा है. आत्मसमर्पित माओवादियों को पुनर्वास नीति के तहत 50 हजार रुपये की तात्कालिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, कृषि भूमि सहित अन्य सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. 20 महीनों में दंतेवाड़ा से 508 माओवादी मुख्यधारा में लौटे पुनर्वास नीति की वजह से पिछले 20 महीनों में दंतेवाड़ा में 165 इनामी माओवादी समेत 508 लोग आत्मसमर्पण कर चुके हैं. इसके अलावा ‘लोन वर्राटू’ अभियान के तहत अब तक 333 इनामी समेत 1160 माओवादी हथियार छोड़ चुके हैं. वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में आत्मसमर्पण आत्मसमर्पण करने वालों में कई कुख्यात एवं इनामी माओवादी शामिल हैं। इनका स्वागत पुलिस उपमहानिरीक्षक दंतेवाड़ा रेंज कमलोचन कश्यप, डीआईजी (CRPF) राकेश चौधरी, पुलिस अधीक्षक दंतेवाड़ा गौरव राय, CRPF की 111वीं, 230वीं और 80वीं बटालियन के कमांडेंटों सहित अन्य अधिकारियों ने किया। इस अभियान को सफल बनाने में डीआरजी, बस्तर फाइटर्स, विशेष शाखा, CRPF की कई कंपनियों और आरएफटी जगदलपुर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। माओवादियों से अपील दंतेवाड़ा पुलिस और जिला प्रशासन ने एक बार फिर आग्रह किया है कि माओवादी हिंसा छोड़कर समाज से जुड़ें. “पूना मारगेम यह संदेश देता है कि लौटने का अवसर हर किसी के लिए खुला है. अपने परिवार और बस्तर की नई शुरुआत के लिए शांति, पुनर्वास और सम्मान का मार्ग अपनाएं.”

सीमा पर जंग के हालात! पाक-अफगान सेनाओं के बीच जमकर हुई फायरिंग

अफगानिस्तान पाकिस्तान और अफगानिस्तान के सैनिकों के बीच मंगलवार को सुदूर उत्तर-पश्चिमी सीमा क्षेत्र में झड़पें हुईं। पाकिस्तान की सरकारी मीडिया ने अपनी खबर में अफगानिस्तान के सैनिकों पर ‘‘बिना उकसावे के गोलीबारी'' करने का आरोप लगाया और कहा कि गोलीबारी के बाद जवाबी कार्रवाई की गई। ‘पाकिस्तान टीवी' में प्रसारित खबर और दो सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई की जिससे अफगान टैंकों और सैन्य चौकियों को नुकसान पहुंचा। अफगनिस्तान के खोस्त प्रांत के पुलिस उप प्रवक्ता ताहिर अहरार ने झड़पों की पुष्टि की लेकिन कोई और जानकारी नहीं दी। इस सप्ताह दोनों ओर से गोलीबारी की यह दूसरी घटना है। पाकिस्तान की सरकारी मीडिया के अनुसार अफगानिस्तान की सेना और पाकिस्तानी तालिबान ने संयुक्त रूप से ‘‘बिना उकसावे के'' एक पाकिस्तानी चौकी पर गोलीबारी की जिसके बाद खैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत के कुर्रम ज़िले में पाकिस्तानी सैनिकों ने करार जवाब दिया। सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने पाकिस्तानी तालिबान के एक विशाल प्रशिक्षण केंद्र को भी नष्ट कर दिया। पाकिस्तानी सेना ने फिलहाल इस घटना पर टिप्पणी नहीं की है। शनिवार को दोनों पक्षों के बीच कई सीमावर्ती क्षेत्रों में गोलीबारी हुई थी जिससे दोनों पक्षों के दर्जनों लोग हताहत हुए थे। इसके बाद से ही सेना अलर्ट पर है। हालांकि सऊदी अरब और कतर की अपील के बाद रविवार को झड़पें रुक गईं थीं लेकिन पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच सभी सीमाएं बंद हैं।  

कार्यक्रम के बाद बवाल: सपना चौधरी के इवेंट में मारपीट और तोड़फोड़, मामला दर्ज

कोरबा छत्तीसगढ़ के कोरबा में हरियाणवी डांसर सपना चौधरी के कार्यक्रम में विवाद हो गया. आरोप है कि कुछ लोगों ने जश्न रिसॉर्ट में तोड़फोड़ की और सपना चौधरी की टीम के साथ मारपीट भी की. इस मामले में सपना चौधरी की टीम और रिसॉर्ट के मालिक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. बताया जा रहा है कि कार्यक्रम के बाद जब रात में सपना चौधरी अपने कमरे में सो रही थी तब बाहर कुछ लोगों ने कमरे का दरवाजा तोड़ने का प्रयास किया। गाली गलौज करने के साथ गोली मारने की धमकी दी। सपना चौधरी के मुताबिक उनकी टीम के साथ झगड़ा और मारपीट भी की गई और लोगों को उकसाया भी गया. 10 हजार लूटने और CCTV कैमरा का डीवीअर ले जाने का भी आरोप इस मामले में जश्न रिसोर्ट के मालिक करणदीप ने अमित,अनिल,युगल और सुजल के विरुद्ध कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. आरोप है इन चार लोगों ने सपना चौधरी के लोगों से कार्यक्रम के लिए ज्यादा पैसा लेने का आरोप लगाते हुए गाली गलौज कर मारपीट की और जब इन्हें मना किया गया तो जश्न रिसोर्ट में तोड़फोड़ और मारपीट की. साथ ही सीसीटीवी कैमरा का डीवीअर अपने साथ ले गए और 10000 रुपए भी लूट लिए। दोनों पक्षों की शिकायत पर मामला दर्ज, जांच जारी : सीएसपी रिसोर्ट मालिक ने सात लाख रुपए का नुकसान होने की बात कही है. इस मामले में कोरबा सीएसपी भूषण एक्का ने बताया कि दोनों पक्षों की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है. मामले की जांच की जा रही है.

बरेली में नमाज के बाद उपद्रव, माहौल बिगड़ने पर पुलिस ने बरसाईं लाठियां

बरेली  यूपी के बरेली में जुमे की नमाज के बाद बवाल हो गया. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया. प्रदर्शनकारी 'आई लव मोहम्मद' पोस्टर विवाद को लेकर सड़कों पर उतरे थे. आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा ने प्रोटेस्ट का ऐलान किया था. पुलिस ने काफी समझाने-बुझाने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी भीड़ नहीं मानी और वह बैरिकेड तोड़ते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करने लगी. जिसके बाद पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा. फिलहाल, माहौल तनावपूर्ण हो गए हैं.  दरअसल, शुक्रवार को बरेली में जुमे की नमाज के बाद 'आई लव मोहम्मद' पोस्टर विवाद को लेकर मुस्लिम समाज के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया. सैकड़ों लोग शहर के अलग-अलग हिस्सों में पोस्टर और बैनर लेकर सड़कों पर उतर आए, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया.  बताया जा रहा है कि श्यामगंज इलाके में प्रदर्शनकारियों और एसपी क्राइम के बीच नोकझोंक भी हुई. हालात को देखते हुए पुलिस ने श्यामगंज में दुकानें बंद करा दीं. नौमहला मस्जिद के बाहर भी भीड़ जुट गई. जब भीड़ बेकाबू हो गई तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया. जिससे कुछ ही मिनट में सैकड़ों की संख्या में जमा हुए लोग भाग खड़े हुए.  आपको बता दें कि मौलाना तौकीर रजा ने 'आई लव मोहम्मद' मामले में डीएम के जरिए राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजने की बात कही थी. उन्होंने सड़क पर उतरने का ऐलान किया था. जिसको लेकर पुलिस पहले से हाई अलर्ट पर थी. भीड़ को कंट्रोल करने के लिए हजारों की संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था.  शुक्रवार को सुबह से ही इस्लामिया मैदान और बिहारीपुर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था. श्यामगंज मंडी वाले रोड पर बैरिकेडिंग करने के साथ-साथ भारी फोर्स भी लगाई गई थी. दोपहर होते-होते जब लोग घरों से निकलने लगे तो माहौल गरम होने लगा. आखिर में जुमे की नमाज के बाद लोग जुलूस के रूप से नारेबाजी करते हुए सड़कों पर निकल पड़े. नारेबाजी हुई, हंगामा हुआ, पुलिस ने रोका तो झड़प हुई. इसके बाद लाठीचार्ज हुआ.