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मुख्यमंत्री ने अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना में अगले शैक्षणिक सत्र से 200 बच्चों को लाभ दिलाने की महत्वपूर्ण घोषणा

रायपुर : अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना से निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए खुला बेहतर शिक्षा का रास्ता – मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री ने अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना में अगले शैक्षणिक सत्र से 200 बच्चों को लाभ दिलाने की महत्वपूर्ण घोषणा मुख्यमंत्री साय ने अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना का किया शुभारंभ, चयनित बच्चों का किया सम्मान रायपुर मुख्यमंत्री ने "अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना" में अगले शैक्षणिक सत्र से 200 बच्चों को लाभ दिलाने की महत्वपूर्ण घोषणामुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  राजधानी स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में श्रम विभाग द्वारा श्रमिक बच्चों के लिए संचालित "अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना" का शुभारंभ किया। उन्होंने चयनित बच्चों का सम्मान करते हुए उन्हें शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना से निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा का मार्ग प्रशस्त हुआ है। साय ने घोषणा की कि अगले शैक्षणिक सत्र से इस योजना का लाभ 200 बच्चों को मिलेगा।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रमिक अनेक समाज के हित के लिए कार्य करता है, परंतु अपने परिवार के लिए बहुत कम समय, संसाधन, ऊर्जा और ध्यान दे पाता है। उनके भी सपने होते हैं कि उनके घर के बच्चे पढ़-लिखकर बेहतर जीवन जिएँ, ताकि भविष्य में मजदूर का बेटा-बेटी केवल मजदूरी न करे, बल्कि समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, वकील और राजनेता बने।इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी के अंतर्गत श्रमिक बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हमारी सरकार ने छत्तीसगढ़ में "अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना" प्रारंभ की है। इसके तहत प्रदेश के श्रमिकों के बच्चों को कक्षा छठवीं से बारहवीं तक श्रेष्ठ आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा प्राप्त होगी। इनका पूरा खर्च श्रम विभाग द्वारा वहन किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से कार्यक्रम के दौरान निर्माण श्रमिकों एवं उनके बच्चों ने मिलकर योजना का शुभारंभ पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना से अब हम अपने बच्चों के भविष्य को लेकर निश्चिंत हो गए हैं। इस योजना के माध्यम से बच्चों को अच्छी शिक्षा और भविष्य सँवारने का सुनहरा अवसर मिल गया है। हमारे लिए यह एक सपना था, जो अब पूरा हो गया है। मुख्यमंत्री साय ने श्रमिकों से चर्चा करते हुए कहा कि निर्माण श्रमिकों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह योजना लागू की गई है। योजना के तहत चालू वर्ष में 100 निर्माण श्रमिकों के बच्चों को 14 निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। इन विद्यालयों में सीबीएसई और आईसीएसई पाठ्यक्रम के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई कराई जाएगी। श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज श्रम विभाग के सहयोग से श्रमिक परिवारों के 100 बच्चों का दाखिला प्रदेश के 14 निजी आवासीय विद्यालयों में कराया गया है। सरकार की सोच है कि श्रमिक का बच्चा केवल श्रमिक न रहकर अधिकारी बने और देश की सेवा करे। उन्होंने बताया कि श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों के बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग योजना भी संचालित की जा रही है, जिसके निश्चित ही दूरगामी परिणाम सामने आएँगे। श्रम मंत्री देवांगन ने आगे कहा कि श्रम विभाग के अंतर्गत तीन मंडल संचालित हैं, जिनमें लगभग 70 से अधिक योजनाएँ चलाई जा रही हैं। राज्य सरकार द्वारा पिछले 20 माह में लगभग 600 करोड़ रुपये का लाभ श्रमिकों को डीबीटी के माध्यम से पहुँचाया गया है। उन्होंने योजना के तहत चयनित बच्चों को शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि श्रद्धेय अटल जी के संकल्पों को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सुशासन की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। राज्य में लगभग 30 लाख से अधिक पंजीकृत श्रमिक हैं, जिनके बच्चे अच्छे विद्यालयों में नहीं पढ़ पाते थे। उनके लिए "अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना" किसी वरदान से कम नहीं है। इस योजना से श्रमिकों के बच्चों को बेहतर विद्यालयों में पढ़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने चयनित बच्चों एवं अभिभावकों को शुभकामनाएँ दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस मौके पर श्रम विभाग के सचिव हिम शिखर गुप्ता ने स्वागत भाषण दिया। इस अवसर पर संयुक्त सचिव श्रीमती फरिहा आलम, श्रम कल्याण मंडल के सचिव गिरीश रामटेके सहित बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे एवं उनके अभिभावक उपस्थित थे।

मेरा लक्ष्य मेरा अभियान’: रायपुर में वनमंत्री कश्यप ने कार्यक्रम में दी विशेष भागीदारी

रायपुर : वनमंत्री कश्यप ‘मेरा लक्ष्य मेरा अभियान’ कार्यक्रम में हुए शामिल मेरा लक्ष्य मेरा अभियान’: रायपुर में वनमंत्री कश्यप ने कार्यक्रम में दी विशेष भागीदारी वनमंत्री कश्यप ने रायपुर में बढ़ाया उत्साह, ‘मेरा लक्ष्य मेरा अभियान’ कार्यक्रम में हुए शामिल रायपुर वन मंत्री केदार कश्यप आज कोण्डागांव जिले के फरसगांव स्थित आदर्श विद्यालय में आयोजित विधानसभा स्तरीय ‘मेरा लक्ष्य मेरा अभियान’ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपने जीवन में स्पष्ट लक्ष्य तय करने के लिए प्रेरित करना था। इस कार्यक्रम में कुल 4,000 विद्यार्थियों ने भाग लिया। जिसमें कालेज के प्रथम वर्ष के लगभग 1 हजार और कक्षा 11वीं के करीब 3 हजार छात्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बस्तर भूमि से जुड़े प्रेरणादायक व्यक्तित्वों को आमंत्रित किया गया था, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इस अवसर पर कांकेर विधायक आशाराम नेताम, डीआईजी कमललोचन कश्यप सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे। वन मंत्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर क्षेत्र की प्रतिभाएं आज राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़ संकल्प, गृह मंत्री अमित शाह के अदम्य साहस और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य नक्सलवाद के खात्मे की ओर बढ़ रहा है। इससे न केवल विकास कार्यों की गति तेज होगी बल्कि बस्तर क्षेत्र शिक्षा के क्षेत्र में भी अग्रणी बनेगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में हम छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना का रजत जयंती  महोत्सव मना रहे हैं। इस अवसर पर हम देश के पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी को नमन करते हैं और उनके योगदान के लिए आभार प्रकट करते हैं। वन मंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे हर परिस्थिति में धैर्य बनाए रखें, जीवन में एक लक्ष्य तय कर एकाग्रता के साथ मेहनत करें और लक्ष्य प्राप्ति तक निरंतर आगे बढ़ते रहें। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल नौकरी के बारे में न सोचकर अपनी रुचि के अनुसार कैरियर का चयन करना चाहिए। अंत में उन्होंने सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं और बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।  इस अवसर पर बस्तर की बेटी लैंड एडवेंचर अवॉर्ड से सम्मानित पर्वतारोहिणी नैना सिंह धाकड़, कोण्डागांव जिले के प्रख्यात कृषक डॉ. राजाराम त्रिपाठी, सोशल मीडिया के क्षेत्र में प्रसिद्ध सीजी मास्टर टीम सहित बस्तर क्षेत्र के कई प्रमुख व्यक्तित्व उपस्थित रहे। इस अवसर पर पूर्व विधायक सेवक राम नेताम, नगर पंचायत फरसगांव और केशकाल के अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना अंतर्गत राज्य सरकार की 1.85 करोड़ रुपये की सब्सिडी का ऑनलाइन अंतरण

रायपुर : प्रदेश में सौर ऊर्जा के उपभोक्ता ऊर्जा उत्पादक के साथ-साथ बन रहे हैं ऊर्जा दाता : मुख्यमंत्री साय प्रदेश में सौर ऊर्जा के उपभोक्ता ऊर्जा उत्पादक के साथ-साथ बन रहे हैं ऊर्जा दाता पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना अंतर्गत राज्य सरकार की 1.85 करोड़ रुपये की सब्सिडी का ऑनलाइन अंतरण मुख्यमंत्री ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापक जागरूकता के लिए सूर्य रथ को दिखाई हरी झंडी मुख्यमंत्री सौर ऊर्जा जागरूकता और प्रोत्साहन अभियान में हुए शामिल, उत्कृष्ट वेंडरों को किया सम्मानित रायपुर प्रदेश में सौर ऊर्जा के उपभोक्ता अब केवल ऊर्जा उत्पादक ही नहीं, बल्कि ऊर्जा दाता भी बन रहे हैं। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना जैसी महत्वाकांक्षी पहल के माध्यम से प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य की प्राप्ति के संकल्प को तीव्र गति से पूर्ण करने की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित सौर ऊर्जा जागरूकता और प्रोत्साहन अभियान को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री सौर ऊर्जा जागरूकता और प्रोत्साहन अभियान में हुए शामिल, उत्कृष्ट वेंडरों को किया सम्मानित मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर सौर ऊर्जा के फायदों, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना और इसके अंतर्गत मिलने वाली सब्सिडी के विषय में लोगों को जानकारी देने और जागरूक करने के उद्देश्य से सूर्य रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। साथ ही मुख्यमंत्री ने 618 उपभोक्ताओं के खातों में प्रत्येक को 30 हजार रुपये की दर से कुल 1.85 करोड़ रुपये की राज्यांश सब्सिडी का ऑनलाइन अंतरण किया। मुख्यमंत्री सौर ऊर्जा जागरूकता और प्रोत्साहन अभियान में हुए शामिल, उत्कृष्ट वेंडरों को किया सम्मानित मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ता प्रदूषण हम सभी के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है और छत्तीसगढ़ इस लक्ष्य की प्राप्ति में पूरे समर्पण और क्षमता के साथ अपनी भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देते हुए हॉफ बिजली बिल से आगे बढ़ते हुए मुफ्त बिजली की ओर ले जाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने इसे हर्ष का विषय बताते हुए कहा कि प्रदेशवासी इस योजना के महत्व को समझते हुए स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आमजन से आग्रह किया कि वे अपने आसपास के लोगों को भी इस योजना से जोड़ें और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में प्रदेश को अग्रसर बनाने में योगदान दें। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उपभोक्ताओं को सब्सिडी उपलब्ध करा रही हैं। साथ ही बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से आसान वित्तीय सुविधा भी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उपभोक्ताओं को पूर्ण रूप से मुफ्त बिजली का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत आज लाभार्थियों को लेटर ऑफ अवार्ड प्रदान किए गए हैं। इन योजनाओं से उपभोक्ता स्वयं सौर ऊर्जा का उत्पादन कर बिजली का विक्रय कर रहे हैं और साथ ही सस्ती बिजली का लाभ भी प्राप्त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने सौभाग्य योजना के माध्यम से हर घर बिजली पहुँचाने का संकल्प लिया था। उस समय देश के 18 हजार गाँव अंधेरे में थे और आज उन सभी गाँवों तक बिजली पहुँच चुकी है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में अब देश स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ में बिजली उत्पादन क्षमता केवल 1,400 मेगावाट थी, जबकि आज प्रदेश 30,000 मेगावाट का उत्पादन कर रहा है और पड़ोसी राज्यों को भी बिजली उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने बताया कि नई उद्योग नीति के अंतर्गत ऊर्जा क्षेत्र में 3.50 लाख करोड़ रुपये के एमओयू संपादित हुए हैं और आने वाले समय में प्रदेश की ऊर्जा उत्पादन क्षमता और भी बढ़ जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ उठाएँ और स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य की प्राप्ति में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएँ। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के समक्ष राजनांदगांव से आए कक्षा 12वीं के छात्र प्रथम सोनी ने सौर ऊर्जा की विशेषताओं और शासन द्वारा इसे बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर अपने विचार रखे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘इम्पैक्ट ऑफ डिस्ट्रीब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी ऑन ग्रिड स्टेबिलिटी’ तथा ‘एग्रीवोल्टाइक्स परफार्मर हैण्डबुक’ का भी विमोचन किया। इस अवसर पर पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के क्रियान्वयन में विशेष भूमिका निभाने वाले उत्कृष्ट वेंडरों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विधायक मोतीलाल साहू, विधायक पुरंदर मिश्रा, क्रेडा के चेयरमैन भूपेंद्र सवन्नी, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, क्रेडा के सीईओ राजेश राणा, भारतीय सौर ऊर्जा महासंघ के अध्यक्ष सुमन कुमार, तीनों पॉवर कंपनी के प्रबंध निदेशक सहित बड़ी संख्या में सौर ऊर्जा के उपभोक्ता उपस्थित थे।

सुपोषण, महतारी वंदन योजना सहित राज्य सरकार के प्रयासों की यूनिसेफ इंडिया ने की सराहना

रायपुर : विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में यूनिसेफ इंडिया देगा तकनीकी सहयोग सुपोषण, महतारी वंदन योजना सहित राज्य सरकार के प्रयासों की यूनिसेफ इंडिया ने की सराहना मुख्यमंत्री से यूनिसेफ इंडिया के प्रतिनिधिमंडल ने की सौजन्य भेंट रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में यूनिसेफ इंडिया के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने विकसित छत्तीसगढ़ बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की और यूनिसेफ की ओर से तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यूनिसेफ इंडिया के सहयोग का स्वागत करते हुए कहा कि यूनिसेफ द्वारा विश्वभर में जनकल्याण हेतु विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यूनिसेफ की तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ छत्तीसगढ़ को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने अंजोर विजन 2047 दस्तावेज़ के अंतर्गत सरकार की प्राथमिकताओं को प्रतिनिधिमंडल के साथ साझा किया। मुख्यमंत्री को यूनिसेफ के प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ में यूनिसेफ द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति से अवगत कराया। यूनिसेफ इंडिया की फील्ड सर्विसेज प्रमुख सुसोलेदाद हेरेरो ने राज्य की पोषण संबंधी पहल और "विकसित छत्तीसगढ़" निर्माण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की। सुहेरेरो ने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि यूनिसेफ छत्तीसगढ़ में हमर स्वस्थ लइका कार्यक्रम में भी सहयोग प्रदान कर रहा है, जिसके अत्यंत सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इस पहल को मध्यप्रदेश, राजस्थान और ओडिशा जैसे अन्य राज्यों द्वारा भी अपनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने यूनिसेफ इंडिया द्वारा छत्तीसगढ़ में किए जा रहे योगदान की सराहना की और भविष्य में भी अंजोर विजन 2047 के लक्ष्यों को केंद्र में रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत बनाने का आह्वान किया है। उसी कड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार भी विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए संकल्पित है और इसके लिए अंजोर विजन 2047 दस्तावेज़ तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंजोर विजन 2047 के तहत आदिवासी समुदाय, विशेषकर विशेष पिछड़ी जनजातियों (पीवीटीजी) का उत्थान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। शिशु मृत्यु दर, कुपोषण सहित स्वास्थ्य एवं पोषण के सूचकांकों को बेहतर बनाने में यूनिसेफ का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। मुख्यमंत्री ने किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए बेहतर स्वास्थ्य एवं शिक्षा के महत्व पर भी चर्चा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के प्रमुख विलियम हैनलॉन जूनियर तथा डॉ. बाल परितोष दास भी उपस्थित रहे।

संस्कृत हमारी विरासत का आधार, इसे संरक्षित करना सबकी जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री साय विराट संस्कृत विद्वत्-सम्मेलन में हुए शामिल रायपुर भारतीय संस्कृति की आत्मा संस्कृत में निहित है, जो हमें विश्व पटल पर एक विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। संस्कृत भाषा व्याकरण, दर्शन और विज्ञान की नींव है, जो तार्किक चिंतन को बढ़ावा देती है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के संजय नगर स्थित सरयूपारीण ब्राह्मण सभा भवन में आयोजित विराट संस्कृत विद्वत्-सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि संस्कृत शिक्षा आधुनिक युग में भी प्रासंगिक और उपयोगी है। संस्कृत भाषा और साहित्य हमारी विरासत का आधार हैं, जिन्हें हमें संरक्षित और संवर्धित करना चाहिए।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि देववाणी संस्कृत पर चर्चा के साथ यह सम्मेलन भारतीय संस्कृति, संस्कार और राष्ट्र को सुदृढ़ बनाने का एक महान प्रयास है। मुख्यमंत्री साय ने संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए संस्कृत भारती छत्तीसगढ़ और सरयूपारीण ब्राह्मण सभा छत्तीसगढ़ द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की तथा उन्हें बधाई और शुभकामनाएँ दीं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक शिक्षा में संस्कृत भाषा को शामिल करने से विद्यार्थियों का बौद्धिक विकास सुनिश्चित होगा। संस्कृत में वेद, उपनिषद और पुराण जैसे ग्रंथों का विशाल भंडार है, जो दर्शन, विज्ञान और जीवन-मूल्यों का संदेश देते हैं। वेदों में वर्णित आयुर्वेद, गणित और ज्योतिष आज भी प्रासंगिक हैं और शोध का विषय हो सकते हैं। इन ग्रंथों में कर्म, ज्ञान और भक्ति के सिद्धांत स्पष्ट रूप से प्रतिपादित हैं, जो आधुनिक जीवन में शांति और संतुलन ला सकते हैं।ऐसे में संस्कृत शिक्षा आधुनिक युग में भी उतनी ही प्रासंगिक और उपयोगी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वेदों और उपनिषदों के ज्ञान को अपनाकर हम अपनी विरासत को संजोने के साथ-साथ अपने जीवन को भी समृद्ध बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें युवाओं को संस्कृत साहित्य से जोड़ने के लिए प्रेरित करना होगा, ताकि वे इस ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुँचा सकें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि तकनीक के माध्यम से संस्कृत शिक्षा को आकर्षक और प्रासंगिक बनाया जा सकता है। राज्य में संस्कृत विद्वानों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी से इस दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि इस सम्मेलन के माध्यम से हमें संस्कृत विद्या के प्रचार-प्रसार और अगली पीढ़ी को जोड़ने का संकल्प लेना चाहिए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने सरयूपारीण ब्राह्मण सभा, छत्तीसगढ़ के प्रचार पत्रक का विमोचन भी किया। विराट संस्कृत विद्वत्-सम्मेलन का आयोजन संस्कृत भारती छत्तीसगढ़ एवं सरयूपारीण ब्राह्मण सभा छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।  सम्मेलन को संबोधित करते हुए संस्कृत भारती के प्रांताध्यक्ष डॉ. दादू भाई त्रिपाठी ने कहा कि इतिहास में ऐसे अनेक प्रमाण मिलते हैं, जिनसे सिद्ध होता है कि एक समय संस्कृत जनभाषा के रूप में प्रचलित थी। छत्तीसगढ़ी भाषा का संस्कृत से सीधा संबंध है। छत्तीसगढ़ी में पाणिनि व्याकरण की कई धातुओं का सीधा प्रयोग होता है। उन्होंने यह भी बताया कि सरगुजा क्षेत्र में सर्वाधिक आदिवासी विद्यार्थी संस्कृत की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में सरयूपारीण ब्राह्मण समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया। इनमें गठिया रोग विशेषज्ञ डॉ. अश्लेषा शुक्ला, उत्कृष्ट तैराक अनन्त द्विवेदी तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला शामिल थे। सम्मेलन को दंडी स्वामी डॉ. इंदुभवानंद महाराज, सरयूपारीण ब्राह्मण सभा छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष डॉ. सुरेश शुक्ला और अखिल भारतीय संस्कृत भारती शिक्षण प्रमुख डॉ. श्रीराम महादेव ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर डॉ. सतेंद्र सिंह सेंगर, अजय तिवारी, बद्रीप्रसाद गुप्ता सहित बड़ी संख्या में संस्कृत शिक्षकगण, सामाजिक प्रतिनिधि और गणमान्यजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने गोंडी अनुवादक ऐप ‘आदि वाणी’ परियोजना की सफलता पर दी बधाई

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से यहाँ उनके निवास कार्यालय में ट्रिपल आई टी नया रायपुर के निदेशक प्रोफेसर ओमप्रकाश व्यास ने सौजन्य मुलाकात की।मुख्यमंत्री साय ने ‘आदि वाणी’ परियोजना के अंतर्गत गोंडी भाषा अनुवादक मोबाइल ऐप के सफल लॉन्च पर प्रोफेसर व्यास एवं उनकी टीम को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस ऐप के माध्यम से गोंडी बोलने वाले जनजातीय भाई-बहनों की आवाज़ राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचेगी। यह तकनीक उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने, शिक्षा तथा शासन-प्रशासन में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का सशक्त माध्यम बनेगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ट्रिपल आई टी नया रायपुर भविष्य में भी इसी प्रकार के नवाचार और समाजोन्मुखी अनुसंधान से प्रदेश एवं देश का गौरव बढ़ाएगा। प्रोफेसर व्यास ने मुख्यमंत्री को बताया कि इस परियोजना में गोंडी भाषा के लिए टेक्स्ट-टू-स्पीच एवं अनुवाद प्रणाली विकसित की गई है। इसके माध्यम से गोंडी से हिंदी और अंग्रेज़ी तथा इसके विपरीत अनुवाद संभव होगा। यह सुविधा अब मोबाइल ऐप के रूप में भी उपलब्ध है, जिससे आम नागरिक इसे आसानी से उपयोग कर सकेंगे। उन्होंने अवगत कराया कि इस परियोजना में ट्रिपल आई टी नया रायपुर के साथ-साथ आईआईटी दिल्ली, आईआईटी हैदराबाद और बिट्स पिलानी जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थान भी सहभागी हैं। ‘आदि वाणी’ परियोजना को भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा प्रायोजित किया गया है। प्रोफेसर व्यास ने बताया कि इस उपलब्धि से ट्रिपल आई टी नया रायपुर ने राष्ट्रीय पटल पर अपनी सार्थक उपस्थिति दर्ज कराई है। विशेष रूप से बस्तर अंचल के 30 लाख से अधिक गोंडी भाषी समुदाय को इस तकनीक से अपनी भाषा और संस्कृति की पहचान सुरक्षित करने और डिजिटल युग में अपनी आवाज़ को बुलंद करने का अवसर मिलेगा।

सीएम विष्णु देव साय ने रायगढ़ के गढ़ उमरिया में नवगुरुकुल का किया शुभारंभ

रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिक्षा को नई दिशा देने के लिए नवगुरुकुल का उद्घाटन किया नवगुरुकुल : बालिकाओं की शिक्षा और संस्कारों के संवर्धन की नई पहल रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज रायगढ़ जिले के प्रवास के दौरान खरसिया तहसील अंतर्गत ग्राम गढ़ उमरिया में नवगुरुकुल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने नवप्रवेशी छात्राओं को लैपटॉप वितरित कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।  मुख्यमंत्री साय ने नवगुरुकुल में स्थापित आधुनिक कंप्यूटर लैब का निरीक्षण करते हुए शिक्षकों को निर्देश दिए कि वे बालिकाओं को उच्चस्तरीय शिक्षा और मूल्य आधारित संस्कार प्रदान करें ताकि उनका भविष्य सुनहरा बने।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए सर्वप्रथम गणेशोत्सव, शिक्षक दिवस और चक्रधर समारोह की बधाई दी। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक राष्ट्र निर्माता होता है, इसलिए समाज में उनका सर्वोच्च सम्मान होना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने स्मरण कराया कि पिछले वर्ष चक्रधर समारोह के समापन अवसर पर रायगढ़ में प्रयास विद्यालय का उद्घाटन किया गया था और आज नवगुरुकुल की स्थापना इस कड़ी को आगे बढ़ाती है। उन्होंने इस अभिनव पहल के लिए वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी, नवगुरुकुल की सह-संस्थापक सुनिधि और उनकी टीम की प्रशंसा की तथा कार्यक्रम में उपस्थित सभी बालिकाओं को बधाई देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार लगातार युवाओं के लिए रोजगार सृजन पर कार्य कर रही है। इसके साथ ही निजी क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए नई औद्योगिक नीति लागू की गई है, जिससे प्रदेश के युवाओं को व्यापक लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री साय ने विशेष रूप से नवगुरुकुल संस्था द्वारा जशपुर जिले की 150 बालिकाओं को प्लेसमेंट के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने की सराहना की और इस प्रयास को और व्यापक बनाने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि संस्था में प्रवेश पाने वाली 120 बालिकाएँ अपनी योग्यता और मेहनत का प्रमाण प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए आत्मविश्वास, ऊर्जा, जज्बा, जुनून और कठिन परिश्रम की पराकाष्ठा आवश्यक है। निराशा के लिए जीवन में कोई स्थान नहीं होना चाहिए क्योंकि निराशा के साथ कोई भी व्यक्ति प्रगति नहीं कर सकता। उप मुख्यमंत्री ने सभी बालिकाओं को निरंतर आगे बढ़ने और सफलता हासिल करने की प्रेरणा दी। वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार बनने के बाद से प्रदेश में निरंतर विकास कार्य हो रहे हैं। उन्होंने नवगुरुकुल की स्थापना को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया और कहा कि यह संस्था विशेष रूप से बहनों के लिए समर्पित होकर काम कर रही है। उन्होंने जानकारी दी कि रायगढ़ जिले में 35 करोड़ रुपये की लागत से नालंदा परिसर का निर्माण कार्य प्रगति पर है।  महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने बदलती तकनीक और समय की जरूरतों के अनुरूप छात्राओं को शिक्षा प्राप्त कर जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। नवगुरुकुल की सह-संस्थापक सुनिधि ने गुरुकुल की शिक्षा प्रक्रिया और प्रशिक्षण पद्धति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य छात्राओं को न केवल तकनीकी शिक्षा देना है बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने योग्य बनाना है। शुभारंभ समारोह में पूर्व विधायक विजय अग्रवाल, गुरुपाल भल्ला, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, जिला पंचायत सीईओ जितेंद्र यादव सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित थीं। सभी ने नवगुरुकुल की स्थापना को इस क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक पहल बताते हुए इसे बालिकाओं के विकास और सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर करार दिया।

सिंचाई परियोजनाओं के रखरखाव और मरम्मत पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता– मुख्यमंत्री साय

रायपुर : लुत्ती बांध के टूटने पर जताई गहरी नाराज़गी, इस तरह की गलती नहीं की जाएगी बर्दाश्त – मुख्यमंत्री साय सिंचाई परियोजनाओं के रखरखाव और मरम्मत पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता– मुख्यमंत्री साय मैदानी अधिकारी–कर्मचारी फील्ड में जाकर बांधों एवं संबंधित संरचनाओं का करें सतत निरीक्षण– मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की जल संसाधन विभाग के कामकाज की समीक्षा रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बलरामपुर–रामानुजगंज जिले में स्थित लुत्ती बांध के टूटने की घटना पर गहरी नाराज़गी व्यक्त की। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह की गलती किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साय ने नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि मैदानी अधिकारी और कर्मचारी फील्ड में जाकर नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण यह स्थिति बनी है। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सतत रूप से फील्ड में जाकर बांधों सहित अन्य संरचनाओं का निरंतर निरीक्षण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में जल संसाधन विभाग की गहन समीक्षा बैठक ली। उन्होंने सिंचाई परियोजनाओं के रखरखाव और मरम्मत पर विशेष ध्यान देने, सभी बांधों की जलभराव क्षमता, वर्तमान सिंचाई स्थिति और आगामी परियोजनाओं की प्रगति आदि के सम्बन्ध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा–निर्देश दिए। साथ ही विशेष रूप से बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 का कड़ाई से पालन करने तथा जिला प्रशासन के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए। बैठक में मुख्यमंत्री साय ने लक्षित सिंचाई क्षमता और वास्तविक सिंचाई क्षमता के बीच अंतर को कम करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेषकर बस्तर और सरगुजा संभाग की अधूरी योजनाओं को शीघ्र पूर्ण करने तथा निर्माणाधीन वृहद परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर बल दिया, ताकि किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्तमान में 04 वृहद परियोजनाएँ, 357 लघु परियोजनाएँ और 300 एनीकेट, इस प्रकार कुल 661 कार्य प्रगतिरत हैं। इसके अतिरिक्त 1036 जीर्णोद्धार कार्य भी चल रहे हैं। इस तरह कुल 1697 कार्य प्रगतिरत हैं, जिनमें लगभग ₹8966 करोड़ की राशि व्यय होगी। इस बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव रवि मित्तल, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो, प्रमुख अभियंता इंद्रजीत उईके तथा बस्तर, सरगुजा, बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग मंडलों के मुख्य अभियंता सहित जल संसाधन विभाग के अधिकारीगण उपस्थित थे।

रायपुर को बड़ी सौगात: अब बिना जोखिम के होगी नदी पार, CM विष्णुदेव साय का ऐलान

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले– अब जान जोखिम में डालकर नदी पार करने की जरूरत नहीं मुख्यमंत्री ने चार उच्च स्तरीय पुलों के निर्माण को दी मंजूरी रायपुर जशपुर जिले में आवागमन को सुरक्षित और सुगम बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय द्वारा लगातार पहल की जा रही है। जिले में सड़क, पुल-पुलियों का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने जिले में चार वृहद पुलों निर्माण के लिए कुल 13 करोड़ 46 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। जिले के गुलझरिया-बम्हनी मार्ग पर श्री नदी पर उच्च स्तरीय पुल एवं पहुँच मार्ग के निर्माण की काफी अरसे से मांग की जा रही थी। बरसात के दिनों में ग्रामीणों को नदी पार करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रीनदी पर पुल निर्माण के लिए 3 करोड़ 66 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इस पुल के निर्माण से गुलझरिया और बम्हनी के बीच बसे लगभग दर्जनभर गांवों के निवासियों का विकासखंड मुख्यालय दुलदुला तक पहुँचना सरल हो जाएगा। इससे छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच कनेक्टिविटी हेतु एक वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध हो सकेगा। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री श्री साय ने जिले में अन्य तीन पुल निर्माण की भी स्वीकृति दी है। इनमें किलकिला से केराकछार मार्ग पर बेनसारी नाला में पुल निर्माण के लिए 1.71 करोड़ रुपये, कांसाबेल से शब्दमुंडा मार्ग पर मैनी नदी में पुराने जर्जर पुल की जगह नए पुल के निर्माण के लिए 3.49 करोड़ रुपये जिला मुख्यालय जशपुर में बांकी नदी पर जर्जर पुल के स्थान पर उच्च स्तरीय नए पुल के निर्माण 4 करोड़ 60 लाख रुपये की स्वीकृति शामिल है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि किसी भी जिले के विकास का आधार बुनियादी ढांचा होता है। जशपुर जिले में पिछले दो वर्षों के दौरान इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। सड़क और पुल-पुलिया निर्माण के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया गया है। 

संपत्ति करों के युक्तियुक्तकरण के लिए उप मुख्यमंत्री ने सभी नगरीय निकायों की ली बैठक

रायपुर : विसंगतियां दूर करने संपत्ति कर सुधार अति आवश्यक : अरुण साव संपत्ति करों के युक्तियुक्तकरण के लिए उप मुख्यमंत्री ने सभी नगरीय निकायों की ली बैठक वार्षिक भाड़ा मूल्य को संपत्ति के वर्तमान मूल्यों के अनुरूप अपडेट करने के दिए निर्देश महापौर, आयुक्त, नगर पालिका और नगर पंचायत अध्यक्ष तथा सीएमओ वर्चुअल बैठक में हुए शामिल रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने आज नगरीय निकायों में संपत्ति करों के युक्तियुक्तकरण के लिए बैठक ली। मंत्रालय, महानदी भवन में आयोजित वर्चुअल बैठक में राज्य के सभी नगर निगमों के महापौर व आयुक्त तथा नगर पालिकाओं व नगर पंचायतों के अध्यक्ष और मुख्य नगर पालिका अधिकारी शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री साव के साथ नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस. और संचालक आर. एक्का भी मंत्रालय से बैठक में ऑनलाइन जुड़े। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बैठक में कहा कि नगरीय निकायों के कार्यों से प्रदेश की छवि निर्मित होती है। शहर में नागरिकों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराना संबंधित नगरीय निकाय की जिम्मेदारी है। उन्होंने महापौरों तथा नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के अध्यक्षों से कहा कि शहर को आगे ले जाने का जिम्मा आप पर है। शहर में संपत्ति करों के मूल्यांकन और उनमें सुधार की शुरुआत अपने कार्यालयों और अपने घरों से करें। उन्होंने कहा कि वार्षिक भाड़ा मूल्य (ARV) को वर्तमान संपत्ति मूल्यों के अनुरूप अपडेट करने से राजस्व में अच्छी बढ़ोतरी होगी। इससे कर भार सभी संपत्ति मालिकों पर समानुपातिक रूप से वितरित होगा। उन्होंने कहा कि अधिक राजस्व से निकाय वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनेंगे और उन्हें अनुदानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। बढ़े हुए राजस्व से नागरिकों को तेजी से बेहतर जनसुविधाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। उप मुख्यमंत्री साव ने नगरीय निकायों से कहा कि राज्य शासन की मंशा ई-गवर्नेंस मॉडल के माध्यम से नागरिकों को पारदर्शी और सुगम सेवाएं प्रदान करने की है। यह शहरों के चहुंमुखी विकास और त्वरित नागरिक सेवाओं के लिए जरूरी है। इससे साफ-सफाई, पानी और बिजली आपूर्ति की व्यवस्थाएं और बेहतर होंगी। साव ने बताया कि वर्ष 2016 के बाद से संपत्ति कर प्रणाली में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके चलते कई नगरीय निकायों में विसंगतियां उत्पन्न हो गई हैं। उन्होंने सभी महापौरों और अध्यक्षों से संपत्ति करों में सुधार के कार्यों को पूरी शिद्दत और गंभीरता से करने का आग्रह किया। साव ने बैठक में नगरीय निकायों को अटल परिसरों और नालंदा परिसरों के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी निर्माण कार्यों को अच्छी गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूर्ण करने को कहा। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को रोज प्रातः भ्रमण कर निर्माण और साफ-सफाई के कार्यों का निरीक्षण करने को भी कहा। उन्होंने निविदा प्रक्रिया में त्रुटि या लापरवाही पाए जाने पर संबंधितों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी। नगरीय प्रशासन विभाग की उप सचिव डॉ. रेणुका श्रीवास्तव, राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के सीईओ शशांक पाण्डेय और नगरीय प्रशासन विभाग के अपर संचालक पुलक भट्टाचार्य भी बैठक में मौजूद थे।