samacharsecretary.com

76 किलो वर्ग में स्वर्ण पदक: काजल बनीं भारत की उभरती कुश्ती स्टार, ओलंपिक पर नजर

सोनीपत हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव लाठ की रहने वाली उभरती हुई स्टार महिला पहलवान काजल ने इंटरनेशनल मंच पर एक बार फिर से सफलता का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। काजल ने मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में आयोजित इंटरनेशनल रैंकिंग रेसलिंग टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए 76 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि से जिले, प्रदेश और पूरे देश का गौरव बढ़ा है। पहलवान काजल फिलहाल सोनीपत के सेक्टर-23 में अपने चाचा पहलवान कृष्ण के पास रहकर कुश्ती की बारिकियां सीख रही हैं। वह अपनी लगातार कठिन मेहनत, अनुशासित प्रशिक्षण और खेल के प्रति गजब के समर्पण के बल पर भारतीय महिला कुश्ती की सबसे उभरती हुई स्टार्स में शुमार हो चुकी हैं। मेहनत, अनुशासन और समर्पण का मिला फल भारतीय महिला रेसलिंग टीम के पूर्व मुख्य कोच और बड़वासनी स्थित कुलदीप मलिक कुश्ती अकादमी के संचालक कुलदीप मलिक ने काजल की इस स्वर्णिम सफलता पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल स्तर पर मिला यह गोल्ड मेडल काजल की अथक मेहनत, कड़े अनुशासन और खेल के प्रति उसके अद्वितीय समर्पण का ही प्रतिफल है। वहीं, उनके कोच अजय मलिक ने काजल के खेल की तारीफ करते हुए बताया कि वह शुरू से ही बेहद मेहनती और अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित खिलाड़ी रही हैं। वह प्रतिदिन मैट पर कठिन प्रशिक्षण लेती हैं और अपनी तकनीक को लगातार बेहतर बनाने का प्रयास करती हैं। कोच अजय ने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में काजल विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक जैसे दुनिया के सबसे बड़े खेल मंचों पर भी देश के लिए पदक जीतकर इतिहास रचेगी। वर्ल्ड रेसलिंग में पहले भी जीत चुकी हैं सोना यह पहला मौका नहीं है जब काजल ने इंटरनेशनल मैट पर तिरंगा लहराया हो, उनका पुराना ट्रैक रिकॉर्ड भी बेहद शानदार रहा है। बुल्गारिया के समोकोव में आयोजित इस चैंपियनशिप में काजल ने कमाल का खेल दिखाते हुए 72 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल मुकाबले में गोल्ड मेडल जीतकर विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था। साल 2024 में आयोजित अंडर-17 विश्व चैंपियनशिप में भी काजल ने अपने भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर भारतीय रेसलिंग में अपनी बादशाहत साबित की थी। मंगोलिया में मिली इस ताजा सफलता के बाद काजल ने अपने अगले बड़े मिशन का भी खुलासा कर दिया है। काजल का अगला और मुख्य लक्ष्य वर्ष 2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है, जिसके लिए वे अभी से जी-तोड़ मेहनत में जुट गई हैं। भारत ने लंबे समय से ओलंपिक में रेसलिंग में कोई भी मेडल नहीं जीता है। भारत को इसकी लंबे समय से तलाश है।

छत्तीसगढ़ की बेटी दिव्या ने एशियन बास्केटबॉल चैंपियनशिप में रचा इतिहास

महासमुंद छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले की होनहार बेटी दिव्या रंगारी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। दिव्या व उनकी टीम ने मलेशिया में आयोजित अंडर-16 एशियन वूमेन्स बास्केटबॉल चैंपियनशिप 2025 में भारत का परचम लहराया है। चैपियनशिप में दिव्या और उसकी टीम ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए शानदार खेल का प्रदर्शन किया और इस टूर्नामेंट में 8 साल बाद भारत की वापसी कराते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया। यह पल दिव्या और उनकी टीम के लिए गौरव का पल था, जो भारत के लिए खेल रही थी। 13 से 19 सितम्बर तक मलेशिया में आयोजित इस टूर्नामेंट में 8 देशों के साथ भारत का मुकाबला हुआ। दिव्या और उसकी टीम ने पूरे दमखम के साथ खेलकर भारत को विजयी दिलाई। भारत की ओर से खेलने वाली खिलाड़ियों में महासमुंद की दिव्या रंगारी छत्तीसगढ़ की मात्र अकेली खिलाड़ी थी। FIFA बास्केटबॉल टूर्नामेंट चैंपियनशिप में भारत को गोल्ड मेडल दिलाने के बाद महासमुंद लौटी दिव्या का भव्य स्वागत हुआ। पूरे शहरवासी, खेल प्रेमी, जनप्रतिनिधि, समाज सेवी और विभिन्न समुदाय के लोगों ने उनका जगह-जगह भव्य स्वागत किया। रास्तेभर गाजे- बाजे की आवाज और आतिशबाजी के साथ भारत माता की जय के नारे गूंजती रही। किसी भी परिस्थिति में घबराएं नहीं, डटकर मुकाबला करें : दिव्या लोगों ने फूल माला और मिठाई के साथ दिव्या का स्वागत किया। सभी ने दिव्या से मुलाकात कर उसके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए शुभकामनाएं दी। इस दौरान दिव्या ने कठिनाइयों में पीछे हट जाने वाले खिलाड़ियों को संदेश देते हुए कहा कि हर परिस्थितियों में घबराकर मैदान छोड़ने की जरूरत नहीं है बल्कि वहां डटे रहकर मुकाबला करने से ही जीत मिलती है। दिव्या ने अपने इस सफलता का श्रेय अपने कोच, अपने माता-पिता और बास्केटबॉल संघ के सदस्यों को दिया है। उनके परिजन भी दिव्या की इस सफलता पर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। पिता ने कहा – बेटी ने दिलाई पहचान दिव्या के पिता का कहना है कि जो लोग मुझे जानते नहीं थे, वे आज मुझे अपनी बेटी के नाम से पहचानने लगे हैं। एक पिता के लिए इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है। बास्केटबॉल संघ ने भी दिव्या के इस सफलता पर खुशी जाहिर की और आने वाले समय में हर खिलाड़ी के लिए एक बेहतर प्लेटफॉर्म तैयार करने की बात कही।