samacharsecretary.com

महिला आयोग चेयरपर्सन ने आटा न गूंथ पाने पर खाए ताने’

यमुना नगर. 'मैं 17 वर्ष की थी। जब मेरी शादी हो गई। बाल विवाह वाले इसे नोट न करें, क्योंकि उस समय परिस्थितियां ऐसी थी। मेरे माता-पिता की मौत हो गई थी। ताऊ को मेरी शादी करनी थी। जब मैं ससुराल में गई तो कुछ मेहमान आए हुए थे। मुझे उनके लिए रोटियां बनानी थी लेकिन मुझसे आटा नहीं गूथा गया। यह देखकर सास ने मेरी परेशानी समझी और आटा तैयार किया। उन्होंने आटा न गूथने पर मुझे ताना नहीं दिया।' यह कहना है हरियाणा राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणू भाटिया का। वह सोमवार को महाराजा अग्रसेन कालेज में टूटते रिश्ते जोड़ते संवाद कार्यक्रम में पहुंची। बिगड़ रहे वैवाहिक संबंधों को सुधारने की दिशा में हरियाणा राज्य महिला आयोग की ओर से टूटते रिश्ते जोड़ते संवाद जागरूकता कार्यक्रम की शुरूआत यमुनानगर से की गई है। उन्हें आज के समय में वैवाहिक संबंधों को बिगड़ने से रोकने के लिए संवाद करने के बारे में जागरूक करना रहा। यहां पर आयोग की चेयरमैन रेणू भाटिया, डीसी प्रीती, एसपी कमलदीप गोयल व अन्य वक्ताओं ने लोगों से संवाद किया। रेणू भाटिया ने मंच से एक गाना बजवाकर डांस भी किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 से अब तक 14 हजार केस पारिवारिक विवाद के सुने हैं।

महिला आयोग का चेयरपर्सन पद खाली, मध्यप्रदेश में 26 हजार मामले पेंडिंग

भोपाल  मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग में करीब 26 हजार मामले पेंडिंग होने के बावजूद आयोग के अध्यक्ष का पद करीब 6 साल से खाली पड़ा है. राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि इस पद से संबंधित मामला अदालत में लंबित है और उन्होंने आश्वासन दिया कि वह जल्द ही इस पद को भरने के लिए कदम उठाएंगी.  मध्य प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर  सरकार ने हाल ही में विधानसभा के मानसून सत्र में कहा कि 1 जनवरी, 2024 से इस वर्ष 20 जून के बीच राज्य में बलात्कार के 10 हजार 840 मामले दर्ज किए गए, जबकि 21 हजार 175 महिलाएं एक महीने से अधिक समय तक लापता रहीं.  आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में हर दिन बलात्कार के लगभग 20 और महिलाओं के लापता होने के 38 मामले दर्ज किए जा रहे हैं. मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग सात सदस्यीय पैनल है, जिसमें छह सदस्य सरकार से बाहर के होते हैं और एक सरकार द्वारा नियुक्त होता है. इसके अध्यक्ष का पद जनवरी 2019 से रिक्त है.सागर की वर्तमान लोकसभा सदस्य लता वानखेड़े 1 जनवरी 2016 से 2019 तक इसकी अध्यक्ष थीं.  इसके बाद यह पद लगभग एक साल तक रिक्त रहा और 16 मार्च 2020 को कमलनाथ के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार ने कांग्रेस नेता शोभा ओझा को पैनल का अध्यक्ष नियुक्त किया. हालांकि, चार दिन बाद, 20 मार्च 2020 को कमलनाथ सरकार गिर गई. बाद में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली BJP सरकार ने आयोग के अध्यक्ष के रूप में ओझा की नियुक्ति रद्द कर दी. इसके बाद शोभा ने इस फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया. हाई कोर्ट ने 22 मई 2020 को अपने आदेश में पद के मामले में यथास्थिति बनाए रखने को कहा. ओझा ने बाद में जून 2022 में तत्कालीन भाजपा सरकार पर उन्हें काम नहीं करने देने और बाधाएं पैदा करने का आरोप लगाते हुए पद से इस्तीफा दे दिया. न्यूज एजेंसी से बात करते हुए मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा, "राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष का पद निश्चित रूप से लंबे समय से खाली है और मैं इसे जल्द से जल्द भरने के लिए आवश्यक कदम उठाऊंगी."  उन्होंने यह भी कहा कि पद से संबंधित मामला अदालत में लंबित है, जो इस कदम में एक बाधा है. भूरिया ने स्वीकार किया कि पद खाली रहने के कारण कई शिकायतें लंबित हैं और फैसलों में देरी हो रही है. ओझा ने राज्य की भाजपा सरकार पर महिलाओं के प्रति असंवेदनशील होने का आरोप लगाया. उन्होंने आरोप लगाया, "इतने लंबे समय से खाली पड़ा यह महत्वपूर्ण पद दर्शाता है कि यह सरकार महिलाओं के प्रति कितनी असंवेदनशील है." उन्होंने दावा किया, "महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में मध्य प्रदेश शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है. आज भी महिलाएं मेरे पास शिकायत लेकर आती हैं और मैं व्यक्तिगत रूप से उनकी हर संभव मदद करती हूं."