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Jhajjar की रुपांशी का कमाल, अंडर-17 नेशनल रेसलिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर बढ़ाया मान

झज्जर. एक साधारण हलवाई की बेटी ने उत्तर प्रदेश के गोंडा में आयोजित अंडर-17 राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे जिले का नाम चमका दिया है। सिलाना गांव की बेटी रुपांशी (इशु) ने 53 किलोग्राम भारवर्ग के फ्री स्टाइल मुकाबले में देश के शीर्ष पहलवानों को धूल चटाते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। राष्ट्रीय स्तर पर इस शानदार उपलब्धि के बाद गांव पहुंचने पर रुपांशी सिलाना का ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ जोरदार नागरिक अभिनंदन किया गया। शौक से शुरू हुआ सफर, अब देश को मेडल दिलाने की जिद : चैंपियन पहलवान रुपांशी ने बातचीत के दौरान बताया कि उनके गांव में जब अखाड़ा खुला था, तो वह महज 9 साल की उम्र में शौक-शौक में वहां चली गई थीं। शुरुआत में वह अखाड़े में अकेली लड़की थी, जिसे देखकर लोग कुछ संकोच भी था, लेकिन उनके माता-पिता सहित परिवार ने अपनी बेटी के सपनों को टूटने नहीं दिया। रुपांशी ने कहा, शुरुआत में न्यूं तो कवै थे कि लड़की कुश्ती करेगी, पर मेरे पापा और मम्मी हमेशा मेरे साथ खड़े रहे। आज बहुत खुशी हो रही है, जब मैं गोल्ड मेडल जीतकर आई, तो सारा गाम मेरे स्वागत में खड़ा था। इससे पहले रुपांशी रोहतक में हुई स्टेट चैंपियनशिप में तीसरा स्थान हासिल कर चुकी हैं। पिता बनाते हैं मिठाई, बेटी ने कुश्ती में घोली मिठास रुपांशी के परिवार की पृष्ठभूमि बेहद साधारण है। उनके पिता तिलक राज गांव में ही हलवाई का काम करते हैं और मां घरेलू महिला हैं। दो बहनों और एक बड़े भाई में सबसे छोटी रुपांशी ने अपनी खेल प्रतिभा से साबित कर दिया कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं। रुपांशी का बड़ा भाई भी खेल में रुचि रखता है। खेल के साथ-साथ पढ़ाई को तरजीह देते हुए रुपांशी ने हाल ही में 12वीं कक्षा की परीक्षा भी 60 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की है। कड़ी मेहनत और ठेठ हरियाणवी डाइट का कमाल : रुपांशी रोजाना सुबह और शाम 3-3 घंटे अखाड़े में कड़ा अभ्यास करती हैं। अपनी डाइट को लेकर बताया कि वह पूरी तरह से पारंपरिक और पौष्टिक आहार पर निर्भर हैं, जिसमें दूध, दही, घी, चूरमा और खीर मुख्य रूप से शामिल हैं। अभ्यास के ठीक बाद वह नियमित रूप से बादाम रगड़ा पीती हैं। अब रुपांशी का अगला लक्ष्य 14 जून को होने वाली एशियाई चैंपियनशिप के ट्रायल को पास करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतना है। गुरुओं की मेहनत और ग्रामीणों का मिला भरपूर आशीर्वाद रुपांशी ने अपनी सफलता का श्रेय कोच अमित कुमार को दिया, जिन्होंने सिलाना अखाड़े में उनकी प्रतिभा को निखारा। इसके साथ ही खलीफा पहलवान कली राम, पहलवान कदम कोच और पहलवान राजबीर उर्फ सांडा आदि खलीफाओं के मार्गदर्शन ने मैट पर मजबूत बनाया। गांव आगमन पर आयोजित ''प्रतिभा सम्मान समारोह'' के दौरान सरपंच राकेश कुमार, पूर्व पार्षद हरेंद्र सिलाना, जोहरी पहलवान, पूर्व सरपंच सूरज मल, धर्मबीर, आजाद सिंह, साहब सिंह, रामफल सिंह, लीलू राम और धर्मेंद्र पहलवान, नरेश सहित भारी संख्या में खेल प्रेमियों ने बेटी को आशीर्वाद दिया और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

अंडर-17 कुश्ती में मध्यप्रदेश का जलवा, युवा पहलवानों ने बढ़ाया प्रदेश का मान

अंडर-17 कुश्ती में छाया मध्यप्रदेश,युवा पहलवानों ने बढ़ाया प्रदेश का मान सब-जूनियर राज्य कुश्ती चैम्पियनशिप में खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन, कई स्वर्ण पदक किए अपने नाम भोपाल  12–13 अप्रैल को सागर (मध्यप्रदेश) में आयोजित अंडर-17 सब-जूनियर राज्य कुश्ती चैम्पियनशिप में मध्यप्रदेश के युवा पहलवानों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई पदक अपने नाम किए। फ्रीस्टाइल और ग्रीको रोमन वर्ग में बालक एवं बालिका खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया। प्रतियोगिता में खिलाड़ियों ने दमदार तकनीक, फिटनेस और अनुशासन का परिचय देते हुए स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक हासिल किए। स्वर्णिम जीत के सितारे मुकाबलों में गगन ग्वाला (-51 किग्रा), वेदाग्य जोशी (-80 किग्रा), भूमि खत्री (-43 किग्रा), निशा माली (-61 किग्रा) और अनुष्का बोरासी (-65 किग्रा) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किए। इन खिलाड़ियों ने आत्मविश्वास और तकनीकी दक्षता के साथ हर चुनौती को पार किया। रजत में भी दमदार प्रदर्शन यशाश्वी भाटी (-53 किग्रा) ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार मुकाबले लड़े और रजत पदक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। कांस्य पदकों की मजबूत मौजूदगी घेना मोदी (-46 किग्रा), प्राची कमारिया (-53 किग्रा), अंशु पटेल (-61 किग्रा), आलोक प्रजापति (-55 किग्रा) और रोहित तोमर (-48 किग्रा) ने कांस्य पदक जीतकर प्रदेश की पदक तालिका को और मजबूत किया। जज्बा, जुनून और जीत का संगम पूरे टूर्नामेंट में खिलाड़ियों ने जिस ऊर्जा, रणनीति और खेल भावना का प्रदर्शन किया, वह दर्शाता है कि मध्यप्रदेश में कुश्ती का भविष्य बेहद उज्ज्वल है। हर मुकाबला संघर्ष, साहस और जीत की कहानी कहता नजर आया। खेल मंत्री श्री सारंग ने दी बधाई मध्यप्रदेश के सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने सभी पदक विजेता खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि खिलाड़ियों की मेहनत, प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और राज्य में विकसित हो रही खेल संरचना का परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी बेहतर प्रदर्शन करेंगे। प्रदेश में कुश्ती को मिल रही नई पहचान लगातार मिल रही इन सफलताओं से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश में कुश्ती खेल तेजी से विकसित हो रहा है। राज्य में उपलब्ध प्रशिक्षण सुविधाएं, अकादमियों का सहयोग और प्रतियोगिताओं में बढ़ती भागीदारी खिलाड़ियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक साबित हो रही हैं। प्रशिक्षण और मेहनत बनी सफलता की कुंजी राज्य की खेल अकादमियों और प्रशिक्षण केंद्रों में खिलाड़ियों को आधुनिक तकनीक, फिटनेस और अनुभवी कोचिंग का लाभ मिल रहा है। यही कारण है कि प्रदेश के खिलाड़ी लगातार राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। यह सफलता युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और उन्हें खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती है। 

एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप: अमन सहरावत और मुकुल दहिया को फाइनल में हार, भारत को दो रजत

बिश्केक भारतीय पहलवान अमन सहरावत और मुकुल दहिया एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में अपना-अपना फाइनल मुकाबला हार गए और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। ओलंपिक पदक विजेता अमन सहरावत को एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक से संतोष करना पड़ा, जबकि मुकुल दहिया भी रविवार को अपना फाइनल हार गए जिससे भारत ने 17 पदक (दो स्वर्ण सहित) से अपने अभियान का समापन किया। भारत ने कुल दो स्वर्ण, छह रजत और नौ कांस्य पदक जीते। दोनों ही मुक्केबाज फाइनल में हारे गैर ओलंपिक पुरुषों के फ्रीस्टाइल 61 किग्रा वर्ग में मुकाबला करते हुए अमन को फाइनल में कोरिया के क्वांग म्योंग किम के हाथों 10-13 से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद पुरुषों के 86 किग्रा फ्रीस्टाइल फाइनल में मुकुल को ईरान के कामरान जी घासेमपोर के हाथों 0-7 से हार मिली जिससे उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। फिर दिनेश ने 125 किग्रा वर्ग में किर्गिस्तान के अर्स्लानबेक तुरदुबेकोव पर तकनीकी श्रेष्ठता (12-1) से जीत दर्ज करते हुए अपना कांस्य प्लेऑफ मुकाबला जीत लिया। टीम रैंकिंग में ईरान 178 अंकों के साथ शीर्ष पर रहा, जबकि भारत 162 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा और जापान 127 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।