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यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने की तैयारी तेज, अधिकारियों को 2027 तक काम पूरा करने के निर्देश

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने यमुना नदी की स्वच्छता और जल गुणवत्ता में सुधार के लिए बड़े स्तर पर चल रहे प्रोजेक्ट्स को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। राज्य के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने मंगलवार को संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि यमुना एक्शन प्लान के तहत चल रहे और प्रस्तावित सभी सीवेज ट्रीटमेंट, औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन तथा प्रदूषण नियंत्रण परियोजनाओं को 31 दिसंबर 2027 तक हर हाल में पूरा किया जाए। उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए रस्तोगी ने कहा कि राज्य सरकार यमुना और उसकी सहायक नालियों के प्रदूषण को कम करने तथा पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है। अधिकारियों को दिए निर्देश उन्होंने अधिकारियों को परियोजनाओं की समय-सीमा का सख्ती से पालन करने और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि 425 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) से अधिक सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता और 150 एमएलडी से अधिक औद्योगिक अपशिष्ट उपचार क्षमता बढ़ाने वाली कई परियोजनाएं मंजूरी, टेंडरिंग और निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से यमुना में प्रदूषित जल के प्रवाह को काफी हद तक रोका जा सकेगा। क्या है सरकार की योजना     31 दिसंबर 2027 तक सभी यमुना एक्शन प्लान परियोजनाएं पूरी करने का लक्ष्य।     425 एमएलडी से अधिक नई सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता जोड़ी जाएगी।     150 एमएलडी से अधिक औद्योगिक अपशिष्ट उपचार क्षमता विकसित होगी।     पानीपत, करनाल और सोनीपत में कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम जारी।     यमुना और सहायक नालियों में प्रदूषण कम करने पर सरकार का फोकस। कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा समीक्षा के दौरान कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा की गई। इनमें पानीपत के जट्टल रोड स्थित 10 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का उन्नयन, करनाल के ग्रामीण क्षेत्रों में छह माइक्रो-एसटीपी की स्थापना, सोनीपत के नाथूपुर और कुंडली में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की योजना तथा रथधना एसटीपी के विस्तार की परियोजना शामिल हैं। इसके अलावा मुंगेशपुर नाले से निकलने वाले अपशिष्ट जल के उपचार के उपायों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि यमुना की सफाई केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सतत विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने अधिकारियों से परियोजनाओं की नियमित निगरानी और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा।

यमुना पर तीन प्रमुख बांध प्रोजेक्ट्स को मिली गति, केंद्र का फैसला दिल्ली के जलसंकट को सुलझाएगा

लखनऊ  कई दशकों से ठंडे बस्ते में पड़े यमुना और उसकी सहायक नदियों पर प्रस्तावित तीन बड़े बांध प्रोजेक्ट अब फिर से रफ्तार पकड़ने जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने लखवार, रेणुकाजी और किशाऊ बांध परियोजनाओं की समीक्षा कर इन्हें पुनर्जीवित करने का फैसला लिया है। अधिकारियों के अनुसार, इन परियोजनाओं के पूरा होने से यमुना नदी में जल प्रवाह बेहतर होगा और राजधानी दिल्ली की पीने के पानी की जरूरतें अगले 25 वर्षों तक पूरी की जा सकेंगी। इन परियोजनाओं को लेकर हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और जल मंत्री प्रवेश वर्मा के साथ बैठक हुई थी। बैठक में यमुना के पुनर्जीवन और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में टिकाऊ जल उपलब्धता सुनिश्चित करने की व्यापक रणनीति पर चर्चा की गई। अधिकारियों का कहना है कि इन तीनों बांधों से मिलने वाला पानी दिल्ली की दीर्घकालिक जल समस्या का समाधान बन सकता है। दिल्ली में पानी की कमी, बढ़ती मांग वर्तमान में दिल्ली में औसतन 900 मिलियन गैलन प्रतिदिन (MGD) पानी का उत्पादन होता है, जबकि कुल मांग 1,113 MGD है। इसका मतलब है कि राजधानी को करीब 200 MGD पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, दिल्ली के कम से कम 10 प्रतिशत घरों में आज भी पाइप से पानी की नियमित आपूर्ति नहीं हो पा रही है। दिल्ली को कितना पानी मिलेगा      परियोजनाएं पूरी होने के बाद दिल्ली को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।     लखवार बांध से दिल्ली को लगभग 135 MGD पानी मिलेगा।     रेणुकाजी परियोजना से 275 MGD पानी मिलने की संभावना है।     किशाऊ परियोजना से 372 MGD पानी दिल्ली को उपलब्ध कराया जा सकेगा। इन तीनों परियोजनाओं से कुल मिलाकर पानी की आपूर्ति बढ़ेगी, जिससे मौसमी और अनियमित जल स्रोतों पर निर्भरता कम होगी। अधिकारियों के अनुसार, अगले 5 से 7 वर्षों में इन परियोजनाओं से दिल्ली को पानी मिलना शुरू हो सकता है। पर्यावरणीय प्रवाह (ई-फ्लो) में सुधार इन बांधों से केवल पानी की मात्रा ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि यमुना में ई-फ्लो (पर्यावरणीय प्रवाह) भी सुधरेगा। ई-फ्लो का मतलब नदी में पानी की वह मात्रा, समय और गुणवत्ता है, जो स्वस्थ जलीय पारिस्थितिकी तंत्र और उस पर निर्भर मानव जीवन के लिए जरूरी होती है। अतिरिक्त 1,000 क्यूसेक पानी मिलने से यमुना की जल गुणवत्ता और प्रवाह की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है। परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति     लखवार परियोजना (उत्तराखंड): अब तक करीब 12.6 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसे 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।     रेणुकाजी परियोजना (हिमाचल प्रदेश): यह फिलहाल टेंडर प्रक्रिया के चरण में है और इसके 2032 तक पूरा होने की उम्मीद है।     किशाऊ परियोजना (उत्तराखंड–हिमाचल सीमा): यह अभी अंतरराज्यीय समझौते और मंजूरी के चरण में है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2033 रखा गया है। कई राज्यों को होगा फायदा इन परियोजनाओं से केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को भी लाभ मिलेगा। जल बंटवारा राज्यों की लागत भागीदारी के आधार पर किया जाएगा। इसके अलावा, इन बांधों से 760 मेगावाट से अधिक जलविद्युत उत्पादन की क्षमता भी विकसित की जाएगी। पहले क्यों रुकी थीं परियोजनाएं अधिकारियों के मुताबिक, इन परियोजनाओं के लंबे समय तक अटके रहने के पीछे कई कारण रहे:-     फंड की कमी     राज्यों के बीच विवाद     पर्यावरण और वन संबंधी मंजूरियों में देरी अब केंद्र सरकार के सक्रिय हस्तक्षेप के बाद इन बाधाओं को दूर करने की कोशिश की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये तीनों परियोजनाएं तय समयसीमा में पूरी हो जाती हैं, तो न केवल दिल्ली की जल आपूर्ति मजबूत होगी, बल्कि यमुना नदी के पुनर्जीवन की दिशा में भी यह एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।