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किसानों को सीएम योगी का बड़ा तोहफा, अब कम ब्याज दर पर मिलेगा कृषि ऋण

लखनऊ  सीएम योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के लघु और सीमांत किसानों को बड़ी खुशखबरी दी है। रविवार को लखनऊ में युवा सहकार सम्मेलन और यूपी को ऑपरेटिव एक्सपो 2025 के उद्घाटन के मौके पर सीएम योगी ने कहा कि इस महत्वपूर्ण अवसर पर सरकार किसानों के लिए एक नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक (एलडीबी) के जरिए मिलने वाले लोन के ब्याज की दर को कम किया जाएगा। हम चाहते हैं कि यह लोन सिर्फ छह प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाए। राज्य सरकार इसमें सहयोग करेगी।   कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पी प्रभु बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। सीएम योगी की इस घोषणा को अन्नदाता किसानों के हित में उठाया गया बड़ा कदम बताया जा रहा है। इससे प्रदेश के लघु और सीमांत किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश के अंदर उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक LDB से लोन का रेट अभी करीब साढ़े 11 प्रतिशत है। किसान को बहुत ब्याज देना पड़ता है। हम लोग इसको कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। राज्य सरकार इसमें योगदान देगी। लघु और सीमांत किसानों को 'मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना' के अंतर्गत हम 6% की ब्याज दर पर LDB के माध्यम से ऋण उपलब्ध करवाएंगे। सीएम योगी ने कहा कि बलरामपुर में एक नए जिला कोआपरेटिव बैंक के गठन की कार्रवाई आगे बढ चुकी है। 2024-25 में 162 करोड़ 2 लाख रुपए का लाभ भी हमारे कोआपरेटिव बैंक ने कमाया है। अब हम इसमें तेजी के साथ काम कर रहे हैं। विपक्ष और पूर्ववर्ती सरकारों पर हमला बोलते हुए सीएम योगी ने कहा कि पिछली सरकारें वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया पालती थीं। पिछली सरकारों के माफिया राज के कारण कोआपरेटिव क्षेत्र बर्बाद हो गया था। किसानों की हजारों करोड़ पूंजी फंस गई थी। हम लोगों धीरे-धीरे करके किसानों का पैसा वापस कराया। आज वो पैसा भी वापस है। बैंक भी आगे बढ़ रहा है। अब हम वन डिस्ट्रिक्ट वन कोआपरेटिव बैंक की दिशा में बैंक आगे बढ़ रहा है। सीएम योगी ने कहा कि हम लोगों ने प्रयास किया है कि प्रदेश के अंदर जितना भी फर्टिलाइजर, केमिकल और पेस्टिसाइड का वितरण होता है। इसमें से कम से कम आधा को-ऑपरेटिव से जुड़े हुए एम-पैक्स के माध्यम से वितरित हो। सहकारिता की उपलब्धियों पर पुस्तक का विमोचन सीएम योगी ने इस मौके पर सहकारिता विभाग की उपलब्धियों एवं नवाचार पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया। इसके साथ ही सहकारिता के सर्वांगीण विकास हेतु कार्य करने वाले जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और ​विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित भी किया।  

यीडा का बड़ा अभियान, 4.6 हेक्टेयर (46,000 वर्ग मीटर) भूमि पर से हटाया अवैध कब्जा

मुख्यमंत्री के निर्देश पर औद्योगिक विकास और अवसंरचनात्मक परियोजनाओं को गति देने के लिए जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराने की चल रही मुहिम नोएडा  यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप बुधवार को ग्राम दनकौर (तहसील सदर, गौतम बुद्ध नगर) में अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। खसरा नंबर 211 पर फैली 4.6 हेक्टेयर यानी लगभग 46,000 वर्ग मीटर बहुमूल्य सरकारी/प्राधिकरण की भूमि को पूर्णतः अतिक्रमण मुक्त करा लिया गया। इस भूमि का अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 500 करोड़ रुपये बताया गया है। यीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के विशेष कार्य अधिकारी शैलेंद्र सिंह के नेतृत्व में संपन्न हुई कार्रवाई के दौरान मौके पर जेसीबी मशीनों के साथ पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा।  अवैध निर्माण का पूरी तरह ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान प्राधिकरण की भूमि पर अवैध रूप से बनाई गई टीनशेड, कच्ची-पक्की दीवारें, झोपड़ियां, स्थायी-अस्थायी निर्माण को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। इससे यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक एवं शहरी विकास के लिए आरक्षित भूमि पूरी तरह मुक्त हो गई है। शैलेंद्र सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यीडा क्षेत्र में विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्राधिकरण की किसी भी भूमि पर अवैध कब्जा बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में ऐसा करने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और लागत वसूली के साथ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज होगा। विकास परियोजनाओं को मिलेगी गति शैलेंद्र सिंह ने कहा कि दनकौर में 46,000 वर्ग मीटर से अधिक भूमि, जिसकी कीमत लगभग 500 करोड़ रुपये है, को अतिक्रमण से मुक्त कराना यीडा के संकल्प का प्रतीक है। यह कार्रवाई स्पष्ट करती है कि योगी सरकार प्रदेश में औद्योगिक निवेश, अवसंरचना विस्तार और पारदर्शी प्रशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि यमुना एक्सप्रेस-वे तथा ईस्टर्न पेरिफेरल के इंटरचेंज के किसानों के 7% आबादी भूमि एवं यीडा क्षेत्र में विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए सरकारी व प्राधिकरण की समस्त भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना प्राथमिकता है।

तीन चरणों में मिलेगी नेवर पेड और लॉन्ग अनपेड उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

ब्याज पर 100% और मूलधन पर 25% तक की छूट आगरा के 1.60 लाख उपभोक्ताओं का 501 करोड़ रुपए बकाया होगा माफ आगरा उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने विद्युत उपभोक्ताओं को एक बड़ी सौगात देते हुए "बिजली बिल राहत योजना 2025- 26" को लागू करने का निर्णय लिया है। यह योजना 01 दिसंबर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में लागू रहेगी और इसका उद्देश्य लंबित बिल वाले नेवर पेड और लॉन्ग अनपेड उपभोक्ताओं को बकाये से मुक्ति दिलाना है। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) में लागू हो रही इस एक मुश्त समाधान योजना (ओटीएस) के तहत, 2 किलोवॉट तक के घरेलू (एलएमवी-1) और 01 किलोवॉट तक के वाणिज्यिक  (एलएमवी-2) उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। डीवीवीएनएल के मुख्य अभियंता कपिल सिंधवानी ने बताया कि इस योजना के माध्यम से केवल दक्षिणांचल में ही लगभग 501 करोड़ रुपये का बकाया माफ होने का अनुमान है, जो 1.60 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को सीधा लाभ पहुँचाएगा। आगरा देहात के 1.60 लाख उपभोक्ता होंगे लाभान्वित   मुख्य अभियंता कपिल सिंधवानी ने बताया कि आगरा देहात में 24,300 नेवर पेड घरेलू उपभोक्ता और 1,35,725 लॉन्ग अनपेड घरेलू उपभोक्ता (जिन्होंने 31 मार्च 2025 तक बिल जमा नहीं किया) हैं। उन्होंने योजना की छूट का विवरण देते हुए कहा कि पहली बार तीन चरणों की इस योजना में, नेवर पेड व लॉन्ग अनपेड बिजली उपभोक्ताओं को ब्याज पर 100 फीसदी और मूलधन पर 25 फीसदी तक की छूट प्रदान की जाएगी।  उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रथम चरण (01 से 31 दिसंबर 2025) में पंजीकरण कराकर 30 दिन में पूरा भुगतान करने पर ब्याज में 100% और मूल बकाए में 25% की छूट मिलेगी। द्वितीय चरण में मूलधन में छूट का दायरा 20% और तृतीय चरण में यह 15% रहेगा। किस्त भुगतान पर भी मिलेगी राहत किस्त में भुगतान का विकल्प चुनने वाले उपभोक्ताओं के लिए भी राहत है। मुख्य अभियंता ने बताया कि मासिक 500 या 750 रुपए की किस्त व नियमित बिल का भुगतान करने पर ब्याज में 100% छूट रहेगी। साथ ही, मूल बकाये में भी 5% से 10% तक की छूट मिलेगी। हालांकि, तीन बार किस्त बाउंस होने पर उपभोक्ता योजना से अयोग्य हो जाएगा। जन-जन तक पहुँचें योजना का लाभ, होगा व्यापक प्रचार- प्रसार योजना को जन-जन तक पहुँचाने के लिए योगी सरकार ने व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए हैं। सोशल मीडिया, एफएम रेडियो, प्रिंट/इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ-साथ प्रत्येक गाँव में मुनादी कराना अनिवार्य किया गया है। राजस्व संग्रह एजेंसियों को विशेष प्रोत्साहन योजना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए कलेक्शन एजेंसियों (जनसेवा केंद्र, विद्युत सखी, मीटर रीडर्स) को विशेष प्रोत्साहन देने की व्यवस्था की गई है, जिससे वे नेवर पेड उपभोक्ताओं से अधिक से अधिक वसूली कर सकें और योजना को सफल बना सकें। योगी सरकार की ऐतिहासिक 'बिजली बिल राहत योजना पर आम लोगों की राय "मैं 1.5 किलोवाट का घरेलू उपभोक्ता हूँ और लंबे समय से बिल नहीं भर पाया था। अब योगी सरकार ने जो ब्याज पूरी तरह माफ किया है और मूल में भी छूट दी है, उससे हम जैसे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। यह योजना हमारे लिए नया जीवनदान है।" -मनोज कुमार, उपभोक्ता "यह योजना केवल आर्थिक राहत नहीं है, बल्कि यह लाखों परिवारों को बिजली कनेक्शन कटने के डर से मुक्ति दिलाकर उन्हें मुख्यधारा में जोड़ेगी। योगी सरकार का यह कदम अत्यंत संवेदनशील और लोक-कल्याणकारी है, खासकर बिजली चोरी के प्रकरणों में राजस्व निर्धारण में छूट देने का प्रावधान सराहनीय है।" -समाजसेवी मुकेश कुमार गर्ग

UP में किसानों के लिए खुशखबरी: योगी सरकार ने दी 1% रिकवरी छूट, भारी फायदा राइस मिलों को भी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘नॉन-हाइब्रिड' (मोटे) धान पर एक प्रतिशत की ‘रिकवरी' छूट की मंगलवार को घोषणा की जो ‘हाइब्रिड' धान पर पहले से दी जा रही छूट के समान है। यह धान से चावल निकालने की प्रक्रिया में होने वाले अनाज की ‘रिकवरी' (उपज) पर सरकार द्वारा दी गई रियायत या छूट। इससे राज्य के करीब 15 लाख किसानों को फायदा होगा। वहीं राजकोष पर 166 करोड़ रुपये का भार बढ़ेगा।  प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने यहां पत्रकारों से कहा कि जब ‘हाइब्रिड' धान से चावल निकाला जाता है तो केंद्र सरकार के मानदंडों के अनुसार ‘रिकवरी' दर 67 प्रतिशत होती है। उत्तर प्रदेश सरकार हालांकि पहले से ही ‘हाइब्रिड' धान की ‘रिकवरी' पर तीन प्रतिशत की छूट दे रही है और इस छूट पर सालाना लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च करती है। खन्ना ने कहा कि यही लाभ अब मोटे धान पर भी लागू किया जाएगा जिसमें एक प्रतिशत की ‘रिकवरी' छूट दी जाएगी।  खन्ना ने कहा, ‘‘ इस (छूट) पर 166 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इससे राज्य के लगभग 15 लाख चावल उत्पादक किसानों को लाभ होगा।'' उन्होंने कहा कि इससे मंडियों में किसानों को धान का बढ़ा हुआ भाव मिलेगा। इससे किसानों को सीधा-सीधा फायदा होगा। यह निर्णय किसान व मजदूर हित के साथ-साथ धान मिल संचालकों के भी हित में है। कुल मिलाकर इससे पूरे उद्योग को बल मिलेगा। उत्तर प्रदेश में धान की सरकारी खरीद जारी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक अक्टूबर से जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक नवंबर से यह खरीद शुरू की गई थी।   

‘वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ लक्ष्य की दिशा में बढ़ रहे कौशल मिशन के कदम

‘वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में चल रहे कौशल विकास कार्यक्रमों की प्रगति पर हुई चर्चा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं के कौशल विकास, आत्मनिर्भरता और स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता देते हुए ठोस कदम उठा रही है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर युवा अपने कौशल के बल पर रोजगार या स्वरोजगार से जुड़कर विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत के संकल्प को साकार करे। सरकार के प्रयासों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल और स्किल इंडिया मिशन को राज्य स्तर पर नई गति मिल रही है। प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन मुख्यालय, अलीगंज, लखनऊ में समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में चल रहे कौशल विकास कार्यक्रमों की प्रगति पर चर्चा हुई। अधिक से अधिक युवा आईटीआई से जोड़े जाएं मंत्री अग्रवाल ने कहा कि योगी सरकार के प्रयासों से आईटीआई से पासआउट छात्रों को देश की अग्रणी कंपनियों में बेहतर प्लेसमेंट मिल रहा है, जिससे प्रदेश के युवाओं में कौशल शिक्षा को लेकर उत्साह बढ़ा है। उन्होंने निर्देश दिए कि इन सफलताओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि अधिक से अधिक युवा आईटीआई संस्थानों में प्रवेश लेकर अपनी रुचि के अनुसार कोर्स पूरा करें और रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़ सकें। छात्रों को औद्योगिक भ्रमण कराया जाए उन्होंने कहा कि हर जिले में विभिन्न उद्योगों से समन्वय स्थापित कर छात्रों का औद्योगिक भ्रमण (इंडस्ट्री विजिट) कराया जाए और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए मिशन द्वारा एक इंडस्ट्री विजिट कैलेंडर और टाइम-टेबल तैयार किया जाएगा। मंत्री अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि योगी सरकार उद्योगों को कौशल विकास मिशन और आईटीआई संस्थानों से जोड़ने के लिए ठोस पहल कर रही है, ताकि छात्रों को उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण मिल सके और रोजगार के अधिक अवसर उत्पन्न हों। उन्होंने स्किल मित्र पोर्टल पर छात्रों की प्लेसमेंट स्थिति अद्यतन रखने और कोर्स को इंडस्ट्री डिमांड बेस्ड बनाने के निर्देश दिए। प्रत्येक माह की 21 तारीख को प्लेसमेंट ड्राइव सरकार के निर्देशानुसार सभी नोडल आईटीआई संस्थान प्रत्येक माह की 21 तारीख को प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित करेंगे। इन ड्राइव्स में डेलॉइट इंडिया की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, जो कंपनियों की भागीदारी सुनिश्चित करेगा। अब तक Subros Ltd., Creature Industries, Dixon Technologies, Havells, Pepsico और Sona BLW जैसी प्रमुख कंपनियों में आईटीआई छात्रों का चयन और प्लेसमेंट हुआ है। इसके अलावा Gyan Dairy, Alpha Engineers (TATA Motors Ancillary), Mohannah Enterprises, Kashi Industries और Avionics Sparrow जैसी इकाइयों में औद्योगिक भ्रमण कराए गए, जिससे छात्रों को प्रत्यक्ष औद्योगिक अनुभव प्राप्त हुआ। विभिन्न संस्थाओं के साथ योगी सरकार लगातार कर रही साझेदारी  बैठक में यह भी बताया गया कि ऑटोमोटिव स्किल्स डेवलेपमेंट काउंसिल (ASDC), फर्नीचर एंड फिटिंग सेक्टर स्किल काउंसिल (FFSC) तथा ज्ञान डेयरी जैसी संस्थाओं के साथ योगी सरकार लगातार साझेदारी कर रही है। नोएडा, गोरखपुर और सहारनपुर में फर्नीचर सेक्टर के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) स्थापित करने की दिशा में कार्य तेजी से प्रगति पर है। बैठक में प्रमुख सचिव डॉ. हरि ओम, मिशन निदेशक पुलकित खरे, अपर निदेशक प्रिया सिंह, विभागीय अधिकारीगण तथा डेलॉइट इंडिया के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

UP में कृषि क्रांति की नई शुरुआत: हर जिले में बनेगा अपनी खास फसल का क्लस्टर

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि ‘कमोडिटी क्लस्टर’ दृष्टिकोण के तहत बुंदेलखंड में मूंगफली, वाराणसी में लाल मिर्च व सब्जी, बाराबंकी से आज़मगढ़ के बीच केला, कालानमक चावल, हरी मटर, उड़द और आलू आदि के क्लस्टर विकसित किए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि केले की खेती को बढ़ावा देने के लिए ‘टिशू कल्चर’ को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सेक्टोरल विशेषज्ञों की नियुक्ति पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री मंगलवार को उत्तर प्रदेश एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड रूरल एंटरप्राइज इकोसिस्टम स्ट्रेंथनिंग प्रोजेक्ट (यूपी एग्रीज) की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर, टिकाऊ और डिजिटल रूप से सशक्त बनाना शामिल है। उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य में ‘डिजिटल एग्रीकल्चर इकोसिस्टम’ के निर्माण की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाए, ताकि फसल, मौसम, बीज, सिंचाई, उर्वरक, बीमा, बाजार, लॉजिस्टिक्स और संस्थागत सेवाओं से संबंधित सभी सूचनाएं एकीकृत प्लेटफॉर्म पर रियल टाइम उपलब्ध हो सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में डिजिटल कृषि नीति तैयार की जाए, जो राष्ट्रीय तकनीकी मानकों पर आधारित हो और सुरक्षित साइबर अवसंरचना तथा नवाचार आधारित अनुसंधान को प्रोत्साहित करे। उन्होंने कहा कि बीज से लेकर बाजार तक की प्रक्रिया को समग्र दृष्टिकोण से जोड़ते हुए यह परियोजना किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने और राज्य के कृषि क्षेत्र को तकनीकी रूप से उन्नत एवं डिजिटल टिकाऊ कृषि तंत्र की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘कृषि से उद्योग तक’ की सोच के साथ कार्य करते हुए मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी जाए। निर्देश दिए कि उत्तर प्रदेश विविध कृषि सहायता परियोजना (यूपी डास्प) के समन्वयन में यूपी एग्रीज का क्रियान्वयन करते हुए कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और किसान उत्पादक संगठनों को भी परियोजना से जोड़ा जाए। बैठक में बताया गया कि यह परियोजना लगभग ₹4000 करोड़ (यूएस $500 मिलियन) की लागत से विश्व बैंक के सहयोग से छह वर्षों की अवधि के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के 28 जनपदों में लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य बदलते जलवायु परिदृश्य के अनुरूप कृषि उत्पादन में सतत वृद्धि करना और किसानों को बाजार से बेहतर रूप में जोड़ना है। परियोजना में उत्पादकता वृद्धि, संसाधनों के कुशल उपयोग, कृषि आधारित उद्योगों के विकास और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कृषि वित्तीय प्रणाली को सुदृढ़ बनाना अत्यंत आवश्यक है। इसके अंतर्गत छोटे एवं सीमांत किसानों तथा कृषि आधारित सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को ऋण सुविधा, जोखिम प्रबंधन की सुदृढ़ व्यवस्था और निजी निवेश को प्रोत्साहन पर बल दिया जाए। बैठक में बताया गया कि परियोजना से संबंधित संस्थागत तैयारियों में ठोस प्रगति हुई है। सामाजिक एवं पर्यावरणीय मूल्यांकन का कार्य पूरा हो चुका है। मॉनिटरिंग, लर्निंग एवं इवैल्यूएशन एजेंसी तथा तकनीकी सहायता एजेंसी का चयन किया जा चुका है। अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (इर्री) के साथ छह वर्षीय उत्पादकता कार्यक्रम के लिए अनुबंध स्वीकृत हो चुका है। किसान उत्पादक संगठनों की क्षमता निर्माण के लिए तकनीकी सहायता एजेंसी का चयन शीघ्र किया जाएगा, जबकि तकनीकी परामर्शी एजेंसी का चयन अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने निर्देश दिए कि परियोजना के प्रत्येक घटक के परिणामों की नियमित समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि इसका सीधा लाभ किसानों तक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यूपी एग्रीज की सतत मॉनिटरिंग के लिए आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश भी दिए।  

हर संडे अब स्कूलों में श्रमदान, यूपी सरकार की अनोखी योजना का पूरा प्लान

लखनऊ  स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में अनुशासन, जिम्मेदारी और एक दूसरे का सहयोग करने की भावना को जाग्रत करने के लिए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन को नई गति देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने अभिनव कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन और समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण के निर्देश पर प्रदेश के सभी जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों और राजकीय छात्रावासों में हर रविवार श्रमदान कार्यक्रम शुरू हो गया है। श्रमदान कार्यक्रम के तहत प्रत्येक रविवार को विद्यालय और छात्रावास परिसर की साफ-सफाई की जाएगी। टूटी हुई कुर्सियाँ, मेज और अन्य फर्नीचर की मरम्मत, पानी की टंकियों व नालियों की सफाई तथा कचरा निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आवश्यक उपकरण—झाड़ू, फावड़े, बाल्टी, तसला और कूड़ेदान—की व्यवस्था पहले से कर दी गई है। बागवानी से हरियाली को बढ़ावा बागवानी पर जोर देते हुए पेड़-पौधों की निराई-गुड़ाई, नए पौधों का रोपण और सूखे पत्तों व टहनियों से खाद बनाने का कार्य भी किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण की भावना मजबूत होगी। सदनवार जिम्मेदारी और डिजिटल मॉनिटरिंग विद्यालयों को सदनों में बाँटकर श्रमदान की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इससे विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना जागेगी और परिसर को सुंदर बनाने की प्रेरणा मिलेगी। श्रमदान कार्य की पहले और बाद की तस्वीरें निर्धारित प्रारूप में QR कोड के माध्यम से अपलोड की जाएंगी, जिससे निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।  

योगी सरकार का रबी बीजों की समय से उपलब्धता एवं वितरण पर जोर

कृषि मंत्री ने ली अधिकारियों की बैठक, दिए आवश्यक निर्देश किसानों को वितरण के लिए 25 अक्टूबर तक उपलब्ध करा दिए जाएं रबी फसलों के बीज बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में समय से मिले किसानों को बीमा का लाभ: शाही लखनऊ योगी सरकार का रबी बीजों के समय से उपलब्धता व वितरण पर जोर है। इसे देखते हुए बुधवार को कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कृषि निदेशालय में बैठक ली। उन्होंने कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं/कार्यक्रमों की भौतिक एवं वित्तीय समीक्षा बैठक की। कृषि मंत्री ने कहा कि किसान योगी शासन की प्राथमिकता में हैं। उन्नतशील बीजों का वितरण कृषकों को पूर्ण पारदर्शिता के साथ समय से अवश्य सुनिश्चित किया जाये l  कृषि मंत्री द्वारा समस्त जनपद /मंडल के अधिकारियों को निम्न निर्देश दिए गए  रबी फ़सलों (गेहूँ,जौ,चना, मटर,मसूर, सरसों, अलसी आदि) के सभी बीज दिनांक 25 अक्तूबर तक समस्त राजकीय बीज भंडारों पर कृषकों को वितरण हेतु उपलब्ध करा दिये जाएं l रबी फ़सलों के सभी अनुदानित बीजों का कृषकों को वितरण बुआई से पूर्व 25 नवम्बर तक अनिवार्य रूप से राजकीय कृषि बीज भंडारों के माध्यम से पूर्ण कर लिया जाये।  वर्तमान में बाढ़ प्रभावित/हानि वाले इलाकों में कृषकों को बीमा का लाभ समय से प्राप्त कराए जाने हेतु राजस्व, कृषि एवं बीमा के जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों की संयुक्त टीम द्वारा अविलंब पूर्ण कर प्रभावित कृषकों को तत्काल लाभ पहुंचाया जाये l रबी फ़सलों में विशेषकर दलहन (चना,मटर,मसूर आदि) एवं तिलहन (तोरिया,सरसों, राई, अलसी आदि) में फसल उत्पादकता बढ़ाए जाने के लिए जनपदीय उप कृषि निदेशक/जिला कृषि अधिकारी विशेष प्रयास करें l बैठक में कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, प्रमुख सचिव कृषि रविंद्र जी, सचिव इन्द्र विक्रम सिंह, विशेष सचिव टी.के. शीबू, ओ.पी. वर्मा, निदेशक पंकज त्रिपाठी, निदेशक सांख्यिकी सुमिता सिंह आदि की मौजूदगी रही।

योगी सरकार के प्रयासों से देश-विदेश में खुल रहे रोजगार के अवसर

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार राज्य के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार ऐतिहासिक पहल कर रही है। श्रम एवं सेवायोजन विभाग की योजनाएं जिस दूरदर्शिता से रोजगार सृजन की बहुआयामी रणनीति अपनाई है। रोजगार को लेकर प्रदेश सरकार की नीति अब सिर्फ स्थानीय नौकरियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन की शुरुआत की है।  मिशन के मुख्य उदेश्यों में राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न रोजगार के अवसरों को पता लगाना, स्किलगैप का अध्ययन कर उसको दूर कराना, रोजगार कार्यक्रम संचालित करना, कॅरियर काउन्सिलिंग कराना तथा राज्य के रोजगार के इच्छुक अभ्यर्थियों एवं अल्परोजगार युवाओं को पोस्ट प्लेसमेन्ट स्पोर्ट प्रदान करना है जिसमें घरेलू एवं विदेशी प्लेसमेन्ट के जरिए राज्य सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि हो। विदेश में नौकरी के लिए युवाओं को तैयार करने के उद्देश्य से युवाओं को प्रोफेशनल रूप से तैयार किया जायेगा तथा बाजार मांग के अनुरूप ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किये जाएंगे। जापान, जर्मनी, क्रोएशिया और यूएई में श्रमिकों की भारी मांग इस अभियान को और विस्तार देते हुए प्रदेश सरकार ने जापान, जर्मनी, क्रोएशिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से भी नर्सों, केयर गिवर्स, ड्राइवरों और निर्माण श्रमिकों की मांग प्राप्त की है। इसमें लगभग 1.50 लाख रूपये तक का वेतन मिलेगा, साथ ही खाड़ी देशों से भी विभिन्न सेक्टर की रिक्तियों की प्राप्ति सम्भावित है। श्रम विभाग इस दिशा में तेजी से कार्य कर रहा है ताकि उत्तर प्रदेश के कुशल श्रमिकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सम्मानजनक और बेहतर वेतनमान वाली नौकरियां मिल सकें। यह पहल युवाओं को विदेश जाने का सुरक्षित और कानूनी विकल्प उपलब्ध कराकर अवैध माध्यमों पर भी रोक लगाने में सहायक है। 10,830 रोजगार मेलों के माध्यम से 13,64,501 अभ्यर्थियों को निजी क्षेत्र में नौकरियां मिली रोजगार सृजन को लेकर प्रदेश सरकार की दूसरी बड़ी उपलब्धि रोजगार मेलों के माध्यम से निजी क्षेत्र में रोजगार दिलाना है। 1 अप्रैल 2017 से लेकर 30 अप्रैल 2025 तक सेवायोजन विभाग की ओर से आयोजित 10,830 रोजगार मेलों के माध्यम से 13,64,501 अभ्यर्थियों को निजी क्षेत्र में नौकरियां मिली हैं। ये मेले राज्य के विभिन्न जिलों में आयोजित किए गए, जिनमें सैकड़ों कंपनियों ने हिस्सा लिया और युवाओं को मौके पर ही चयनित कर नौकरी दी। इससे न केवल युवाओं को अवसर मिले बल्कि कंपनियों को भी प्रशिक्षित और कुशल जनशक्ति उपलब्ध हुई। इस मिशन के तहत अब तक 5,978 श्रमिकों को इज़राइल में रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है। वहीं, 1,383 और निर्माण श्रमिकों को भेजने की प्रक्रिया तेज़ी से प्रगति पर है। इस प्रयास से राज्य में न केवल विदेशी मुद्रा का आगमन बढ़ेगा, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। अनुमान है कि इजराइल भेजे गए श्रमिकों से प्रदेश को लगभग 1,000 करोड़ रुपये का रेमिटेन्स प्राप्त हो सकता है, जो ‘वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है। योगी सरकार का मानना है कि केवल नौकरी उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं, बल्कि युवाओं को सही दिशा देना भी उतना ही जरूरी है। इसी सोच के तहत सेवायोजन विभाग की ओर से अबतक 24,493 करियर काउंसलिंग कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 26,51,727 युवाओं को करियर मार्गदर्शन मिला। इन कार्यक्रमों ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है, जहां जानकारी की कमी के कारण प्रतिभाएं पीछे छूट जाती थीं। सेवामित्र पोर्टल पर 52,349 श्रमिक पंजीकृत स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार ने ‘सेवामित्र योजना’ की शुरुआत की है। इस योजना के अंतर्गत कुशल कामगारों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया गया है, जिस पर अब तक 52,349 श्रमिक पंजीकृत हो चुके हैं। ये श्रमिक प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, पेंटर, एसी मैकेनिक, ब्यूटीशियन आदि सेवाओं के लिए लोगों को घर बैठे उपलब्ध हो रहे हैं। यह योजना एक ओर जहां श्रमिकों की आय सुनिश्चित कर रही है, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल रही हैं। उत्तर प्रदेश अब केवल नौकरी ढूंढने वाला नहीं, बल्कि श्रम और प्रतिभा का निर्यात करने वाला राज्य बन रहा है। आने वाले वर्षों में यह पहल राज्य को सामाजिक और आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।  

यूपी के युवाओं के लिए खुशखबरी, योगी सरकार दे रही स्थानीय स्तर पर रोजगार का मौका

लखनऊ  योगी आदित्यनाथ सरकार प्रदेश के युवाओं को हुनरमंद बनाने के साथ ही उनकी क्षमता का भी पूरा उपयोग करने का इंतजाम कर रही है। सरकार स्किल डेवलपमेंट के साथ युवाओं को स्वावाल‍ंबी बनाने के लिए हर स्तर उनकी मदद की योजना तैयार कर चुकी है। सरकार तो अब युवाओं को उनके ही जिले में रोजगार देने की कोशिश कर रही है। पहली बार जिला स्तर पर स्थानीय उद्योगों की जरूरतों के अनुसार कौशल विकास की कार्ययोजना बनाई जा रही है। इसके तहत युवाओं को उन्हीं सेक्टरों में प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिनकी उनके जिले में सबसे अधिक मांग है। हर जिले में पांच प्रमुख सेक्टरों की पहचान की जा रही है। यह चयन स्थानीय उद्योगों की मांग, रोजगार की संभावनाएं और तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखकर होगा। हर जिले में चुने गए पांच सेक्टरों में काम कर रही पांच अग्रणी कंपनियों या औद्योगिक इकाइयों को चिन्ह्ति किया जाएगा। इनके साथ समन्वय कर युवाओं को उनकी मांग के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें उन्हीं कंपनियों में सीधे रोजगार के अवसर मिलेंगे। कौशल विकास मिशन के निदेशक पुलकित खरे ने सभी जिलों के मुख्य विकास अधिकारियों (सीडीओ) के साथ बैठक कर योजना की रूपरेखा साझा की है। योजना को अगले तीन वर्षों में चरणबद्ध रूप से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। इस दौरान जिला प्रशासन, उद्योग प्रतिनिधियों, प्रशिक्षण संस्थानों और मिशन टीम के बीच मजबूत समन्वय किया जाएगा। मुख्य विकास अधिकारियों को 26 सेक्टरों की सूची सौंपी गई है, जिनमें से उन्हें अपने जिले के लिए पांच उपयुक्त सेक्टरों का चयन करना है। कौशल विकास मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि इससे उद्योगों को स्थानीय प्रशिक्षित जनशक्ति मिलेगी, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और युवाओं को घर के पास ही नौकरी मिलेगी।