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टीबी नियंत्रण अभियान को मिलेगी रफ्तार: बिहार में आधुनिक तकनीक से होगी मरीजों की पहचान

समस्तीपुर.

जिले में 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी पूरी कर ली है। अब एआई आधारित पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन के जरिए टीबी मरीजों की तुरंत पहचान की जाएगी। इस नई तकनीक से बिना लक्षण वाले संक्रमित मरीजों का भी आसानी से पता लगाया जा सकेगा।

राज्य स्वास्थ्य समिति ने राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत 56 प्रशिक्षित एक्स-रे तकनीशियनों की तैनाती का निर्णय लिया है। इनमें दो तकनीशियन समस्तीपुर जिले के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे। जिले में समस्तीपुर और विभूतिपुर प्रखंड को इस अभियान के लिए चयनित किया गया है।

आयुष्मान आरोग्य शिविर में जांच
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार आयुष्मान आरोग्य शिविरों में संभावित टीबी मरीजों की जांच एआई तकनीक से लैस हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों से की जाएगी। राज्य में कुल 104 पोर्टेबल मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। इसके संचालन के लिए एजेंसी का चयन भी कर लिया गया है। जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. एनके चौधरी ने बताया कि अभियान का उद्देश्य टीबी संक्रमण और मृत्यु दर को कम कर देश को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में तेजी लाना है। उन्होंने कहा कि मरीजों की जल्द पहचान के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है।

अभियान में मिले 1264 नए मरीज
स्वास्थ्य विभाग ने 24 मार्च से 7 मई तक जिले में विशेष टीबी जांच अभियान चलाया था। इस दौरान 288 शिविर लगाए गए और 312 हाई रिस्क गांवों में विशेष स्क्रीनिंग अभियान संचालित किया गया। अभियान के दौरान कुल 18,803 लोगों की जांच की गई। स्क्रीनिंग में 1264 नए टीबी संक्रमित मरीजों की पहचान हुई। एआई तकनीक की मदद से पांच ऐसे मरीज भी मिले, जिनमें टीबी के कोई स्पष्ट लक्षण मौजूद नहीं थे।

कम रेडिएशन में सटीक जांच
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एआई आधारित हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन पारंपरिक मशीनों की तुलना में अधिक सुरक्षित मानी जा रही है। इस मशीन से केवल तीन से चार मिली एंपियर तक रेडिएशन निकलता है, जबकि सामान्य एक्स-रे मशीनों में लगभग 300 मिली एंपियर रेडिएशन उत्सर्जित होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कम रेडिएशन के कारण यह तकनीक मरीजों के लिए सुरक्षित है। वहीं एआई आधारित प्रणाली तेजी और सटीकता के साथ टीबी संक्रमितों की पहचान करने में सक्षम साबित हो रही है।

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