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10 मई 2026 राशिफल: जानें आज आपके करियर, प्यार और पैसे का हाल

मेष 10 मई के दिन आपके क्रिएटिव विचार किसी सीनियर या सहकर्मी को प्रभावित कर सकते हैं, खासतौर पर ग्रुप मीटिंग के दौरान। आपको बचत करने का कोई छोटा लेकिन स्मार्ट तरीका मिल सकता है, जैसे कोई डील या कोई अनावश्यक खर्च न करना। आपकी एनर्जी दूसरों को मोटिवेट करती है। वृषभ 10 मई के दिन अपने आस-पास के लोगों पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ेंगे। आप अपने साथी को कोई मजेदार कहानी सुनाकर सरप्राइज दे सकते हैं या सैर की योजना बना सकते हैं। काम ज्यादा रोमांचक रहेगा। मिथुन 10 मई के दिन आप कुछ नया करने, उत्साहित लोगों से जुड़ने या अपने विचार साझा करने के लिए उत्साहित महसूस कर सकते हैं। आपका स्वाभाव आपको मजेदार और केंद्रित दोनों तरह की गतिविधियों में मार्गदर्शन करेगा। कर्क 10 मई के दिन की शुरुआत उत्साह, सीखने, हंसने और नए अनुभवों का आनंद लेने के साथ-साथ व्यक्तिगत लक्ष्यों और दूसरों के साथ सार्थक बातचीत पर केंद्रित रहने के साथ होती है। आज का दिन खुशी और खोज की भावना लेकर आया है। सिंह 10 मई के दिन आज योजना बनाने की बहुत जरूरत महसूस होगी। आप धैर्य और व्यवस्थित रहकर छोटी-छोटी चुनौतियों को सुलझा सकते हैं। काम पर आपका ध्यान आपको प्रोजेक्ट पूरा करने में मदद करेगा। कन्या 10 मई के दिन का आनंद लेंगे। आप लंबित मुद्दों का समाधान पा सकते हैं। दोस्ती को मजबूत कर सकते हैं और अपनी प्रतिभाओं को दिखाने के लिए मोटिवेटेड महसूस कर सकते हैं। आपका संतुलित दृष्टिकोण तनावपूर्ण सिचुएशन में शांति ला सकता है। तुला 10 मई का दिन आपके लिए अपने करीबी दोस्तों से जुड़ने, अपनी सोच में रचनात्मक चिंगारी खोजने के लिए अच्छा समय है। शांत रवैया आपको विचारों को आसानी से साझा करने और पूरे दिन तनाव कम रखने में मदद करता है। वृश्चिक 10 मई के दिन आज लाइफ में रोमांस पर फोकस करें। विचारों को साझा करने और हल्के-फुल्के कार्यों की योजना बनाने में प्रसन्नता महसूस करेंगे। आप मौज-मस्ती और काम को आसानी से कर सकते हैं। छोटी-छोटी बातें मन को खुश करती हैं। धनु 10 मई के दिन संतुलित मानसिकता रखें और खुद पर भरोसा रखें। क्लियर इरादे और अपनी भावनाओं का सम्मान करके, आप आज के अवसरों को आत्मविश्वास और उद्देश्य के साथ आगे बढ़ाएंगे। ऑफिस में आपका ध्यान केंद्रित रहेगा। मकर 10 मई के दिन सेल्फ लव पर फोकस करें। ध्यान केंद्रित करने के लिए जगह चुनने से पहले सोचें। अच्छे शब्द आपके मूड को खुश कर देते हैं। आपका दिमाग आपको काम पूरा करने में मदद करता है। आसान योजनाएं शांति लाती हैं। कुंभ 10 मई के दिन खुला दिमाग रखें। आप में एनर्जी का एक उछाल देखने को मिलेगा, जो आपको प्रगति की ओर ले जाएगा। आप छिपी हुई प्रतिभाओं को उजागर कर सकते हैं, व्यक्तिगत सीमाओं को मजबूत कर सकते हैं और छोटी-छोटी जीत से मोटिवेटेड महसूस कर सकते हैं। मीन 10 मई के दिन आज आप नए विचारों और सामाजिक योजनाओं के लिए तैयार महसूस करेंगे। दोस्तों को मुद्दों को सुलझाने में मदद करें। आज शांति से सरल कार्यों के साथ मौज-मस्ती को संतुलित करें। ईमानदार लेकिन सभ्य रहें।

शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर मंथन, दो दिवसीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

भोपाल  राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन एवं उच्च शिक्षा में अकादमिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से "स्नातक स्तरीय पाठ्यक्रम निर्माण एवं चिन्हित विषयों की संदर्भ पुस्तकों की पांडुलिपियों में भारतीय ज्ञान परंपरा एवं अकादमिक गुणवत्ता परीक्षण" विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का 8 एवं 9 मई को आयोजन हुआ। उच्च शिक्षा विभाग एवं मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में भोपाल स्थित पलाश रेसिंडेसी में दो दिवसीय महत्वपूर्ण कार्यशाला में प्रदेशभर के विषय विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, अकादमिक विद्वानों एवं नीति-निर्माताओं ने सहभागिता की। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप, उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों एवं संदर्भ ग्रंथ पुस्तकों की गुणवत्ता, प्रासंगिकता तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेश पर व्यापक मंथन किया। कार्यशाला के प्रथम दिवस पर आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 केवल शैक्षणिक सुधार का दस्तावेज नहीं, बल्कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था को आत्मनिर्भर, मूल्याधारित एवं ज्ञान-केंद्रित बनाने का व्यापक दृष्टिकोण है।  सिपाहा ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए तैयार की जा रही पाठ्य सामग्री गुणवत्तापूर्ण, समकालीन तथा भारतीय संदर्भों से समृद्ध होना आवश्यक है। मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के संचालक  अशोक कड़ेल ने कहा कि अकादमिक पांडुलिपियों का गुणवत्ता परीक्षण उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस पहल को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी एवं रोजगारोन्मुखी ज्ञान-संसाधनों के निर्माण की दिशा में सार्थक प्रयास बताया। शिक्षा उत्थान न्यास समिति के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेश को राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मूल आधार बताते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, संस्कार और राष्ट्रबोध का निर्माण करना भी है। उन्होंने भारतीय चिंतन, संस्कृति एवं परंपरागत ज्ञान को पाठ्यक्रमों में समाहित करने पर बल दिया। डॉ. कोठारी ने बताया कि प्रदेश, देश का पहला राज्य है जहां राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं भारतीय ज्ञान परंपरा पर व्यापक कार्य हुआ है। उच्च शिक्षा विभाग की यह पहल अन्य राज्यों के लिए उदाहरण साबित होगी। महर्षि संस्कृत विश्वविद्यालय कैथल हरियाणा के पूर्व कुलपति डॉ. रमेश चंद्र भारद्वाज ने इस कार्यक्रम को वैश्विक स्तर का कार्यक्रम बताया। उन्होंने प्रदेश के विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं एवं महाविद्यालयों के प्राध्यापकों एवं लेखकों को धन्यवाद देते हुए उत्कृष्ट कार्य की प्रशंसा भी की। कार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र में स्नातक तृतीय वर्ष के 21 विषयों के लिए तैयार पाठ्यक्रमों एवं पांडुलिपियों का विशेषज्ञों द्वारा गहन परीक्षण किया गया। विषय विशेषज्ञों ने पाठ्य सामग्री की अकादमिक गुणवत्ता, भाषा, तथ्यात्मक शुद्धता, समसामयिकता एवं विद्यार्थियों की आवश्यकता के अनुरूप उपयोगिता पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। द्वितीय तकनीकी सत्र में डॉ. रविन्द्र कान्हेरे ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही विकसित भारत और विकसित मध्यप्रदेश की आधारशिला है। इसके उपरांत भारतीय ज्ञान परंपरा संदर्भ पुस्तक की पांडुलिपि का परीक्षण किया गया। कार्यशाला के द्वितीय दिवस में भारतीय ज्ञान परंपरा संदर्भ पुस्तक की पांडुलिपि का प्रस्तुतीकरण किया गया तथा 21 विषयों के लिए तैयार पाठ्यक्रमों के परीक्षण का शेष कार्य संपन्न हुआ। विभिन्न विषयों के अध्यक्षों द्वारा प्रस्तुतिकरण के माध्यम से पाठ्यक्रमों की विशेषताओं, उद्देश्यों एवं नवाचारों पर प्रकाश डाला गया। कार्यशाला के दौरान उच्च शिक्षा विभाग की भारतीय ज्ञान परंपरा शीर्ष समिति की बैठक भी आयोजित हुई, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित अध्ययन सामग्री, पाठ्यक्रम विकास एवं भावी कार्ययोजना पर गंभीर विमर्श किया गया। साथ ही शोध गतिविधियों एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विशेष बैठक भी आयोजित की गई। कार्यशाला के समापन अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तैयार की जा रही अध्ययन सामग्री विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन, नैतिक मूल्यों, भारतीयता एवं शोध प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करेगी। यह कार्यशाला, उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, नवाचार एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी। कार्यशाला के अंतिम चरण में "विकसित भारत-मध्यप्रदेश में शिक्षा" विषयक बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, समावेशी एवं भविष्य उन्मुख बनाने के लिए विभिन्न सुझावों पर विचार किया गया। कार्यक्रम का संचालन विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी उच्च शिक्षा डॉ. मनोज कुमार सिंह ने किया। आभार प्रदर्शन के साथ कार्यशाला का समापन हुआ।

तेंदूपत्ता संग्राहक के बेटे अजय गुप्ता बने भारतीय वन सेवा के अधिकारी

रायपुर छत्तीसगढ़ के जंगलों से निकली एक प्रतिभा ने आज देश की सर्वाेच्च सेवाओं में अपनी जगह बनाकर प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है। रायगढ जिले के सम्बलपुरी ग्राम के एक साधारण तेंदूपत्ता संग्राहक परिवार के सुपुत्र अजय गुप्ता ने अपने अटूट संकल्प से भारतीय वन सेवा (IFS) में चयनित होकर यह सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा संसाधनों की नहीं, बल्कि कड़े संघर्ष और सही मार्गदर्शन की मोहताज होती है।           रायगढ़ के संबलपुरी गांव में तेंदूपत्ता और महुआ बीनने वाला अजय गुप्ता अब IFS अधिकारी बन गया है। कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई करते हुए अजय ने पूरे देश में 91वीं रैंक हासिल की। अब वही जंगल, जो कभी परिवार की रोजी-रोटी था, उसकी जिम्मेदारी बनने जा रहा है। अजय गुप्ता ने 12वीं कक्षा में भी शानदार प्रदर्शन किया और इसके बाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में प्रवेश मिला। एनआईटी में पढ़ाई के दौरान भी उन्हें तीन वर्षों तक छात्रवृत्ति मिलती रही। अजय कहते हैं कि पहले सपने बहुत बड़े नहीं थे। लगता था कि हमारी दुनिया बस गांव तक सीमित है, लेकिन एनआईटी में एडमिशन लेने के बाद नजरिया बदल गया। पहली बार लगा कि मैं भी कुछ बड़ा कर सकता हूं। अजय कहते हैं कि जंगल उनके बचपन से ही जिंदगी का हिस्सा रहा है। जंगल ने उन्हें सिर्फ रोजगार नहीं दिया, बल्कि जीवन की दिशा भी दी। वह कहते हैं बचपन से मेरा जुड़ाव जंगल से रहा है। जंगल ने मुझे बहुत कुछ दिया है, बस्तर में काम करने के दौरान भी जंगल से रिश्ता और मजबूत हुआ। संघर्ष की जमीन से सफलता के आसमान तक          अजय का बचपन जंगलों के बीच वनोपज संग्रहण और खेती-किसानी करते हुए बीता। संघर्ष के दिनों को याद करते हुए अजय बताते हैं। माता-पिता अधिक शिक्षित नहीं थे, लेकिन उन्होंने बच्चों की शिक्षा को ही अपना लक्ष्य माना। छुट्टियों के दौरान अजय स्वयं जंगलों में जाकर तेंदूपत्ता और महुआ इकट्ठा करने में माता-पिता की मदद करते थे। अभावों के बीच भी उन्होंने 10वीं में 92.66 प्रतिशत और 12वीं में 91.40 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी योग्यता का परिचय दिया था। सरकारी योजनाओं ने पंखों को दी मजबूती अजय की इस लंबी उड़ान में छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं ने 'कैशलेस सपोर्ट' और आर्थिक संबल प्रदान किया। लघु वनोपज संघ की छात्रवृत्ति ने स्कूल से कॉलेज तक की पढ़ाई के दौरान इस छात्रवृत्ति ने आर्थिक बोझ को कम किया। राज्य शासन की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना से उन्हें निरंतर वित्तीय सहायता मिली, जिससे वे अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर सके। अजय की सफलता छत्तीसगढ़ के वनाश्रित परिवारों के अटूट विश्वास की जीत है – मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय              मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने रायगढ़ जिले के अजय गुप्ता को भारतीय वन सेवा (IFS) में चयनित होने पर बधाई देते हुए कहा कि अजय ने न केवल अपने माता-पिता का मान बढ़ाया है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है।            मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि एक ऐसा युवा जिसने स्वयं जंगलों में तेंदूपत्ता और महुआ संग्रहित किया, आज उन्हीं वनों के संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने जा रहा है। हमारी सरकार की 'लघु वनोपज संघ छात्रवृत्ति' और 'पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति' जैसी योजनाओं ने अजय जैसे प्रतिभाशाली युवाओं की राह आसान की है। अजय की उपलब्धि यह दर्शाती है कि सही अवसर मिलने पर हमारे ग्रामीण अंचल के युवा भी देश की सर्वोच्च सेवाओं में अपना स्थान सुनिश्चित कर सकते हैं। वन मंत्री ने जताया गौरव, हजारों परिवारों के सपनों का प्रतीक         वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने अजय गुप्ता को फोन कर बधाई दी और उनकी उपलब्धि को ऐतिहासिक बताया। मंत्री जी ने कहा कि अजय की सफलता छत्तीसगढ़ के उन हजारों वनाश्रित परिवारों की जीत है जो जंगलों के बीच रहकर बड़े सपने देखते हैं। यह साबित करता है कि हमारी योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि ऐसे ही सशक्त भविष्य का निर्माण करना है। युवाओं के लिए नया आदर्श          अजय गुप्ता आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं जो सीमित संसाधनों में IFS जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि मेहनत सच्ची हो और शासन का साथ मिले, तो वनांचल का कोई भी युवा देश के शीर्ष पद तक पहुँच सकता है।

मुंबई की नन्ही पर्वतारोही ग्रिहिता ने जीती छत्तीसगढ़ की सबसे ऊंची चोटी, बेटियों को किया प्रेरित

कुसमी महाराष्ट्र के मुंबई की 11 वर्षीय पर्वतारोही ग्रिहिता विचारे ने छत्तीसगढ़ की सबसे ऊंची चोटी ‘गौरलाटा पीक’ (Gaurlata peak) भी फतह कर लिया। इसके साथ ही उसने नया इतिहास रच दिया। बलरामपुर जिले के सामरी क्षेत्र अंतर्गत चांदो मार्ग पर स्थित ग्राम पंचायत ईदरीपाठ के इस दुर्गम पर्वत शिखर पर पहुंचकर ग्रिहिता ने साहस, आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया। वह ‘बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ’ का संदेश लेकर यहां पहुंची थी। चोटी फतह करने के बाद ग्रिहिता के चेहरे पर मुस्कान देखी गई। इसके पूर्व ग्रिहिता ने देश-विदेश के सर्वश्रेष्ठ चोटी पर पहुंचकर परचम लहराया है। बता दें कि बेटी बचाओ-बेटी बचाओ का संदेश लेकर निकली ग्रिहिता के पिता सचिन विचारे भी इस अभियान में शामिल रहे। ग्रिहिता के पिता ने बताया कि उसे शुरु से ही पर्वतारोहण (Gaurlata peak) करने का शौक था। उसकी लगन व जज्बा देख उन्होंने उसका पूरा सपोर्ट किया और आगे भी करते रहेंगे। कम उम्र में ही ग्रिहिता (Gaurlata peak) अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई कठिन पर्वतारोहण अभियानों को सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी हैं। इनमें एवरेस्ट बेस कैंप, अफ्रीका की माउंट किलिमंजारो तथा मलेशिया की माउंट किनाबालु जैसी प्रसिद्ध चोटियां भी शामिल हैं। सरपंच संघ के अध्यक्ष ने किया स्वागत गौरलाटा अभियान के दौरान सरपंच संघ कुसमी के अध्यक्ष संतोष इंजीनियर ने ग्रिहिता का स्वागत करते हुए उन्हें आवश्यक सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रतिभाएं देश (Gaurlata peak) और समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। इनके साहसिक अभियान युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और प्रकृति के प्रति प्रेम की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में ग्रिहिता माउंट एवरेस्ट जैसे विश्व के सर्वोच्च शिखर पर भी सफलता का परचम लहराकर देश और प्रदेश का नाम रोशन करेंगी। प्राकृतिक धरोहर को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान ग्रिहिता की इस उपलब्धि पर क्षेत्रवासियों, पर्वतारोही प्रेमियों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी हर्ष व्यक्त करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। वहीं इस अभियान को छत्तीसगढ़ के पर्वतीय पर्यटन (Gaurlata peak) और प्राकृतिक धरोहर को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

‘आज बंगाल का स्वतंत्रता दिवस है’, बांग्लादेश में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी का बयान चर्चा में

ढाका पूर्व केंद्रीय मंत्री और बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन को ‘बंगाल का स्वतंत्रता दिवस’ करार दिया। उन्होंने कहा कि राज्यभर की महिलाओं ने खुशी जाहिर की है और भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को अपना आशीर्वाद दिया है। कोलकाता में ANI से बातचीत करते हुए दिनेश त्रिवेदी ने कहा, 'आज बंगाल का स्वतंत्रता दिवस है। महिलाओं की आंखों में खुशी के आंसू इस बात का संकेत हैं कि उन्हें आजादी मिल गई है। उनका विशेष आशीर्वाद हमारे साथ है।'   उन्होंने आगे कहा, जब भारत आजाद हुआ था, तब श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जिस तरह की आजादी की कल्पना की थी, सही मायनों में आज बंगाल को वही आजादी मिली है। यही कारण है कि आज भारी संख्या में लोग सड़कों पर निकले हैं। यह भाजपा कार्यकर्ताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की कड़ी मेहनत का परिणाम है।' इससे पहले, सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जिसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 वर्षों के शासन का अंत हो गया। भाजपा के पांच नेताओं दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, क्षुदिराम टुडू और निशीथ प्रमाणिक ने भी मंत्री पद की शपथ ली। पीएम मोदी के अलावा कई राज्यों के मुख्यमंत्री रहे उपस्थित शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा और धर्मेंद्र प्रधान भी मौजूद रहे। इसके अलावा त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी सहित कई अन्य नेता समारोह में शामिल हुए। समारोह के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा के दिवंगत कार्यकर्ताओं देबासिस मंडल, सौमित्र घोषाल और आनंद पॉल के परिजनों से भी मुलाकात की। शुभेन्दु अधिकारी ने कोलकाता में आयोजित भव्य समारोह में पश्चिम बंगाल के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 207 सीटें हासिल कीं और तृणमूल कांग्रेस के 15 साल पुराने शासन का अंत कर दिया। वहीं, टीएमसी को 80 सीटों पर जीत मिली। सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 15 हजार से अधिक वोटों से हराया, साथ ही नंदीग्राम विधानसभा सीट भी बरकरार रखी।

हंता वायरस बढ़ने पर सख्ती, WHO ने जारी किए बचाव और सुरक्षा नियम

नई दिल्ली हंता वायरस को लेकर एक नई खबर आई है। अब तक हम यही जानते थे कि यह वायरस चूहों की गंदगी से फैलता है, लेकिन WHO के चीफ डॉ. टेड्रोस ने बताया है कि इसका एंडिस वायरस वाला रूप अब इंसानों के जरिए भी एक-दूसरे में फैल सकता है। MV Hondius जहाज पर इसके 8 मरीज मिले हैं, जिनमें से 3 की मौत हो चुकी है। हालात को देखते हुए WHO ने सख्त नियम बना दिए हैं ताकि इसे दुनिया में फैलने से रोका जा सके। राहत की बात बस इतनी है कि यह कोविड की तरह हवा की रफ्तार से नहीं फैलेगा, लेकिन फिर भी बहुत सावधान रहने की जरूरत है। इंसान से इंसान में फैलने वाला वायरस WHO के मुताबिक, एंडिस वायरस दुनिया का ऐसा हंता वायरस है जो एक बीमार इंसान से दूसरे स्वस्थ इंसान के शरीर में जा सकता है। अगर कोई इस वायरस से बीमार व्यक्ति के बहुत करीब रहता है या उसके संपर्क में आता है, तो उसे भी यह बीमारी हो सकती है। इस वायरस का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि शरीर में जाने के बाद इसके लक्षण दिखने में 6 हफ्ते (42 दिन) तक लग सकते हैं। यानी मरीज को खुद पता नहीं चलेगा कि वह बीमार है और वह अनजाने में दूसरों को भी संक्रमित कर सकता है। 42 दिनों तक डॉक्टर्स करेंगे मॉनिटरिंग WHO का कहना है कि जो लोग मरीजों के साथ रहे हैं, उन्हें कम से कम 42 दिनों तक डॉक्टरों की निगरानी में रहना होगा। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि इस वायरस को पनपने में लंबा समय लगता है। हालांकि, अभी आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, बस सावधानी रखकर इसकी चेन तोड़ी जा सकती है। हंता वायरस की शुरुआत कहां से हुई? National Library of Medicine के अनुसार, हंता वायरस कोई बिल्कुल नई बीमारी नहीं है, लेकिन इसका इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। इस वायरस का नाम दक्षिण कोरिया की हंतन नदी (Hantan River) के नाम पर रखा गया है। साल 1976 में पहली बार डॉक्टर हो वांग ली ने एक बीमार चूहे के शरीर में इस वायरस की पहचान की थी। 1950 के दशक में कोरियाई युद्ध के दौरान करीब 3,000 अमेरिकी और कोरियाई सैनिक एक रहस्यमयी बीमारी की चपेट में आ गए थे। उस समय इसे कोरियाई रक्तस्रावी बुखार कहा गया था, जो बाद में हंता वायरस के रूप में पहचाना गया। साल 1993 में अमेरिका के फोर कॉर्नर्स इलाके में भी इस वायरस ने कोहराम मचाया था, जहां अचानक कई स्वस्थ लोगों की मौत फेफड़ों में पानी भरने (Hantavirus Pulmonary Syndrome) की वजह से हो गई थी। WHO के नए नियम     जिस भी व्यक्ति में बीमारी के लक्षण दिखें, उसे तुरंत बाकी लोगों से दूर एक अलग कमरे में शिफ्ट कर दिया जाए।     जहाज पर मौजूद लोगों को सलाह दी गई है कि वे अपने कमरों (कैबिन) में ही रहें।     कमरे से बाहर निकलने पर मास्क पहनना जरूरी है।     मरीजों की देखभाल करने वालों को पीपीई किट पहनने को कहा गया है।     कमरों और सामान को बार-बार साफ करें। डिस्क्लेमरःइस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

व्यापार में निवेश के नाम पर धोखाधड़ी करने वाला आरोपी गिरफ्तार

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में वित्तीय अपराधों एवं आमजन से धोखाधड़ी करने वाले अपराधियों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में कटनी जिले की एनकेजे थाना पुलिस को व्यापार में निवेश के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने वाले आरोपी को गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है। कार्रवाही के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 36 लाख 30 हजार रुपये नगद एवं घटना में प्रयुक्त एक लग्जरी वाहन सहित 76 लाख रुपए से अधिक की संपत्ति जब्त की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार फरियादी से आरोपी द्वारा स्वयं को रेलवे का कॉन्ट्रेक्टर बताते हुए रेलवे से संबंधित कार्य में निवेश कराने का झांसा दिया गया। आरोपी ने योजनाबद्ध तरीके से विश्वास में लेकर रेलवे ठेका दिलाने एवं उसमें लाभ दिलाने का प्रलोभन दिया तथा छलपूर्वक 36 लाख 30 हजार रुपये की राशि प्राप्त कर ली। बाद में फरियादी को अपने साथ हुई धोखाधड़ी का एहसास होने पर थाना एनकेजे में शिकायत दर्ज कराई गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस द्वारा तत्काल अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। तकनीकी साक्ष्यों, साइबर इनपुट एवं सतत निगरानी के आधार पर पुलिस टीम द्वारा आरोपी की लोकेशन ट्रेस की गई। इसके पश्चात जिला पन्ना क्षेत्र में घेराबंदी कर आरोपी को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने धोखाधड़ी की घटना को अंजाम देना स्वीकार किया। पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई प्रदेश में वित्तीय अपराधों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाती है।

सुमन हेल्प डेस्क 24×7 सेवाओं के साथ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा का बनी आधार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है। सुरक्षित मातृत्व, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं की समय पर उपलब्धता एवं तकनीक आधारित स्वास्थ्य मॉनिटरिंग से प्रदेश सरकार महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए प्रभावी पहल कर रही है। सुमन हेल्प डेस्क एवं इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर प्रदेश में सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मध्यप्रदेश सरकार सुरक्षित मातृत्व एवं स्वस्थ नवजात शिशु की सुरक्षा के संकल्प को तकनीक, संवेदनशीलता और सतत सेवा के माध्यम से साकार कर रही है। सुमन हेल्प डेस्क स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने, शिकायतों के त्वरित समाधान, समयबद्ध रेफरल एवं सतत निगरानी के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सशक्त आधार प्रदान कर रही है। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ एवं अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में संचालित सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) हेल्प डेस्क व्यवस्था प्रदेश में गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं एवं उनके परिवारों के लिए भरोसेमंद सहायक प्रणाली बनकर उभरी है। राज्य में प्रारंभिक रूप से 57 स्वास्थ्य संस्थाओं से शुरू हुई यह व्यवस्था अब विस्तारित होकर 55 जिला चिकित्सालयों, 10 शासकीय मेडिकल कॉलेजों तथा एम्स भोपाल तक पहुँच चुकी है। राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया मध्यप्रदेश मॉडल मध्यप्रदेश के सुमन आइसीसीसी एवं जिला हेल्प डेस्क मॉडल को भारत सरकार द्वारा आयोजित 10वें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन (नेशनल समिट ऑन इनोवेशंस एंड बेस्ट प्रैक्टिसेज) में नवाचार एवं सर्वोत्तम कार्य-पद्धति के रूप में सराहा गया है। जिलों में स्थित सभी 66 हेल्प डेस्क भी अब 24×7 होंगी संचालित राज्य स्तर पर स्थित आईसीसीसी पूर्व से ही 24 घंटे सातों दिवस कार्यरत था, जबकि जिला स्तरीय हेल्प डेस्क कार्यालयीन समय में संचालित होते थे। इस व्यवस्था के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए मई 2026 से प्रदेश के सभी 66 जिला स्तरीय SUMAN हेल्प डेस्क को भी 24×7 संचालित किया जा रहा है। सुमन हेल्प डेस्क प्रत्येक जिले में सक्रिय प्रदेश के प्रत्येक जिले में सुमन हेल्प डेस्क स्थापित की गई है, जहाँ 2 टेली-कॉलर एवं एक सुपरवाइज़र नियुक्त हैं। हेल्प डेस्क का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को सभी निर्धारित स्वास्थ्य सेवाएँ समय पर, निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण रूप से उपलब्धता सुनिश्चित करना है। लाभार्थी को स्वास्थ्य सेवाओं में देरी या असुविधा पर हेल्प डेस्क द्वारा संबंधित स्वास्थ्यकर्मी — एएनएम, सीएचओ अथवा अन्य मैदानी अमले से समन्वय स्थापित कर त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाता है। शिकायतों का समयबद्ध निवारण इस प्रणाली की प्रमुख विशेषता है। आइसीसीसी से जुड़ी हाई-टेक निगरानी व्यवस्था सुमन हेल्प डेस्क व्यवस्था राज्य स्तरीय सुमन इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आइसीसीसी) से जुड़ी हुई है। कंट्रोल सेंटर से सेवाओं की सतत निगरानी, रिपोर्टिंग एवं समन्वय किया जा रहा है। यह कमांड सेंटर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और तकनीक-आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 104 टोल फ्री सेवा से मिल रहा व्यापक परामर्श 104 टोल फ्री नंबर के माध्यम से गर्भवती महिलाओं एवं परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी परामर्श, शिकायत निवारण, शासकीय योजनाओं की जानकारी तथा आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) सेवाओं की जानकारी, सोनोग्राफी एवं आवश्यक जांच के लिए परामर्श, आईएफए एवं कैल्शियम अनुपूरण संबंधी मार्गदर्शन, बर्थ वेटिंग होम में भर्ती के लिए प्रेरित करना, उच्च जोखिम गर्भावस्था (हाई रिस्क प्रेगनेंसी) की सतत निगरानी, नवजात शिशुओं की स्वास्थ्य ट्रैकिंग आदि सेवाएँ नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। लाखों माताओं और नवजातों की नियमित मॉनिटरिंग सुमन हेल्प डेस्क से लाखों गर्भवती महिलाओं, उच्च जोखिम गर्भावस्था वाली माताओं एवं नवजात शिशुओं की नियमित निगरानी की जा रही है। हेल्प डेस्क द्वारा समय-समय पर जागरूकता संदेश, स्वास्थ्य परामर्श एवं आवश्यक जानकारी भी साझा की जाती है, जिससे सुरक्षित प्रसव एवं नवजात देखभाल के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।  

WFI ने विनेश फोगाट को थमाया कारण बताओ नोटिस, अनुशासनहीनता पर सख्त कार्रवाई

नई दिल्ली पहलवान विनेश फोगाट और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के बीच विवाद और गहरा गया है। शनिवार को WFI ने विनेश को शो-कॉज नोटिस जारी कर दिया। उन पर अनुशासनहीनता और एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। साथ ही उन्हें 26 जून 2026 तक किसी भी घरेलू इवेंट में भाग लेने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि विनेश ने रिटायरमेंट से वापसी के लिए यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) के एंटी-डोपिंग नियमों के तहत अनिवार्य छह महीने का नोटिस पीरियड पूरा नहीं किया। WFI का कहना है कि पेरिस ओलंपिक में विनेश के बर्ताव से भारतीय कुश्ती की बदनामी हुई है। महासंघ ने आरोप लगाया है कि उन्होंने WFI संविधान, UWW के अंतरराष्ट्रीय नियमों और एंटी-डोपिंग नियमों का उल्लंघन किया। इस नोटिस के बाद विनेश की कॉम्पिटिटिव रिंग में वापसी की राह और मुश्किल हो गई है। रविवार से गोंडा में शुरू हो रहे नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में अब वे हिस्सा नहीं ले पाएंगी, जबकि यही उनका वापसी का पहला मौका था। WFI अध्यक्ष संजय सिंह ने PTI को बताया, “हमें देखना होगा कि WADA के नियमों का सही तरीके से पालन हुआ है या नहीं। अभी यह साबित नहीं हुआ है कि उन्होंने रिटायरमेंट से वापसी की सभी शर्तें पूरी की हैं। छह महीने का अनिवार्य नोटिस पीरियड पूरा करना जरूरी है।”   क्या-क्या आरोप लगाए गए? WFI ने विनेश से कई मुद्दों पर जवाब मांगा है। इनमें शामिल हैं:     मार्च 2024 के सिलेक्शन ट्रायल में दो अलग-अलग वेट कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा करना     2024 पेरिस ओलंपिक में वेट कट न कर पाने के कारण डिसक्वालीफाई होना     एंटी-डोपिंग नियमों के तहत ठिकाने की जानकारी न देना डोपिंग टेस्ट और नोटिस पीरियड का मुद्दा WFI ने इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी (ITA) के 4 मई 2026 के कम्युनिकेशन का हवाला दिया है, जिसमें 18 दिसंबर 2025 को विनेश पर “मिस्ड टेस्ट” दर्ज किया गया था। UWW एंटी-डोपिंग नियमों के आर्टिकल 5.7 के अनुसार, रिटायरमेंट से वापसी करने वाले एथलीट को कम से कम छह महीने पहले सूचना देनी होती है और इस दौरान टेस्टिंग के लिए उपलब्ध रहना पड़ता है। WFI का दावा है कि विनेश ने यह शर्त पूरी नहीं की। महासंघ ने कहा कि विनेश ने 14 दिसंबर 2024 को UWW को ईमेल भेजकर अगस्त 2025 तक सबैटिकल की जानकारी दी थी। लेकिन बाद में 12 दिसंबर 2025 को SAI, WFI और TOPS को लिखे पत्र में उन्होंने 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक का लक्ष्य रखते हुए ट्रेनिंग शुरू करने की बात कही। WFI इसे रिटर्न फ्रॉम रिटायरमेंट मानता है, लेकिन छह महीने का नोटिस पीरियड पूरा नहीं हुआ है। इसी के छह दिन बाद 18 दिसंबर को डोपिंग अधिकारी उन्हें नहीं ढूंढ पाए, जिसे मिस्ड टेस्ट माना गया। इसके अलावा, WFI ने सितंबर 2024 का NADA whereabouts failure भी याद दिलाया, जब सोनीपत स्थित उनके घर पर टेस्टिंग अधिकारी नहीं पहुंच पाए थे। अब देखना होगा कि विनेश इस शो-कॉज नोटिस का क्या जवाब देती हैं। फिलहाल इस विवाद ने उनकी 2028 ओलंपिक की तैयारी को और बड़ा झटका दिया है।

भोपाल में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय हॉकी श्रृंखला में करेंगे देश का प्रतिनिधित्व

भोपाल  भारत और आस्ट्रेलिया के बीच भोपाल में आयोजित होने वाली अंडर-18 हॉकी सीरीज के लिए भारतीय पुरुष एवं महिला टीमों की घोषणा कर दी गई है। इस प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय श्रृंखला के लिए मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी, भोपाल के कुल 10 प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का चयन हुआ है। खिलाड़ियों के चयन से प्रदेश में खुशी और गर्व का माहौल है। भारतीय अंडर-18 पुरुष टीम में अकादमी के गोलकीपर आयुष रजक, डिफेंडर अंश बहुत्रा और करण गौतम, मिडफील्डर अवि माणिकपुरी तथा फॉरवर्ड खिलाड़ी सिद्धार्थ बेन और गाज़ी खान को स्थान मिला है। वहीं भारतीय अंडर-18 महिला टीम में अकादमी की प्रतिभाशाली खिलाड़ियों स्नेहा दावड़े, गोलकीपर महक परिहार, नम्मी गीता और नौशीन नाज़ का चयन हुआ है। इन खिलाड़ियों के चयन से अकादमी में खुशी और उत्साह का माहौल है। भोपाल में होगा भारत-ऑस्ट्रेलिया मुकाबला भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अंडर-18 हॉकी सीरीज का आयोजन भोपाल में किया जाएगा। यह सीरीज 15 मई से 20 मई 2026 तक खेली जाएगी, जिसमें देश और विदेश के युवा खिलाड़ी अपना कौशल दिखाएंगे। घरेलू मैदान पर खेलने का अवसर मिलने से मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों का उत्साह और भी बढ़ गया है। राष्ट्रीय चयन में दिखा एमपी अकादमी का दम मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी लंबे समय से देश को प्रतिभाशाली खिलाड़ी देने का कार्य कर रही है। आधुनिक प्रशिक्षण, फिटनेस प्रबंधन और अनुभवी कोचिंग के कारण अकादमी के खिलाड़ी लगातार राष्ट्रीय टीम में जगह बना रहे हैं। एक साथ 10 खिलाड़ियों का भारतीय टीम में चयन अकादमी की मजबूत खेल संरचना और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण का प्रमाण है। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  सारंग ने दी शुभकामनाएं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने चयनित खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि खिलाड़ियों की मेहनत, प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और राज्य सरकार द्वारा विकसित खेल सुविधाओं का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करेंगे। हॉकी में उभरती ताकत बन रहा मध्यप्रदेश लगातार राष्ट्रीय टीमों में खिलाड़ियों के चयन और उत्कृष्ट प्रदर्शन से यह स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश अब हॉकी के क्षेत्र में तेजी से उभरती ताकत बन रहा है। प्रदेश की खेल अकादमियों में तैयार हो रहे खिलाड़ी देश के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आ रहे हैं।