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घर में रखें ये 8 हेल्थ गैजेट्स, इमरजेंसी में बन सकते हैं लाइफसेवर

 नई दिल्ली दुनियाभर में इन दिनों हंतावायरस को लेकर चर्चा बढ़ गई है. यह एक खतरनाक वायरस माना जाता है, जो ज्यादातर चूहों और दूसरे रोडेंट्स से इंसानों तक पहुंचता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक संक्रमित चूहों की लार या गंदगी के संपर्क में आने से यह वायरस फैल सकता है. कई मामलों में बंद जगहों की सफाई के दौरान हवा में फैले छोटे कणों से भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।  शुरुआती लक्षण आम वायरल जैसे लगते हैं, जैसे बुखार, शरीर दर्द, कमजोरी और सांस लेने में दिक्कत. गंभीर मामलों में यह फेफड़ों और शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर सकता है।  हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि आम लोगों के लिए खतरा फिलहाल कम है, लेकिन सावधानी बेहद जरूरी है. दूसरे देशों में इस वायरस के मामले लगातार मिल रहे हैं। हंतावायरस के खौफ के बीच अब कांगो में इबोला से अब तक 80 मौतें हो चुकी हैं. WHO ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है।  इबोला वायरस ने फिलहाल अफ्रिका के दो मुल्कों में हड़कंप मचा रखा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर समय रहते इसे कंट्रोल नहीं किया गया तो हालात कोविड जैसे हो सकते हैं।  ऐसे समय में सिर्फ दवाइयां ही नहीं, बल्कि कुछ जरूरी हेल्थ डिवाइस घर में होना भी बहुत काम आ सकता है. खासकर तब जब घर में बुजुर्ग, बच्चे या पहले से बीमार लोग हों. कई बार छोटी-सी हेल्थ दिक्कत अचानक बड़ी इमरजेंसी में बदल जाती है और तब ये गैजेट तुरंत मदद करते हैं।  ऑक्सीमीटर कोविड के बाद यह डिवाइस लगभग हर घर का हिस्सा बन गया. ऑक्सीमीटर उंगली में लगाकर शरीर का ऑक्सीजन लेवल और पल्स चेक करता है।  अगर किसी को सांस लेने में दिक्कत हो रही हो, कमजोरी लग रही हो या वायरल के लक्षण हों, तो यह डिवाइस तुरंत संकेत दे सकता है कि बॉडी में ऑक्सीजन कम तो नहीं हो रही।  डिजिटल थर्मामीटर बुखार लगभग हर बीमारी का पहला संकेत होता है. इसलिए घर में एक अच्छा डिजिटल थर्मामीटर जरूर होना चाहिए. पुराने मर्करी थर्मामीटर के मुकाबले यह ज्यादा सेफ और तेज होता है. कुछ सेकंड में तापमान बता देता है और छोटे बच्चों के लिए भी आसान रहता है।  ब्लड प्रेशर मॉनिटर आजकल हाई BP और लो BP की समस्या बहुत आम हो चुकी है. कई बार टेंशन, वायरल या कमजोरी की वजह से अचानक ब्लड प्रेशर ऊपर-नीचे होने लगता है. डिजिटल BP मॉनिटर घर में होने से तुरंत स्थिति समझी जा सकती है. खासकर बुजुर्गों और दिल के मरीजों के लिए यह बहुत जरूरी गैजेट माना जाता है।  एयर प्यूरिफायर हंतावायरस जैसी बीमारियों में साफ हवा और साफ माहौल बहुत जरूरी माना जाता है. अगर घर ऐसी जगह है जहां धूल, गंदगी या पॉल्यूशन ज्यादा रहता है, तो एयर प्यूरिफायर काफी मदद कर सकता है. अच्छे एयर प्यूरिफायर HEPA फिल्टर के साथ आते हैं, जो हवा में मौजूद छोटे पार्टिकल्स और डस्ट को फिल्टर करते हैं।  स्टीम इनहेलर नाक बंद होना, गले में परेशानी या सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याओं में स्टीम इनहेलर काफी काम आता है. गर्म भाप लेने से सांस की नली खुलती है और राहत मिलती है. वायरल सीजन में यह छोटा गैजेट बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।  नेब्युलाइजर अगर घर में किसी को अस्थमा, एलर्जी या सांस से जुड़ी दिक्कत है, तो नेब्युलाइजर जरूर होना चाहिए. यह लिक्विड दवा को धुंध में बदलकर सीधे फेफड़ों तक पहुंचाता है. अचानक सांस फूलने जैसी स्थिति में यह काफी मदद कर सकता है।  स्मार्ट हेल्थ वॉच आजकल कई स्मार्टवॉच सिर्फ स्टेप्स नहीं गिनतीं, बल्कि हार्ट रेट, SpO2, स्ट्रेस लेवल और स्लीप ट्रैकिंग जैसी चीजें भी मॉनिटर करती हैं. कुछ डिवाइस इरेगुलर हार्टबीट का अलर्ट भी देती हैं. लगातार हेल्थ ट्रैकिंग के लिए यह काफी काम की डिवाइस बन चुकी है।  पोर्टेबल इमरजेंसी लाइट और पावर बैंक यह सुनने में हेल्थ गैजेट नहीं लगता, लेकिन मेडिकल इमरजेंसी में बिजली जाना बड़ी समस्या बन सकता है. खासकर रात में या खराब मौसम में. इसलिए घर में चार्ज्ड पावर बैंक और इमरजेंसी लाइट रखना भी जरूरी है ताकि जरूरत पड़ने पर फोन, मेडिकल डिवाइस या इंटरनेट बंद न हो।  एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि कोई भी गैजेट डॉक्टर की जगह नहीं ले सकता. लेकिन सही समय पर सही जानकारी देकर ये डिवाइस बड़ी परेशानी को समय रहते पकड़ने में मदद जरूर कर सकते हैं. यही वजह है कि अब हेल्थ एक्सपर्ट्स भी सलाह देते हैं कि घर में कुछ जरूरी मेडिकल गैजेट हमेशा मौजूद होने चाहिए, ताकि इमरजेंसी में घबराहट कम और तैयारी ज्यादा हो।   

क्या इंसानों में तेजी से फैल रहा है हंतावायरस? WHO ने जारी की नई जानकारी

नई दिल्ली दुनिया भर में खौफ फैलाने वाले एंडीज हंतावायरस के बारे में वैज्ञानिकों को अब भी बहुत कम जानकारी है. खासकर यह वायरस इंसान के शरीर में कितने समय तक रह सकता है. कितने समय तक दूसरों में फैल सकता है. यह अभी भी एक रहस्य बना हुआ है. MV Hondius क्रूज जहाज पर फैले इस वायरस ने 11 लोगों को बीमार किया और 3 लोगों की जान ले ली. अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इस वायरस की गहराई से जांच कर रहा है।  एंडीज हंतावायरस सिर्फ हवा या चूहों से नहीं, बल्कि इंसान के कई तरह के शरीर के तरल पदार्थों से भी फैल सकता है. इसमें लार, मां का दूध और स्पर्म शामिल हैं. क्रूज जहाज पर हुई इस घटना के बाद वैज्ञानिक चिंतित हैं क्योंकि यह वायरस यौन संबंध या निकट संपर्क से भी फैल सकता है. लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि संक्रमण के बाद व्यक्ति कितने समय तक दूसरों को संक्रमित कर सकता है, इसकी सही जानकारी नहीं है।  WHO ने शुरू की जरूरी स्टडी विश्व स्वास्थ्य संगठन की उभरती बीमारियों और जूनोसिस यूनिट की प्रमुख मारिया वान केरखोवे ने बताया कि एंडीज हंतावायरस पर कई अध्ययन चल रहे हैं. इनमें सबसे महत्वपूर्ण है नेचुरल हिस्ट्री स्टडी. यह स्टडी वायरस के इंसान के शरीर में जीवन चक्र को समझने की कोशिश करेगी।  मारिया वान केरखोवे ने कहा कि यह स्टडी उन लोगों के नियमित सैंपल लेकर करेगी जो क्वारंटाइन में हैं. इससे पता चलेगा कि वे संक्रमित हैं या नहीं. क्या वे दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं या नहीं. यह जानकारी इसलिए बहुत जरूरी है क्योंकि अभी तक हंतावायरस के लिए कोई खास इलाज उपलब्ध नहीं है।  क्रूज जहाज पर फैला खतरा अप्रैल महीने में MV Hondius क्रूज जहाज पर यह वायरस तेजी से फैला. जहाज पर सवार यात्री और कर्मचारी दोनों प्रभावित हुए. इस घटना के बाद पूरी दुनिया में इस वायरस को लेकर अलर्ट जारी किया गया है. कई देशों में क्रूज यात्रियों की निगरानी बढ़ा दी गई है. हंतावायरस के प्रकारों के बारे में कुछ जानकारी है, लेकिन एंडीज स्ट्रेन नया और खतरनाक है।  वैज्ञानिक नहीं जानते कि संक्रमण के बाद वायरस शरीर में कितने दिन, हफ्ते या महीने तक एक्टिव रह सकता है. अगर यह वायरस लंबे समय तक शरीर में छिपा रह सकता है तो ठीक हो चुके व्यक्ति भी दूसरों को संक्रमित कर सकता है. यही वजह है कि WHO क्वारंटाइन में रह रहे लोगों पर लगातार नजर रख रहा है. उनके सैंपल (खून, लार, स्पर्म आदि) की जांच कर रहा है। फिलहाल हंतावायरस का कोई स्पेसिफिक इलाज नहीं है. डॉक्टर सिर्फ सपोर्टिव केयर दे सकते हैं, जैसे ऑक्सीजन, दर्द निवारक दवाएं और फेफड़ों की देखभाल. अगर वायरस लंबे समय तक संक्रामक रहता है तो क्वारंटाइन की अवधि बढ़ाई जा सकती है. यही वजह है कि WHO इस स्टडी को बहुत महत्व दे रहा है।  आगे क्या हो सकता है? वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले हफ्तों और महीनों में स्टडी के नतीजे सामने आएंगे. इससे पता चलेगा कि संक्रमित व्यक्ति को कितने समय तक अलग-थलग रखना चाहिए. किन-किन सावधानियों का पालन करना चाहिए. खासकर पुरुषों को यौन संबंध बनाने, स्तनपान कराने वाली महिलाओं को सावधानी बरतने और निकट संपर्क से बचने की सलाह दी जा सकती है।  एंडीज हंतावायरस अभी भी कई राज छिपाए हुए है. WHO की यह नई स्टडी वायरस को बेहतर समझने में मदद करेगी. फिलहाल सतर्कता और साफ-सफाई ही सबसे बड़ा बचाव है. वैज्ञानिक लगातार काम कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी बीमारियों को रोका जा सके और प्रभावित लोगों का सही इलाज किया जा सके।     

कोरोना के बाद नया खतरा? जानिए हंतावायरस कितना खतरनाक है और इसका इलाज कैसे होगा

 नई दिल्ली हंतावायरस से प्रभावित लग्जरी क्रूज शिप एमवी होंडियस की घटना ने दुनिया भर में चिंता पैदा कर दी है. कुछ लोग इसे कोविड-19 जैसी नई महामारी समझ रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह बिल्कुल अलग है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख डॉ. टेड्रोस ने स्पष्ट कहा है कि यह कोविड-19 नहीं है. वर्तमान में हंतावायरस से पब्लिक हेल्थ का खतरा बहुत कम है।  हंतावायरस चूहों से इंसानों में फैलने वाला वायरस है. यह मुख्य रूप से दो प्रकार की बीमारियां पैदा करता है – एक फेफड़ों पर हमला करता है (Hantavirus Pulmonary Syndrome – HPS) और दूसरा किडनी को प्रभावित करता है. यह वायरस चूहों के मूत्र, लार और मल से फैलता है. जब ये सूखकर हवा में उड़ते हैं तो इंसान उन्हें सांस के साथ अंदर ले लेता है. कोविड-19 की तरह यह हवा में आसानी से नहीं फैलता।  कोविड-19 से सबसे बड़ा अंतर कोविड-19 हवा के जरिए बहुत तेजी से फैलता था. एक व्यक्ति से दूसरे में सामान्य बातचीत, खांसने या छींकने से भी संक्रमण हो जाता था. लेकिन हंतावायरस में इंसान से इंसान में संक्रमण बहुत दुर्लभ है. सिर्फ एंडीज स्ट्रेन ही इंसान से इंसान में फैलता है. यह तब होता है जब लंबे समय तक बहुत करीबी संपर्क हो, जैसे घर में साथ रहना या घनिष्ठ संबंध. सामान्य मिलने-जुलने से यह नहीं फैलता।  वैक्सीन अभी तक क्यों नहीं बना?  दुनिया भर में हर साल हंतावायरस से लगभग 60 हजार से एक लाख लोग संक्रमित होते हैं, फिर भी यूरोप, अमेरिका और लैटिन अमेरिका में अभी तक इसका कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. इस वायरस के कारण होने वाली बीमारी बेहद खतरनाक हो सकती है, खासकर एंडीज स्ट्रेन जो 40 प्रतिशत तक मौत का कारण बन सकता है. हंतावायरस ने एक बार फिर इस सवाल को उठा दिया है कि क्या हमें महामारी आने से पहले ही टीका तैयार करना चाहिए। मॉडर्ना की कोशिश और प्रीक्लिनिकल स्टेज 2023 से अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना दक्षिण कोरिया की कोरिया यूनिवर्सिटी वैक्सीन इनोवेशन सेंटर के साथ mRNA Access प्रोग्राम के तहत काम कर रही है. इस साझेदारी की औपचारिक घोषणा 2024 में की गई थी. चूहों पर किए गए परीक्षणों में इस mRNA वैक्सीन ने अच्छे परिणाम दिखाए हैं. हालांकि, यह वैक्सीन अब भी प्रीक्लिनिकल स्टेज में है और ह्यूमन ट्रायल्स शुरू नहीं हुए हैं।  विशेष बात यह है कि यह वैक्सीन मुख्य रूप से हेमोरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (HFRS) पैदा करने वाले स्ट्रेन पर काम कर रही है, न कि MV होंडियस क्रूज शिप वाले एंडीज स्ट्रेन पर, जो HPS (हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम) का कारण बनता है।  क्रूज संकट के दौरान शेयरों में उछाल MV होंडियस क्रूज शिप पर हंतावायरस के मामले सामने आने के बाद जब मॉडर्ना की इस साझेदारी की खबर आई, तो कंपनी के शेयरों में करीब 10 प्रतिशत की तेजी आई. निवेशकों को उम्मीद है कि अगर भविष्य में बड़े पैमाने पर हंतावायरस का खतरा बढ़ा तो मॉडर्ना का mRNA प्लेटफॉर्म काम आ सकता है. लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अभी तक यह सिर्फ शुरुआती चरण में है।  लक्षण और मौत का खतरा हंतावायरस के लक्षण शुरू में फ्लू जैसे होते हैं – बुखार, थकान, सिरदर्द. इसके 4-10 दिन बाद सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों में पानी भरना शुरू हो जाता है. HPS का मौत का दर करीब 40% है, जो कोविड-19 से ज्यादा है. लेकिन क्योंकि यह आसानी से नहीं फैलता, इसलिए बड़े स्तर पर फैलने का खतरा बहुत कम है. कोविड-19 का इनक्यूबेशन पीरियड 2-14 दिन था, जबकि हंतावायरस का 1-8 हफ्ते तक।  कोविड-19 से मिला सबक कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया को सिखाया कि टीका बनाने का सबसे सही समय महामारी शुरू होने से पहले होता है. जब कोविड-19 आया तब mRNA टेक्नोलॉजी पहले से तैयार थी, जिसकी वजह से कुछ महीनों में ही वैक्सीन बन गई. हंतावायरस के मामले में भी यही स्थिति है. वैज्ञानिक सालों से इस पर काम कर रहे हैं, लेकिन लगातार फंडिंग और प्राथमिकता न मिलने के कारण प्रगति धीमी रही है।  दुनिया भर में स्थिति वर्तमान में कोई भी देश हंतावायरस का स्वीकृत टीका नहीं दे रहा है. कुछ देशों में शोध चल रहा है, लेकिन बड़े पैमाने पर उत्पादन और इमरजेंसी उपयोग की मंजूरी अभी दूर है. MV होंडियस वाली घटना ने वैश्विक स्तर पर इस दिशा में ध्यान खींचा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अब समय आ गया है कि हंतावायरस जैसे जानलेवा वायरस पर गंभीरता से निवेश किया जाए।  मॉडर्ना की यह कोशिश एक अच्छी शुरुआत है. अगर मानव परीक्षण सफल रहे तो mRNA आधारित हंतावायरस वैक्सीन बन सकती है. लेकिन इसमें अभी कई साल लग सकते हैं।  क्रूज शिप पर क्या हुआ? एमवी होंडियस क्रूज शिप पर कुल 11 मामले सामने आए हैं. तीन लोगों – एक डच जोड़े और एक जर्मन पर्यटक – की मौत हो चुकी है. शिप पर सवार सभी लोगों को उनके देशों में भेज दिया गया है. उन्हें क्वारंटाइन में रखा गया है. स्पेन, नीदरलैंड, अमेरिका समेत कई देशों में यात्री पहुंच चुके हैं. विशेषज्ञों का अनुमान है कि कुछ यात्री अर्जेंटीना में शिप पर चढ़ने से पहले ही संक्रमित हो गए थे, क्योंकि वहां यह वायरस पहले से मौजूद है।  महामारी बनने का खतरा? विशेषज्ञों का साफ कहना है कि हंतावायरस से महामारी बनना लगभग असंभव है. क्योंकि इंसान से इंसान में फैलाव बहुत कम और सीमित है. WHO, ECDC और अन्य एजेंसियां इसे अच्छी तरह नियंत्रित करने में सक्षम हैं. कोविड-19 पूरी दुनिया में फैल गया था क्योंकि यह हवा में आसानी से घूमता था. हंतावायरस ऐसा नहीं है।  क्या सावधानी बरतनी चाहिए? जिन लोगों में लक्षण दिखें (बुखार, थकान, सांस लेने में दिक्कत) उन्हें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. क्वारंटाइन का समय 6 हफ्ते तक रखा जा रहा है क्योंकि वायरस का इनक्यूबेशन लंबा है. हंतावायरस खतरनाक है, लेकिन इसका फैलाव कोविड-19 जैसा नहीं है. चूहों से बचाव, स्वच्छता और सतर्कता रखने से इसका खतरा बहुत कम किया जा सकता है. WHO और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार निगरानी कर रहे हैं। 

हंता वायरस बढ़ने पर सख्ती, WHO ने जारी किए बचाव और सुरक्षा नियम

नई दिल्ली हंता वायरस को लेकर एक नई खबर आई है। अब तक हम यही जानते थे कि यह वायरस चूहों की गंदगी से फैलता है, लेकिन WHO के चीफ डॉ. टेड्रोस ने बताया है कि इसका एंडिस वायरस वाला रूप अब इंसानों के जरिए भी एक-दूसरे में फैल सकता है। MV Hondius जहाज पर इसके 8 मरीज मिले हैं, जिनमें से 3 की मौत हो चुकी है। हालात को देखते हुए WHO ने सख्त नियम बना दिए हैं ताकि इसे दुनिया में फैलने से रोका जा सके। राहत की बात बस इतनी है कि यह कोविड की तरह हवा की रफ्तार से नहीं फैलेगा, लेकिन फिर भी बहुत सावधान रहने की जरूरत है। इंसान से इंसान में फैलने वाला वायरस WHO के मुताबिक, एंडिस वायरस दुनिया का ऐसा हंता वायरस है जो एक बीमार इंसान से दूसरे स्वस्थ इंसान के शरीर में जा सकता है। अगर कोई इस वायरस से बीमार व्यक्ति के बहुत करीब रहता है या उसके संपर्क में आता है, तो उसे भी यह बीमारी हो सकती है। इस वायरस का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि शरीर में जाने के बाद इसके लक्षण दिखने में 6 हफ्ते (42 दिन) तक लग सकते हैं। यानी मरीज को खुद पता नहीं चलेगा कि वह बीमार है और वह अनजाने में दूसरों को भी संक्रमित कर सकता है। 42 दिनों तक डॉक्टर्स करेंगे मॉनिटरिंग WHO का कहना है कि जो लोग मरीजों के साथ रहे हैं, उन्हें कम से कम 42 दिनों तक डॉक्टरों की निगरानी में रहना होगा। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि इस वायरस को पनपने में लंबा समय लगता है। हालांकि, अभी आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, बस सावधानी रखकर इसकी चेन तोड़ी जा सकती है। हंता वायरस की शुरुआत कहां से हुई? National Library of Medicine के अनुसार, हंता वायरस कोई बिल्कुल नई बीमारी नहीं है, लेकिन इसका इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। इस वायरस का नाम दक्षिण कोरिया की हंतन नदी (Hantan River) के नाम पर रखा गया है। साल 1976 में पहली बार डॉक्टर हो वांग ली ने एक बीमार चूहे के शरीर में इस वायरस की पहचान की थी। 1950 के दशक में कोरियाई युद्ध के दौरान करीब 3,000 अमेरिकी और कोरियाई सैनिक एक रहस्यमयी बीमारी की चपेट में आ गए थे। उस समय इसे कोरियाई रक्तस्रावी बुखार कहा गया था, जो बाद में हंता वायरस के रूप में पहचाना गया। साल 1993 में अमेरिका के फोर कॉर्नर्स इलाके में भी इस वायरस ने कोहराम मचाया था, जहां अचानक कई स्वस्थ लोगों की मौत फेफड़ों में पानी भरने (Hantavirus Pulmonary Syndrome) की वजह से हो गई थी। WHO के नए नियम     जिस भी व्यक्ति में बीमारी के लक्षण दिखें, उसे तुरंत बाकी लोगों से दूर एक अलग कमरे में शिफ्ट कर दिया जाए।     जहाज पर मौजूद लोगों को सलाह दी गई है कि वे अपने कमरों (कैबिन) में ही रहें।     कमरे से बाहर निकलने पर मास्क पहनना जरूरी है।     मरीजों की देखभाल करने वालों को पीपीई किट पहनने को कहा गया है।     कमरों और सामान को बार-बार साफ करें। डिस्क्लेमरःइस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।