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ट्रायल्स से बाहर होने के बावजूद WFI की जिद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, विनेश फोगाट केस में अहम टिप्पणी

सोनीपत  सुप्रीम कोर्ट ने पहलवान विनेश फोगाट के एशियन गेम्स के ट्रायल्स में हिस्सा लेने के खिलाफ कुश्ती संघ की याचिका पर सुनवाई गुरुवार (4 जून, 2026) को बंद कर दी है. कोर्ट को बताया गया कि विनेश ट्रायल्स में हिस्सा ले चुकी हैं और हारकर बाहर भी हो चुकी हैं. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आगे सुनवाई को गैरजरूरी बताया।  कुश्ती संघ (WFI) ने हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें विनेश को ट्रायल्स में जाने की अनुमति दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले से जुड़े कानूनी सवाल खुले हैं. हाईकोर्ट चाहे तो उन पर विचार कर सकता है।  बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार कुश्ती संघ ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की है. कुश्ती संघ की तरफ से सीनियर एडवोकेट डीएन गोवर्धन ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि पैरा नंबर 31 से आगे का हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया जाना चाहिए, क्योंकि इसमें तो यहां तक कह दिया गया है कि डब्ल्यूएफआई की कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण और निंदनीय है. हालांकि, कोर्ट ने आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।  सुप्रीम कोर्ट ने कुश्ती संघ से कहा है कि हाईकोर्ट की इन टिप्पणियों का सिंगल बेंच के पास लंबित मामले की सुनवाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा. कोर्ट ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट के निष्कर्षों को सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दोहराया है और मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।  यह मुद्दा विनेश फोगाट को एशियन गेम्स के ट्रायल्स में शामिल होने के लिए इजाजत देने से जुड़ा है. पहले हाईकोर्ट ने विनेश फोगाट को ट्रायल्स में जाने की अनुमति दे दी थी और फिर 29 मई को सुप्रीम कोर्ट ने भी फैसले को बरकरार रखा. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने विनेश को इजाजत देने के लिए हाईकोर्ट की तरफ से अपनाए गए दृष्टिकोण पर विचार करने के लिए मामले को लंबित रखा था।  कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने आदेश में मातृत्व पर पन्ने दर पन्ने खर्च कर दिए, जबकि असली मुद्दा इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी (ITA) के मानदंडों से जुड़ा है क्योंकि विनेश फोगाट डोपिंग टेस्ट में शामिल नहीं हुईं।  सुप्रीम कोर्ट ने विनेश को फटकार भी लगाई थी कि वह 2024 से गायब हैं, कभी मातृत्व और कभी  बतौर विधायक हरियाणा विधनासभा की कार्यवाही में व्यस्त होने का हवाला दिया. 2026 के डोपिंग टेस्ट में भी शामिल नहीं हुईं. कोर्ट ने उनसे कहा था कि हमें समझना होगा कि भारतीय खेल, विश्व खेलों से जुड़े हुए हैं. खिलाड़ी की उपलब्धियों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन देश हर बात से पहले है. हाईकोर्ट ने विनेश फोगाट को घरेलू प्रतियोगिताओं और 2026 के एशियन गेम्स के ट्रायल्स के लिए अयोग्य ठहराए जाने की डब्ल्यूएफआई की कार्रवाई को निंदनीय और बदले की भावना से प्रेरित बताया था. उन्होंने कहा था कि मातृत्व अवकाश के बाद वापसी कर रही खिलाड़ी से ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है। 

विनेश फोगाट का एशियन गेम्स 2026 सपना टूटा, ट्रायल्स में युवा पहलवान मीनाक्षी से मिली हार

नई दिल्ली भारतीय कुश्ती में 30 मई (शनिवार) को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला. दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित एशियन गेम्स ट्रायल्स के सेमीफाइनल में दिग्गज महिला पहलवान विनेश फोगाट को हार का सामना करना पड़ा. विनेश को युवा रेसलर मीनाक्षी गोयत ने विमेंस 53 किलो भारवर्ग के मुकाबले में 6-4 से हरा दिया. इस हार के साथ विनेश फोगाट का एशियन गेम्स 2026 में जगह बनाने का सपना टूट गया. हालांकि मुकाबले के बाद उनका रिएक्शन सबसे ज्यादा चर्चा में आ गया. हार के तुरंत बाद विनेश फोगाट मैट से बाहर गईं, लेकिन कुछ ही पलों बाद वह दोबारा लौट आईं. उन्होंने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के अध्यक्ष संजय सिंह की तरफ इशारा करते हुए कहा, 'मैं वापस आऊंगी.' विनेश का ये रिएक्शन तेजी से वायरल हो रहा है. मुकाबले की बात करें तो मीनाक्षी ने शुरुआत से ही बेहद आक्रामक कुश्ती दिखाई., उन्होंने विनेश को संभलने का मौका नहीं दिया और लगातार अंक बटोरती रहीं. विनेश ने अनुभव के दम पर वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन युवा पहलवान ने दबाव बनाए रखा और आखिर में 6-4 से मुकाबला जीत लिया. यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि मीनाक्षी पिछले कुछ समय से शानदार फॉर्म में हैं. उन्होंने 2026 एशियन रेसलिंग चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर पहले ही अपनी ताकत दिखा दी थी. किर्गिस्तान के बिश्केक में हुए उस टूर्नामेंट के बाद अब एशियन गेम्स ट्रायल्स में विनेश फोगाट जैसी स्टार को हराकर उन्होंने साफ संकेत दे दिया है कि भारतीय महिला कुश्ती में नई पीढ़ी तेजी से आगे बढ़ रही है. WFI से विनेश की हुई थी खटपट डब्ल्यूएफआई लगातार विनेश फोगाट की एंट्री का विरोध कर रहा था. महासंघ ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें विनेश फोगाट को ट्रायल्स में हिस्सा लेने देने के निर्देश दिए गए थे. लेकिन आखिर में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद विनेश के ट्रायल्स में उतरने का रास्ता साफ हुआ. तीन बार ओलंपिक खेल चुकी विनेश फोगाट पहले 57 किलोग्राम वर्ग में वापसी करने की तैयारी कर रही थीं. उन्होंने उत्तर प्रदेश के गोंडा में आयोजित सीनियर ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में हिस्सा लेने का फैसला किया था, लेकिन वहां भी डब्ल्यूएफआई ने उन्हें खेलने की अनुमति नहीं दी थी. इसके बाद मामला कोर्ट तक पहुंचा और फिर कानूनी लड़ाई शुरू हुई. आखिरकार विनेश को राहत मिली और वह एशियन गेम्स ट्रायल्स में उतर सकीं.

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, विनेश फोगाट चयन ट्रायल्स में ले सकेंगी हिस्सा

नई दिल्ली भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 2026 एशियन गेम्स के चयन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी. ये ट्रायल्स 30 और 31 मई को आयोजित होने हैं. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसे भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर किया था. हाईकोर्ट ने पहले ही विनेश फोगाट को ट्रायल्स में भाग लेने की इजाजत दी थी. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि विनेश फोगाट का मामला सामान्य खिलाड़ियों से अलग है, क्योंकि उन्होंने देश को कई मौकों पर गौरवान्वित किया है. कोर्ट ने कहा, 'अगर कोई और खिलाड़ी होता तो मामला अलग होता. उन्होंने देश का नाम रोशन किया है.' हालांकि, कोर्ट ने खेल मामलों में बार-बार न्यायिक हस्तक्षेप को लेकर चिंता भी जताई. जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, 'आप शानदार रेसलर हैं, आपने देश को गर्व महसूस कराया है, लेकिन देश पहले है. हाईकोर्ट पूरे शेड्यूल को बाधित नहीं कर सकता.' सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के तरीके पर भी सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि खेल प्रशासन में इस तरह तेजी से हस्तक्षेप करने से पूरे स्पोर्ट्स सिस्टम और शेड्यूल पर असर पड़ सकता है. दरअसल, पिछले हफ्ते दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि मातृत्व को किसी खिलाड़ी के करियर में 'अक्षम्यता' या बाहर करने का आधार नहीं बनाया जा सकता. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने WFI को निर्देश दिया था कि विनेश फोगाट को ट्रायल्स में हिस्सा लेने दिया जाए. अब सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल विनेश को राहत देते हुए ट्रायल्स में खेलने की मंजूरी दे दी है, लेकिन साथ ही WFI की याचिका पर उनका जवाब भी मांगा है. मामले की अगली सुनवाई अगले हफ्ते होगी.

Vinesh Phogat केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, WFI की मुश्किलें बढ़ीं

 नई दिल्ली भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 2026 एशियन गेम्स के चयन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी. ये ट्रायल्स 30 और 31 मई को आयोजित होने हैं।  जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसे भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर किया था. हाईकोर्ट ने पहले ही विनेश फोगाट को ट्रायल्स में भाग लेने की इजाजत दी थी।  सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि विनेश फोगाट का मामला सामान्य खिलाड़ियों से अलग है, क्योंकि उन्होंने देश को कई मौकों पर गौरवान्वित किया है. कोर्ट ने कहा, 'अगर कोई और खिलाड़ी होता तो मामला अलग होता. उन्होंने देश का नाम रोशन किया है। हालांकि, कोर्ट ने खेल मामलों में बार-बार न्यायिक हस्तक्षेप को लेकर चिंता भी जताई. जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, 'आप शानदार रेसलर हैं, आपने देश को गर्व महसूस कराया है, लेकिन देश पहले है. हाईकोर्ट पूरे शेड्यूल को बाधित नहीं कर सकता।  सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के तरीके पर भी सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि खेल प्रशासन में इस तरह तेजी से हस्तक्षेप करने से पूरे स्पोर्ट्स सिस्टम और शेड्यूल पर असर पड़ सकता है।  दरअसल, पिछले हफ्ते दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि मातृत्व को किसी खिलाड़ी के करियर में 'अक्षम्यता' या बाहर करने का आधार नहीं बनाया जा सकता. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने WFI को निर्देश दिया था कि विनेश फोगाट को ट्रायल्स में हिस्सा लेने दिया जाए।  अब सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल विनेश को राहत देते हुए ट्रायल्स में खेलने की मंजूरी दे दी है, लेकिन साथ ही WFI की याचिका पर उनका जवाब भी मांगा है. मामले की अगली सुनवाई अगले हफ्ते होगी।  इस फैसले के बाद अब सभी की नजरें 30-31 मई को होने वाले ट्रायल्स पर टिकी हैं, जहां विनेश फोगाट एक बार फिर मैट पर अपनी दावेदारी पेश करती नजर आएंगी।   

Vinesh Phogat के पक्ष में हाईकोर्ट का फैसला, अब एशियन गेम्स ट्रायल में ले सकेंगी हिस्सा

नई दिल्ली मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह विशेषज्ञों की एक समिति गठित करे, जो विनेश फोगाट की फिटनेस का मूल्यांकन करेगी। इसी आधार पर उन्हें 30-31 मई को होने वाले एशियन गेम्स चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दी जाएगी। मातृत्व को नुकसान की वजह नहीं बनाया जा सकता: हाईकोर्ट सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि देश में मातृत्व का सम्मान किया जाता है और इसे किसी खिलाड़ी के करियर के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा, 'मातृत्व उत्सव है। इसे किसी खिलाड़ी के लिए नुकसानदायक नहीं बनाया जाना चाहिए।' दरअसल, विनेश फोगाट जुलाई 2025 में मां बनी थीं और इसके बाद अब घरेलू प्रतियोगिताओं में वापसी की तैयारी कर रही हैं। डब्ल्यूएफआई ने जून 2026 तक किया था अयोग्य घोषित भारतीय कुश्ती महासंघ ने हाल ही में विनेश फोगाट को 26 जून 2026 तक घरेलू टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। महासंघ का तर्क था कि संन्यास के बाद वापसी करने वाले खिलाड़ी को यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) के एंटी-डोपिंग नियमों के तहत कम से कम छह महीने पहले नोटिस देना जरूरी होता है। डब्ल्यूएफआई के मुताबिक, विनेश ने यह अनिवार्य नोटिस अवधि पूरी नहीं की, इसलिए वे घरेलू प्रतियोगिताओं में खेलने की पात्र नहीं हैं। 15 पन्नों का नोटिस, 'राष्ट्रीय शर्म' जैसी टिप्पणी पर भी सवाल विनेश को जारी किए गए 15 पन्नों के कारण बताओ नोटिस में डब्ल्यूएफआई ने उन पर अनुशासनहीनता और एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए थे। नोटिस में यह भी कहा गया था कि उनके आचरण से भारतीय कुश्ती की छवि को नुकसान पहुंचा है। सुनवाई के दौरान विनेश की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने अदालत को बताया कि 9 मई को जारी नोटिस में पेरिस ओलंपिक डिस्क्वालिफिकेशन को 'राष्ट्रीय शर्म' बताना पूर्वाग्रहपूर्ण और अपमानजनक था। इस पर खंडपीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, 'अगर किसी से नाराजगी या विवाद है तो खेल की बलि क्यों दी जाए? विनेश अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी हैं। मातृत्व के सिर्फ 10 महीने बाद उन्हें ट्रायल से बाहर रखने का क्या औचित्य है?' सिंगल जज से नहीं मिली थी राहत इससे पहले 18 मई को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने विनेश को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके खिलाफ उन्होंने डिवीजन बेंच में अपील दायर की थी, जिस पर अब यह फैसला आया है। क्या है पूरा विवाद?     WFI ने विनेश फोगाट को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।     उन पर अनुशासनहीनता और एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए।     महासंघ ने दावा किया कि संन्यास के बाद वापसी के लिए जरूरी छह महीने का नोटिस नहीं दिया गया।     इसी आधार पर उन्हें जून 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं से बाहर कर दिया गया।     विनेश ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी।     अब हाईकोर्ट ने उन्हें एशियाई खेल चयन ट्रायल में शामिल होने की अनुमति दे दी है।

कुश्ती महासंघ के फैसले पर सवाल, कोर्ट ने कहा—खिलाड़ियों का नुकसान नहीं होना चाहिए

 नई दिल्ली  दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ के उस फैसले पर कड़े सवाल उठाए, जिसमें पहलवान विनेश फोगाट को घरेलू कुश्ती प्रतियोगिताओं के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। हाई कोर्ट ने विनेश की योग्यता तय करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि महासंघ के अंदरूनी विवादों के कारण खेल और खिलाड़ियों का नुकसान नहीं होना चाहिए। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि भारतीय कुश्ती महासंघ ने विनेश फोगाट के मामले में अपने पुराने चयन मानदंडों को बदल दिया है। कोर्ट ने अपने अहम टिप्पणी में कहा कि हमारे देश में मातृत्व का सम्मान किया जाता है और उसका जश्न मनाया जाता है। ऐसे संवेदनशील मामलों से पूरी निष्पक्षता के साथ निपटा जाना चाहिए। महासंघ में चाहे कोई भी मतभेद या विवाद हो, लेकिन उसकी वजह से कुश्ती का खेल प्रभावित नहीं होना चाहिए। विनेश फोगाट को जारी किया गया था नोटिस यह विवाद तब शुरू हुआ जब भारतीय कुश्ती महासंघ ने नौ मई को विनेश को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। महासंघ ने विनेश पर कई आरोप लगाए थे, जिनमें 2024 समर ओलंपिक्स के दौरान तय वजन सीमा में फिट न बैठ पाना, एंटी-डोपिंग नियमों के तहत लोकेशन की जानकारी देने में विफल होना और ओलंपिक क्वालीफायर के ट्रायल्स के दौरान दो अलग-अलग वजन श्रेणियों में हिस्सा लेना आदि शामिल है। इसके अलावा भारतीय कुश्ती महासंघ का तर्क था कि विनेश संन्यास के तुरंत बाद वापसी नहीं कर सकतीं, क्योंकि एंटी-डोपिंग नियमों के मुताबिक संन्यास के बाद दोबारा खेलने के लिए एथलीटों को छह महीने का नोटिस पीरियड पूरा करना होता है। पेरिस ओलंपिक में अयोग्य घोषित होने के बाद विनेश ने कुश्ती से संन्यास ले लिया था। इसके बाद जुलाई 2025 में उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया। हालांकि, मां बनने के बाद 12 दिसंबर 2025 को उन्होंने खेल में दोबारा वापसी का एलान किया। नेशनल ओपन टूर्नामेंट में लिया हिस्सा महासंघ द्वारा अयोग्य ठहराए जाने के बावजूद विनेश ने गोंडा में आयोजित नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में हिस्सा लिया। उन्होंने भारतीय कुश्ती महासंघ के कारण बताओ नोटिस का जवाब देते हुए महासंघ के स्टैंड का कड़ा विरोध किया। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि विनेश फोगाट भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के विरुद्ध मोर्चा खोलने वाले प्रमुख चेहरों में से एक रही हैं। हाल ही में विनेश ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह उन छह महिला पहलवानों में शामिल थीं, जिन्होंने सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे और 2023 में न्याय की मांग को लेकर हुए पहलवानों के बड़े विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था।  

विनेश केस में हाई कोर्ट की तीखी टिप्पणी, बोला- मातृत्व को सजा नहीं बना सकते

रोहतक  मां बनने के बाद वापसी की राह पर चल रहीं भारतीय स्टार पहलवान विनेश फोगाट के समर्थन में दिल्ली हाई कोर्ट खुलकर सामने आ गया. कोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) को फटकार लगाते हुए साफ कहा कि 'मातृत्व कोई अपराध नहीं है' और किसी खिलाड़ी के साथ 'बदले की भावना' से व्यवहार नहीं किया जा सकता।  मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि तुरंत विशेषज्ञों की एक समिति बनाई जाए, जो विनेश फोगाट की फिटनेस और प्रतिस्पर्धा में वापसी का आकलन करे. कोर्ट ने यह भी कहा कि हर हाल में विनेश को आगामी एशियन गेम्स चयन ट्रायल्स में हिस्सा लेने का मौका मिलना चाहिए।  सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने WFI के रवैये पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को पहले राहत दी जाती रही है, लेकिन विनेश के मामले में अचानक नियम बदल देना 'बहुत कुछ कहता है.' अदालत ने दो टूक कहा, 'इस देश में मातृत्व का सम्मान किया जाता है… इसे किसी खिलाड़ी के करियर के खिलाफ हथियार नहीं बनाया जा सकता।  दरअसल, WFI ने विनेश को 26 जून 2026 तक घरेलू टूर्नामेंट खेलने के लिए 'अयोग्य' घोषित कर दिया था. संघ का दावा था कि संन्यास के बाद वापसी करने वाले खिलाड़ियों को एंटी-डोपिंग नियमों के तहत छह महीने पहले नोटिस देना जरूरी है. लेकिन जुलाई 2025 में मां बनने के बाद वापसी की तैयारी कर रहीं विनेश इसके बावजूद गोंडा में आयोजित नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में पहुंच गईं।  विनेश की ओर से अदालत में दलील दी गई कि 9 मई को जारी शो-कॉज नोटिस सिर्फ उन्हें बाहर करने की कोशिश थी. कोर्ट ने उस नोटिस पर भी नाराजगी जताई, जिसमें 2024 Summer Olympics में 100 ग्राम अधिक वजन के कारण हुए उनके डिस्क्वालिफिकेशन को 'राष्ट्रीय शर्म' कहा गया था।  अदालत ने सख्त लहजे में कहा, 'खेल किसी व्यक्तिगत दुश्मनी से बड़ा होता है. खिलाड़ियों के भविष्य के साथ इस तरह का व्यवहार खेल के हित में नहीं है।  गौरतलब है कि विनेश फोगाट 2023 में महिला पहलवानों के उस ऐतिहासिक आंदोलन का चेहरा भी रही थीं, जिसमें WFI के पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए थे। 

डब्ल्यूएफआई विवाद के बीच विनेश फोगाट मामला कोर्ट में, नोटिस पर 6 जुलाई तक फैसला

 नई दिल्ली  दिल्ली हाईकोर्ट ने एशियन गेम्स चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की मांग को लेकर पहलवान विनेश फोगाट को तुरंत शामिल होने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया है। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि दूसरे पक्ष (डब्ल्यूएफआई) को सुने बिना उन्हें 30 और 31 मई को होने वाले ट्रायल में भाग लेने की अंतरिम राहत नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति ने मामले की सुनवाई करते हुए डब्ल्यूएफआई और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। डब्ल्यूएफआई को मिले निर्देश अदालत ने डब्ल्यूएफआई को निर्देश दिया कि विनेश को जारी कारण बताओ नोटिस पर छह जुलाई तक निर्णय लेकर उसे रिकार्ड पर पेश किया जाए। कोर्ट ने विनेश को कारण बताओ नोटिस का विस्तृत जवाब दाखिल करने की भी अनुमति दी। सुनवाई के दौरान विनेश की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मातृत्व अवकाश पर गई महिला खिलाड़ियों की रैंकिंग और स्थिति सुरक्षित रखी जाती है, लेकिन डब्ल्यूएफआई की नई नीति के तहत उन्हें ट्रायल से बाहर कर दिया गया। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि विनेश को एशियन गेम्स ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी जाए। इस पर अदालत ने कहा कि आपको पहले ही अयोग्य घोषित किया जा चुका है। दूसरे पक्ष को सुने बिना अदालत ऐसी राहत कैसे दे सकती है, मामले में प्रतिस्पर्धी हित हैं। एक तरफ आपका पक्ष है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय हित भी जुड़ा हुआ है। जो दिख रहा है उससे कहीं अधिक है विनेश की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि नौ मई को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और अगले ही दिन गोंडा में आयोजित प्रतियोगिता में भाग लेने से रोक दिया गया। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि मामले में जो दिख रहा है, उससे कहीं अधिक है। हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई छह जुलाई को तय की है। डब्ल्यूएफआई ने विनेश फोगाट को 26 जून 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए अयोग्य घोषित किया है। डब्ल्यूएफआई का कहना है कि संन्यास से वापसी करने वाले खिलाड़ियों पर एंटी-डोपिंग नियमों के तहत छह माह की अनिवार्य नोटिस अवधि लागू होती है। हालांकि, प्रतिबंध के बावजूद विनेश गोंडा में आयोजित नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में पहुंची थीं।

नंदिनी नगर कुश्ती प्रतियोगिता को लेकर गरमाई सियासत, आरोप-प्रत्यारोप जारी

 लखनऊ पहलवान विनेश फोगाट और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में है। नंदिनी नगर में आयोजित सीनियर ओपन रैंकिंग कुश्ती प्रतियोगिता को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब इशारों और शेरो-शायरी तक पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर दोनों के आरोप-प्रत्यारोप की खेल व राजनीतिक जगत में चर्चा हो रही है। पहलवान विनेश फोगाट ने एक्स पर एक भावुक पोस्ट साझा की है। इसमें लिखा, ‘जिंदगी फंसी है किसी मझधार में, जमाना ढूंढ़ता है खामी मेरे किरदार में… जिंदगी तेरा सर सदा बुलंद रखा है, झुकाने की ताकत नहीं किसी तलवार में…!’ विनेश की इस पोस्ट को उनके समर्थक संघर्ष और आत्मसम्मान से जोड़कर देख रहे हैं। चर्चा है कि यह पोस्ट गोंडा में रविवार को शुरू हुई प्रतियोगिता और उससे जुड़े घटनाक्रमों की ओर इशारा कर रही है। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भी दी प्रतिक्रिया विनेश की इस पोस्ट के कुछ ही घंटों बाद पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भी सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक शेर साझा करते हुए लिखा, ‘शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है, जिस शाख पर बैठे हो, वह टूट भी सकती है।’ सोशल मीडिया यूजर इसे विनेश की पोस्ट का जवाब मान रहे हैं। हालांकि, दोनों ने सीधे तौर पर एक-दूसरे का नाम नहीं लिया है, लेकिन समय और संदर्भ को देखते हुए इसे सीधा मुकाबला माना जा रहा है। विवाद की जड़ 10 से 12 मई तक नंदिनी नगर में होने वाली सीनियर ओपन रैंकिंग कुश्ती प्रतियोगिता है। हाल ही में विनेश फोगाट ने इस आयोजन स्थल को लेकर अपनी असहजता जताई थी। इसके बाद पूर्व सांसद ने स्पष्ट किया था कि इस प्रतियोगिता से उनका कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने कहा था कि आयोजन भारतीय कुश्ती संघ की ओर से कराया जा रहा है और वह इसमें हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं। विनेश ने जवाब नहीं दिया तो लगेगा प्रतिबंध : संजय सिंह भारतीय कुश्ती संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा है कि विनेश फोगाट ने अनुशासनहीनता के नोटिस का समय पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो उन पर प्रतिबंध लग सकता है। गोंडा में नंदिनी नगर स्पोर्ट्स स्टेडियम में रविवार को आयोजित ओपन सीनियर नेशनल रैंकिंग कुश्ती प्रतियोगिता के उद्घाटन अवसर पर आए संजय सिंह ने कहा कि विनेश हर बात पर आरोप लगाने की आदी हो गई हैं। उन्होंने कहा कि विनेश के प्रतियोगिता में आने की बात कहने पर सुरक्षित लाने, मुकाबला कराने व वापस छोड़ने की पूरी जिम्मेदारी ली गई थी। संजय सिंह ने बताया कि 2028 ओलंपिक की तैयारी शुरू कर दी गई है। भारत को चार से पांच पदक मिलने की उम्मीद है। देशविरोधी कुछ ताकतें फिर माहौल खराब करने की कोशिश कर सकती हैं।   बृजभूषण शरण सिंह और विनेश के बीच सोशल मीडिया पर शायरी पोस्ट करने को लेकर संजय सिंह ने कोई टिप्पणी नहीं की। वह सिर्फ इतना बोले कि बृजभूषण शायरी के बादशाह हैं। जवाब देने में पूर्वांचल में उनका मुकाबला नहीं है। दोनों के बीच सोशल मीडिया पर जो चल रहा है, वह उनका व्यक्तिगत मामला है। संजय सिंह ने कहा कि नंदिनी नगर स्टेडियम जैसी सुविधाएं देश में कहीं नहीं हैं। प्रतियोगिता में 28 राज्यों के खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। फ्री स्टाइल कुश्ती में करीब 600 पहलवान मैदान में हैं, जिनमें से 80 प्रतिशत हरियाणा से हैं। रैंकिंग सीरीज का मकसद नए खिलाड़ियों को राष्ट्रीय चैंपियनशिप की तरह आगे बढ़ने के लिए मंच देना है।    

WFI ने विनेश फोगाट को थमाया कारण बताओ नोटिस, अनुशासनहीनता पर सख्त कार्रवाई

नई दिल्ली पहलवान विनेश फोगाट और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के बीच विवाद और गहरा गया है। शनिवार को WFI ने विनेश को शो-कॉज नोटिस जारी कर दिया। उन पर अनुशासनहीनता और एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। साथ ही उन्हें 26 जून 2026 तक किसी भी घरेलू इवेंट में भाग लेने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि विनेश ने रिटायरमेंट से वापसी के लिए यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) के एंटी-डोपिंग नियमों के तहत अनिवार्य छह महीने का नोटिस पीरियड पूरा नहीं किया। WFI का कहना है कि पेरिस ओलंपिक में विनेश के बर्ताव से भारतीय कुश्ती की बदनामी हुई है। महासंघ ने आरोप लगाया है कि उन्होंने WFI संविधान, UWW के अंतरराष्ट्रीय नियमों और एंटी-डोपिंग नियमों का उल्लंघन किया। इस नोटिस के बाद विनेश की कॉम्पिटिटिव रिंग में वापसी की राह और मुश्किल हो गई है। रविवार से गोंडा में शुरू हो रहे नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में अब वे हिस्सा नहीं ले पाएंगी, जबकि यही उनका वापसी का पहला मौका था। WFI अध्यक्ष संजय सिंह ने PTI को बताया, “हमें देखना होगा कि WADA के नियमों का सही तरीके से पालन हुआ है या नहीं। अभी यह साबित नहीं हुआ है कि उन्होंने रिटायरमेंट से वापसी की सभी शर्तें पूरी की हैं। छह महीने का अनिवार्य नोटिस पीरियड पूरा करना जरूरी है।”   क्या-क्या आरोप लगाए गए? WFI ने विनेश से कई मुद्दों पर जवाब मांगा है। इनमें शामिल हैं:     मार्च 2024 के सिलेक्शन ट्रायल में दो अलग-अलग वेट कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा करना     2024 पेरिस ओलंपिक में वेट कट न कर पाने के कारण डिसक्वालीफाई होना     एंटी-डोपिंग नियमों के तहत ठिकाने की जानकारी न देना डोपिंग टेस्ट और नोटिस पीरियड का मुद्दा WFI ने इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी (ITA) के 4 मई 2026 के कम्युनिकेशन का हवाला दिया है, जिसमें 18 दिसंबर 2025 को विनेश पर “मिस्ड टेस्ट” दर्ज किया गया था। UWW एंटी-डोपिंग नियमों के आर्टिकल 5.7 के अनुसार, रिटायरमेंट से वापसी करने वाले एथलीट को कम से कम छह महीने पहले सूचना देनी होती है और इस दौरान टेस्टिंग के लिए उपलब्ध रहना पड़ता है। WFI का दावा है कि विनेश ने यह शर्त पूरी नहीं की। महासंघ ने कहा कि विनेश ने 14 दिसंबर 2024 को UWW को ईमेल भेजकर अगस्त 2025 तक सबैटिकल की जानकारी दी थी। लेकिन बाद में 12 दिसंबर 2025 को SAI, WFI और TOPS को लिखे पत्र में उन्होंने 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक का लक्ष्य रखते हुए ट्रेनिंग शुरू करने की बात कही। WFI इसे रिटर्न फ्रॉम रिटायरमेंट मानता है, लेकिन छह महीने का नोटिस पीरियड पूरा नहीं हुआ है। इसी के छह दिन बाद 18 दिसंबर को डोपिंग अधिकारी उन्हें नहीं ढूंढ पाए, जिसे मिस्ड टेस्ट माना गया। इसके अलावा, WFI ने सितंबर 2024 का NADA whereabouts failure भी याद दिलाया, जब सोनीपत स्थित उनके घर पर टेस्टिंग अधिकारी नहीं पहुंच पाए थे। अब देखना होगा कि विनेश इस शो-कॉज नोटिस का क्या जवाब देती हैं। फिलहाल इस विवाद ने उनकी 2028 ओलंपिक की तैयारी को और बड़ा झटका दिया है।