पटना
12 अप्रैल को कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी का पटना दौरा इस हलचल को और तेज करने वाला है. नीतीश कुमार के एमएलसी पद से इस्तीफे के बाद बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज है और इसी बीच राहुल गांधी का आना महज संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी सियासी बिसात का हिस्सा माना जा रहा है.
पान महासम्मेलन के मंच से सजेगी चुनावी बिसात
इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के अध्यक्ष आईपी गुप्ता के अनुसार, राहुल गांधी 12 अप्रैल को पटना के ऐतिहासिक बापू सभागार में आयोजित होने वाले “पान महासम्मेलन” का उद्घाटन करेंगे. कहने को तो यह पान व्यवसाय से जुड़े समाज का एक सम्मेलन है, लेकिन जिस तरह से इसमें बड़े सियासी दिग्गजों का जमावड़ा होने वाला है, उसने साफ कर दिया है कि असली मकसद 2024 के चुनावों से पहले विपक्षी एकजुटता की धार को और तेज करना है.
पटना की सड़कों पर राहुल गांधी की मौजूदगी उस वक्त होगी जब सत्ता पक्ष (एनडीए) नए मुख्यमंत्री के नाम पर मंथन कर रहा होगा.
तेजस्वी और दीपंकर के साथ ‘पावर शो’ की तैयारी
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी हाईलाइट राहुल गांधी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और भाकपा (माले) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य का एक साथ मंच साझा करना होगा.
नीतीश कुमार के संभावित विदाई के बाद पैदा हुए ‘पॉलिटिकल वैक्यूम’ को भरने के लिए विपक्ष इस मौके का भरपूर इस्तेमाल करना चाहता है. यह एक ऐसा मंच होगा जहां से महागठबंधन के नेता न केवल सामाजिक संदेश देंगे, बल्कि राज्य में बदलते समीकरणों के बीच अपनी मजबूती का अहसास भी कराएंगे.
नीतीश की विदाई और विपक्ष की नई रणनीति
बिहार में इस वक्त एनडीए के भीतर नए मुखिया को लेकर खींचतान और मंथन का दौर जारी है. ऐसे में राहुल गांधी का यह दौरा कांग्रेस और राजद के कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का काम करेगा.
नीतीश कुमार के राज्यसभा की राह पकड़ने के बाद बिहार की राजनीति में जो नया समीकरण उभर रहा है, उसमें राहुल और तेजस्वी की जुगलबंदी काफी निर्णायक साबित हो सकती है. अब सबकी निगाहें 12 अप्रैल के उस संबोधन पर टिकी हैं, जो बापू सभागार से गूंजेगा और आने वाले दिनों में बिहार की सत्ता की दिशा तय करेगा.





