samacharsecretary.com

एक वक्त था जब ईसीजी भी नहीं था, आज वही प्रदेश जीवन की रक्षा कर रहा है

एक रात, जब ईसीजी भी नसीब नहीं था… आज वही प्रदेश जीवन बचा रहा

डॉ. शरत चंद्रा ने सुनाया 2005 का अनुभव, बताया-कैसे बदली उत्तर प्रदेश में हृदय के उपचार की तस्वीर

लखनऊ
सीएसआई के एनआईसी-2026 सम्मेलन के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी के भीड़ भरे सभागार में जब डॉ. शरत चंद्रा ने बोलना शुरू किया, तो उनका स्वर सिर्फ एक डॉक्टर का नहीं, बल्कि एक बेटे का भी था जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की सीमाओं को बहुत करीब से महसूस किया था। उन्होंने वर्ष 2005 की एक घटना साझा की। 
उन्होंने बताया कि दिसंबर की एक रात करीब 10 बजे चंदौसी स्थित उनके घर से पिता का फोन आया कि बेटा सीने में दर्द हो रहा है, क्या करूं? एक डॉक्टर बेटे के रूप में उन्होंने सहज ही कहा- पापा, कहीं पास में जाकर ईसीजी करा लीजिए। पिता ने कहा कि इस समय रात में ईसीजी कहां हो पाएगा, सुबह ही कराएंगे। डॉ. चंद्रा ने कहा कि उस रात सिर्फ मेरे पिता ही नहीं, मैं भी जागता रहा। अगले दिन ईसीजी सामान्य आया, लेकिन वह रात उनके मन में एक सवाल छोड़ गई कि क्या हमारे पास समय पर इलाज की व्यवस्था है? 

उन्होंने कहा कि आज, दो दशक बाद, उसी उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल चुकी है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अब दिल का दौरा पड़ने पर मरीज को सुबह का इंतजार नहीं करना पड़ता। ‘हृदय सेतु’ जैसे प्रयासों ने बड़े संस्थानों जैसे एसजीपीजीआई, केजीएमयू और डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस को जिला अस्पतालों से जोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि पहले जहां एंजियोप्लास्टी जैसे उपचार केवल बड़े शहरों तक सीमित थे, वहीं अब सुल्तानपुर, जौनपुर, बहराइच, गोंडा और बस्ती जैसे जिलों में भी यह सुविधा उपलब्ध है। अब मरीज को केवल दूरी नहीं, बल्कि समय से भी लड़ना नहीं पड़ता। 
अपने संबोधन के अंत में डॉ. चंद्रा ने कहा कि यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों का नहीं है, यह भरोसे का बदलाव है। एक समय था जब रात में ईसीजी भी संभव नहीं था, और आज वही प्रदेश जीवन बचाने के लिए हर पल तैयार खड़ा है। यही बदला हुआ उत्तर प्रदेश है, यही उत्तम प्रदेश है।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here