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दिन-रात बेखौफ फर्राटा भरती हैं ट्रेनर दीदी और 60 सहेलियां, सेफ मोबिलिटी से बन रहीं लखपति

सीएम योगी के विजन से बदला यूपी का माहौल, महिला सशक्तिकरण को मिल रही नई रफ्तार

आत्मनिर्भर बनीं गोरखपुर की मंशा देवी, दूसरे ब्लॉकों की महिलाओं को भी बनाया आत्मनिर्भर

स्वयं सहायता समूह से जुड़कर एक वर्ष में मंशा देवी बनीं लखपति दीदी, अब 26 जनवरी को पीएम मोदी से करेंगीं मुलाक़ात

लखनऊ
उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण अब सिर्फ नारा नहीं, बल्कि हकीकत बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से गोरखपुर की मंशा देवी ने न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि 60 से अधिक महिलाओं को भी रोजगार और सम्मानजनक आजीविका से जोड़ा है। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर एक वर्ष में वे लखपति दीदी बन गई हैं। अब मंशादेवी 26 जनवरी को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगी। कभी सीमित आय में जीवन चलाने वाली मंशा देवी आज ई-रिक्शा ट्रेनर के रूप में दिन-रात बेखौफ फर्राटा भर रही हैं और दूसरी महिलाओं को भी आत्मविश्वास की चाबी थमा रही हैं।

ऐसे बदली जिंदगी की दिशा
स्वयं सहायता समूह से जुड़कर समूह सखी के रूप में काम करने वाली मंशा देवी के पास पहले कोई विशेष आय का जरिया नहीं था। सेफ मोबिलिटी कार्यक्रम से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी की दिशा बदल गई। आज उनकी मासिक आय 20 से 30 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है। जिससे साल भर में करीब ढाई से तीन लाख रुपए तक की आय होती है। सेफ मोबिलिटी कार्यक्रम राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मिशन निदेशक दीपा रंजन के निर्देशन में डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स एवं आजीविका मिशन के बीच हुए एक अनुबंध के अन्तर्गत चल रहा है।

सुरक्षित परिवहन के माहौल ने महिलाओं के लिए खोली नई राह
मंशादेवी ने ब्रह्मपुर ब्लॉक सहित गोरखपुर जिले की 60 से अधिक महिलाओं को ड्राइविंग, लाइसेंस और उद्यमिता का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया है। सरकारी योजनाओं से मिले मजबूत वित्तीय सहयोग और सुरक्षित परिवहन के माहौल ने महिलाओं के लिए नई राह खोली है। सड़कों पर आत्मविश्वास और स्वाभिमान के साथ ई-रिक्शा चलाती ये महिलाएं प्रदेश में बदले सामाजिक-आर्थिक वातावरण की गवाही दे रही हैं।

गांव की दूसरी महिलाओं को भी ट्रेंड करना शुरु किया
एक समय आय का कोई साधन नहीं था। तभी मंशा देवी को सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चलाई जा रही योजनाओं का पता चला। सेफ मोबिलिटी प्रोग्राम के जरिए अब उन्हें स्थाई आय होने लगी है। अब मंशादेवी को प्रतिदिन 800 से हजार रुपए की आमदनी हो रही है। मंशा देवी ने अपने गांव की दूसरी महिलाओं को भी ट्रेंड करना शुरु किया। धीरे धीरे जिले के अन्य ब्लॉकों की करीब 60 महिलाओं को समूह से जोड़का ट्रेनिंग दी, जिसके जरिए अब सभी महिलाएं निश्चित आय से अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

अपने साथ पूरे समाज को आगे बढ़ा सकती हैं ग्रामीण महिलाएं
मंशा देवी को मुद्रा योजना से 1.25 लाख रुपए और ब्लॉक स्तर से एक लाख रुपए की सहायता मिली। जिसके बाद उनके काम ने रफ्तार पकड़ी। उनके समूह की 60 अन्य महिलाएं सुरक्षित माहौल में अब दिन-रात आत्मविश्वास के साथ ई-रिक्शा चला रही हैं। मोबिलिटी प्रोग्राम के जरिए महिला सुरक्षा, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। मंशा देवी की यह यात्रा समूह सखी से ई-रिक्शा ट्रेनर बनने तक इस बात का प्रमाण है कि सही नीति, प्रशिक्षण और अवसर मिलें तो ग्रामीण महिलाएं न केवल खुद को, बल्कि पूरे समाज को आगे बढ़ा सकती हैं।

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