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Twisha Case: गिरिबाला सिंह और समर्थ की बढ़ीं मुश्किलें, CBI की कार्रवाई के बीच जेल से बाहर आना मुश्किल

भोपाल 
नोएडा की एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की भोपाल में ससुराल में हुई संदिग्ध मौत के मामले में सास रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह और बेटे समर्थ सिंह को जेल में रहते करीब 30 दिन हो गए हैं। उनकी न्यायिक हिरासत फिर से बढ़ गई है। कोर्ट ने गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह की रिमांड 14 जुलाई तक बढ़ा दी। दोनों आरोपियों के जेल से बाहर आने में सीबीआई आड़े आ रही है। आरोपी गिरिबाला सिंह और बेटे समर्थ सिंह को रिमांड अवधि पूरी होने के बाद 30 जून को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया। न्यायाधीश आरती आदित्य बांदिल की अदालत में सीबीआइ ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की। हालांकि बचाव पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जांच एजेंसी के पास हिरासत बढ़ाने का कोई नया आधार नहीं है लेकिन अदालत ने यह दलील स्वीकार नहीं की।

सीबीआइ ने अदालत में सुनवाई के दौरान जांच आगे बढ़ने की बात बताई। कोर्ट में उसकी ओर से दो आवेदन भी पेश किए गए। पहले आवेदन में समर्थ सिंह के जब्त लैपटॉप का पासवर्ड उपलब्ध कराने की मांग की गई जबकि दूसरे में गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के वॉयस सैंपल लेने की अनुमति मांगी। सीबीआई के इन दोनों आवेदनों पर कोर्ट 3 जुलाई को सुनवाई करेगी।

अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि केवल मौखिक अनुरोध के आधार पर कोई आदेश नहीं दिया जा सकता। यदि आरोपी पक्ष को ऐसी अनुमति चाहिए तो उसे लिखित आवेदन देना होगा।

दरअसल तमाम कवायदों के बाद भी सीबीआई की जांच अभी पूरी नहीं हो सकी है। जांच एजेंसी पर तय समय सीमा में चार्जशीट पेश करने का भी दबाव है।

वकील ने बताया केस का सबसे संदिग्ध पहलू, दिल्ली AIIMS पर भी शक

भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह और सास पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह जेल से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। मंगलवार को कोर्ट ने दोनों की न्यायिक हिरासत 14 जुलाई तक बढ़ा दी है। ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह 2 जून से भोपाल की केंद्रीय जेल में बंद हैं। मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई अपनी पड़ताल में जुटी हुई है। इस बीच पीड़ित परिवार के वकील अनुराग श्रीवास्तव का अहम बयान सामने आया है। उनका कहना है कि फिलहाल इस केस में हम सीबीआई पर बहुत निर्भर हैं। अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने ट्विशा शर्मा डेथ केस के सबसे संदिग्ध पहलू की भी जानकारी दी। उनके अनुसार लिगेचर बेल्ट पर की गई लापरवाही बड़ी खामी है। अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव का यह भी कहना है कि उन्हें पहले से शक था कि दिल्ली AIIMS टुकड़ों में नतीजे नहीं देगा। उन्होंने दूसरी पोस्टमार्टम के नतीजों को केस के लिए अहम बताया।

समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह के संबंध में पीड़ित परिवार के वकील अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, "CBI ने न्यायिक हिरासत बढ़ाने के लिए अर्ज़ी दी थी और इसे 14 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है। उन्होंने कहा कि हम CBI पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं। उन्होंने दो और अर्ज़ियां दायर करने की बात कही है।

अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव के अनुसार एक मामला वॉइस स्पेक्ट्रोग्राफी टेस्ट से जुड़ा है। सीबीआई के अधिकारी, गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह का यह टेस्ट करना चाहते हैं। इसके लिए संदिग्धों की असली आवाज़ से मिली हुई रिकॉर्डिंग का मिलान करना होगा, इसलिए उन्हें वॉइस सैंपल की ज़रूरत है। दूसरा मुद्दा एक लैपटॉप का है जिसे वे एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं।
शुरू से ही शक था कि AIIMS दिल्ली शायद टुकड़ों में नतीजे नहीं देगा

दिल्ली एम्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव बोले- जहां तक दूसरे पोस्टमार्टम का सवाल है, मुझे शुरू से ही शक था कि AIIMS नई दिल्ली शायद टुकड़ों में नतीजे नहीं देना चाहेगा। हमने शुरुआती पोस्टमार्टम में कुछ कमियां बताई थीं, इसलिए हो सकता है कि वे FSL और विसरा रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हों।

केस में लिगेचर बेल्ट की अहमियत
ट्विशा पक्ष के वकील अनुराग श्रीवास्तव ने केस में लिगेचर बेल्ट की अहमियत भी बताई। उन्होंने कहा- शुरू से ही मेरा यह मानना ​​रहा है कि इस मामले का सबसे संदिग्ध पहलू समय पर लिगेचर बेल्ट को ज़ब्त न कर पाना और उसे पहले पोस्टमार्टम के लिए उपलब्ध न करा पाना था। ट्विशा के परिवार के लिए दूसरे पोस्टमार्टम के नतीजे जानना बहुत ज़रूरी है। असल में उन्हें यह जानने का पूरा अधिकार भी है।

फोरेंसिक जांच के लिए जरूरी है लैपटॉप:
ट्विशा पक्ष की तरफ से अधिवक्ता अंकुर पाण्डेय और शुभांग दीक्षित ने बताया, सीबीआइ समर्थ का लैपटॉप पहले ही जब्त कर चुकी है, लेकिन वह लॉक है। डिजिटल सबूत और फॉरेंसिक जांच पूरी करने के लिए उसका पासवर्ड जरूरी है। सीबीआइ ने समर्थ के लैपटॉप के पासवर्ड और मां-बेटे के वॉयस सैंपल की मांग की।

जेल में बीते एक माह
बता दें कि भोपाल की पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को 2 जून को न्यायिक हिरासत में भोपाल की केंद्रीय जेल में भेजा गया था। वे तभी से यहीं हैं। इस प्रकार ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह करीब एक महीने से जेल में ही बंद हैं।

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