samacharsecretary.com

नाम की गलती से परेशान ग्रामीण को शिविर में मिला न्याय

जयपुर
 माता—पिता ने नाम रखा डूंगरदास लेकिन पटवारी की लापरवाही से राजस्व रेकार्ड में नाम दर्ज हुआ डूंगरराम। बैंक पास बुक, आधार, जन आधार और अन्य रेकार्ड में असली नाम डूंगरदास चलता रहा। अब उसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि समेत अन्य योजनाओं का लाभ ही नहीं मिल सकता था क्योंकि खेत हो गया डूंगरराम के नाम और बैंक पास बुक डूंगरदास के नाम। एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर काट काट कर थक गया और अब यह डर घर कर गया कि नाम दुरूस्ती से पहले ईश्वर के यहां से बुलावा आ गया तो जमीन उसकी संतान के नाम नहीं हो पायेगी क्योंकि जमीन डूंगरराम के नाम है और डूंगरराम नाम का कोई आदमी उस गांव में था ही नहीं।

मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने डूंगरदास जैसे लोगों की समस्या का समाधान करने के लिए ही ग्रामीण सेवा शिविर अभियान चला रखा है। जैसलमेर जिले की ग्राम पंचायत खींया में आयोजित शिविर में डूंगरदास की जमीन के रेकार्ड में 10 मिनट में उसका गलत नाम डूंगरराम हटा कर वास्तविक नाम दर्ज किया गया।

 वर्षों से चली आ रही समस्या का शिविर में ही समाधान होने पर डूंगरदास के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी। उन्होंने मुख्यमंत्री की इस जनहितैषी पहल की सराहना करते हुए उनका आभार प्रकट किया है। अब उसे उन सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा, जिनका अब तक पात्र तो था लेकिन नाम में त्रुटि के कारण अब तक वंचित था।                 

जैसलमेर जिले की ही ग्राम पंचायत सादा में आयोजित शिविर में वर्षों से लंबित नाम शुद्धिकरण की समस्या का भी मौके पर ही समाधान किया गया।       शिविर में चेतनाराम, भागूराम, नेताराम एवं चन्द्रेश ने राजस्व अभिलेखों मेंदर्ज नामों की त्रुटियों के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया। दस्तावेज चैक करने के बाद शिविर में ही पोकरण विधायक महंत प्रतापपुरी ने इनको  नाम शुद्धिकरण पत्र प्रदान किए गए।

इसी प्रकार ग्राम पंचायत लोहारकी निवासी मीना पत्नी बाबूनाथ के जीवन में यह शिविर उम्मीद की नई किरण लेकर आया और वर्षों से संजोया गया उसका आवासीय भूखण्ड  पट्टे का सपना पूरा हुआ। उसने बताया कि श्री भजनलाल शर्मा ने उसे और उसके परिवार को इतना बड़ा उपहार दिया, वे उनकी इस पहल को कभी नहीं भूलेंगे।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here