samacharsecretary.com

भारत से नहीं, अब चीन से संपर्क करेंगे: बंगाल में बीजेपी जीत पर बांग्लादेश की प्रतिक्रिया

ढाका 

पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलने के तुरंत बाद पड़ोसी देश बांग्लादेश की तरफ से एक बड़ा बयान आया है। बांग्लादेश ने दोनों देशों के बीच सालों से अटके तीस्ता समझौते को लेकर कहा है कि इसके लिए अब वह भारत का इंतजार नहीं करेगा। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने एक बयान में यह बातें कही हैं। उन्होंने कहा है कि तीस्ता समझौते के लिए बांग्लादेश अब भारत का इंतजार नहीं कर सकता और इसीलिए अब चीन का रुख करेगा।

डेली स्टार की एक रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेशी विदेश मंत्री ने इस समझौते को अपने देश के लिए बहुत जरूरी बताया। बता दें कि खलीलुर रहमान जल्द ही चीन के दौरे पर जाने वाले हैं। बीजिंग की आधिकारिक यात्रा से पहले मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि चीन में बातचीत के एजेंडे में तीस्ता परियोजना भी होगी।

बंगाल में बीजेपी की सरकार पर क्या बोले रहमान?
बांग्लादेशी विदेश मंत्री का यह बयान तब आया है जब पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनाने जा रही है। भाजपा की जीत पर पूछे गए सवालों पर रहमान ने कहा, “देखिए, पश्चिम बंगाल में अभी सरकार नहीं बनी है। वे क्या सोचते हैं या क्या करेंगे, यह उन्हें कहना है। उनका मन पढ़ना मेरा काम नहीं है। हम हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठ सकते, हमें अपना काम करना है।”

तीस्ता पर क्या है विवाद?
गौरतलब है कि तीस्ता नदी को लेकर दोनों देशों के बीच काफी समय से बात चल रही है, लेकिन अभी तक कोई समझौता नहीं हो पाया है। बांग्लादेश चाहता है कि उसे नदी में बराबर हिस्सा मिले, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार इसका विरोध करती है। 2011 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जब बांग्लादेश गए थे, तब इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश हुई थी। एक योजना के तहत तीस्ता का करीब 37.5 फीसदी पानी बांग्लादेश को और 42.5 फीसदी भारत को मिलने की योजना पर बात हुई थी। हालांकि बंगाल के विरोध के कारण यह बात आगे नहीं बढ़ सकी।

1983 में हुआ था अस्थायी समझौता
इससे पहले 1983 में दोनों देशों के बीच एक अस्थायी समझौता हुआ था, जिसमें बांग्लादेश को 36 फीसदी और भारत को 39 फीसदी पानी देने की बात थी। वहीं बाकी 25 फीसदी का हिसाब बाद में तय होना था। लेकिन यह समझौता पूरी तरह लागू नहीं हो पाया। 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश दौरे के समय भी बांग्लादेश को उम्मीद थी कि कोई हल निकलेगा, लेकिन सहमति नहीं बन पाई। बता दें कि भारत और बांग्लादेश आपस में बीच 54 नदियां साझा करते हैं, लेकिन अब तक सिर्फ दो पर ही समझौता हुआ है, गंगा और कुशियारा। अन्य नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर अब भी विवाद चल रहा है।

चीन के पास पहुंचा बांग्लादेश
तीस्ता समझौते में देरी को देखते हुए बांग्लादेश ने 2019 में 'तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली परियोजना' शुरू की और शेख हसीना की बीजिंग यात्रा के दौरान चीन से मदद मांगी थी। अब रहमान ने एक बार फिर चीन से सहयोग लेने की बात कही है। जानकारी के मुताबिक रहमान तीन दिवसीय इस दौरे पर वे चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात करेंगे। इस दौरान तीस्ता समझौते पर मदद के अलावा बांग्लादेश चीन से कम ब्याज दर पर कर्ज की मांग करेगा। वहीं बांग्लादेश चीन से निवेश भी मांगेगा। इससे पहले जुलाई के विद्रोह के बाद चीन की ओर से निवेश की गति धीमी रही है, जिसे अब नई सरकार फिर से रफ्तार देना चाहती है। वहीं चीन ने भी बांग्लादेश को करीबी पड़ोसी और रणनीतिक साझेदार बताते हुए संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा जताई है।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here