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मध्य प्रदेश में ₹2,387 करोड़ की नर्मदा सिंचाई परियोजना शुरू, किसानों को मिलेगा फायदा

धार 
 नर्मदा का पानी खेतों तक पहुंचेगा तो आदिवासी अंचल में खेती की तस्वीर बदलने की शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 24 अक्टूबर को दोपहर में सरदारपुर में 2387.60 करोड़ रुपये की नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला-सरदारपुर माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना का शुभारंभ किया। इससे धार-झाबुआ के 260 गांवों के 57,422 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने का लक्ष्य है।

परियोजना से झाबुआ के 194 और धार की सरदारपुर तहसील के 66 गांव लाभान्वित होंगे। चंदनखेड़ी के पास नर्मदा नदी से 186.62 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी उठाकर भूमिगत दबावयुक्त पाइपलाइन से खेतों तक पहुंचाने की योजना है। 2.5 हेक्टेयर के चक तक 20 मीटर दबाव से पानी उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

किसान ड्रिप और स्प्रिंकलर से जरूरत के अनुसार सिंचाई कर सकेंगे। इससे खरीफ के साथ रबी की फसलों का रकबा बढ़ने, उत्पादन में सुधार और किसानों की आय बढ़ने की संभावना है। खेती से जुड़े रोजगार, स्थानीय व्यापार और ग्रामीण बाजारों को भी गति मिल सकती है। परियोजना को 2018 में 2050.70 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिली थी, जिसे 2024 में बढ़ाकर 2387.60 करोड़ रुपये किया।

नर्मदा का पानी खेतों तक पहुंचेगा तो आदिवासी अंचल में खेती की तस्वीर बदलने और किसानों के घर समृद्धि आने की उम्मीद है। इससे धार-झाबुआ के 260 गांवों के 57,422 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने का लक्ष्य है। कम वर्षा से जूझ रहे क्षेत्र में यह परियोजना खेती को नई ताकत दे सकती है। हालांकि, इस वर्ष पानी की कमी के कारण किसान बुआई का रकबा घटाने को मजबूर हैं। ऐसे में उनकी निगाहें नर्मदा जल पर टिकी हैं।इस योजना के माध्यम से माही नदी में भी पानी छोड़ा जाएगा। इसे सूख के साल में भी माही जीवंत रहेगी।

कम पानी, घटती बुआई और उम्मीद
    सरदारपुर क्षेत्र में इस वर्ष कम वर्षा और तालाबों में पर्याप्त पानी नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ी है। पटलावदिया के सुधीर भावसार ने बताया कि पानी की व्यवस्था नहीं होने से गेहूं-चने की बुआई नहीं की है।नर्मदा-माही परियोजना का पानी खेतों या माही नदी में आने पर ही बुआई करेंगे।

    खरेली के अंतरसिंह पटेल ने पांच बीघा में गेहूं बोया है और एक सिंचाई के बाद अगली सिंचाई के लिए नर्मदा जल की उम्मीद कर रहे हैं।

    मोरगांव के रविंद्र पाटीदार के पास करीब 40 बीघा जमीन है, लेकिन पानी की कमी से 15 बीघा में ही बुआई कर पा रहे हैं।

    हातोद के राधेश्याम पटेल ने बताया कि हर वर्ष 60 बीघा में खेती करते हैं, लेकिन इस बार पानी की उपलब्धता के अनुसार 30 बीघा में ही बुआई की है। शेष जमीन पर भी सिंचाई का पानी मिलने की आस है।

खेती से बढ़ेगी आय, बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
परियोजना से झाबुआ के 194 और धार की सरदारपुर तहसील के 66 गांव लाभान्वित होंगे। चंदनखेड़ी के पास नर्मदा नदी से 186.62 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी उठाकर भूमिगत दबावयुक्त पाइपलाइन से खेतों तक पहुंचाने की योजना है। 2.5 हेक्टेयर के चक तक 20 मीटर दबाव से पानी उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

किसान ड्रिप और स्प्रिंकलर से जरूरत के अनुसार सिंचाई कर सकेंगे। इससे खरीफ के साथ रबी की फसलों का रकबा बढ़ने, उत्पादन में सुधार और किसानों की आय बढ़ने की संभावना है। खेती से जुड़े रोजगार, स्थानीय व्यापार और ग्रामीण बाजारों को भी गति मिल सकती है। परियोजना को 2018 में 2050.70 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिली थी, जिसे 2024 में बढ़ाकर 2387.60 करोड़ रुपये किया गया।

 

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