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असम सीएम का आरोप – ममता बनर्जी को बाकी मुसलमानों से नहीं, सिर्फ बांग्ला भाषी मुसलमानों से लगाव

गुवाहाटी असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की उनकी समकक्ष ममता बनर्जी को केवल बांग्ला भाषी मुसलमानों की चिंता है। उन्होंने आगाह किया कि अगर ममता मुस्लिम-बंगालियों के लिए असम आती हैं, तो असमिया और हिंदू-बंगाली उन्हें 'नहीं बख्शेंगे'। शर्मा ने भाजपा पर राजनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भाषाई पहचान को हथियार बनाने के तृणमल कांग्रेस अध्यक्ष के हालिया आरोप पर कहा, ‘सवाल यह है कि क्या ममता बनर्जी बंगालियों को पसंद करती हैं या केवल मुस्लिम-बंगालियों को। मेरा जवाब है केवल मुस्लिम-बंगालियों को।" उन्होंने कहा, ‘अगर वह मुस्लिम-बंगालियों के लिए असम आती हैं, तो असमिया लोग और हिंदू-बंगाली उन्हें नहीं बख्शेंगे।" शर्मा ने सवाल किया कि अगर बनर्जी बांग्ला भाषी लोगों की सुरक्षा में रुचि रखती हैं, तो उन्होंने ‘अपने राज्य में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम क्यों नहीं लागू किया?’ नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आए गैर-मुस्लिम प्रवासियों – हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई – को भारतीय नागरिकता प्रदान की जाती है। बनर्जी केंद्र और भाजपा शासित राज्यों पर बांग्ला भाषी प्रवासियों को 'अवैध बांग्लादेशी' या ‘रोहिंग्या’ बताकर व्यवस्थित रूप से निशाना बनाने का आरोप लगाती रही हैं।  

मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा- तमिलनाडु दिवस तमिलों के इतिहास में एक अनोखा दिन

चेन्नई तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने शुक्रवार को कहा कि 1967 में आज ही के दिन तमिलनाडु को अपनी पहचान मिली थी और यह तमिलों के इतिहास में एक अनोखा दिन है। स्टालिन ने राज्य का नाम रखने में द्रविड़ द्रमुक कषगम (द्रमुक) सरकार के प्रयासों को याद करते हुए कहा, ‘‘18 जुलाई 1967 को द्रमुक के सत्ता में आने के बाद इस भूमि की पहचान बदल गई।'' उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ''तमिलनाडु दिवस – तमिल समुदाय के इतिहास में एक अनोखा दिन ! वह दिन जब हमें आधिकारिक तौर पर अपना असली नाम तमिलनाडु मिला, एक सपना जो हम वर्षों से अपने दिलों में संजोए हुए थे, एक सपना सच हुआ।'' द्रमुक अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में कहा कि यही वह दिन था जब महान नेता (पूर्व मुख्यमंत्री) सी एन अन्नादुरई ने राज्य का नामकरण किया और राज्य विधानसभा में तीन बार ‘तमिलनाडु’ नाम दोहराया, फिर चारों ओर यह आवाज गूंजी।  

57 मुस्लिम देशों के सामने पाकिस्तान ने उठाया सिंधु मुद्दा, पानी को बताया अस्तित्व का संकट

इस्लामाबाद भारत की तरफ से सिंधु जल समझौते को रोके जाने का दुख़ा पाकिस्तान ने मुस्लिम देशों के संगठन OIC में भी सुनाया है। पाकिस्तान 57 मुसलमान देशों की संस्था इस्लामिक सहयोग संगठन की मीटिंग में यह बात रखी और कहा कि भारत ने एकतरफा तौर पर यह फैसला लिया है। जेद्दा में आयोजित OIC के ह्यूमन राइट्स कमिशन के 25वें सत्र में पाकिस्तान ने कहा कि हमारे अधिकारों का भारत की ओर से हनन किया जा रहा है। पाकिस्तान ने 'राइट टू वार' नाम से आयोजित सेशन को संबोधित करते हुए कहा कि यह फैसला मनमाना है। टीवी के मुताबिक सत्र को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि सैयद फवाद शेर ने कहा भारत ने एकतरफा तौर पर यह निर्णय लिया है और इससे वर्ल्ड बैंक की ओर से तय शर्तों का भी उल्लंघन किया गया है। उन्होंने कहा कि पानी तो हमारे लिए मूल अधिकार की तरह है, लेकिन भारत उसे भी हमसे छीनने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान ने कहा कि हम तो पहले ही पानी के संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे में यदि भारत से आने वाली नदियों में पानी की कमी हुई तो हमारे आगे मुश्किल हालात होंगे। उन्होंने कहा कि इससे हमारे इलाके में जलवायु का संकट पैदा हो सकता है। पानी की किल्लत होगी और खेती से लेकर तमाम जरूरी चीजों पर खतरा पैदा होगा। सैयद फवाद शेर ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से इस मसले को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह बड़ी परेशानी है। हालांकि पाकिस्तान के इस रुख के बाद भी मुस्लिम देशों के संगठन ने अब तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिसमें इस मसले का कोई जिक्र हो। बता दें कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को रोक दिया है। इसके अलावा सिंधु समेत सभी नदियों पर बांध आदि परियोजनाओं पर तेजी लाई जा रही है। इनके माध्यम से पाकिस्तान की ओर से जाने वाले पानी का इस्तेमाल किया जाएगा।  

अमेरिकी ओपन 2025 में कई दिग्गज खिलाड़ी उतरेंगे मैदान में

न्यूयार्क अमेरिकी ओपन 2025 के लिए तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और इस प्रतिष्ठित ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट में कई नामी सितारे अपनी किस्मत आजमाने को तैयार हैं। गत चैंपियन यानिक सिनर और दुनिया की नंबर एक महिला खिलाड़ी एरीना सबालेंका उन 10 पूर्व विजेताओं में शामिल हैं जो इस बार भी खिताब के लिए जोर लगाएंगे। अमेरिकी टेनिस एसोसिएशन ने 24 अगस्त से शुरू होने वाले टूर्नामेंट के लिए आधिकारिक प्रवेश सूची जारी की है जिसमें कुल 18 पूर्व ग्रैंडस्लैम एकल चैंपियन खिलाड़ियों के नाम शामिल हैं। इस सूची में खिलाड़ियों को सीधे प्रवेश 14 जुलाई तक की विश्व रैंकिंग के आधार पर दिया गया है। पुरुष खिलाड़ियों के लिए कटऑफ 101वीं रैंकिंग रही जबकि महिला वर्ग में यह सीमा 99वीं रैंकिंग पर थी। इसका मतलब है कि इस साल भी कोर्ट पर दुनिया के कई बड़े सितारे और अनुभवी नाम एक बार फिर अपनी दावेदारी पेश करेंगे और दर्शकों को कड़ी टक्कर वाले मुकाबले देखने को मिलेंगे। विश्व के नंबर वन पुरुष खिलाड़ी यानिक सिनर इस समय शानदार फॉर्म में हैं। उन्होंने हाल ही में विंबलडन फाइनल में दुनिया के दूसरे नंबर के खिलाड़ी कार्लोस अल्काराज को हराकर अपना चौथा ग्रैंडस्लैम खिताब जीता और अब वह अमेरिकी ओपन में भी उसी लय को बरकरार रखना चाहेंगे। दूसरी ओर, महिला वर्ग की नंबर एक खिलाड़ी एरीना सबालेंका विंबलडन में सेमीफाइनल तक पहुंची थीं, हालांकि वहां उन्हें अमेरिका की अमांडा अनिसिमोवा के हाथों हार का सामना करना पड़ा। अनिसिमोवा इस समय विश्व रैंकिंग में सातवें स्थान पर हैं और अमेरिकी ओपन में शीर्ष आठ खिलाड़ियों में शामिल चार अमेरिकी महिला खिलाड़ियों में से एक हैं, जो घरेलू दर्शकों के सामने खिताब जीतने की प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं। अमेरिका की तरफ से इस बार सबसे ज्यादा 30 खिलाड़ियों को टूर्नामेंट में सीधा प्रवेश मिला है, जिनमें 16 महिला और 14 पुरुष खिलाड़ी शामिल हैं। इससे साफ है कि घरेलू दर्शकों को अपने पसंदीदा खिलाड़ियों का शानदार खेल देखने का भरपूर मौका मिलेगा और टूर्नामेंट में जबरदस्त रोमांच की उम्मीद की जा रही है।  

विश्व रिकॉर्डधारी चेपनगेटिच डोपिंग के आरोप में निलंबित

मोनाको विश्व रिकॉर्ड धारी महिला मैराथन एथलीट रूथ चेपनगेटिच मुश्किल में घिरती नजर आ रही हैं। चेपनगेटिच डोपिंग जांच में पॉजिटिव पाई गई हैं जिसके बाद उन्हें अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है। ट्रैक एंड फील्ड की एथलेटिक्स नैतिक इकाई (एआईयू) ने गुरुवार को यह जानकारी दी। जांचकर्ताओं ने बताया कि चेपनगेटिच का मार्च में प्रतिबंधित मूत्रवर्धक और मास्किंग एजेंट की जांच पॉजिटिव आई है और एआईयू की जांच जारी रहने तक उन्होंने स्वैच्छिक अस्थायी निलंबन का विकल्प चुना। केन्या की इस धावक ने पिछले साल अक्तूबर में शिकागो मैराथन में दो घंटे, नौ मिनट, 56 सेकेंड में लगभग दो मिनट के अंतर से विश्व रिकॉर्ड बनाया था। एआईयू ने अनुशासनात्मक मामले के लिए कोई समय नहीं दिया है।   

विश्व रिकॉर्डधारी चेपनगेटिच डोपिंग के आरोप में निलंबित

मोनाको विश्व रिकॉर्ड धारी महिला मैराथन एथलीट रूथ चेपनगेटिच मुश्किल में घिरती नजर आ रही हैं। चेपनगेटिच डोपिंग जांच में पॉजिटिव पाई गई हैं जिसके बाद उन्हें अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है। ट्रैक एंड फील्ड की एथलेटिक्स नैतिक इकाई (एआईयू) ने गुरुवार को यह जानकारी दी। जांचकर्ताओं ने बताया कि चेपनगेटिच का मार्च में प्रतिबंधित मूत्रवर्धक और मास्किंग एजेंट की जांच पॉजिटिव आई है और एआईयू की जांच जारी रहने तक उन्होंने स्वैच्छिक अस्थायी निलंबन का विकल्प चुना। केन्या की इस धावक ने पिछले साल अक्तूबर में शिकागो मैराथन में दो घंटे, नौ मिनट, 56 सेकेंड में लगभग दो मिनट के अंतर से विश्व रिकॉर्ड बनाया था। एआईयू ने अनुशासनात्मक मामले के लिए कोई समय नहीं दिया है।   

नक्सलियों पर करारा प्रहार: नारायणपुर में सुरक्षाबलों ने किया बड़ा ऑपरेशन, हथियारों का जखीरा जब्त

नारायणपुर छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में जवानों को बड़ी सफलता मिली है। शुक्रवार को सुरक्षाबल के जवानों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में जवानों ने 6 नक्सलियों को मार गिराया है। अभी इलाके में सर्चिंग अभियान जारी है। माना जा रहा है कि इस एनकाउंटर में नक्सलियों के कई टॉप लीडर के ढेर होने की संभावना है। सुरक्षाबल के जवान सर्चिंग अभियान के लिए निकले थे इसी दौरान नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। मुठभेड़ में छह नक्सलियों को मार जाने की पुष्टि पुलिस अधिकारियों ने की है। एनकाउंटर के बारे में जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में छह नक्सलियों को मार गिराया। हालांकि अभी मारे गए नक्सलियों की पहचान नहीं है। नक्सलियों के शव के साथ भारी मात्रा में विस्फोटक और हथियार भी बरामद किया गया है। क्या कहा अधिकारी ने बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में माओवादियों के मौजूदगी की सूचना मिली थी। जिसके बाद नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबल के जवानों की संयुक्त टीम को रवाना किया गया है। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान शुक्रवार दोपहर माआवोदियों ने सुरक्षाबलों की टीम पर हमला किया। जिसके जवाब में जवानों ने भी फायरिंग की। अभी मिशन जारी है उन्होंने बताया कि माओवादियों और जवानों के बीच रुक-रुक कर मुठभेड़ चल रही है। अब तक तलाशी अभियान के दौरान मुठभेड़ स्थल से छह नक्सलियों के शव, एके-47 और एसएलआर राइफल, कई अन्य हथियार, विस्फोटक सामग्री तथा दैनिक उपयोग की वस्तुएं बरामद की गई हैं। पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि अभियान अभी जारी है, इसलिए इसमें शामिल जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिक जानकारी अभी नहीं दी जा सकती है। मिशन पूरा होने के बाद देंगे जानकारी उन्होंने बताया कि अभियान पूरा होने के बाद इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि मिशन में शामिल सभी जवान पूरी तरह से सुरक्षित हैं। बता दें कि छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ अभियान में जवानों ने माओवादियों के कई टॉप लीडरों को ढेर किया है जिसके बाद से नक्सली संगठन कमजोर हो रहे हैं।

एमपी में टेक क्रांति की दस्तक, स्पेन की कंपनी ‘सबमर’ लगाएगी इंडस्ट्रियल प्लांट

भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्पेन के बार्सिलोना में छा गए। उनका अंदाज और उनकी बातों ने यहां की टेक जायंट कंपनी सबमर टेक्नोलॉजीज प्रबंधन को इतना प्रभावित किया कि उसने सीएम डॉ. यादव के कुछ घंटे पहले हुए दौरे के बाद ही मेमोरंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) साइन कर लिया। यह एमओयू मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (MPSEDC) और सबमर के बीच हुआ है। इसका उद्देश्य सहयोग को बढ़ाना, मध्यप्रदेश में निवेश और साझेदारी के अवसरों की खोज करना है। इसमें टिकाऊ डेटा सेंटर टेक्नोलॉजी, इमर्शन कूलिंग सॉल्यूशन, ग्रीन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्च के जॉइंट डेवलपमेंट पर फोकस किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 17 जुलाई की रात ही सबमर (Submer) का दौरा किया था। उनकी विजिट के दौरान सरकार और कंपनी प्रबंधन के बीच अहम चर्चा भी हुई थी। इस चर्चा के बाद ही कंपनी प्रबंधन ने कह दिया था कि मध्यप्रदेश सरकार और हम एक साथ सतत एआई तकनीकि विकास पर काम कर सकते हैं।   बता दें, मध्यप्रदेश और सबमर टेक्नोलॉजीज इस बात पर सहमत हुए हैं कि सबमर द्वारा मध्यप्रदेश में इमर्शन कूलिंग और टिकाऊ डेटा सेंटर से संबंधित निर्माण, रिसर्च एंड डेवलपमेंट बुनियादी ढांचे की स्थापना में निवेश करेगा। एमपीएसईडीसी द्वारा उपयुक्त भूमि, बुनियादी ढांचे, और सिस्टम में मदद करेगी। एमपीएसईडीसी योजनाओं और नीतियों के अनुरूप आवश्यक प्रोत्साहन और नीति पर सहयोग करेगी। इसके अलावा दोनों डिजीटल बुनियादी ढांचे क्षेत्र में कौशल विकास, नवाचार, और स्थानीय रोजगार सृजन को बढ़ावा देंगे। मध्यप्रदेश की बदल जाएगी सूरत सबमर से मध्यप्रदेश की टेक्नोलॉजी संबंधी कई चुनौतियां हल हो जाएंगी। इस पहल से प्रदेश टिकाऊ, एआई तैयार डेटा सेंटर के मामले में देश में अग्रणी होगा। डेटा सेंटर डिजाइन और इस्टेब्लिशमेंट में नई जनरेशन के स्टैंडर्ड की देखरेख होगी। सबमर तकनीकी सलाहकार के रूप में काम करेगी। इससे राज्य में नए डेटा सेंटर परियोजनाओं के लिए वैश्विक विशेषज्ञता आएगी। लिक्विड कूलिंग, ऊर्जा अनुकूलन, और एआई बुनियादी ढांचे में अपनी विशेषज्ञता के साथ सबमर यह सुनिश्चित करेगा कि ये परियोजनाएं दक्षता, स्थिरता, और आर्थिक प्रभाव के उच्च मानकों को पूरा करें। यह साझेदारी वैश्विक खिलाड़ियों को आकर्षित करने और मध्यप्रदेश के लिए दीर्घकालिक आर्थिक मूल्यों को सृजित करने के लिए की गई है। क्या है सबमर कंपनी का इतिहास सबमर की स्थापना बार्सिलोना में साल 2015 में हुई। यह कंपनी डेटा सेंटर, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और एज कंप्यूटिंग के लिए सिंगल फेज कूलिंग प्रणालियों में विशेषज्ञता रखती है। यह कंपनी स्मार्टपॉड, स्मार्टपॉडएक्स, ईएक्सओ और माइक्रोपॉड बनाती है। यह कंपनी पारंपरिक तरीकों की तुलना में कूलिंग ऊर्जा की खपत 45 प्रतिशत तक कम कर देती है 90 प्रतिशत तक पानी की बचत करती है। कंपनी वैश्विक स्तर पर डेटा सेंटर्स, एआई प्रयोगशालाओं, वित्तीय संस्थानों और सरकारी कंप्यूटिंग क्लस्टरों में सिस्टम स्थापित कर चुकी है। मई साल 2022 में सबमर ने भारत में इंग्राम माइक्रो इंडिया के साथ साझेदारी की। दोनों ने क्लाउड प्रदाताओं, आईटी पार्कों, सरकारी प्रतिष्ठानों और निजी उद्यमों में स्मार्ट, टिकाऊ डेटा सेंटर की स्थापना की। गौर करने वाली और सबसे खूबसूरत बात ये रही कि एमओयू के समय सबमर के फाउंडर पोल वाल्स सोलर मध्यप्रदेश हैंडलूम की टाई में नजर आए। यह सिर्फ टाई नहीं, बल्कि संस्कृति, सम्मान और साझेदारी के रिश्ते को पहनने जैसा है। 

नई जीवन तकनीक: तीन लोगों के DNA से बच्चा पैदा करने में ब्रिटेन को मिली कामयाबी

नई दिल्ली  मानव सभ्यता को आगे बढ़ाने और बेहतर बनाने के लिए मेडीकल जगत में नित नए प्रयोग होते रहते हैं। इसी क्रम में ब्रिटेन ने भी आज से दस साल पहले माइटोकॉन्ड्रियल दान को वैध बना दिया था। इस नियम के बनने के सालों बाद इसके नतीजे सामने आ रहे हैं। इस उच्च स्तरीय तकनीक के जरिए मानवीय डीएनए में आई खराबी को आगे बढ़ने से रोकना सबसे बड़ी चुनौती थी। अब डॉक्टरों ने इस शोध के नतीजे प्रकाशित किए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस तीन माता-पिता वाले शिशु की इस तकनीक से अभी तक आठ बच्चे पैदा किए जा चुके हैं, खुशी की बात यह है कि यह आठों ही अभी स्वस्थ हैं। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रजनन उपचार पर प्रकाशित दो शोध पत्रों के मुताबिक सरकार से अनुमति मिलने के बाद इसका प्रयोग 22 महिलाओं के डीएनए के लिए किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक यह वह महिलाएं थी जिनका जीन परेशानी खड़ा करने वाला था। यानी इनके जीन को लेकर अगर बच्चा पैदा होता तो वह गंभीर अनुवांशिक विकार यार जन्मजात विकलांगता के साथ पैदा होता। इन महिलाओं के जीन में लेह सिंड्रोम भी उपस्थित था। रिपोर्ट के मुताबिक न्यूकैसल टीम द्वारा विकसित की गई इस तकनीक में तीन लोगों के डीएनए का उपयोग करके एक भ्रूण का निर्माण किया गया है। इसमें होने वाले माता पिता के न्यूक्लियर डीएनए को लिया गया और डोनर एक से स्वस्थ माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए को लिया गया। आपको बता दें कि एक बच्चे के माइटोकॉन्ड्रिया के निर्माण के लिए उसकी माता ही जिम्मेदार होती है। ऐसे में अगर माता किसी बीमारी से ग्रसित है तो बच्चा भी उसी परेशानी के साथ पैदा हो सकता है। ऐसी स्थिति में यहां पर किसी दूसरी महिला के अंड़े से माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए लिया गया। इसके बाद इन तीनों को निषेचित करके भ्रूण का निर्माण किया गया। 2015 में जब ब्रिटेन की संसद से इस माइटोकॉन्ड्रियल दान के बारे में बहस की जा रही थी। तब इसकी प्रक्रिया और प्रभावशीलता के बारे में कई सवाल उठे थे। हालांकि बाद में संसद से इसे मंजूरी मिल गई थी। हालांकि अब जबकि रिपोर्ट सामने आ गई है तो इसके बाद भी ब्रिटिश मीडिया में इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर यह तकनीक सफल हो गई थी तो अभी तक इसके बारे में सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं बताया गया, जबकि इसमें बहुत बड़ा वित्तीय निवेश किया गया था। मीडिया के मुताबिक आखिर कार इस तकनीक को अभी तक दुनिया से क्यों छिपाया गया। अगर इसमें पारदर्शिता दिखाई जाती तो यह कई शोध टीमों के लिए महत्वपूर्ण साबित होती।  

सुजीत कलकल ने पॉलीक इमरे-वर्गा जानोस कुश्ती चैंपियनशिप में भारत को दिलाया गोल्ड

बुडापेस्ट (हंगरी) भारतीय पहलवान सुजीत कल्कल ने हंगरी के बुडापेस्ट में आयोजित पोल्याक इमरे एंड वर्गा जानोस मेमोरियल 2025 कुश्ती टूर्नामेंट में पुरुषों की 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। फाइनल में सुजीत ने अजरबैजान के चार बार के यूरोपीय पदक विजेता अली रहीमजादे को 5-1 से मात दी। यह जीत इस साल किसी भी रैंकिंग सीरीज़ इवेंट में भारत का पहला स्वर्ण पदक है। इससे पहले भारत के पहलवान जॉर्डन के अम्मान और मंगोलिया में हुए टूर्नामेंट में पदक नहीं जीत सके थे। फाइनल मुकाबला पहले पीरियड में सुजीत ने एक एक्टिविटी पॉइंट गंवाया, लेकिन दूसरे पीरियड में उन्होंने आक्रामक खेल दिखाते हुए लगातार दो टेकडाउन किए। इसके बाद एक और एक्टिविटी पॉइंट हासिल कर उन्होंने 5-1 से शानदार जीत दर्ज की। फाइनल तक का सफर सुजीत का फाइनल तक का सफर बेहद दमदार रहा। उन्होंने प्री-क्वार्टर फाइनल में पेरिस 2024 ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता इस्लाम डुडाएव (अल्बानिया) को 11-0 से हराया। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने यूरोपीय रजत पदक विजेता खमज़ात अर्सामर्ज़ोएव (फ्रांस) को पछाड़ा, जबकि सेमीफाइनल में उन्होंने आर्मेनिया के वाज़गेन तेवान्यान को 6-1 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। 57 किग्रा में भारत को कांस्य पुरुषों की 57 किग्रा फ्रीस्टाइल में भारत के राहुल ने जर्मनी के निक्लास स्टेचले को 4-0 से हराकर कांस्य पदक जीता। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने कोरिया गणराज्य के किम सुंग-ग्वोन को 5-3 से हराया था। हालांकि सेमीफाइनल में वह अमेरिका के ल्यूक जोसेफ लिलेडल से कड़े मुकाबले में 7-6 से हार गए। अन्य भारतीय पहलवानों का प्रदर्शन भारत के उदित (61 किग्रा) और विकी (97 किग्रा) को रिपेचेज राउंड में हार का सामना करना पड़ा।यह टूर्नामेंट साल का चौथा और अंतिम रैंकिंग सीरीज़ इवेंट है। यहां मिलने वाले रैंकिंग पॉइंट्स सितंबर में क्रोएशिया के ज़ाग्रेब में होने वाली विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के लिए सीडिंग में मदद करेंगे। भारत ने बुडापेस्ट में चल रहे इस टूर्नामेंट में पुरुषों और महिलाओं की फ्रीस्टाइल तथा ग्रीको-रोमन स्पर्धाओं में पहलवान उतारे हैं। प्रतियोगिता का समापन रविवार को होगा।