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माता-पिता की सेवा ही सच्चा धर्म: बेटा बना श्रवण कुमार, 20 KM पैदल चला कोटेश्वर धाम

बालाघाट/लांजी  कहते हैं भक्ति और सेवा जब साथ चलें, तो वह दृश्य अद्वितीय बन जाता है। सावन माह में भगवान शिव की भक्ति के ऐसे ही एक अलौकिक दृश्य ने हर किसी को भावुक कर दिया। लांजी के प्रसिद्ध कोटेश्वर धाम में जब तीन बेटों ने अपने वृद्ध माता-पिता को खाट पर बैठाकर 20 किलोमीटर पैदल यात्रा पूरी की, तो हर किसी को श्रवण कुमार की याद आ गई। यह दृश्य सोमवार शाम को कोसमारा से लांजी के बीच दिखा। भीमराज नेताम, अनोत नेताम और दुर्गेश नेताम नामक 3 भाई अपने माता-पिता जयलाल नेताम और सुगन बाई नेताम को खाट पर बिठाकर कांवड़ यात्रा के रूप में कोटेश्वर धाम ले जा रहे थे। उनके साथ चाचा जलम नेताम और अन्य स्वजन भी थे। वर्षों पुरानी मनोकामना हुई पूरी भीमराज नेताम ने बताया कि दो वर्ष पहले उनके मन में यह संकल्प आया था कि वे अपने माता-पिता को कांवड़ में लेकर भगवान कोटेश्वर का जलाभिषेक करवाएंगे। गांव में शिव मंदिर का निर्माण हो चुका था, लेकिन कोटेश्वर धाम ले जाने की मनोकामना अधूरी रह गई थी। इस बार सावन में सभी भाइयों ने मिलकर प्रण किया कि इस बार वह यह सेवा पूर्ण करेंगे और अंततः सोमवार को उन्होंने अपने संकल्प को पूरा कर दिखाया। बोल बम के जयकारों के साथ जैसे-जैसे वे रास्ता तय कर रहे थे, हर कोई उन्हें श्रद्धा से निहार रहा था। रास्ते में पड़ने वाले गांवों के लोगों ने उन्हें पानी पिलाया, विश्राम करवाया और श्रवण कुमार की उपाधि दी। कोटेश्वर धाम पहुंचकर उन्होंने विधिपूर्वक भगवान शिव का जलाभिषेक किया। इसके बाद उसी मार्ग से वे अपने माता-पिता को वापस कोसमारा ले गए। हर-हर महादेव का जयकारा करते निकले कांवड़िये पवित्र श्रावण माह के दूसरे सोमवार को शहपुरा-भिटौनी में करीब 7 km की कांवड़ यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में हजारों की संख्या में महिलाएं, बच्चे और बड़े शामिल हुए, जिन्होंने नर्मदा तट के मालकछार घाट से जल भरकर प्रसिद्ध सफेद शिवलिंग सीतासरोवर मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया। आयोजक विश्वजीत सिंह और राजदीप राय ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से यह यात्रा निकाली जा रही है, जिससे वे शिव भक्त भी जुड़ पाते हैं जो लंबी कांवड़ यात्रा नहीं कर सकते। इस यात्रा से वे अपनी आस्था और महत्वाकांक्षाओं को नर्मदा जल से अभिषेक कर पूरा कर पा रहे हैं। बेलखाड़ू में कांवड़ यात्रा का किया स्वागत श्रावण मास के दूसरे सोमवार को विश्व हिंदू परिषद महिला शक्ति द्वारा गौरीघाट से कटंगी तक की 56 km लंबी कांवड़ यात्रा निकाली। यात्रा की शुरुआत मां नर्मदा के पूजन-अर्चन से हुई, जिसके बाद लड़कियों और महिला कांवड़धारियों ने 'बम भोले' के जयकारे लगाते हुए पैदल चलकर अपने कंधे पर कांवड़ रखी। ग्राम बेलखाडू के माल बाबा मंदिर, सिमरिया तिराहा और अन्य स्थानों पर शिव भक्तों ने उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान जगह-जगह स्टॉल लगाकर फल, मिठाई और भोजन-पानी भी वितरित किया गया। स्वागत करने के लिए कटंगी नगर परिषद अध्यक्ष अमिताभ साहू, मंडल अध्यक्ष कटंगी भूपेंद्र सिंह ठाकुर, राजू शुक्ला, अरविंद साहू, जतिन उपाध्याय, रज्जी शुक्ला, तनु जानू शिवहरे, गनेश साहू, पीयूष साहू आदि उपस्थित रहे।

जांच के घेरे में सौरभ शर्मा: करोड़पति कांस्टेबल की जमानत याचिका खारिज, हाईकोर्ट सतर्क, जांच तेज

भोपाल  जबलपुर हाईकोर्ट में  आरटीओ के पूर्व कॉन्स्टेबल से करोड़पति बिल्डर बने सौरभ शर्मा की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। ईडी ने सौरभ शर्मा और उनके परिवार के सदस्यों समेत 12 लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है, जिसके बाद शर्मा 4 फरवरी से न्यायिक हिरासत में हैं। जिला न्यायालय से जमानत याचिका खारिज होने के बाद शर्मा ने हाईकोर्ट में अपील की थी। 12 व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज है मामला हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल ने सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी किए हैं। लोकायुक्त ने आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा के घर पर दबिश दी थी। बेनामी संपत्ति मिलने पर ईडी ने सौरभ शर्मा सहित उसके पारिवारिक सदस्यों समेत 12 व्यक्तियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। 4 फरवरी से पुलिस की अभिरक्षा में है सौरभ आरोपी सौरभ शर्मा विगत 4 फरवरी से न्यायिक अभिरक्षा में है। ईडी द्वारा दर्ज प्रकरण में जिला न्यायालय ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद आरोपी ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट में याचिका की सुनवाई के दौरान सौरभ शर्मा के वकील ने दलील दी कि ईडी द्वारा जब्त की गई संपत्ति सौरभ शर्मा के नाम पर नहीं है और उनका उन संपत्तियों से कोई लेना-देना नहीं है। 108 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच ईडी की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता विक्रम सिंह ने अदालत को बताया कि सह-आरोपियों का कहना है कि सौरभ शर्मा ने उनके नाम पर उक्त संपत्तियां खरीदी हैं। ईडी के अधिवक्ता ने एकलपीठ को बताया कि 108 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई है, जिसे सौरभ शर्मा ने सह-आरोपियों के नाम पर खरीदा था। अटैच की गई संपत्ति से संबंधित एक सिविल प्रकरण दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है। आरोपी सौरभ शर्मा द्वारा अवैध रूप से अर्जित धन से उक्त संपत्तियां खरीदी गई थीं। जिला न्यायालय में खारिज हुई थी जमानत अर्जी मामला तब शुरू हुआ जब लोकायुक्त ने आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा के घर पर छापा मारा और बेनामी संपत्ति का पता लगाया। इसके बाद, ईडी ने शर्मा, उनके परिवार और 12 अन्य व्यक्तियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। शर्मा को 4 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं। शर्मा ने जिला न्यायालय में जमानत के लिए अर्जी दी, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की।  

तेजस एक्सप्रेस की शुरुआत आज से, इंदौर से मुंबई तक सुपरफास्ट सफर लेकिन बढ़ेगा खर्च

इंदौर  मुंबई और इंदौर के बीच सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। पश्चिम रेलवे पहली बार इंदौर से मुंबई के लिए सुपरफास्ट तेजस स्पेशल ट्रेन की शुरुआत करने जा रही है। यह ट्रेन आज 23 जुलाई से मुंबई से रवाना होगी, जबकि इंदौर से पहली तेजस ट्रेन 24 जुलाई को चलेगी। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह ट्रेन सप्ताह में तीन दिन चलाई जाएगी। यात्रा का समय और रूट मुंबई सेंट्रल से इंदौर के लिए ट्रेन संख्या 09085 हर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को रात 11:20 बजे रवाना होगी और अगले दिन दोपहर 1 बजे इंदौर पहुंचेगी। इसी तरह, इंदौर से मुंबई के लिए ट्रेन संख्या 09086 हर मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को शाम 5 बजे चलेगी और दूसरे दिन सुबह 7:10 बजे मुंबई पहुंचेगी।तेजस एक्सप्रेस मुंबई और इंदौर के बीच बोरिवली, वापी, सूरत, वडोदरा, दाहोद, रतलाम और उज्जैन स्टेशनों पर ठहरेगी। ट्रेन में फर्स्ट एसी, सेकंड एसी और थर्ड एसी की सुविधा रहेगी। यह ट्रेन सप्ताह में तीन दिन चलेगी। इसका किराया इंदौर-मुंबई के बीच चलने वाली अवंतिका एक्सप्रेस से से ज्यादा है, लेकिन यात्रा में अवंतिका से भी ज्यादा समय लेगी। इस ट्रेन का एसी-3 टियर का किराया एक हजार 805 रुपये है, जबकि एसी-2 टियर का किराया दो हजार 430 रुपये है। एसी फर्स्ट क्लास का किराया तीन हजार 800 रुपये रखा गया है। राखी त्योहार के समय शुरू की गई इस स्पेशल ट्रेन की बुकिंग 21 जुलाई से शुरू हो गई थी। ट्रेन मंगलवार को मुंबई से रवाना होगी और बुधवार सुबह इंदौर पहुंचेगी। इस ट्रेन में यात्रियों को आटोमेटिक डोर व वाईफाई की सुविधा मिलेगी। यह स्पेशल ट्रेन ( संख्या 09085) हर मंगलवार, गुरुवार व शनिवार को इंदौर से शाम पांच बजे रवाना होगी। ट्रेन अगले दिन सुबह सात बजे तक मुंबई पहुंचेगी। मुंबई सेंट्रल से यह ट्रेन रात को 11.20 बजे रवाना होगी, जो सुबह 11 बजे तक इंदौर पहुंचेगी। इस ट्रेन का फायदा गुजरात जाने वाले यात्रियों को भी होगा। ट्रेन का ठहराव सूरत, वड़ोदरा, दाहोद, रतलाम और उज्जैन रहेगा। दूरंतो ट्रेन सूरत व वापी में नहीं रुकती है। किराया अन्य ट्रेनों से ज्यादा तेजस एक्सप्रेस का किराया इस रूट की दुरंतो एक्सप्रेस और अवंतिका एक्सप्रेस से अधिक रखा गया है। थर्ड एसी का किराया 1805, सेकंड एसी का किराया 2430 जबकि फर्स्ट एसी का किराया 3800 है। जबकि दुरंतो एक्सप्रेस में फर्स्ट एसी का किराया 3425 और अवंतिका एक्सप्रेस में 2870 है। यात्रा समय भी ज्यादा तेजस ट्रेन, दुरंतो और अवंतिका की तुलना में अधिक समय लेगी। दुरंतो एक्सप्रेस इंदौर से मुंबई का सफर 11 घंटे 10 मिनट में पूरा करती है। वही अवंतिका एक्सप्रेस 12 घंटे 15 मिनट में पहुंचती है। जबकि तेजस एक्सप्रेस को 14 घंटे 10 मिनट का समय लगेगा। तेजस ट्रेन की खासियत तेजस एक्सप्रेस देश की पहली कॉर्पोरेट ट्रेन है, जिसे आईआरसीटीसी संचालित करता है। इसमें एलसीडी स्क्रीन, वाई-फाई, स्वचालित दरवाजे, बायो-वैक्यूम टॉयलेट और आरामदायक सीटें जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। बुकिंग शुरू और सीटें उपलब्ध तेजस ट्रेन की बुकिंग 21 जुलाई से शुरू हो चुकी है। मुंबई से 23 जुलाई की ट्रेन में थर्ड एसी में 338, सेकंड एसी में 112 और फर्स्ट एसी में 81 सीटें उपलब्ध हैं। इंदौर से 24 जुलाई की ट्रेन में थर्ड एसी में 317 सीटें, सेकंड एसी में 101 और फर्स्ट एसी में 77 सीटें खाली हैं। दुरंतो और अवंतिका से ज्यादा है किराया इंदौर-मुंबई के बीच चलने वाली तेजस स्पेशल का किराया इसी मार्ग पर चल रही दुरंतो एक्सप्रेस और अवंतिका एक्सप्रेस से अधिक है। इंदौर-दुरंतो में फिलहाल सेकेंड सीटिंग का किराया 460 रुपए, एसी इकोनॉमी का 2070 रुपए, थर्ड एसी का 2205 रुपए, सेकेंड एसी का 2975 रुपए और फर्स्ट एसी का किराया 3670 रुपए है। वहीं, अवंतिका एक्सप्रेस में स्लीपर का किराया 465 रुपए, एसी इकोनॉमी का 1130 रुपए, थर्ड एसी का 1220 रुपए, सेकेंड एसी का 1715 रुपए और फर्स्ट एसी का किराया 2870 रुपए है। तेजस स्पेशल ट्रेन के किराए निर्धारण का अधिकार आईआरसीटीसी को होगा, जो आवश्यकता अनुसार किराया बढ़ा सकती है। तेजस का किराया और समय ज्यादा     इंदौर-मुंबई तेजस का किराया और समय दोनों ही इंदौर से मुंबई के लिए चलने वाली दुरंतो एक्सप्रेस और अवंतिका एक्सप्रेस के मुकाबले ज्यादा है। तेजस ट्रेन इंदौर से मुंबई का सफर पूरा करने में दूरंतो से 3 घंटे और अवंतिका से 1 घंटे ज्यादा लेगी।     इंदौर से सप्ताह में दो दिन चलने वाली दुरंतो एक्सप्रेस (12228) इंदौर से रात को 9 बजे निकलकर दूसरे दिन सुबह 8.20 बजे मुंबई पहुंचती है। यानी इस दौरान यह ट्रेन पूरे 11 घंटे 20 मिनट का समय लेती है।     सप्ताह में सातों दिन चलने वाली अवंतिका एक्सप्रेस (12962) शाम को 5.40 बजे इंदौर से निकलकर दूसरे दिन सुबह 6.40 बजे मुंबई पहुंचती है। यानी इस दौरान यह पूरे 13 घंटे का सफर तय करती है।     इसी तरह तेजस एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 09086 इंदौर से शाम 5 बजे रवाना होगी और दूसरे दिन सुबह 7.10 बजे मुंबई पहुंचेगी। यानी इस दौरान यह ट्रेन पूरे 14 घंटे 10 मिनट का समय लेगी। तेजस के देरी पर चलने पर नहीं मिलेगा रिफंड रेलवे सूत्रों की मानें तो इंदौर-मुंबई-इंदौर के बीच चलने वाली तेजस अगर देरी से चलेगी तो किसी भी प्रकार कर रिफंड नहीं दिया जाएगा। यह सुविधा आईआरसीटीसी ने बंद कर दी है। पहले ट्रेन के 1 घंटे से अधिक लेट होने पर 100 रुपए और 2 घंटे से अधिक लेट होने पर 250 रुपए का रिफंड मिलता था, लेकिन दिसंबर 2024 के बाद से इस सुविधा को बंद कर दिया है। देश की पहली प्राइवेट तेजस ट्रेन की खासियत तेजस ट्रेन, भारतीय रेलवे की एक अर्ध-उच्च गति वाली पूरी तरह से वातानुकूलित ट्रेन है। यह आधुनिक सुविधाओं से लैस है। इसमें स्वचालित दरवाजे, आरामदायक सीटें, एलसीडी स्क्रीन, वाई-फाई और बायो-वैक्यूम शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह देश की पहली निजी और कॉर्पोरेट ट्रेन है, जिसका संचालन आईआरसीटीसी करती है। पहली तेजस ट्रेन 24 मई 2017 को शुरू हुई थी भारत की पहली तेजस ट्रेन 24 मई 2017 को मुंबई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से करमाली, गोवा के बीच शुरू हुई थी। यह एक सेमी-हाई स्पीड, पूरी तरह … Read more

सोने की कीमतों पर सरकार का असरदार फैसला, अब 40 हजार से नीचे मिलेगा शुद्ध सोना

मुंबई  सोना (Gold) काफी महंगा हो गया है, 24 कैरेट 10 ग्राम गोल्ड का भाव 1 लाख रुपये के आसपास बना हुआ है. भारत में बड़े पैमाने पर लोग सोने की ज्वेलरी खरीदते हैं, खासकर महिलाएं गहने लेती हैं. लेकिन अब सोना महंगा होने से महिलाएं चाहकर भी गोल्ड ज्वेलरी नहीं खरीद पा रही हैं. इस बीच अब सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. जिससे आने वाले दिनों में सोने की ज्वेलरी की बिक्री बढ़ सकती है. क्योंकि आप 40 हजार रुपये से कम में 10 ग्राम गोल्ड ज्वेलरी (Gold Jewellery) खरीद सकते हैं.   दरअसल, सोना इतना महंगा हो गया है कि ग्राहक 22 या 18 कैरेट की जगह सस्ते 9 कैरेट के गहनों की खरीदारी में इंटरेस्ट ले रहे हैं. कम कैरेट वाले गोल्ड ज्वेलरी खरीदना लोग बेहतर समझ रहे हैं, क्योंकि ये जेब पर कम बोझ डालते हैं. इसलिए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अधीन काम करने वाले भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने ऐलान किया है कि अब 9 कैरेट सोने के गहनों पर भी हॉलमार्किंग अनिवार्य होगी. सरकार का तर्क है कि 9 कैरेट गोल्ड पर हॉलमार्क होने से लोग ठगी से बचेंगे. 9 कैरेट गोल्ड के फायदे  इसलिए अब 9 कैरेट सोने के आभूषणों के लिए भी हॉलमार्किंग (Hallmarking) अनिवार्य है. भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने 9 कैरेट सोने को अनिवार्य हॉलमार्किंग श्रेणियों की सूची में शामिल कर लिया है. यह नियम इसी जुलाई से लागू हो गया है, यानी अब आप हॉलमार्क वाले 9 कैरेट वाली गोल्ड ज्वेलरी खरीद सकते हैं. इससे पहले 14, 18, 20, 22, 23 और 24 कैरेट सोने के आभूषणों पर हॉलमार्किंग अनिवार्य थी. एक अनुमान के मुताबिक फिलहाल 9 कैरेट गोल्ड की कीमत करीब 37000 से 38000 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम हो सकती है. वहीं, 22 कैरेट गोल्ड ज्वेलरी के लिए आपको कम से कम 1 लाख रुपये चुकाने होंगे. सरकार के इस कदम से ग्राहकों को सोने की शुद्धता के बारे में सही जानकारी मिलेगी. 9 कैरेट सोना 22 या 24 कैरेट सोने से सस्ता होता है, और इस पर आधुनिक डिजाइन बनाना भी आसान है.  हॉलमार्किंग से निर्यात को मिलेगा बढ़ावा यही नहीं, 9 कैरेट सोने के आभूषणों पर हॉलमार्किंग से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा. क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगा, विदेशों में भी 9 कैरेट गोल्ड की खूब डिमांड है. 9 कैरेट सोने के आभूषणों के लिए हॉलमार्किंग अनिवार्य होने से ग्राहकों को सुरक्षा मिलेगी, और 9 कैरेट सोने के आभूषणों की लोकप्रियता भी बढ़ेगी.  अगर फायदे की बात करें तो 9 कैरेट गोल्ड हॉलमार्किंग से गहनों की कीमत कम होगी और लोगों को सस्ता गोल्ड ज्वेलरी खरीदने का बेहतरीन विकल्प मिल जाएगा. हॉलमार्किंग से 9 कैरेट गोल्ड की 37.5% शुद्धता पक्की होगी. नियम के मुताबिक अब ज्वैलर्स और हॉलमार्किंग केंद्रों को इसका पालन करना होगा. कैसे करें शुद्ध ज्वेलरी की पहचान सोने के आभूषणों पर हॉलमार्किंग की जांच करने के लिए, आप भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का BIS-Care ऐप इस्तेमाल कर सकते हैं. इस ऐप के जरिये आप ज्वेलरी पर दिए गए HUID (Hallmark Unique Identification) नंबर को डालकर असली या नकली हॉलमार्किंग की पहचान कर सकते हैं. इसके अलावा आप BIS की वेबसाइट पर जाकर भी हॉलमार्क की जांच कर सकते हैं.  गौरतलब है कि आप जब 22 कैरेट सोने की ज्वेलरी लेते हैं तो आपको पता होनी चाहिए कि उसमें 22 कैरेट गोल्ड के साथ 2 कैरेट कोई और मेटल मिक्स होता है. वहीं जब आप 18 कैरेट की ज्वेलरी खरीदते हैं, उसमें 6 कैरेट कोई और मेटल मिला होता है. हालांकि अगर आप निवेश के लिए ज्वेलरी खरीद रहे हैं तो फिर 22 कैरेट की ज्वेलरी ही खरीदें.   हॉलमार्क क्यों जरूरी? हॉलमार्किंग का मतलब होता है सोने की शुद्धता की सही पहचान. जब आप कोई सोने का गहना खरीदते हैं, तो उस पर एक छोटा-सा निशान बना होता है, जो बताता है कि वो गहना कितने कैरेट का है और उसकी गुणवत्ता क्या है. हॉलमार्किंग से ग्राहक को भरोसा रहता है कि जो सोना वह खरीद रहा है, वह असली है और उसकी कीमत के हिसाब से उसमें कोई धोखा नहीं है. इससे न सिर्फ खरीदार को सुरक्षा मिलती है, बल्कि सोने की बिक्री या आगे चलकर एक्सचेंज में भी आसानी होती है.

नागरिक सेवाएँ ई-नगर पालिका 2.0 एवं ऐप के माध्यम से देने का प्रयास

भोपाल प्रदेश में नगरीय निकायों को कम्प्यूटरीकृत करने के लिये केंद्रीयकृत वेब आधारित ई-नगर पालिका 2.0 संचालित हो रही है। यह परियोजना डिजिटल इंडिया के उद्देश्य को बढ़ावा देने तथा पारदर्शी एवं त्वरित नागरिक सेवा देने के उद्देश्य से नगरीय निकायों में चल रही है। मध्यप्रदेश ऐसा पहला राज्य है जहां प्रदेश के समस्त नगरीय निकायों को एक सिंगल पोर्टल पर लाया गया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने वर्ष 2025-26 में ई-गवर्नेंस-आईटी के माध्यम से नागरिक सुविधाओं के विस्तार की कार्ययोजना तैयार की है। नगरीय निकायों की सभी सेवाओं को ऑनलाइन नवीन तकनीक से अपग्रेड किया जायेगा। समस्त नगरीय निकायों में नागरिक सेवाओं को ई-नगर पालिका 2.0 पोर्टल एवं मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से प्रदाय किया जाएगा। एनालिटिल डेशबोर्ड नगरीय क्षेत्रों के सतत् और योजनाबद्ध विकास तथा विभागीय कार्यों की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिये रियल टाइम डेशबोर्ड विकसित किया जा रहा है। विभाग की एआई गार्ड योजना में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के प्रयोग किये जाने की भी योजना तैयार की गई है। ई-गवर्नेंस में ज्योग्रोफिकल इन्फॉरमेशन सिस्टम (जीआईएस) के संयोजन के साथ शहरी विकास और सेवा विस्तार में आधुनिक पारदर्शी और डेटा संचालित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जायेगी। जीआईएस पोर्टल पर 90 से अधिक महत्वपूर्ण डाटा लेयर्स का प्रयोग कर इसका विकास किया जायेगा। नवीन 3.0 पोर्टल ऑटोमेटेड बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम 3.0 पोर्टल (एबीपीएएस) के माध्यम से ऑनलाइन भवन अनुज्ञा की सुविधा समस्त नगरीय निकायों में प्रदाय की जायेगी। इसके साथ ही कॉलोनी विकास अनुज्ञा को भी ऑनलाइन किये जाने को इस वर्ष की कार्ययोजना में शामिल किया गया है। नगरीय निकायों में ई-गवर्नेंस एवं आईटी के विस्तार में व्हाट्सएप चेटबोट के माध्यम से नगरीय निकायों के सभी प्रकार के कर एवं गैर करों के बिल भुगतान की सुविधा एवं सेवाओं की जानकारी देने का प्रयास किया जायेगा।  

28 जुलाई से MP में सियासी हलचल तेज़, विधानसभा के मानसून सत्र में 10 बैठकें होंगी आयोजित

भोपाल  मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 28 जुलाई से प्रारंभ होने जा रहा है, जो 8 अगस्त तक चलेगा। इस 12 दिवसीय सत्र के दौरान कुल 10 बैठकें आयोजित की जाएंगी। सत्र में 2 अगस्त (शनिवार) और 3 अगस्त (रविवार) को अवकाश रहेगा। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने राजधानी भोपाल में नवीन विधायक विश्राम गृह के भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि यह सत्र प्रदेश के हित में बेहद उपयोगी और सार्थक रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से लाए गए विधेयकों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा और पक्ष-विपक्ष दोनों मिलकर राज्य के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे। तोमर ने कहा कि हमारा प्रयास है कि सभी दल सदन की गरिमा बनाए रखते हुए रचनात्मक बहस करें। इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मजबूत होगी।  विधानसभा के मानसून सत्र में मोहन सरकार अनुपूरक बजट पेश करेगी। सरकार ने तय किया है कि बजट में केवल जनहित से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं, अनावश्यक खर्चों पर सख्ती बरती जाएगी। वित्त विभाग ने सभी विभागों से साफ कह दिया है कि अफसरों के लिए वाहन जैसी फिजूलखर्ची संबंधी प्रस्ताव न भेजें। इस सप्लीमेंट्री बजट में जनता से जुड़े कार्यों के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया जाएगा, ताकि विकास योजनाएं रुकें नहीं और प्रदेश के हित में प्रभावी क्रियान्वयन हो सके।  मानसून सत्र के लिए अब विधायकों लिखित सवाल नहीं पूछ पाएंगे, ऐसा इसलिए क्योंकि लिखित सवाल पूछने का समय बीत चुका है। अब विधायक ध्यानाकर्षण, शून्यकाल, याचिका या फिर अन्य माध्यम से अपने क्षेत्र के मसले सदन में उठा सकेंगे, सरकार से सवाल कर सकेंगे। हालांकि विधायकों ने इस बार सवालों की झड़ी लगा दी है। विस सचिवालय तक 3,377 लिखित सवाल पहुंचे हैं। इनमें ऑनलाइन माध्यम से सवाल सर्वाधिक पहुंचे। बता दें, लिखित सवाल पूछने के लिए विधायकों(MP Monsoon Session) को 11 जुलाई तक का मौका था। यह तिथि बीत जाने के बाद विधायकों के अब किसी भी प्रकार के सवाल विधानसभा सचिवालय नहीं ले रहा है। सचिवालय तक जो सवाल आ चुके हैं, वे सभी सवाल राज्य सरकार को भेज दिए गए हैं, जिससे समय रहते सवालों के जवाब सरकारी महकमे विधानसभा सचिवालय को भेज सकें। विपक्षी दल कांग्रेस विधायकों ने तीखे सवाल किए हैं। प्रयास यही है कि सदन में सरकार की घेराबंदी की जा सके। इनमें भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी, घोटाला, बेरोजगारी, बिगड़ती कानून व्यवस्था, अवैध उत्खनन, कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सवाल हैं। पहले दिन रोजगार-कृषि, पंचायत पर सवाल सत्र के पहले दिन यानी 28 जुलाई को रोजगार, कृषि, पंचायत, श्रम, खेल एवं युवा कल्याण, सहकारिता, उच्च शिक्षा, आयुष, तकनीकी शिक्षा कौशल विकास इत्यादि से जुड़े सवाल होंगे। विधानसभा सचिवालय इसकी सूचना संबंधित विभागों को भेज चुका है। मंत्रियों को भी इसी आधार पर सदन में जवाब देने की तैयारी करना होगी। विपक्ष ने कसी कमर, सत्ता पक्ष भी तैयारी से विपक्षी दल कांग्रेस ने सदन में सरकार को घेरने की तैयारी की है। सवालों से सरकार को आइना दिखाने का प्रयास होगा। रोजगार का वादा पूरा न होने पर सवाल पूछे जाएंगे वहीं किसानों के साथ की गई वादा खिलाफी पर भी घेराबंदी होगी। घर-घर नल से जल पहुचाने में हुए घोटाले की गूंज भी होने की संभावना है। पिछले सत्रों में भी जल जीवन मिशन में घोटाला को लेकर कांग्रेस ने घेराबंदी की थी। इस बार भी तैयारी है। वहीं सत्तारूढ़ दल भाजपा और सरकार के मंत्रियों ने भी तैयारी कर रखी है। विपक्षी सदस्यों का जवाब उन्हीं की शैली में दिया जाएगा। 22 से ली जाएंगी स्थगन, ध्यानाकर्षण सूचनाएं विधायक यदि किसी मामले का ध्यानाकर्षण या शून्यकाल के जरिए सदन में उठाना चाहते हैं तो इसके लिए अभी मौका है। स्थगन, ध्यानाकर्षण एवं शून्यकाल की सूचनाएं 22 जुलाई से विधानसभा सचिवालय लेना शुरू करेगा। विधायकों को इसकी सूचना भेज दी गई है। सचिवालय ने कहा कि ये सूचनाएं ई-मेल के माध्यम से भी सचिवालय में भेजी जा सकती हैं। विधायक चाहें तो विधानसभा सचिवालय ने आकर भी ये सूचनाएं कार्यालय समय में दे सकते हैं। इसी सत्र में पेश होगा सप्लीमेंट्री बजट मानसून सत्र(MP Monsoon Session) में करीब एक दर्जन विधेयक भी सरकार सदन में पेश करेगी। अभी तक सिर्फ एक विधेयक विधानसभा तक पहुंचा है। अन्य की मौखिक सूचना सचिवालय को विभागों ने दे दी है। वहीं सप्लीमेंट्री बजट भी पेश किया जाएगा। इस सप्लीमेंट्री बजट में विभिन्न विभागों के खर्चों के लिए रकम का प्रावधान किया जा रहा है। वित्त विभाग सप्लीमेंट्री बजट की कवायद कर रहा है। विभागों से प्रस्ताव मंगाए जा चुके हैं। विभागों से स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि सप्लीमेंट्री बजट में कोई नया खर्च शामिल नहीं होगा। इस बार ये खास     3377: सवाल विधायकों ने लिखित पूछे     2076: सवाल ऑनलाइन माध्यम से पहुंचे     1301: सवाल ऑफलाइन माध्यम से भेजे गए     12 दिन: सत्र अवधि     10 दिन: सत्र की प्रस्तावित बैठकें

37 करोड़ की लागत से डुबान जलाशय में बनेगा राज्य का पहला एक्वा पार्क, रोजगार के नए अवसर खुलेंगे

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार ने कोरबा जिले के हसदेव बांगो डुबान जलाशय में राज्य का पहला ‘ एक्वा पार्क ’ बनाने का फैसला किया है। ‘एक्वा पार्क’ के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के तहत केंद्र सरकार से 37.10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत हो चुकी है। यह पार्क एतमा नगर और सतरेंगा क्षेत्र में फैले सैकड़ों एकड़ डुबान जलाशय में विकसित होगा। सीएम साय ने इस प्रोजेक्ट की स्वीकृति के लिए पीएम मोदी का आभार जताया है। अधिकारियों ने बताया कि इस पार्क के विकसित होने से राज्य में मछली पालन के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन होगा और मछली उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, विक्रय, निर्यात व ‘एक्वा टूरिजम’ से क्षेत्र के ग्रामीणों की आय बढ़ेगी। अधिकारियों ने बताया कि एतमा नगर में मछलियों के उत्पादन से लेकर उनके प्रसंस्करण और विपणन के साथ-साथ उन्हें विदेशों में निर्यात करने की सुविधा भी विकसित होगी। एक्वा म्यूजियम बनेगा उन्होंने बताया कि एतमा नगर की इस प्रसंस्करण इकाई से हटकर सतरेंगा में ‘एक्वा म्यूजियम’ बनेगा। अधिकारियों ने बताया कि ‘एक्वा म्यूजियम’ बन जाने से पर्यटकों की जानकारी के लिए यहां विभिन्न प्रकार की मछलियों को रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही सतरेंगा में ‘एंगलिंग डेस्क’, कैफेटेरिया, ‘फ्लोटिंग हाउस’ और ‘मोटर बोट’ सहित वाटर स्पोर्ट्स की सविधाएं भी विकसित की जाएंगी, जिससे क्षेत्र में पर्यटन बढ़ेगा। रोजगार के बढ़ेंगे अवसर अधिकारियों ने बताया कि पर्यटन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय ग्रामीणों की आय बढ़ने से उनके जीवन स्तर में सुधार होगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में ‘एक्वा पार्क’ के लिए स्वीकृति मिलने पर राज्य के मछली पालकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस ‘एक्वा पार्क’ से न केवल मछली पालन की नई उन्नत तकनीक लोगों तक पहुंचेंगी बल्कि प्रसंस्करण-पैकेजिंग इकाई से मछली व्यवसाय को नई दिशा मिलेगी। व्यापार के खुलेंगे द्वार उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ की तिलपिया मछली की विदेशों में बहुत मांग है और इस ‘एक्वा पार्क’ में इस मछली के उत्पादन से छत्तीसगढ़ के मछली पालकों के लिए अब सात समुंदर पार भी व्यापार के द्वार खुलेंगे।” साय ने ‘एक्वा पार्क’ की स्थापना को मछली पालन के क्षेत्र में राज्य को आत्मनिर्भर बनाने वाला निर्णय बताया।

भारतीय वायुसेना का गौरव मिग-21 हो रहा रिटायर, छह दशक की सेवा को सलाम

नई दिल्ली  हिंदुस्तान के आसमान में 60 और 70 के दशक में अपनी बादशाहत कायम रखने वाला फाइटर जेट मिग-21 सिंतबर में रिटायर हो रहा है। पैंथर्स के नाम से मशहूर 23 स्क्वाड्रन ने भारत के हर छोटे-बड़े युद्ध में हिस्सा लिया। 60 वर्षों से अधिक समय तक भारतीय वायुसेना का हिस्सा रहने के बाद इसे अब 19 सितंबर को चंडीगढ़ एयरबेस पर एक समारोह में विदाई दे दी जाएगी। जानते हैं 1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल होने के बाद कैसा रहा मिग-21 का सफर… मिग-21 लड़ाकू विमान का इतिहास मिला-जुला रहा। इस फाइटर जेट को भारत ने सोवियत संघ से खरीदा था। इसके बाद इसे 1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया। भारतीय वायुसेना में शामिल होने के बाद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने इसके कई विमान भारत में बनाए। 1960 और 70 के दशक में मिग-21 स्क्वाड्रन की आकाश में मौजूदगी से उस समय भारतीय वायुसेना को रणनीतिक बढ़त मिली। 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध, 1971 में बांग्लादेश की मुक्ति, 1999 में कारगिल युद्ध और 2019 में बालाकोट स्ट्राइक में मिग-21 का अहम योगदान रहा। अभी चल रहे ऑपरेशन सिंदूर में भी मिग-21 स्क्वाड्रन अलर्ट मोड में है। हादसों के बाद दिया गया 'उड़ता ताबूत' नाम जहां एक तरफ 60-70 के दशक में आकाश में अपनी मौजूदगी से भारतीय वायुसेना को मिग-21 ने सशक्त किया। वहीं दूसरी ओर समय के साथ इसकी टेक्नोलॉजी कमजोर पड़ने लगी। कई हादसों के कारण इसे 'उड़ता ताबूत' भी नाम दिया गया। आप के दौर में लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के विमानों के सामने मिग-21 कुछ खास नहीं रह गया। हालांकि 60-70 के दशक में इसकी गिनती बेहतरीन फाइटर जेटों में होती थी। इसकी पुरानी तकनीक और हादसों के बाद उठ रहे सवाल को लेकर अब इसे 62 वर्षों बाद 19 सितंबर को रिटायर कर दिया जाएगा। वहीं पैंथर्स स्क्वाड्रन की विदाई के बाद भारतीय वायुसेना में लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या घटकर 29 हो जाएगी। जो कि 1960 के दशक के बाद सबसे कम है। यहां तक की 1965 में 32 लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या थी। हर युद्ध में मिग-21 ने किया कमाल एविएशन एक्सपर्ट अंगद सिंह ने कहा, 'कोई और फाइटर जेट भारतीय वायुसेना के साथ इतने लंबे समय तक नहीं जुड़ा रहा। वायुसेना के 93 साल के इतिहास में दो-तिहाई समय तक यह जेट रहा है। इसने 1965 से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक हर मोर्चे पर अपना अहम योगदान दिया है। आज हर भारतीय फाइटर पायलट के करियर में इसका योगदान है। इसमें कोई शक नहीं कि यह भारतीय आसमान के एक महान विमान को भावुक विदाई होगी।' सूत्रों के अनुसार, मिग-21 के विदाई समारोह में वायुसेना के बड़े अधिकारी और पुराने सैनिक शामिल होंगे। इस मौके पर फ्लाईपास्ट और विमानों की प्रदर्शनी भी होगी। मिग-21 ने सबसे लंबे समय तक वायुसेना में सेवा देने का रिकॉर्ड बनाया है। भारत ने मिग-21 के 850 से अधिक विमान खरीदे थे, जिनमें ट्रेनर विमान भी शामिल थे। लगभग 600 विमान हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने भारत में बनाए थे। स्वदेशी विमानों की डिलीवरी में देरी दुनियाभर में इन विमानों का इस्तेमाल अब खत्म हो चुका है, लेकिन वायुसेना इनकी समय सीमा बढ़ाती रही है। क्योंकि इनकी जगह लेने के लिए आधुनिक लड़ाकू विमान अभी तक नहीं मिल पाए हैं। पहले यह तय हुआ था कि मिग-21 स्क्वाड्रन की जगह लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट लेंगे, लेकिन इन स्वदेशी विमानों की डिलीवरी में देरी हो गई है।